मरने की दुआएं क्यूँ मांगूं-जिद्दी १९४८
१९६४ की फिल्म जिद्दी से आपने दो गीत सुन लिए हैं। आज आपको सन ४८
की फिल्म जिद्दी से गीत सुनवाते हैं। इस फिल्म में संगीत दिया है अनिल बिश्वास ने।
ये गीत किशोर कुमार का गाया प्रथम गीत है इसलिए विशेष है। और गायकों की
तरह वे भी यहाँ सहगल प्रभाव में गा रहे हैं। वैसे भी सहगल किशोर के पसंदीदा
गायक रहे हैं। वैसे ये प्रभाव लम्बे समय तक नहीं चला और दुसरे गायकों की बनिस्बत
वो जल्दी इससे मुक्त हो गए और अपनी अलग शैली और प्रभाव विकसित कर लिया
उन्होंने। गीत फिल्माया गया है देव आनंद पर। किशोर कुमार को देव आनंद की आवाज़
कहा जाता था श्वेत श्याम के ज़माने में क्यूंकि वो और नायकों के लिए पार्श्व गायन
नहीं किया करते थे स्वयं और देव आनंद के सिवा। गीत लिखा है मोईन अहसान ज़ज्बी ने
और धुन बनाई है खेमचंद प्रकाश ने।
विचित्र सा विरोधाभास है इस विडियो गीत में। हताश निराश सा दिख रहा नायक ऐसा
लगता है कि तालाब में कूद जायेगा मगर उसके हाथ में बन्दूक दिखाई देती है तब भ्रम
दूर होता है। अब वो दुखी गीत क्यूँ गा रहा है इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
जंगल में शिकार नहीं मिला या कोई और वजह .....
गीत के बोल:
मरने की दुआएं क्यूँ मांगूं
जीने की तमन्ना कौन करे,
कौन करे
ये दुनिया हो या वो दुनिया,
अब ख्वाहिश-ए-दुनिया कौन करे, कौन करे
मरने की दुआएं क्यूँ मांगूं
जो आग लगायी थी तुमने
जो आग लगायी थी तुमने
उसको तो बुझाया अश्कों ने
उसको तो बुझाया अश्कों ने
जो अश्कों ने भड़काई है
उस आग को ठंडा कौन करे, कौन करे
उस आग को ठंडा कौन करे, कौन करे
मरने की दुआएं क्यूँ मांगूं
जब कश्ती साबित-ओ-सालिम थी
जब कश्ती साबित-ओ-सालिम थी
साहिल की तमन्ना किसको थी
साहिल की तमन्ना किसको थी
अब ऐश शिकस्ता कश्ती पर
साहिल की तमन्ना कौन करे, कौन करे
साहिल की तमन्ना कौन करे, कौन करे
मरने की दुआएं क्यूँ मांगूं

0 comments:
Post a Comment