जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा -भीगी पलकें १९८२
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।
गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।
गीत के बोल:
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा
जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
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Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982
Artists: Raj Babbar, Smita Patil
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