कौन दिशा में ले के चला-नदिया के पार १९८२
है. मेरे ख्याल से फिल्म नदिया के पार का ये गीत
भी ऐसा ही कुछ है. ज़बरदस्त हिट और निरंतर
बजते रहने वाला ये गीत आज भी आप सुन सकते
हैं कभी कभी. वैसे तो विलायती रंग ढंग वाले रेडियो
चैनल इसे कभी कभार बजा देते हैं एहसान करने
वाले अंदाज़ में.
ये फिल्म हिंदी सिनेमा इतिहास में मील का पत्थर
फिल्म है. बिना इसकी चर्चा के हिंदी फिल्म इतिहास
अपूर्ण सा रहेगा. बदलते युग में इस विषय पर फिल्म
बना के हिट करवा पाना एक असंभव और कठिन काम
था. राजश्री प्रोडक्शंस के कर्ता-धर्ता इसके लिए बधाई
के पात्र हैं. राजश्री की छबि साफ़-सुथरी पारिवारिक
फ़िल्में बनाने वालों की रही है. इस छबि से उन्हें ज़रूर
फायदा मिला था उस समय. फिल्म की कहानी सरल
है और एक अच्छे प्रवाह में चलती है जो इस फिल्म की
सबसे बड़ी खूबी है.
गीत के बोल:
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में
पहली बार हम निकले हैं घर से
किसी अनजाने के संग हो
अनजाने से पहचान बढ़ेगी तो
महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना
महक से तू कहीं बहक न जाना
न करना मोहे तंग हो
तंग करने का तोसे नाता है गुजरिया
हे, ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया,
कौन दिशा में
कितनी दूर अभी कितनी दूर है
ऐ चन्दन तोरा गांव हो
कितना अपना लगने लगे
जब कोई बुलाए ले के नाम हो
नाम न लें तो क्या कह के बुलाएँ
नाम न लें तो क्या कह के बुलाएँ
कैसे कराएँ काम हो
साथी मितवा या अनाडी कहो गोरिया
साथी मितवा या अनाडी कहो गोरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया,
कौन दिशा में
ऐ गूंजा उस दिन तेरी सखियाँ
करती थीं क्या बात हो
कहतीं थीं तोरे साथ चलन को तो
आ गए हम तोरे साथ हो
साथ अधूरा तब तक जब तक
साथ अधूरा तब तक जब तक
पूरे न हो फेरे सात हो ओ ओ ओ
अबहीं तो हमरी है बाली रे उमरिया
अबहीं तो हमरी है बाली रे उमरिया
ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये
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Kaun disha mein le ke-Nadiya ke paar 1982
Artists: Sachin, Sadhna Singh

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