देखो रूठा ना करो–तेरे घर के सामने १९६३
एक समय था जब ये वाकई चीनी अंदाज़ में बनाये
जाते थे. उस समय नूडल्स का रंग सफ़ेद ही होता था
और उसमें डलने वाली सब्जियों का रंग भी नज़र आता
था. शिमला मिर्च भी हरी नज़र आती थी. अब जो बनता
है ठेले वगैरह पर, उसमें काला और पीला रंग का मिश्रण
नज़र आता है. सोयाबीन की बड़ी भी कहीं-कहीं प्रयोग में
आती है. सिरका और काला रंग इतना होता है कि नूडल्स
जली हुई आलू टिक्की के रिश्तेदार नज़र आते हैं.
कुछ कुछ यही हाल आज के फ़िल्मी संगीत का भी है. कौन
से जेनर का संगीत है अंदाज़ा लगाना टेढ़ी खीर हो जाता है.
सुनते हैं सचिन देव बर्मन के संगीत से सजा एक युगल गीत
फिल्म तेरे घर के सामने से. रफ़ी और लता के गाये इस गीत
को फिल्माया गया है देव आनंद और नूतन पर.
गीत के बोल:
देखो रूठा ना करो बात नज़रों की सुनो
हम न बोलेंगे कभी तुम सताया ना करो
देखो रूठा ना करो
चेहरा तो लाल हुआ क्या क्या हाल हुआ
इस अदा पर तेरी मैं तो पागल हुआ
तुम बिगड़ने जो लगो और भी हंसीं लगो
हम न बोलेंगे कभी तुम सताया ना करो
देखो रूठा ना करो
जान पर मेरी बनी आपकी ठहरी हंसी
हाय मैं जान गई प्यार की चिकनागरी
दिल जलाने के लिये ठंडी आहें न भरो
देखो रूठा ना करो
तेरी खुशबू ने मेरे होश भी छीन लिये
है खुशी आज हमें तेरे पहलू में गिरे
दिल की धड़कन पे ज़रा फूल सा हाथ रखो
हम न बोलेंगे कभी तुम सताया ना करो
क्या कहेगा ये समां इन राहों का धुँआ
लाज आए मुझे मुझको लाए हो कहाँ
हम तुम्हें मान गए तुम बड़े वो हो हटो
देखो रूठा ना करो
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Dekho rootha na karo-Tere ghar ke samne 1963
Artists: Dev Anand, Nutan

1 comments:
sahi baat
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