Dec 12, 2011

महबूबा महबूबा-शोले १९७५

शोले महाफिल्म है तो इसमें मसालों की भी कमी नहीं है.
एक खतरनाक डाकू, सूरमा भोपाली, हेलन का डांस, दो
प्रेम कहानियां, बदले की आग में जलने वाला एक ठाकुर,
साम्भा, कालिया, मौसी, बिना बिजली वाले गांव में पानी
की टंकी और पिस्टल से आम तोड़ने की कला.

७० के दशक में फिल्मों में मुजरे और कैबरे का चलन
बरकरार था. सलीम जावेद का कहानी के साथ साथ इस
फिल्म की स्टारकास्ट और अन्य मामलों में भी काफ़ी
इनपुट रहा है.

मेरे ख्याल से हेलन का डांस और ये गाना उनकी ही मांग
रही होगी. जो भी है, इसे इस फिल्म से अलग सोच के
नहीं देख सकते. मज़ा तो तब आता जब पूरी ४ घंटे की
फिल्म हमें देखने को मिलती. उसमें वो एडिटिंग की टेबल
पर उचका दी गयी कव्वाली भी हमें देखने को मिल जाती.

सुनते हैं जलाल आगा औए हेलन पर फिल्माया गया गीत
जिसे स्वयं संगीतकार ने गाया है. बोल आनंद बक्षी के हैं.
इस गीत की धुन सन १९७४ में रिलीज़ सिंगल-डेमी रूज़
के से यू लव मी से मिलती है. इस बात को कम लोग ही
जानते थे.

एक संगीत प्रेमी-कार्तिक ने इसे सबसे पहले सार्वजनिक तौर
पर उजागर किया था-कॉपी वाले गीत. आज जो आप ढेर
सारे वीडियोज देख रहे हैं यू ट्यूब पर भिन्न भिन्न कलाकारों
द्वारा बनाये गए इनमें से अधिकाँश ने इसी साईट से जानकारी
जुटाई है. हमारे यहाँ किसी रेफरेंस और कर्टसी की प्रथा नहीं
है अतः जिसकी जो मर्जी वो धड़ल्ले से यहाँ वहां पर चिपका
रहा है.

ज्यादा बक बक से गाने का मजा किरकिरा हो जायेगा अतः
इसे सुन लेते हैं.



गीत के बोल:

ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ हो
महबूबा महबूबा
ऊ महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
मैं और तू
महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
मैं और तू

फूल बहारों से निकला
चाँद सितारों से निकला
फूल बहारों से निकला
चाँद सितारों से निकला
दिन डूबा
ऊ महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
मैं और तू

हुस्न इश्क़ की राहों में
बाहों में निगाहों में
हुस्न इश्क़ की राहों में
बाहों में निगाहों में
दिन डूबा

ऊ महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
गुलशन में गुल खिलते हैं
जब सहरा में मिलते हैं
हा मैं और तू

महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
………………………………………………
Mehbooba mehbooba-Solay 1975

Artists: Jala Agha, Helen

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