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May 24, 2018

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय-आनंद १९७०

सलिल चौधरी गीत के बोलों पर बारीकी से ध्यान देने वाले
गीतकारों में से थे. शैलेन्द्र के अवसान के बाद जो स्थान रिक्त
हुआ बॉलीवुड के संगीत क्षेत्र में उसकी भरपाई के लिए विकल्प
तलाशते सलिल की मुलाकात संघर्षरत योगेश गौड़ से हुई.
सलिल को शैलेन्द्र वाली बात योगेश कई लेखनी में नज़र आई.
योगेश को इस फिल्म के गीत लिखने के मौका मिल गया.
ये सब आप दूसरी जगह पढ़ चुके होंगे अतः कहानी मैं इधर
रिपीट नहीं करूँगा.

गीत का पहला अन्तरा काफी गहराई वाला है. कम शब्दों में
पूरी जीवन-गाथा है. ईश्वर ने ये जो मन नाम की चीज़ दे दी
है मनुष्य को वो उसे मायाजाल में उलझाये रखती है. सपने,
अभिलाषाएं, आकांक्षायें, अपेक्षाएं और  बंधनों के भंवर से
मनुष्य जीवन पर्यंत निकल नहीं पाता और तेरा-मेरा करते-करते
एक दिन सब यहीं धरा रह जाता है.




गीत के बोल:t

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये
ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये

कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों के आगे कहाँ

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये

जिन्होंने सजाए यहाँ मेले
सुख दुःख संग-संग झेले
जिन्होंने सजाए यहाँ मेले
सुख दुःख संग-संग झेले
वही चुन कर ख़ामोशी
यूँ चली जाए अकेले कहाँ

ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय
कभी तो हंसाये कभी ये रुलाये
.................................................................
Zindagi kaisi hai paheli-Anand 1970

Artist: Rajesh Khanna, Amitabh Bachchan, Sumita Sanyal

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Nov 29, 2015

मैंने तेरे लिए ही-आनंद १९७१

प्रस्तुत गीत में “सात रंग के” शब्दों की जगह सतरंगी
शब्द होता तो मजा किरकिरा हो जाता, है न. कभी
कभी सरल शब्द भी कितने प्रभावी हो जाते हैं कि
सुनने के बाद ताज्जुब सा होता है-ये क्या हुआ कैसे
हुआ. वैसे भी सरल शब्द वाले गीत जनता की जुबान
पर ज्यादा आसानी से चढा करते हैं.

फिल्म आनंद के बाकी के गीत ज्यादा सरल हैं बजाये
इस गीत के. इसमें थोड़े घुमाव हैं. कुछ शब्दों के घुमाव
तो कुछ सलिल के संगीत के घुमाव. मुकेश ने इन सब
उतार चढावों को आसानी से पार किया और नतीजा आप
सब के सामने है-एक शानदार गीत.

वैसे एक सरल शब्द वाला धाँसू गीत है फिल्म पेंटर बाबू
में जिसकी कुछ पंक्तियाँ हैं-कचौड़ी खायेगी छोरी और
चाटेंगे छोरे. वो गीत पता नहीं थोड़े ही दिन जुबां पर
चढा पब्लिक के फिर जल्द ही उतर कर कहीं छुप गया.

तो सुनिए आज बिना विवरण के फिल्म आनंद से एक
सदाबहार गीत. इसे मुकेश ने गाया है और इसका संगीत
सलिल चौधरी ने तैयार किया है. हीरो को आप पहचान
ही गए होंगे, ना पहचान पायें तो एक टिप्पणी दर्ज करें
हम नाम बतला देंगे आपको.



गीत के बोल:

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
कुछ हँसते, कुछ गम के
तेरी आँखों के साये चुराए रसीली यादों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने

छोटी छोटी, छोटी-छोटी बातों की हैं यादें बड़ी
भूले नहीं, बीती हुई एक छोटी घड़ी
जनम-जनम से आँखे बिछाईं
तेरे लिए इन राहों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने

भोले-भाले, भोले-भाले दिल को बहलाते रहे
तन्हाई में, तेरे ख्यालों को सजाते रहे
कभी-कभी तो आवाज देकर
मुझको जगाया ख़्वाबों ने

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
कुछ हँसते, कुछ गम के
तेरी आँखों के साये चुराए रसीली यादों ने
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने
सपने, सुरीले सपने
........................................................................
Maine tere liye hi saat rang ke-Anand 1971.

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Jul 10, 2011

झूमता गाता सावन आया -जज़्बात १९८०

बारिश के मौसम में फिर एक गीत और याद आ गया. सन १९८० की
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .

ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.



गीत के बोल:

हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ

रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे

तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980

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Nov 20, 2010

कहीं दूर जब दिन ढल जाए-आनंद १९७०

हम जनता को उनकी पसंद से भी पहचानते हैं। किसी व्यक्ति
के मूड का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है इसका एक उदाहरण
देता हूँ।

एक सज्जन को मुकेश के गीत पसंद हैं। फिल्म आनंद का ये मशहूर
गीत -"कहीं दूर जब दिन ढल जाए" इन महाशय ने अपनी कालर ट्यून
बना रखा था। जब भी उनको मोबाइल पर रिंग मारो ये गीत सुनाई देता
था। इससे मूड फ्रेश हो जाया करता। ये सिलसिला बहुत दिन तक चला ।
साल भर बाद उनकी कालर ट्यून बदल गई। हिमेश रेशमिया का कोई गीत
उन्होंने कालर ट्यून बना के लगा डाला। उसी के साथ उनके व्यवहार में
बदलाव भी दिखा। उनकी आँखों में अब अक्सर सूअर का बाल दिखाई देता।
इस फेनोमिना की क्या वजह हो सकती है मेरी समझ के बाहर है।

खैर, ये गीत सुनिए आज, जो एक सदाबहार गीत है और फिल्म जगत के
काका अर्थात राजेश खन्ना इसको परदे पर गा रहे हैं। योगेश के लिखे गीत
के लिए धुन बनाई है सलिल चौधरी ने।



गीत के बोल:

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

मेरे ख्यालों के आंगन में
कोई सपनों के दीप जलाये
दीप जलाये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

कभी यूँ ही जब हुयीं बोझल साँसें
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही ऑंखें
कभी यूँ ही जब हुयीं बोझल साँसें
भर आई बैठे बैठे जब यूँ ही ऑंखें
कभी मचल के प्यार से चल के
छुए कोई मुझे पर नज़र ना आये
नज़र ना आये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते
कहीं से निकाल आयें जन्मों के नाते
कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाते
कहीं से निकाल आयें जन्मों के नाते

है मीठी उलझान बैरी अपना मन
अपना ही हो के सहे दर्द पराये
दर्द पराये

कहीं दूर जब दिन ढल जाए
सांझ की दुल्हन बदन चुराए
चुपके से आये

दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
हो गए कैसे मेरे सपने सुनहरे
दिल जाने मेरे सारे भेद ये गहरे
हो गए कैसे मेरे सपने सुनहरे

ये मेरे सपने यही तो हैं अपने
मुझसे जुदा ना होंगे इनके ये साये
इनके ये साये
..................................
Kahin door jab din dhal jaaye-Anand 1970

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Jan 27, 2010

ना जिया लागे ना-आनंद १९७०

संगीत भाषा और जाति के बंधनों से परे है। ध्वनि कैसी भी हो,
आपको आनंदित कर सकती है। इसका एक उदाहरण आपको देता हूँ।
फिल्म आनंद में एक गीत है लता की आवाज़ में-ना जिया लागे ना।
संगीतकार हैं सलिल चौधरी । सलिल ने बंगला भाषा में भी एक गीत
गवाया है लता से इसी धुन पर। मुझे बंगाली धुन ज्यादा पसंद आती है
जिसका कोई ठोस कारण मुझे समझ नहीं आया, क्यूंकि बंगाली भाषा
मुझे ना के बराबर आती है। गीत का आनंद लीलिए। सुमिता सान्याल
नामक अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है। गीतकार हैं योगेश।




गीत का बंगाली भाई इधर है:



गीत के बोल:

ना जिया लागे ना
तेरे बीना मेरा कहीं जिया लागे ना
ना जिया लागे ना
तेरे बिना मेरा कहीं जिया लागे ना
ना जिया लागे ना

जीना भूले थे कहाँ याद नहीं
तुझको पाया है जहाँ, सांस फिर आई वहीँ
जीना भूले थे कहाँ याद नहीं
तुझको पाया है जहाँ, सांस फिर आई वहीँ
ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी तेरे सिवा हाय भये ना
ना जिया लागे ना
तेरे बिना मेरा कहीं जिया लागे ना
ना जिया लागे ना

ना जिया लागे ना
पिया तेरी बावरी से रहा जाए ना
पिया तेरी बावरी से रहा जाए ना

तुम अगर जाओ कभी जाओ कहीं
वक़्त से कहना ज़रा वो ठहर जाए वहीँ
तुम अगर जाओ कभी जाओ कहीं
वक़्त से कहना ज़रा वो ठहर जाए वहीँ
वोह घडी
वोह घडी वहीँ रहे ना जाए ना
ना जिया लागे ना
तेरे बिना मेरा कहीं जिया लागे ना
ना जिया लागे ना
..................................................................
Naa jiya lage naa-Anand 1971

Artist: Sumita Sanyal

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