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Jan 19, 2020

यार दगा दे गया-चोरों की बारात १९८०

गानों की वैराइटी की बात करें तो ८० के दशक में हमें
सबसे ज्यादा तरह तरह का सामान देखने को मिला.
इसी दशक में हमने सलमा आगा, गुलाम अली और
डिस्को संगीत को देख लिया. इस दशक की फ़िल्मी
कव्वालियां भी अलग अलग रंग वाली मिल गयीं.

किसी फिल्म का शीर्षक गीत कव्वाली हो ऐसा कम
देखा हमने. सन १९७७ की फिल्म हम किसी से कम
नहीं में भी शीर्षक गीत कव्वाली है. फिल्म ज़माने को
दिखाना है में भी शीर्षक गीत कव्वाली है.

सुनते हैं सन १९८० की फिल्म की भूली बिसरी कव्वाली
जो जीवन पर फिल्माई गयी है. धार्मिक फिल्मों में
नारद मुनि की भूमिकाएं निभाने वाले जीवन ने सामान्य
फिल्मों में अधिकतर विलन की भूमिकाएं निभाई हैं.

आनंद बक्षी के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.
इसे मन्ना डे, अनवर और जसपाल सिंह ने गाया है.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यार दगा दे गया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
तो दूर थी मंजिल बड़ी राह थी मुश्किल बड़ी
गिरते सँभलते रहे हम मगर चलते रहे
ये भरोसा था हमें
था हमें
इतना पता था हमें
था हमें
हम रहे जिंदा गर आज हो या कल मगर
अरे होगी मुलाक़ात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

वाडे सभी तोड़े के अपना शहर छोड़ के
वो बसा परदेस में एक नये भेस में
हमने भी छोड़ा वतन बाँध के सर पे कफ़न
वो नहीं या हम नहीं हम किसी से कम नहीं
हम किसी से कम नहीं
देखिये सुनिये जनाब क्या तबियत है खराब
किसलिए ये बेरुखी बात नहीं आप की
रे लोगों की है बात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हम पुरानी दोस्ती
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
जान देंगे साथ हम हमने खाई थी कसम
बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हाँ ये सितम हो किसलिए किसलिए
वो अकेला क्यूँ जिए क्यूँ जिए
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
आज का दिन खास है दूर थी अब पास है
हो मिलन की रात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया
…………………………………………….
Yaar daga de gaya-Choron ki baraat 1980

Artists: Jeevan, Ajit, Sudhir, Shatrughan Sinha

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Aug 21, 2019

आज की ताज़ा खबर-पत्थर १९८५

सन १९८५ की फिल्म पत्थर से एक गीत सुनते हैं जसपाल सिंह
की आवाज़ में. गीतकार सुदर्शन के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है 
राम लक्ष्मण ने.

गीत सामाजिक समस्या पर बना गीत है और इसमें वर्त्तमान हालत
का चित्रण है. आज भी ये गीत उतना ही प्रासंगिक है. जिस समाज
में नारी का सम्मान ना हो उस समाज की उन्नति और प्रगति किस
काम की.





गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ
जिंदा अखबार हूँ मैं ज़ुल्म का शिकार हूँ मैं
जिंदा अखबार हूँ मैं ज़ुल्म का शिकार हूँ मैं
एक बेबस सत्ताई अबला की पुकार उन मैं
ढूँढता है
ढूँढता है एक भाई बहन को डगर डगर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर

कोई पापी कुचल गया एक राखी को
कोई पापी कुचल गया एक राखी को
लिए सूनी कलाई एक भाई रोता है
सोचने जैसी बात है के आज दुनिया में
दिन दहाड़े बेबसों पे सितम होता है
इन हवाओं में
इन हवाओं में किसने ग्जोल दिया ज़हर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर

फीसे से औरत खिलौना बन गयी है दुनिया में
कोई भी उसकी आबरू से खेल जाता है
भूल जाता है आदमी उसका औरत से
माँ बहन बेटी के जैसा पवित्र नाता है

टूटे सपनों से
टूटे सपनों से ये रिश्ते कहीं जाए ना बिखर

आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर

भीड़ में कोई खो गया है ढूँढता कोई
शोर इतना है कि आवाज़ डूब जाती है
कोई भाई जो वादा अपना याद करता है
बहन की डोली निगाहों में उभर आती है
मेरे मालिक
मेरे मालिक गरीब की दुवाओं को दे असर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर
आज की ताज़ा खबर आज की ताज़ा खबर
................................................................
Aaj ki taaja khabar-Patthar 1985

Artist:

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Jul 8, 2019

श्याम तेरी बंसी पुकारे-गीत गाता चल १९७५

श्याम की बंसी कितनी मोहक और मधुर रही होगी वो तो द्वापर
युग के भाग्यशाली लोग ही सुन पाए. उसका जो विवरण मिलता
है उससे यही मालूम होता है कि उनसे बड़ा बांसुरी बजाने वाला
सृष्टि ने न देखा और न ही आगे देखने को मिलेगा.

सुनते हैं श्याम की बंसी के विवरण वाला एक गीत सन १९७५ की
फिल्म गीत गाता चल से. इसे जसपाल सिंह और आरती मुखर्जी
ने गाया है. गीत के बोल और संगीत रवींद्र जैन के हैं. फ़िल्मी भजन
यूँ तो लोकप्रिय हो ही जाते हैं मगर इसकी बात कुछ खास है. इसके
बोल और धुन दोनों मोहक हैं.



गीत के बोल:

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम

सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

हो जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम

सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

ओ कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन नहीं
कौन नहीं बसी की धुन का गुलाम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
………………………………………………………
Shyam teri bansi pukare-Geet gaata chal 1975

Artists: Sachin, Sarika

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Oct 18, 2018

दोहावली..बड़े बढ़ाई ना करें-अंखियों के झरोखों से १९७८

फिल्म अंखियों के झरोखों से का स्पेशल फीचर है इसकी
दोहावली. सालों से हिंदी फ़िल्में स्टेज कॉम्पिटिशन के नाम
पर शेर शायरी के मुकाबले दिखाती आ रही थी उससे अलग
जो सालों से नहीं दिखाया जा रहा था और जिसकी अधिकाँश
जनता प्रतीक्षा करती है उसे दिखलाने का शुभ कार्य किया
गया. इस बात के लिए राजश्री को साधुवाद.

इस गीत को जनता ने हाथों हाथ लिया और आज भी आपको
ये कहीं न कहीं बजता मिलेगा चाहे इसका कवर वर्ज़न ही
क्यूँ ना हो. तुलसीदास, कबीर और रहीम के दोहों व पदों पर
आधारित ये गीत अमृतवाणी ही है.

इसे जसपाल सिंह और हेमलता ने गाया है. संगीत रवीन्द्र जैन
का है.



गीत के बोल:

बड़े बड़ाई ना कर बड़े ना बोले बोल
बड़े बड़ाई ना कर बड़े ना बोले बोल
रहिमन हीरा कब कहै लाख टका मेरा मोल
रहीमा लाख टका मेरा बोल

जो बडेन को लघु कहें नहि रहीम घटि जाये
जो बडेन को लघु कहें नहि रहीम घटि जाये
गिरधर मुरलीधर कहे कछु दुःख मानत नाहि
रहीमा कछु दुःख मानत नाहि

ज्ञानी से कहिये कहा कहत कबीर लजाय
ज्ञानी से कहिये कहा कहत कबीर लजाय
अंधे आगे नाचते कला अकारत जाय
कबीरा कला अकारत जाय

ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोये
ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोये
औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय
कबीरा आपहु शीतल होय
…………………………………………………..
Dohavali-Ankhiyon ke jharokhon se 1978

Artists: Sachin, Ranjeeta

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Oct 10, 2017

गगन ये समझे चाँद-सावन को आने दो १९७९

सफलता प्राप्त करने के लिए उसके पीछे छिपी मेहनत किसी
को दिखाई नहीं देती. कितना पसीना बहा, कितने पापड बिले
ये सब अनजान रह जाता है. जो तस्वीर सामने दिखती है
वो चमकते दमकते सफल व्यक्तित्व की.

मेहनत और मेनिपुलेशन दो तरीके हैं ऊपर चढ़ने के. जिसके
जो तरीका समझ आ जाए और हाथ लग जाए. मेहनत वाले
रास्ते में रफ़्तार धीमी हो सकती है मगर धड़ाम से गिरने का
खतरा कम से कम होता है.

फिल्म का नायक कुछ सार्थक करने के उद्देश्य से शहर आता
है और यहाँ उसे हाथ रिक्शा चलने का काम मिल जाता है
जिस पर वो माल धुलाई करता है. काम करते हुए भी वो अपना
शौक-गाना को जिंदा रखता है. आगे चल के यही आवाज़ किसी
कद्रदान के कानों में पड़ेगी और उसकी किस्मत खुल जायेगी.

लखनऊ शहर की सड़कें और गलियां हैं इस गीत में.

गीत मदन भारती का लिखा हुआ है और इसे जसपाल सिंह ने
गाया है. संगीत राजकमल का है.



गीत के बोल:

आ हा हा आ आ आ आ हा हा आ आ आ
आ हा हा आ आ आ आ हा हा आ आ आ
आ हा हा आ आ आ आ हा हा आ आ आ

गगन ये समझे चाँद सुखी है
चंदा कहे सितारे
गगन ये समझे चाँद सुखी है
चंदा कहे सितारे
दरिया की लहरें ये समझे
हमसे सुखी किनारे
ओ साथी दुःख में ही सुख है छिपा रे
ओ साथी दुःख में ही सुख है छिपा रे

भैया रे साथी रे
भैया रे ओ साथी रे

दूर के पर्वत दूर ही रह कर लगते सबको सुहाने
पास अगर जा कर देखें तो पत्थर की चट्टानें
दूर के पर्वत दूर ही रह कर लगते सबको सुहाने
पास अगर जा कर देखें तो पत्थर की चट्टानें

कलियाँ समझे चमन सुखी है
चमन कहे रे बहारें
ओ साथी दुःख में ही सुख है छिपा रे
ओ साथी दुःख में ही सुख है छिपा रे
भैया रे साथी रे
भैया रे हो साथी रहो

हो ओ ओ ओ ओ ओ
हे राम हो हे रामा

रात अंधेरी हे रामा
रात अँधेरी सोचे मन में है दिन में उजियारा
दिन की गरमी सोच रही है है शीतल अंधियारा
ओ साथी है शीतल अंधियारा
रात अँधेरी सोचे मन में है दिन में उजियारा
दिन की गरमी सोच रही है है शीतल अंधियारा
ओ साथी है शीतल अंधियारा

पतझड़ समझे सुखी है सावन
सावन कहे अंगारे
ओ साथी दुःख मे ही सुख है छिपा रे ओ साथी
दुःख मे ही सुख है छिपा रे
…………………………………………………………………
Gagan ye samjhe chand sukhi-Sawan ko aane do 1979

Artist: Arun Govil

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Apr 22, 2017

धरती मेरी माता-गीत गाता चल १९७५

आज अर्थ डे है अर्थात धरती दिवस. इस अवसर पर सुनते
हैं फिल्म गीत गाता चल से जसपाल सिंह का गाया एक गीत.
बोल और संगीत दोनों रवींद्र जैन के हैं.

सचिन और सारिका अभिनीत इस फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय हैं और आज भी सुनाई देते हैं. सचिन का पूरा
नाम सचिन पिलगांवकर है और सारिका का पूरा नाम
सारिका ठाकुर है. कमाल हासन से शादी के बाद उनका
उपनाम अवश्य ही बदला होगा.



गीत के बोल:

धरती मेरी माता पिता आसमान
हो धरती मेरी माता पिता आसमान
मुझको तो अपना सा लागे सारा जहान
धरती मेरी माता पिता आसमान

ऊंचे ऊंचे पर्वतों की बादलों से होड
ऊंचे ऊंचे पर्वतों की बादलों से होड
नदिया बहे रे सारे बंधनों को तोड़
फूलों की हंसी में बसी है मेरी जान
मुझको तो अपना सा लागे सारा जहान
धरती मेरी माता पिता आसमान

यूँ तो मेरी अंखियों ने देखे कई रंग
यूँ तो मेरी अंखियों ने देखे कई रंग
मन को ना बाँधा मैंने किसी के भी संग
जल के ऊपर तैरू मैं हंस के समान
मुझको तो अपना सा लागे सारा जहान
धरती मेरी माता पिता आसमान
मुझको तो अपना सा लागे सारा जहान
धरती मेरी माता पिता आसमान
.........................................................
Dharti meri mata pita aasman-Geet gaata chal 1975

Artist: Sachin

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Mar 1, 2013

कौन दिशा में ले के चला-नदिया के पार १९८२

कोई गीत किसी फिल्म का सिग्नेचर गीत बन जाता
है. मेरे ख्याल से फिल्म नदिया के पार का ये गीत
भी ऐसा ही कुछ है. ज़बरदस्त हिट और निरंतर
बजते रहने वाला ये गीत आज भी आप सुन सकते
हैं कभी कभी. वैसे तो विलायती रंग ढंग वाले रेडियो
चैनल इसे कभी कभार बजा देते हैं एहसान करने
वाले अंदाज़ में.

ये फिल्म हिंदी सिनेमा इतिहास में मील का पत्थर
फिल्म है. बिना इसकी चर्चा के हिंदी फिल्म इतिहास
अपूर्ण सा रहेगा. बदलते युग में इस विषय पर फिल्म
बना के हिट करवा पाना एक असंभव और कठिन काम
था. राजश्री प्रोडक्शंस के कर्ता-धर्ता इसके लिए बधाई
के पात्र हैं. राजश्री की छबि साफ़-सुथरी पारिवारिक
फ़िल्में बनाने वालों की रही है. इस छबि से उन्हें ज़रूर
फायदा मिला था उस समय. फिल्म की कहानी सरल
है और एक अच्छे प्रवाह में चलती है जो इस फिल्म की
सबसे बड़ी खूबी है.




गीत के बोल:


कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया
कौन दिशा में

पहली बार हम निकले हैं घर से
किसी अनजाने के संग हो
अनजाने से पहचान बढ़ेगी तो
महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना
महक से तू कहीं बहक न जाना
न करना मोहे तंग हो
तंग करने का तोसे नाता है गुजरिया
हे, ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया,
कौन दिशा में

कितनी दूर अभी कितनी दूर है
ऐ चन्दन तोरा गांव हो
कितना अपना लगने लगे
जब कोई बुलाए ले के नाम हो
नाम न लें तो क्या कह के बुलाएँ
नाम न लें तो क्या कह के बुलाएँ
कैसे कराएँ काम हो
साथी मितवा या अनाडी कहो गोरिया

साथी मितवा या अनाडी कहो गोरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया,
कौन दिशा में

ऐ गूंजा उस दिन तेरी सखियाँ
करती थीं क्या बात हो
कहतीं थीं तोरे साथ चलन को तो
आ गए हम तोरे साथ हो
साथ अधूरा तब तक जब तक
साथ अधूरा तब तक जब तक
पूरे न हो फेरे सात हो ओ ओ ओ
अबहीं तो हमरी है बाली रे उमरिया
अबहीं तो हमरी है बाली रे उमरिया
ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर दिन जायेगा गुजर
गाडी हांकन दे, हांकन दे
मन भरमाये नैना बांधे ये डगरिया
मन भरमाये
.........................................
Kaun disha mein le ke-Nadiya ke paar 1982

Artists: Sachin, Sadhna Singh

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Mar 1, 2010

जोगी जी वाह जोगी जी-नदिया के पार १९८२

'ठुमका' शब्द से कुछ विशेष गीत याद आते हैं। होली के अवसर पर
ठुमकेदार गीत देखने का आनंद ही कुछ और होता है। विजया इत्यादि
के सेवन उपरान्त चाल ढाल सब रंगीली हो जाया करती है जनता की।
आइये नदिया के पार चलें और देखें होली के अवसर पर क्या हो रहा
है। पुरुष भेस बदल कर नाच रहा है ढोलक की थाप पर।

सचिन और साधना सिंह होली के अवसर पर गाँव वालों के साथ नाच
रहे हैं। गीत सुन कर ऐसा आभास होता है जैसे कोई जोगी नाम के
शख्स के लिए हुंकार भरी जा रही हो । फिल्म नदिया के पार राजश्री
प्रोडक्शंस के एक बड़ी हिट फिल्म थी और इसके गीत इतने बजे कि
लोगों के कैसेट, विनायिल रिकॉर्ड बज बज के घिस गए। रवीन्द्र जैन
ने गीत लिखा और इसकी धुन भी बनाई है।

जसपाल सिंह और हेमलता की आवाज़ के साथ इसमें चन्द्राणी मुखर्जी
और सुशील कुमार की आवाजें हैं जो कि अक्सर ३-४ गायकों वाले गानों
में ही गाते पाए जाते थे। फिल्म सन १९८२ में आई थी और इसने जगह
जगह सिल्वर जुबली मनाने का रिकॉर्ड कायम किया था।



गीत के बोल

जोगी जी धीरे धीरे,
जोगी जी वाह जोगी जी
नदी के तीरे तीरे,
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा
कोई ढूंढें मोतिया,
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जोगी जी ढूंढ के ला दो,
जोगी जी वाह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो,
जोगी जी वाह जोगी जी

फागुन आयो ओ मस्ती लायो
भर के मारे पिचकारी
सा रा रा रा रा
रंग ले के, ओ जंग ले के
गावे जोगी रातें जागी सारी
आ रा रा रा रा रा
जोगी रा
अर रा रा रा रा
जोगी रा
आर रा रा रा रा रा
जोगी जी नींद ना आवे,
जोगी जी वाह जोगी जी
सजन की याद सतावे,
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दावा जड़ी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खरी,
जोगी जी वह जोगी जी

सारे गाँव की गोरियां
रंग गयीं हमपे डार
पर जिसके रंग हम रंगे
छुप गयी वो गुलनार
छुप गयी वो गुलनार
जोगी जी सूना है संसार
छुप गयी वो गुलनार
जोगी जी सूना है संसार
बिना उसे रंग लगाये,
जोगी जी वह जोगी जी
ये फागुन लौट ना जाये,
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा कोई ढूंढें मोतिया
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जोगी जी ढूंढ के ला दो,
जोगी जी वह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो,
जोगी जी वह जोगी जी

छुपती डोले राधिका
ढूंढ सके घनश्याम
कान्हा बोले लाज का
आज के दिन क्या काम
लाज का है क्या काम
के होली खेले सारा गाँव
लाज का है क्या काम
के होली खेले सारा गाँव
रंगी है कब से राधा
जोगी जी वाह जोगी जी
मिलन में फिर क्यूँ बाधा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दावा जदी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खारी,
जोगी जी वाह जोगी जी

हमरी जोगन का पता
उसके गहरे नैन
नैनन से घायल करे
बैनन से बेचैन
देखन को वो नैन जोगी जी
मनवा है बेचैन
देखन को वो नैन जोगी जी
मनवा है बेचैन
लड़कपन जाने को है
जोगी जी वह जोगी जी
जवानी आने को है
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा कोई ढूंढें मोतिया
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जो तेरा प्रेम है सच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगनिया मिलेगी बच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी

जंतर मंतर टोटका
घट में आ ताबीज़
जी को बस में कर सके
दे दो ऐसी चीज़
दे दो ऐसी चीज़
जोगी जी साजन जाए रीझ
दे दो ऐसी चीज़
जोगी जी साजन जाए रीझ
हमारे पीछे पीछे
जोगी जी वाह जोगी जी
चले वो आँखे मींचे
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दवा जदी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी धीरे धीरे
जोगी जी वाह जोगी जी
नदी के तीरे तीरे
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी ढूंढ के ला दो
जोगी जी वाह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो
जोगी जी वाह जोगी जी
जो तेरा प्रेम है सच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगनिया मिलेगी बच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
............................................................
Jogi ji wah jogi ji-Nadiya ke paar 1982

Artists: Sachin, Sadhana Singh,

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Jan 25, 2010

तुम्हें गीतों में...सावन को आने दो-शीर्षक गीत १९७९

ये फिल्म का शीर्षक गीत है जिसे जसपाल सिंह ने गाया है।
मस्त तेज़ गति वाला गीत है ये और गीत में मोर का नाच भी
देखने को मिल जायेगा आपको ।

नायिका को गीतों में ढालने के लिए सावन कैटेलिस्ट का
काम करेगा. गीत के बोल अच्छे हैं और इसे गौहर कानपुरी
ने लिखा है. गौहर ने बप्पी के लिए भी काफ़ी अच्छे गीत
लिखे हैं.

फिल्म: सावन को आने दो
वर्ष: १९७९
गीतकार: गौहर कानपुरी
संगीतकार: राजकमल
गायक: जसपाल सिंह, कल्याणी मित्रा
कलाकार: अरुण गोविल, ज़रीना वहाब



गीत के बोल:

तुम्हे गीतों में ढालूंगा ,
आ, आ, आ, आ,हा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो

तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो

हो, ओ ओ ओ ओ हो, ओ ओ ओ ओ
हो, ओ ओ ओ ओ हो, ओ ओ ओ ओ

झूलों की होंगे घटायें
फूलों की होंगे बहारें
झूलों की होंगे घटायें
फूलों की होंगे बहारें
सरगम की लय पे भँवरे
कलियों का घूंघट उतारें
सपने जगा लूँगा
तुमको तुम्ही ही से मैं
एक दिन चुरा लूँगा
कब ?

सावन को आने दो
सावन को आने दो

देखो ये शान हमारी
हम हैं पवन के पुजारी
देखो ये शान हमारी
हम हैं पवन के पुजारी
धरती गगन के मिलन की
आरती हमने उतारी
अब मैं ना मानूंगा
इस दिल के दर्पण में
तुमको सजा लूँगा
कब ?

सावन को आने दो
सावन को आने दो

बादल से रस रंग बरसे
प्यासा मान कहे को तरसे
बादल से रस रंग बरसे
प्यासा मान कहे को तरसे
कहती है बरखा दीवानी
गोरी सिमट नहीं डर से
अपना बना लूँगा
दिल में बसा लूँगा
सीने से लगा लूँगा
कब ?

सावन को आने दो
सावन को आने दो

तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो
सावन को आने दो
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Sawan ko aane do-Title song-1979

Artists: Arun Govil, Zarina Wahab

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