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Apr 5, 2015

प्रेम की नैया चली-धूप छांव १९३५

कुंदनलाल सहगल का सम्मान जितना रेडियो सीलोन
ने किया शायद आकाशवाणी के चैनल नहीं कर पाए.
एक कार्यक्रम-सदा जवान गीतों में अंत में सहगल का
गीत सुनाया जाना एक सुखद अनुभूति की तरह है.
आल इण्डिया रेडियो ज़रूर अपने पुराने गीतों के
कार्यक्रम में गुज़रे ज़माने के कलाकारों के गीत बिना
नागा बजाया करता था, एफ एम् चैनल के आ जाने
के बाद और पुराना रेडियो जिसपर मीडियम वेव के
स्टेशन सुनाई दिया करते थे, खराब हो गया. अब तो
कोई ऐसा नहीं मिलता जो बतलाये-आल इण्डिया रेडियो
का मिजाज़ कैसा है आज कल. कुछ साल पहले तक
ब्लॉगर चटका या फटका लगा के मौसम का हाल
बतला दिया करते थे. अब अंगूठे दिखाने का ज़माना है
अंगूठे दिखने से तात्पर्य-लाईक करो चलते बनो. यहाँ
चटके का अर्थ टीके या कमेन्ट से है. 


आज आपको फिल्म धूप छांव से चौथा गीत सुनवाते हैं.
इसे पहाड़ी सान्याल और उमा शशि ने गाया है. फिल्म
धूप छांव का निर्देशन नितिन बोस ने किया.फिल्म बनाने
वाली संस्था का नाम है-न्यू थियेटर्स. इस संस्था ने काफी
काम किया फिल्म निर्माण का उन दिनों. न्यू थियेटर्स के
संस्थापक थे-बी. एन. सरकार. १९३५ में प्लेबैक शुरू हुआ
और इसका श्रेय न्यू थियेटर्स को जाता है. भाग्य चक्र नाम
की बंगला फिल्म में इसका पहले पहल उपयोग हुआ.
भाग्य चक्र हिंदी में धूप छांव नाम से बनाई गयी . मूल
बंगला फिल्म में के. सी. डे और पारुल घोष ने आवाजें दीं.




गीत के बोल:

प्रेम की नैया चली जल में मोरी
प्रेम की नैया चली जल में मोरी
छोटी सी नैया चली जल में मोरी
छोटी सी नैया चली जल में मोरी

प्रेम की नैया चली जल में मोरी
छोटी सी नैया चली जल में मोरी
प्रेम का सागर प्रेम की नैया
प्रेम मुसाफिर प्रेम खिवैया
प्रेम का सागर प्रेम की नैया
प्रेम मुसाफिर प्रेम खिवैया
प्रभु बिन मोरा कौन रखैया
प्रभु बिन मोरा कौन रखैया
शोक करे क्यूँ क्यूँ अति भारी
शोक करे क्यूँ क्यूँ अति भारी
ये नैया कभी न गली जल में
ये नैया कभी न गली जल में
मोरी छोटी सी नैया चली जल में मोरी

प्रेम की नैया चली जल में मोरी
छोटी सी नैया चली जल में मोरी

चारों तरफ छाया अँधियारा
सूझे नहीं दूर किनारा
चारों तरफ छाया अँधियारा
सूझे नहीं दूर किनारा
थर थर कांपे मन मतवारा
थर थर कांपे मन मतवारा
क्यूँ इतनी मन की कमजोरी
क्यूँ इतनी मन की कमजोरी
ये नैया हमेशा फली जल में
ये नैया हमेशा फली जल में
छोटी सी नैया चली जल में मोरी

प्रेम की नैया चली जल में मोरी
छोटी सी नैया चली जल में मोरी.
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Prem ki naiya chali-Dhoop Chhaon 1935

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Oct 20, 2009

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर-चंडीदास १९३४

शुरुआती दौर की बोलती हिन्दी फिल्मों में से एक है चंडीदास जो कि
सन १९३४ में रिलीज़ हुई थी, इसमे सहगल के गाये कई गीत हैं।
यह गीत कुंदनलाल सहगल के साथ उमा शशि नाम की गायिका का
गाया हुआ है। गीत लिखा है आगा हश्र कश्मीरी ने और संगीतबद्ध किया
है राय चंद्र बोराल ने जिन्हें हम आर. सी. बोराल के नाम से भी जानते हैं।
गीत की खूबी ये है कि इसमें प्रेम शब्द लगभग हर पंक्ति में एक बार आया
है और ये अपने ज़माने का प्रसिद्ध गीत रहा है। हिन्दी फ़िल्म संगीत के
शुरुआती दौर के पहले कुछ युगल गीतों में से एक है ये।



गाने के बोल:

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार

प्रेम का आंगन, प्रेम की छत और
प्रेम के होंगे द्वार
प्रेम का आंगन, प्रेम की छत और
प्रेम के होंगे द्वार

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार

प्रेम सखा हो प्रेम पड़ोसी
प्रेम में सुख का सार
प्रेम में सुख का सार

प्रेम सखा हो प्रेम पड़ोसी
प्रेम में सुख का सार
प्रेम में सुख का सार

प्रेम के संग बिताएंगे जीवन
प्रेम के संग बिताएंगे जीवन
प्रेम ही प्राणाधार

प्रेम के संग बिताएंगे जीवन
प्रेम के संग बिताएंगे जीवन
प्रेम ही प्राणाधार

प्रेम सुधा से स्नान करूंगी
प्रेम से होगा सिंगार
प्रेम से होगा सिंगार

प्रेम सुधा से स्नान करूंगी
प्रेम से होगा सिंगार
प्रेम से होगा सिंगार

प्रेम ही कर्म है, प्रेम ही धर्म है
प्रेम ही सत्य विचार
प्रेम ही सत्य विचार

प्रेम ही कर्म है प्रेम ही धर्म है
प्रेम ही सत् विचार
प्रेम ही सत्य विचार


प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार

प्रेम का आंगन, प्रेम की छत और
प्रेम के होंगे द्वार
प्रेम का आंगन, प्रेम की छत और
प्रेम के होंगे द्वार

प्रेम नगर में बनाऊँगी घर मैं
तज के घर संसार
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Premnagar mein banaoongi ghar-Chandidas 1934

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