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Nov 16, 2025

बाँधी रे काहे प्रीत-संकोच १९७६

रुपहले परदे का माया यही है जब आप चमक रहे होते हैं तो सब 
वाह वाह करते हैं और आपको दिल-ओ-जान से याद किया करते
हैं. एक बार आप हाशिये पर पहुंचे तो कोई पूछने वाला नहीं बचता

नवम्बर के इस महीने में कुछ दिल्मी कलाकार इस दुनिया को फानी
कह गए उनमें से एक हैं अपने ज़माने की खूबसूरत और प्रतिभा
संपन्न अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

अभिनेता संजीव कुमार से वो विवाह करना चाहती थीं. नियति 
को कुछ और मंजूर था. संजीव कुमार असमय संसार छोड़ चले
उसके बाद सुलक्षणा पंडित आजीवन अविवाहित रहीं. 

दर्शकों और सिने प्रेमियों से पूछा जाये तो अधिकांश यही बात 
कहेंगे कि इन दोनों का विवाह हो जाना था.

सुलक्षणा पंडित की आवाज़ में एक गीत सुनते हैं फिल्म 
संकोच का. इसे लिखा है एम् जी हशमत ने और धुना बनायींई
है कल्यानजी आनंदजी ने. अपने समय का ये एक बेहद चर्चित
गीत है.


गीत के बोल:

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

पास रही तो मैं ना समझी
दूर हुई तो जाना
दूर हुई तो जाना
प्यार में कैसे अपना बन के
कोई बने बेगाना

कैसे बचेगा अब जीवन
कैसे बचेगा अब जीवन
बिन साथी बिन मिलो

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

अंग लगी है पेड़ की बेला
लहर को मिले किनारा
लहर को मिले किनारा
बिन साजन के मैं हूँ अकेली
मेरा कौन सहारा
ऐसा सूना लागे जीवन
ऐसा सूना लागे जीवन
जैसे सुर बिन गीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत
बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत.
...............................................................................................
Bandhi re kaahe preet-Sankoch 1976

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Mar 31, 2020

शादी की है हमको तो-हनीमून १९९२

नायक नायिका को शादी की जल्दी पड़ी थी सो
उन्होंने कर ली. इनमें सबसे ज्यादा जल्दी नायिका
को थी. नायिका कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी और
नायक मेंस होस्येल में जहाँ केवल कुंवारों को जगह
दी जाती है.

शादी के बाद नायक को हॉस्टल से बेदखल कर दिया
जाता है. उसके बाद दोनों सामान ले कर सड़कों पर
घूमते हुए ये गाना गाते हैं जब तक समस्यापूर्ति ना
हो जाये. जहाँ चाह वहाँ राह. उन्हें गीत के अंत तक
तौर ठिकाना मिल ही जाता है.

मनोरंजक गीत है और जिन्हें ये समस्या है शादी के
बाद हनीमून कहाँ मनायें, वो इसे देख के दुःख हल्का
कर सकते हैं.

एम् जी हशमत के बोल, आनंद मिलिंद का संगीत और
अभिजीत, साधना सरगम की आवाजें हैं.



गीत के बोल:

शादी की है हमको तो हनीमून चाहिये
शादी की है हमको तो हनीमून चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये

शादी की है हमको तो हनीमून चाहिये
शादी की है हमको तो हनीमून चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये

अंग अंग जलता है दिल बेताब है
शादी के बाद ये हमारी पहली रात है
अंग अंग जलता है दिल बेताब है
शादी के बाद ये हमारी पहली रात है
दोनों को ज़रूरत है कहीं तन्हाई की
ना कम्बल ना चादर की और ना रजाई की
दिल को तो धडकन का फ़ेविकोल चाहिये
दिल को तो धडकन का फ़ेविकोल चाहिये
हो महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये

कहीं नहीं जायेगी ये बस खाली खड़ी है
दोनों के वास्ते ये सीट काफ़ी बड़ी है
पास आ जा और हो जा मेरे करीब में
मिल जाये खुशियाँ जो हैं नसीब में
मुझको तेरी साँसों की परफ्यूम चाहिये
मुझको तेरी साँसों की परफ्यूम चाहिये
हे महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये

ऐ क्या हो रहा है इधर
जी हनीमून
हनीमून हनीमून हनीमून
हे हे हे हनीमून
हनीमून हनीमून

स्टेशन के बाहर रक डब्बा है रेल का
कटा हुआ हिस्सा है कलकत्ता मेल का
खिडकी बंद कर के तू आ जा मेरी बाहों में
खिडकी बंद कर के तू आ जा मेरी बाहों में
मज़ा आ जायेगा चाहत के खेल का
हाय राम डब्बे से डब्बा टकराया है
लाइन मैं काँटा बदलने को आया है
देखो कैसे जुड़े हुए डब्बे कट जाते हैं
इंजन को छोड़ के दूर हट जाते हैं
लेकिन तेरी आँखों में आंसू क्यूँ आ गये
चलो भागो डब्बे को धोने वाले आ गये
रात में भी डब्बों की होती धुलाई है
भागो भीग जायेंगे बरसात आई है
भीगने दो आज हमको मानसून चाहिये
भीगने दो आज हमको मानसून चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये
महल नहीं छोटा सा एक रूम चाहिये
हनीमून हनीमून
हनीमून हनीमून
हनीमून हनीमून
…………………………………………..
Shadi ki hai hamko to-Honeymoon 1992

Artists: Rishi Kapoor, Varsha Usgaonkar

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Mar 29, 2020

सुनिये जनाब बोलो मेमसाब-हनीमून १९९२

नायक और नायिका होटल में खाने जाते हैं. कहानी
में ये शादी के पहले का वाकया है. पुलाव परोसने के
साथ ही नायिका ख्यालों में खो जाती है. क्या वो ये
सोच रही है कि जो आर्डर किया है कम है और इसे
नायक को ही खाने दूं. या वो ये सोच रही है डॉक्टर
ने उसे तली भुनी चीज़ें खाने को मना किया है क्यूंकि
चेहरे पर कील मुहांसे बहुत हो रहे थे, इसलिए दूर
रहो ऐसे खाने से.

आगे उसके चेहरे के भाव बदलते हैं और स्थाई से
हो जाते हैं जिनमें आश्चर्य भी है थोडा सा. क्या
उसके दिमाग में ये बात आ रही है-कितने दिन से
भूखा है गपागप खा रहा है. मुर्गे की टांगें और सलाद
की प्लेटें साथ रखी है. छुरी कांटे से कोई चावल तो
खाता नहीं. एक ज़माने मं होटल वाले काफी उदार थे
और सलाद भरपूर दिया करते थे खाने के साथ. ये
सलाद की प्लेट अलग से आर्डर की गयी है इसलिए
इतना है.

यार ये खाना खाने के साथ पब्लिक क्या कपड़े भी
साथ ले जाती है. खाने के बाद कपड़े बदल के कोई
नाचता है क्या? अबे चावल में ऐसा क्या था के पचा
नहीं और नाचने के बाद टेनिस भी खेलना पड़ गया.
पीट सैम्प्रास के फैन दोनों केवल बैकहैंड शॉट ही लगा
रहे हैं.

आगे टेलीफोन का सदुपयोग हो रहा है उस पर हमें
कोई कमेन्ट नहीं करना. गीत में आगे उम्र साथ गुज़ार
चुके साथियों के लिए एक सन्देश भी है.

गीत एम जी हशमत का है और इसकी धुन तैयार की
आनंद मिलिंद ने जिसे अभिजीत और साधना सरगम
ने गाया है.




गीत के बोल:

सुनिये जनाब बोलो मेमसाब चोरी हुआ मेरा दिल
सुनिये जनाब बोलो मेमसाब चोरी हुआ मेरा दिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल

सुनो मेमसाब कहिये जनाब चोरी हुआ तेरा दिल
सुनो मेमसाब कहिये जनाब चोरी हुआ तेरा दिल
मैं दिल का चोर नहीं किसने चुराया तेरा दिल
मैं दिल का चोर नहीं किसने चुराया तेरा दिल

ये तो बताओ क्या मुझसे पहले कहीं किसी से मिली हो तुम
ये तो बताओ क्या मुझसे पहले कहीं किसी से मिली हो तुम
मुझे तो कोई मिला नहीं है मिले हो तो बस मिले हो तुम
इसलिए मुझ पर ही शक तेरा जाता है
देखते ही तुमको दिल मचल जाता है
सच है पहले तो तुमने चुराया मेरा दिल

सुनो मेमसाब कहिये जनाब चोरी हुआ मेरा दिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल

दिल तेरा चोरी दिल मेरा चोरी दोनों परेशान हैं दिल से
दिल तेरा चोरी दिल मेरा चोरी दोनों परेशान हैं दिल से
क्यूँ ना मिटा दें ये पर्सेहानी एक दूसरे से हम मिल के
इन आँखों में तेरी तस्वीर नज़र आती है
मुझको इसमें अपनी तकदीर नज़र आती है
फिर क्यूँ जुदा हैं जब एक है अपनी मंज़िल
सुनिये जनाब बोलो मेमसाब चोरी हुआ मेरा दिल
सुनो मेमसाब कहिये जनाब चोरी हुआ मेरा दिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल
आँखों की तलाशी दो शायद वहां जाये मिल
…………………………………………………..
Suniye janaab-Honeymoon 1992

Artists: Rishi Kapoor, Varsha Usgaonkar

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Mar 24, 2020

मैं औरत तू आदमी-हनीमून १९९२

बाहर से आये एक वायरस की वजह से जगह जगह लॉक डाउन हो
गया है. ये सब हमारी सुरक्षा के लिए है, सबको समझना चाहिये.

इस समय पर जनता को घर में रहने के फायदे भी हैं. अपने संबंध
सुधार का एक बढ़िया मौका दिया है प्रकृति ने. उम्मीद है आप सब
को हमारा ब्लॉगपढ़ने का भी मौका मिल रहा होगा.

#कोरोनावायरस -ये सर्वाधिक चर्चा में आई हुई चूं चूं है. जी हाँ हम
ट्विटर की बात कर रहे हैं. ट्वीट यानि कि चूं चूं. जो निर्देश स्वास्थ्य
सेवाओं के कर्मचारीऔर सरकार दे रही है उसका ईमानदारी से पालन
करें.

अपने प्यार की चूं चूं को रिडिसकवर करें और ये गीत सुनें १९९२ की
फिल्म हनीमून का. एम् जी हशमत के बोल हैं और आनंद मिलिंद
का संगीत. इसे गाया है कविता कृष्णमूर्ति और मोहम्मद अज़ीज़ ने.




गीत के बोल:

मैं औरत तू आदमी
मैं औरत तू आदमी मोहब्बत है लाज़मी
मैं औरत तू आदमी मोहब्बत है लाज़मी
दिल रजामंद करे तुझको पसंद
दिल रजामंद करे तुझको पसंद
कार में हैं दोनों क्यूँ ना शीशे कर लें बंद
कार में हैं दोनों क्यूँ ना शीशे कर लें बंद
लेंगे प्यार का आनंद लेंगे प्यार का आनंद
मैं औरत तू आदमी मोहब्बत है लाज़मी
दिल रजामंद करे तुझको पसंद
कार में हैं दोनों क्यूँ ना शीशे कर लें बंद
कार में हैं दोनों क्यूँ ना शीशे कर लें बंद
लेंगे प्यार का आनंद लेंगे प्यार का आनंद

शीशे बंद करेगी तो गर्मी सतायेगी
हो शीशे बंद करेगी तो गर्मी सतायेगी
बाहर की हवा अंदर कैसे आयेगी
बाहर की हवा अंदर कैसे आयेगी
देखो मैंने कार में एसी भी लगाया है
बटन दबाते ही हवा का झोंका आया है
देखो मैंने कार में एसी भी लगाया है
बटन दबाते ही हवा का झोंका आया है
एसी बंद कर मुझे लगती है सर्दी
एसी बंद कर मुझे लगती है सर्दी
अरे डाल मेरी बाहों का गले में गुलबन्द
डाल मेरी बाहों का गले में गुलबन्द
लेंगे प्यार का आनंद लेंगे प्यार का आनंद

आओ न कमरे में
ओह नो नो नो
कमरे में तुझसे मिलन बड़ा खतरनाक है
हाय कमरे में तुझसे मिलन बड़ा खतरनाक है
शादी के बिना इतने पास आना पाप है
शादी के बिना इतने पास आना पाप है
अरे पिछले ज़माने की बात है ये भूल जा
आज के ज़माने में तो सब कुछ माफ है
अरे पिछले ज़माने की बात है ये भूल जा
आज के ज़माने में तो सब कुछ माफ है
देख मेरे सीने में जागी है उमंग
देख मेरे सीने में जागी है उमंग
चिटकनी लगा दी आ के बैठ मेरे संग
चिटकनी लगा दी आ के बैठ मेरे संग
लेंगे प्यार का आनंद लेंगे प्यार का आनंद

मैं औरत तू आदमी मोहब्बत है लाज़मी
मैं हूँ परेशान मुझे मत कर तंग
अरे दिल रजामंद करे तुझको पसंद
भला कर मेरा मेरे बली बजरंग
भला कर मेरा मेरे बली बजरंग
मेरे बली बजरंग मेरे बली बजरंग
जय हो बली बजरंग मेरे बली बजरंग
………………………………………………….
Main aurat too aadmi-Honeymoon 1992

Artists: Rishi Kapoor, Ashwini Bhave

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Nov 10, 2019

रूठे रूठे पिया-कोरा कागज़ १९७४

फिल्म कोरा कागज़ एक साफ़ सुथरी फिल्म है जिसके
कथानक में गंभीरता ज्यादा है. फिल्म में कुछ पल
ऐसे भी हैं जिनमें हास्य और छेड़ छाड है. आम तौर
पर नायक नायिका को छेड़ता नज़र आता है. प्रस्तुत
गीत में नायिका नायक को छेड़ रही है. खिसियाने से
दिख रहे नायक का नाम विजय आनंद है.

एम जी हशमत के लिखे गीत की धुन बनाई है जोड़ी
कल्याणजी आनंदजी ने और इसे लता मंगेशकर ने
गाया है. इस गीत के लिए लता मंगेशकर को फिल्मों
का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. फिल्म के संगीत के
लिए कल्याणजी आनंदजी को उस साल का फिल्मफेयर
पुरस्कार मिला था.



गीत के बोल:

रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
आज न जाने बात हुई क्या
क्यों रूठे मुझसे
जब तक वो न बोलें मुझसे
मैं समझूँ कैसे
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

वो बैठे हैं कुछ ऐसे
शादी में दुल्हन जैसे
क्या बन के दुल्हा मैं जाऊँ
और उनकी माँग सजाऊँ
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
जोड़ी सजे कैसे
रूठे रूठे हो रूठे रूठे
हाँ हाँ रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

क्या मुझसे हसीं हैं क़िताबें
पिया जिनको प्यार से थामे
मैं नैन मिलाना चाहूँ पर
नैन मिला ना पाऊँ
सौतन चश्मा बीच में आये
सौतन चश्मा बीच में आये
नैन मिलें कैसे
रूठे रूठे पिया

क्या बचपना कर रही हो
........................................................
Roothe roothe piya-Kora kagaz 1974

Artists: Jaya Bhaduri, Vijay Anand

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Oct 12, 2019

घंटी बजाये गुलफ़ाम-हनीमून १९९२

घंटा घड़ियाल हिट्स के अंतर्गत सुनते हैं एक गीत फिल्म
हनीमून से. ये सन १९९२ वाला हनीमून है. जिस फिल्म में
दो या अधिक नायिकाएं होतीं तो पब्लिक कहती नायक की
पाँचों उँगलियाँ घी में.

सुनते हैं फिल्म से अगला गीत जिसे लिखा है एम् जी हशमत
ने और धुन तैयार की है आनंद मिलिंद ने. सपना मुखर्जी,
जॉली मुखर्जी और सुदेश भोंसले ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
मैं भी हूँ तुम भी हो तुम भी हो और मैं भी हूँ
मिल के गुजारेंगे शाम
घंटी बजाये गुलफाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
घंटी बजाये गुलफाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम

आ जा तुझको जन्नत दिखाऊंगी
आ जा आ जा
अरे आ जा तुझको जन्नत दिखाऊंगी
दिल तेरा बहलाऊंगी
नरम नाज़ुक उँगलियों से
तन बदन सहलाऊंगी
शरबत पिलाऊंगी किशमिश खिलाऊँगी
ठुमका लगाऊंगी नाचूंगी गाऊंगी
फूलों पे सुला के दूँगी मैं तुझे आराम
घंटी बजाये गुलफाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
घंटी बजाये गुलफाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम

आया हूँ मैं महफ़िल में तेरी
आ जा आ जा
अरे आया हूँ मैं महफ़िल में तेरी लौट के ना जाऊँगा
जितने फल हैं पास तेरे सब के सब मैं खाऊंगा
अंगूर भी हैं खजूर भी हैं अनार भी हैं गुलनार भी है
होंठों से चबा ले ये है हुस्न दीवाना
घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम

मैं जन्नत के बाग में आ कर खाता था अंगूर
कहाँ से आ गया लंगूर
आपका ये अंगूर खाना मुझको नामंजूर
मैं तो रोकूँगा हुज़ूर
मीठा नहीं खट्टा नहीं ज्यादा खाना अच्छा नहीं
अरे रोक मत टोक मत जानता हूँ बच्चा नहीं
मक्खन ना मलाई नहीं कोई चिकनाई नहीं
तेरे नसीब में कोई भी मिठाई नहीं
मुझको तो मीठा चाहिए साथ में नमकीन भी
दौलत के साथ चाहिए दावतें रंगीन भी
तू जी भर के खा ले ये हैं मीठे मीठे आम
घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम
घंटी बजाये गुलफ़ाम मेरे होंठों के जाम तेरे नाम

तुम हो बीबी उस जहाँ की इस जगह क्यों आई हो
तेरा मेरा नाता टूटा लगती मुझे परायी हो
अरे तुम हो बीबी उस जहाँ की इस जगह क्यों आई हो
तेरा मेरा नाता टूटा लगती मुझे परायी हो
डर मत अपनी बीबी से तू ऐश कर खुले आम

……………………………………………………….
Ghanti bajaye gulfam-Honeymoon 1992

Artists: Kadar Khan, Varsha Usgaonkar, Shakti Kapoor, Bindu

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Nov 6, 2018

ये वादा करो न रोओगी-हादसा १९८३

सन १९८३ की फिल्म हादसा के गीत बेहद लोकप्रिय थे
अपने समय में. फिल्म के गानों में वैरायटी है और इसमें
योग के ऊपर भी एक गाना है.

फिल्म में दो दर्द भरे गीत हैं, एक कंचन की आवाज़ वाला
जो ज्यादा लोकप्रिय है और दूसरा किशोर आशा का गाया
युगल गीत.

आज आप किशोर वाला गीत सुनेंगे जिसे एम् जी हशमत
ने लिखा है. धुन तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.
   




गीत के बोल:

ये वादा करो ना रोओगी तुम
ये वादा करो ना रोओगी तुम
अगर हो भी जाऊं मैं तुम से जुदा
अगर हो भी जाऊं मैं तुम से जुदा
वफाओं की तुमको कसम है सनम
कहो तुमने वादा किया
ये वादा करो ना रोओगी तुम

अपनी मोहब्बत की खुशबू हवाओं में है
मैं खुश के तुम आज मेरी बाहों में हो
मिलन की घड़ियाँ कितनी हसीन होती हैं
……………………………………….
Ye wada karo-Haadsa 1983

Artists: Akbar Khan, Ranjeeta

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Feb 28, 2018

जिंदगी ये जिंदगी-हादसा १९८३

गीत छोटा हो या बड़ा हो दम होना चाहिए. ऐसा मैंने
कुछ संगीत प्रेमियों को कहते सुना पिछले कई सालों
में.

कुछ फिल्मों में आपको एक दो लाइन वाले गीत मिलेंगे
अक्सर ये गीत संदेशात्मक होते हैं. प्रस्तुत गीत को सुन
कर मन्ना डे के कुछ गीत याद आ जाते हैं.

एक जी हशमत के लिखे गीत को गाया है एक नये
गायक आनंद कुमार चित्रगुप्त ने. आनंद कुमार संगीतकार
चित्रगुप्त के सुपुत्र हैं. हादसा फिल्म के संगीतकार हैं
कल्याणजी आनंदजी.



गीत के बोल:

जिंदगी ये जिंदगी
जिंदगी ये जिंदगी
जिंदगी लुत्फ़ है दर्द है
आग का दरिया है
डूब जा इसमें हे डूब जा
डूब जा इसमें अगर उस पार जाना है
उस पार जाना है
जिंदगी ये जिंदगी
………………………………………..
Zindagi ye zindagi-Haadsa 1983

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Dec 4, 2017

ऐ धनवालों मर गए भूखे-दो चट्टानें १९७४

महंगाई और जमाखोरी पर समय समय पर कटाक्ष होते रहे हैं
फिल्मों के ज़रिये.

प्रस्तुत गीत लिखा है एम जी हशमत ने और इसकी धुन बनाई है
सोनिक ओमी की जोड़ी ने. इसे आशा भोंसले और मीनू पुरुषोत्तम
ने गाया है.

यो यो शब्द हमने पहले से सुन रखे है गीतों में. आजकल के
एक गायक के नाम के आगे भी यही शब्द लगते हैं.



गीत के बोल:

आटा नहीं चावल नहीं
घी नहीं शक्कर नहीं
आटा नहीं चावल नहीं
घी नहीं शक्कर नहीं
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो

ऐ धनवालों मर गए भूखे
ऐ धनवालों मर गए भूखे
अपने देश के बंदे
इनके पेट के दुश्मन बन गए काले धन के धंधे
छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा
इनके पेट के दुश्मन बन गए काले धन के धंधे
छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा

हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो
हाय हाय यो यो

काले धन से तू धनवान
अंदर भरे हुए गोदाम
दिल में है तेरे शैतान
बन के बैठा है भगवान
डरता भी सरकार तेरे को कर डालेगी नंगा
छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा
छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा

ऐ धनवालों मर गए भूखे

चावल में पत्थर का है चूरा
चाय में लकड़ी का है बूरा
गेहिन में घुन माटी कूड़ा
जल्दी जीवन हो जाए पूरा
जनता के जीवन से खेले आँखों वाला अंधा

छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा
छोड़ ये काला धंधा अरे तू बन जा बंदा

ऐ धनवालों मर गए भूखे
……………………………………………………..
Ae dhanwalon mar gaye bhookhe-Do chattane 1974

Artists-Asha Sachdev, Omprakash, Aruna Irani

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Sep 14, 2017

जो राह चुनी तूने-तपस्या १९७६

हिंदी फिल्मों के नाम में सभी प्रकार के शब्दो का प्रयोग हो चुका
है. शब्दकोष के सारे शब्दों का प्रयोग तो संभव नहीं मगर वैराईटी
की बात की जाए तो काफी अनूठे किस्म के नाम भी हमें देखने
को मिले-राजा रानी को चाहिए पसीना जैसे.

सुनते हैं तपस्या फिल्म से एक गीत. गौरतलब है त्याग, बैराग
सन्यासी, ब्रह्मचारी, पुजारी, पुजारिन जैसे नामों वाली फ़िल्में मौजूद
हैं.

प्रस्तुत गीत किशोर कुमार ने गाया है. एम जी हशमत गीतकार हैं
और रवीन्द्र जैन संगीतकार. आम तौर पर रवीन्द्र जैन ने अपने गीत
खुद लिखा मगर कुछ फिल्मों में आपको दूसरे गीतकारों के लिखे
गीत भी मिल जायेंगे.



गीत के बोल:

जो राह चुनी तूने अरे जो राह चुनी तूने
उसी राह पे राही चलते जाना रे
हो कितनी भी लम्बी रात अरे हो ओ ओ ओ
हो कितनी भी लम्बी रात दिया बन जलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जो राह चुनी तूने उसी राह पे राही चलते जाना रे

कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया हो ओ ओ
कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया
अरे सेवा में सभी की उसने जनम बिताया हो ओ ओ
कोई कितने भी फल तोड़े अरे हो ओ ओ
कोई कितने भी फल तोड़े उसे तो है फलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे

तेरी अपनी कहानी ये दर्पण बोल रहा है हो ओ ओ ओ
तेरी अपनी कहानी ये दर्पण बोल रहा है
भीगी आँख का पानी हक़ीकत खोल रहा है हो ओ ओ ओ
जिस रंग में ढाले अरे हो ओ ओ
जिस रंग में ढाले वक़्त मुसाफ़िर ढलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे

जीवन के सफ़र में ऐसे भी मोड़ हैं आते हो ओ ओ ओ
जीवन के सफ़र में ऐसे भी मोड़ हैं आते
जहाँ चल देते हैं अपने भी तोड़ के नाते ऐ ऐ ऐ
कहीं धीरज छूट न जाये अरे हो ओ ओ ओ
कहीं धीरज छूट न जाये तू देख सम्भलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे

तेरे प्यार की माला कहीं जो टूट भी जाये हो ओ ओ
तेरे प्यार की माला कहीं जो टूट भी जाये
जनमों का साथी कभी जो छूट भी जाये ऐ ऐ ऐ
दे दे कर झूठी आस अरे हो ओ ओ ओ
दे दे कर झूठी आस तू खुद को छलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
हो कितनी भी लम्बी रात अरे हो ओ ओ ओ
हो कितनी भी लम्बी रात दिया बन जलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
……………………………………………………….
Jo raah chuni tone-Tapasya 1976

Artist: Rakhi, Parikishit Sahni

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Apr 12, 2017

मेरा जीवन कोरा कागज़-कोरा कागज़ १९७४

किशोर कुमार के सबसे ज्यादा लोकप्रिय जो गीत हैं उनमें से एक
आज प्रस्तुत है फिल्म कोरा कागज से.

कोरा कागज फिल्म का निर्देशन अनिल गांगुली ने किया है. फिल्म
का कथानक रूटीन फिल्मों से अलग है. एक पारिवारिक फिल्म है
ये जिसमें मानवीय रिश्तों और पेचीदगियों का सजीव चित्रण है.




गीत के बोल:

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
जो लिखा था
जो लिखा था आँसुओं के संग बह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया

इक हवा का झोंका आया
इक हवा का झोंका आया
टूटा डाली से फूल टूटा डाली से फूल
ना पवन की ना चमन की
किसकी है ये भूल किसकी है ये भूल
खो गई
खो गई खुशबू हवा में कुछ न रह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया

उड़ते पंछी का ठिकाना
हो उड़ते पंछी का ठिकाना
मेरा न कोई जहां मेरा न कोई जहां
ना डगर है ना खबर है
जाना है मुझको कहाँ जाना है मुझको कहाँ
बन के सपना
बन के सपना हमसफ़र का साथ रह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन ब्लेंक पेपर कोरा ही रह गया
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Mera jeevan kora kagaz-Kora kagaz 1974

Artists: Jaya Bhaduri, Vijay Anand

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Mar 26, 2017

तेरा प्यार खुदा-दो चट्टानें १९७४

सर्वधर्म सद्भाव वाली थीम से अगला गीत सुनते हैं. पिछला गीत
आपने सुना था फिल्म देश प्रेमी से. प्रस्तुत गीत है सन १९७४
की फिल्म दो चट्टानें से जिसे मन्ना डे और रफ़ी ने गाया है.
गीत लिखा है एम जी हशमत ने.

राकेश पांडे, आशा सचदेव, जोगिन्दर, विक्रम, ओम प्रकाश और
अरुणा ईरानी जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म का निर्देशन किया
जी एच सरीन ने और इसके निर्माता हैं जोगिन्दर.     फिल्म में
सोनिक ओमी का संगीत है. आकर्षक धुन वाला ये गीत किसी
समय रेडियो पर बजा करता था.




गीत के बोल:

तेरा प्यार खुदा ना होना मुझसे जुदा
हो तेरा प्यार खुदा ना होना मुझसे जुदा
तू है हिंदू या है मुसलमान
हो मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
ओए मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
हो तेरा प्यार खुदा

तेरी एक नज़र में काबा तेरी एक नज़र में काशी
प्यार खुदा हो जिनका उनकी कोई नहीं है जाति
हो तू है गीता
तू है गीता मेरी या है तू कुरान
हो मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
हो मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
हो तेरा प्यार खुदा

हाँ दूर हुआ तू जब आँखों से दिल पे क़यामत आई
जब तू गले से आ के लगा तो मैंने ईद मनाई
दिल की धडकन
दिल की धडकन की सुन ले तू जुबान
हो मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
हो मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
हो तेरा प्यार खुदा

ओए ईश्वर अल्लाह ईसा नानक एक दूजे दे यार
सभी प्यार के बन के आये दुनिया में अवतार
फिर क्यूँ उनके मूरख बंदे करते हैं क्यूँ तकरार
प्यार से ही
प्यार से ही हुआ पैदा इंसान
ओ मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
ओए मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
ओ तेरा प्यार खुदा ना होना मुझसे जुदा
तू है हिंदू या है मुसलमान
मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
होए मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
मेरी जान है तू मेरा ईमान है तू
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Tera pyar khuda na hona-Do chattane 1974

Artists: Vikram, Joginder, Alka, Rakesh Pandey, Om prakash

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Sep 15, 2015

अपने जीवन की उलझन को(लता)-उलझन १९७५

आपको उलझन फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया था कुछ समय
पहले जो किशोर कुमार का गाया हुआ है. अब सुनते हैं इस गीत
का महिला संस्करण. इसे लता मंगेशकर ने गया है. गौरतलब
है सुलक्षणा पंडित जो की स्वयं गायिका हैं उनके लिए इस गीत
को लता गा रही हैं.

सुलक्षणा पंडित ने लता के कई गीत डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर
गाये हैं. डबिंग आर्टिस्ट वो होता है जो गीत बनते समय गाया
करता है, गीत पूरा हो जाने के बाद जब मूल गायक उपलब्ध
होता है तो उससे फाइनल गीत गवा लिया जाता है. ऐसी सुविधा
के बारे में कम ही लोगों को मालूम है. कल्याणजी आनंदजी अगर
चाहते तो इस गीत को सुलक्षणा पंडित से भी गवा सकते थे.
खैर जो भी हुआ हो, गीत बढ़िया है और संगीतकार के चयन
का मामला हम अपनी चर्चा में नहीं लाते क्यूंकि हमें इस बारे
में ज्यादा जानकारी नहीं है, ठीक है न भाई लोग(बहनें भी).




गीत के बोल:

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ

दिल में ऐसा दर्द छुपा है
दिल में ऐसा दर्द छुपा है
मुझसे सहा न जाए
मुझसे सहा न जाए
कहना तो चाहूँ अपनों से मैं
फिर भी कहा न जाए
फिर भी कहा न जाए
आंसू भी आँखों में आये
आंसू भी आँखों में आये
चुपके से पी जाऊं

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ

जीवन के पिंजरे में मन का ये पंछी
जीवन के पिंजरे में मन का ये पंछी
कैसे कैद से छूटे
कैसे कैद से छूटे
जीना होगा इस दुनिया में
जब तक सांस न टूटे
जब तक सांस न टूटे
दम घुटता है अब साँसों का
दम घुटता है अब साँसों का
कैसे बोझ उठाऊँ


अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ
अपने जीवन की उलझन को
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Apne jeewan ki uljhan ko-Uljhan 1975

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Feb 6, 2015

अपने जीवन की उलझन को-उलझन १९७५

घटिया घासलेटी लेखन-इन शब्दों को मैंने पहली बार पढ़ा था
जब ये किसी पहाड़ी क्षेत्र के एक लेखा के लिए प्रयुक्त हुए थे
एक दैनिक के कॉलम में. उसके बाद इस शब्द समूह का मैंने
काफी प्रयोग किया. जैसे उदाहरण के लिए एक घटिया घासलेटी
कवि ह्रदय के हिलोरे पर ध्यान दीजिए-

कभी बर्फ समझ के जमा दिया
कभी आइसक्रीम सा पिघला दिया
कभी लौंड्री में धुला दिया
कभी बिना कलफ प्रेस करा दिया

ये पंक्तियाँ मुझे एक जगह सड़ा सा पिज्ज़ा खाते हुए दिमाग में
आये थे. हो सकता है आज ये पंक्तियाँ घासलेट सी बसाती हों
क्या पता आज से १० साल बाद ये सुपर डुपर हिट किसी गीत
की पंक्तियाँ बन जाएँ. कुछ भी संभव है. आप लोजिक पर न
ही जाएँ तो अच्छा है. जब जनता आटा पिसवा सकती है तो
बर्फ को क्यूँ नहीं जमाया जा सकता? आज तक कितनों ने
बोला-गेंहू पिसवाने जा रहे हैं ?

छोडिये ये सब, ये सब उलझनें हैं. आज आपको उलझन फिल्म
से एक गीत सुनवाते हैं. एम् जी हशमत का लिखा हुआ
सरल शब्दों वाला एक दमदार गीत है ये. किशोर कुमार की
आवाज़ है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत है.




गीत के बोल:

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपनो ने जो दर्द दिये है कैसे मैं बतलाऊँ.

प्यार के वादे हो गए झूठे
प्यार के वादे हो गए झूठे
वफ़ा के बंधन टूटे
वफ़ा के बंधन टूटे

बन के जीवन साथी कोई
चैन मेरा क्यूँ लूटे
चैन मेरा क्यूँ लूटे
ऐसे जीवन साथी से
ऐसे जीवन साथी से
मैं कैसे साथ निभाऊं
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपने जीवन की उलझन को

कैसे कैसे भेद छुपाये
कैसे कैसे भेद छुपाये
हाथों की रेखाएं
हाथों की रेखाएं
कोई न जाने इस जीवन को
ये किस ओर ले जाएँ
ये किस ओर ले जाएँ
पढ़ न पाऊँ लेख विधि का
पढ़ न पाऊँ लेख विधि का
पल पल मैं घबराऊँ

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपनो ने जो दर्द दिये है कैसे मैं बतलाऊँ.
अपने जीवन की उलझन को
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Apne jeewan ki uljhan ko-Uljhan 1975

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Aug 17, 2011

वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम-फौजी १९७५

देश को स्वतंत्र हुए ६५ साल हो गये हैं। वर्षों के संघर्ष के बाद हमें
सन १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस दौरान जितने भी वीरों और
बहादुरों ने इसकी प्राप्ति में अपना बलिदान और योगदान दिया उन
सभी को नमन। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रस्तुत गीत है फिल्म फौजी से जो सन १९७५ की फिल्म है। गीत
में दिखाईदेने वाले कलाकारों में जोगिन्दर प्रमुख हैं। जोगिन्दर की
बनाई अधिकतर फिल्मोंमें सोनिक ओमी का संगीत है। गीत गाया
है मन्ना डे और मोहम्मद रफ़ी ने और उनके साथ एक महिला आवाज़
भी है जिसे मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ।


गीत के बोल:

वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
गोलियाँ खा के गर्दन झुकाता नहीं
कदम को बढ़ा के हटाता नहीं
ओ गोलियाँ खा के गर्दन झुकाता नहीं
कदम को बढ़ा के हटाता नहीं
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
वीर वरगा  नी मेरे वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम

शहीदों के खून की खुशबू पुकारे
कोई आबरू-ए-वतन न उजड़े
शहीदों के खून की खुशबू पुकारे
कोई आबरू-ए-वतन न उजड़े
हदों की हिफाज़त हमारा धर्म है
हदों की हिफाज़त हमारा धर्म है
हिमालय से पत्थर न कोई उखाड़े
ना कोई उखाड़े
ये ही है अरमान फौजी मेरा नाम
ये ही है अरमान फौजी मेरा नाम

फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
वीर जैसा नी मेरे वीर जैसा
फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम

ओ हिंदू सिख ईसाई कोई मुसलमान है
ये बेटे हजारों मगर एक माँ है
हिंदू सिख ईसाई कोई मुसलमान है
ये बेटे हजारों मगर एक माँ है
तिरंगे का आँचल ना उतारे कोई
तिरंगे का आँचल ना उतारे कोई
यही कौम की बंदगी का नशा है
बंदगी का नशा है
बाजू है करपाण फौजी मेरा नाम
बाजू है करपाण फौजी मेरा नाम

कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
ओ कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
पीर जैसा ये लगे पीर जैसा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी मुझे पीर जैसा
कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
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Vardi hai bhagwan-Fauji 1976

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Aug 3, 2011

तू क्या जाने तुझ में क्या है-हादसा १९८३

अब आपको सुनवाते हैं एक और हिट फिल्म से एक हिट गीत जो
किशोर कुमार की आवाज़ में है। फिल्म का शीर्षक गीत ज़रूर अमित कुमार
यानि किशोर कुमार के पुत्र की आवाज़ में है। ये कुछ उन बिरली फिल्मों
में से है जिसमें पिता पुत्र दोनों की आवाजों में गीत मौजूद हैं। प्रस्तुत
गीत फिल्माया गया है फिरोज खान के छोटे भाई अकबर खान और रंजीता
पर। अकबर संजय खान से छोटे हैं। उनकी संगीत की समझ काफी अच्छी है ।
फिल्म में कल्याणजी आनंदजी की सेवाएं ली गयीं और उन्होंने कतई निराश
नहीं किया और एक से बढ़ कर एक गीत बनाये फिल्म के लिए। नायक
एक गैराज में मिस्त्री है इसलिए एक विशेष क़िस्म का खटारा वाहन इस गीत
में आप देखेंगे। लड़की पटाने के लिए उपयुक्त गीत है ये। इसमें उपमाओं और
दावों का अतिरेक सा है। मनचली भाषा में ऐसे गीतों को कहते है-फुल्तू पुटास
गीत। गीत लिखा है एम् जी हशमत साहब ने।



अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
हुस्न क़यामत चाल क़यामत
गाल पे बिखरे बाल क़यामत
चलती फिरती आफत हो तुम
आफत पे दिल मेरा फ़िदा है
तू है ज़मीन पर सूनी है जन्नत
कौन करे अब उससे मोहब्बत
खुदा परेशां तुझको बना के
हुस्न खुदाई तुझमें बसा के कर
फिर न बनेगी तुझसी हसीना
सारा हुस्न तो तुझमें भरा है


तेरी शक्ल जब उसने बनाई
प्यार की खुशबू हवा में आई
झूम उठे सब नशे में बादल
नशे में मैं भी तो हो गया पागल
झूमें नशे में चाँद और तारे
मेरी तरह तेरे प्यार के मारे
सूरज के दिल में आग है तेरी
इश्क में तेरे वो भी जला है

हाथ में तेरा हाथ रहे तो
दुनिया से टकरा सकता हूँ
नोच के सूरज चंद सितारे
इस धरती पे ला सकता हूँ
दूर न होना दिल को लगा के
रख दूंगा वरना दुनिया जला के
तेरे बिना मैं जी न सकूंगा
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है

अरे तू क्या जाने तुझमें क्या है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
तेरी मोहब्बत मेरा खुदा है
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Too kya jaane tujh mein kya hai-Haadsa 1983

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May 16, 2011

हम हैं प्यार की डगर के- दो मुसाफिर १९७८

कोलगेट स्माइल प्लीज़। निर्देशक ने नायक को शायद यही निर्देश
दिया होगा इस गीत के फिल्मांकन की शुरुआत में। पिछले गीत
में कल्याणजी आनंदजी के जिक्र से ये गीत याद आ गया। सन १९७८
की फिल्म दो मुसाफिर से ये युगल गीत लिया गया है। शशि कपूर
और रेखा पर फिल्माए गाये इस गीत में लता और रफ़ी की आवाजें हैं।
थोड़ा धीमा और कर्णप्रिय गीत है ये। ये उस दौर का गीत है जब अभिनेत्री
रेखा ने योग करना शुरू नहीं किया था। खड़े तो नायक नायिका हैं समुद्र
के किनारे और गीत में जिक्र नदी का है। इतने सुन्दर गीत में इतना तो
नज़र अंदाज़ किया ही जा सकता है, है ना ?

गीत लिखा है एम् जी हशमत ने । फिल्म का शीर्षक गीत है ये और फिल्म
में २-३ बार सुनाई देता है।




गीत के बोल:

हम हैं प्यार की , प्यार की ,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

जैसे नदिया का गहरा पानी
बन के बादल अम्बर चूमे
जैसे अपने प्यार की धुन
धरती सुने सागर सुने
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार ही ईश्वर प्यार ही पूजा
प्यार से बढ़ के ना कोई

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

जैसे तन और मन का संगम
सांसों का संगीत सुनाये
ऐसे अपने प्यार की सरगम'
जनम जनम से ये दोहराए
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
हर प्रेमी में बसे थे हम तुम
और ना दूजा कोई

हम हैं प्यार की, प्यार की,
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर

हो संग संग रहने का वादा हमारा
वादा हमारा लो वादा हमारा
हम हैं प्यार की डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
डगर के दो मुसाफिर
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Hum hain pyar ki dagar ke-Do musafir 1978

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Dec 16, 2010

जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा -भीगी पलकें १९८२

कुछ फिल्मों ने प्रेमियों के मन पर काफी प्रभाव डाला
उनमे से एक है-भीगी पलकें जो सन १९८२ में आई थी।
राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने इसमें अभिनय किया है
जो बाद में एक दूसरे के जीवन साथी भी बन गए। ये गीत
मानो उन्हीं के लिए लिखा सा प्रतीत होता है। ये है लता और
रफ़ी के गाये युगल गीतों में से आखिरी एक गीत। इसकी
रेकॉर्डिंग सन १९८० या उससे पहले हो गई होगी । फिल्म
का नाम है-भीगी पलकें जिसमे कलाकारों की पलकें कम
भीगी दिखीं और दर्शकों कि ज्यादा और ये शायद दर्शकों के
लिए ही ऐसा नाम रखा गया होगा। फिल्म को महिला दर्शकों
ने काफी पसंद किया।

गीत की बात की जाए- गीत को सदाबहार गीत का दर्ज़ा प्राप्त
है। गीत लिखा है एम्. जी. हशमत ने और धुन बनाई है जोड़ी
जुगल किशोर-तिलक राज ने। इस फिल्म में स्मिता पाटिल का
अभिनय बेजोड़ है और राज बब्बर उस लेवल पर आने के लिए
संघर्षरत ही दिखे हैं। राज बब्बर समर्थ कलाकार हैं और अपने
कई समकालीनों से बेहतर मगर अभिव्यक्ति के मामले में
स्मिता उनसे कई कदम आगे हैं। फिल्म में अगर केवल एक
नाम स्मिता पाटिल का हो तो बस यही बहाना बहुत है फिल्म
देखने का।



गीत के बोल:

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

जब से घूमे धरती, सूरज चाँद सितारे
तब से मेरी निगाहें, समझे तेरे इशारे
रूप बदल कर साजन मैंने, फिर से तुम्हे पुकारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा

प्यार के पंख लगा के, दूर कहीं उड़ जायें
जहाँ हवाएं गम की, हम तक पहुच ना पायें
खुशियों की ख़ुशबू से महके, घर संसार हमारा

जनम जनम का साथ हैं तुम्हारा हमारा, तुम्हारा हमारा
अगर ना मिलते इस जीवन में, लेते जनम दोबारा
...........................................
Janam Janam Ka Sath Hai Hamara Tumhara-Bheegi Palkein 1982

Artists: Raj Babbar, Smita Patil

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Nov 12, 2010

मेरा जीवन कुछ काम ना आया -मेरा जीवन १९७६

साँसों के चलने को तो जीवन कहा नहीं जाए.......

अनजान या गुमनाम सी फिल्मों में कई मधुर गीत हैं जो हमारी जानकारी में
नहीं आते। आगे एक ऐसा ही गीत पेश है जो फिल्म "मेरा जीवन" से लिया गया है।
किशोर कुमार का गाया यह गीत बेहद लोकप्रिय हुआ था। गीत के बोल है
एम्. जी. हशमत के और संगीत है सपन-जगमोहन का।





गीत के बोल:

मेरा जीवन
मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

ओ ओ, अपनों के होते हुए
तन में बनायें तन्हाई
हो ओ ओ, आंसू बना के ख़ुशी
आँखों से मैंने बरसाई
हो ओ ओ, खुशियों को रोते रोते
दुनिया में अब तो मेरा
जी घबराया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

हो ओ, बरस गए रे सावन
दरिया भी जोश में आये
हो ओ ओ, फूल भी खिलने लगे
कलियों के मन मुस्काए
हो ओ ओ, सूनी रही एक डाली
उस पे तो कोई अब तक
फूल ना आया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

हो ओ, जीने को जीना चाहें
मांगूं तो मौत ना आये
हो ओ ओ,साँसों के चलने को तो
जीवन कहा नहीं जाए
हो ओ ओ, दर्द बसा के दिल में
मेरा नसीब मुझको
कहाँ पे लाया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
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Mera jeevan kuchh kaam na aaya-Mera jeevan 1976

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Jun 16, 2010

मेरा पढने में नहीं लागे दिल-कोरा कागज़ १९७४

बात सन १९७४ की हो या सन २०१० की, गाना आज भी प्रासंगिक
है। यूँ कहिये आज ज्यादा प्रासंगिक है। आश्चर्य है की इसका 'मसाला '
'दुशाला, 'ऊट पटांगो छींको खांसो' मिक्स अभी तक क्यूँ नहीं बना।

फिल्म कोरा कागज़ के लिए संगीतकार कल्याणजी भाई और आनंदजी भाई
को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था। गाना फिल्माया गया है जया भादुड़ी पर और
साथ में नाजनीन नाम की नायिका दिखलाई दे रही हैं। नाजनीन गाना शुरू
करती है और नायिका बाद में साथ देने लगती है। विजय आनंद अर्थात मास्टरजी
की शकल दिखाई देने के बाद सिट्टी पिट्टी गुम जैसे भाव के साथ गाना रुकता है
और क्षणिक अन्तराल के बाद फिर चल पढता है।

गीत अपने ज़माने का ज़बरदस्त हिट गीत है और इसे गाया है लता ने । इसको
हम नटखट गीतों की श्रेणी में गिन सकते हैं।



गीत के बोल:


मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ
मेरा पढने में नहीं लागे दिल
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल, उम्म्ह
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो ओ ओ ओ, बैठे बैठे मन मुस्काए
बैठे बैठे मन मुस्काए
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
किस्से बातें करती हूँ मैं
अरे किस्से बातें करती हूँ
चुपके चुपके हंसती हूँ
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो, दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
पास भी उसके जा ना सकूं मैं
अरे, पास भी उसके जा ना सकूं मैं
दूर भी उसके रह ना सकूं मैं

कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, क्यूँ
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ

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