महलों ने छीन लिया-ज़बक १९६१
ने निभाया है. महलों की तारीफ की गयी है गीत में जिस पर बचपन
का प्यार छीन लेने का इलज़ाम लगाया जा रहा है नायक द्वारा और
नायिका अपनी सफाई दे रही है.
नायिका हैं श्यामा और इनके किरदार का नाम है ज़ैनब. गीत लिखा
है प्रेम धवन ने और संगीत चित्रगुप्त द्वारा दिया गया है. इसे गाया है
मुकेश और लता ने..
होमी वाडिया ने कई पौराणिक, ऐतिहासिक फिल्मों का निर्माण
किया है. इस फिल्म का कथानक किस युग का है इसका अंदाजा
लगाना कठिन है. कथानक रोचक है और जिन्होंने फिल्म नहीं
देखी है एक बार अवश्य देखें. काफी उथल पुथल से भरी कहानी
है फिल्म की.
गीत के बोल:
मुझे मुबारक़ पुरानी यादें तुझे मुबारक़ नया फ़साना
जो हो सके तो न याद करना जो याद आऊँ तो भूल जाना
महलों ने छीन लिया बचपन का प्यार मेरा
महलों ने छीन लिया बचपन का प्यार मेरा
मुझको इल्ज़ाम न दो कर लो ऐतबार मेरा
मुझको इल्ज़ाम न दो कर लो ऐतबार मेरा
तुम हो फ़लक़ पर मैं हूँ ज़मीं पे तुमको ख़बर क्या हमारी
तुम हो फ़लक़ पर मैं हूँ ज़मीं पे तुमको ख़बर क्या हमारी
मानो न मानो महलों में रह के मैं आज भी हूँ तुम्हारी
मुझको इल्ज़ाम न दो
ले चल हमें भी साथ अपने कहती हैं दिल की सदाएं
मुझसे जुदा है मंज़िल तुम्हारी तुमसे जुदा हैं मेरी राहें
महलों ने छीन लिया
उलझूँगा ना मैं दामन से तेरे राहों में एक खार बन के
उलझूँगा ना मैं दामन से तेरे राहों में एक खार बन के
जैसे रहे हो वैसे रहोगे दिल में मेरे प्यार बनके
मुझको इल्ज़ाम न दो
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Mehlon ne chheen liya-Zabak 1961
Artists: Mahipal, Shyama

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