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Jul 22, 2020

एक आना बूट पॉलिश-तेल मालिश बूट पॉलिश १९६१

आज गायक मुकेश चंद्र माथुर का जन्मदिन है. इस
अवसर पर सुनेंगे एक गीत चित्रगुप्त के संगीत वाला.
गीतकार प्रेम धवन हैं और फिल्म का नाम रोचक है
तेल मालिश बूट पॉलिश.

परदे पर गीत शेख मुख्तार के ऊपर फिल्माया गया है.
यूनीक सोंग है जिसमें तेल मालिश और बूट पॉलिश
एक साथ की जा रही है. पुराने ज़माने का टू इन वन
ऑफर.




गीत के बोल:

तेल मालिश बूट पॉलिश
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
ना तो किसी की चोरी
ना कोई सीना जोरी
हाथों से रोटी जो कमाई है तो खाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश

बंगले में रहते नहीं रहते हैं चाल में
बंगले में रहते नहीं रहते हैं चाल में
खुश ही रहे हैं यारों रहें जिस हाल में
फ़ाके भी काटे पर मांगी नहीं पाई है

एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश

धंधा है ना रेस का ना सट्टे का व्यापार है
धंधा है ना रेस का ना सट्टे का व्यापार है
माँगा कभी चन्दा है ना खाया ही उधार है
अपनी दूकान फुटपाथ पे लगाई है

एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
तेल मालिश बूट पॉलिश

लाखों की तमन्ना है न महलों का ख़याल है
लाखों की तमन्ना है न महलों का ख़याल है
सुबह शाम रोज़ी मिले इतना सवाल है
तो भी न जीने दे ये दुनिया दुहाई है

एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
गाढ़े पसीने की ये अपनी कमाई है
एक आना बूट पॉलिश
दो आना तेल मालिश
…………………………………………………..
Ek aana boot polish-Tel malish boot polish 1961

Artists: Sheikh Mukhtar, kids

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Jan 26, 2020

सारी दुनिया से पूछा-मिलन १९५८

आपको कुछ दिन पहले एक गीत सुनवाया था जिसमें गज़ब
की हाय है. वो गीत है फिल्म नौजवान से जिसे लता ने गाया
है और नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है.

एक बार फिर से वही हाय, इस गीत में २-३ बार है, गीतकार
प्रेम धवन हैं, संगीतकार हंसराज बहल. इसे भी लता ने गाया
है. मिलन के गीत-हाय जिया रोये की छाया में लता के ही गाये
इस फिल्म के २ गीत कहीं खो से गए. प्रस्तुत गीत तो आप कई
बार रेडुआ पर सुन चुके होंगे.

नायिका एक छोटे दुधमुंहे बच्चे को ले कर नायक की तलाश में
भटकते हुए ये गीत गा रही है.





गीत के बोल:

सारी दुनिया से पूछा मिला ना निशाँ
चुप रही ये ज़मीं चुप रहा आसमाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ

सारी दुनिया से पूछा मिला ना निशाँ
चुप रही ये ज़मीं चुप रहा आसमाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ हाय
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँड़ूँ कहाँ

जबसे तुम दूर हो दूर है ज़िन्दगी
जबसे तुम दूर हो दूर है ज़िन्दगी
फिर भी जीने पे मजबूर है ज़िन्दगी
रह गई बन के मैं
रह गई बन के मैं ग़म भरी दास्ताँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ

किसके दर पे न हम ग़म के मारे गये
किसके दर पे न हम ग़म के मारे गये
सारे आलम में तुझको पुकारे गये
ना तो मंज़िल मिली
ना तो मंज़िल मिली ना मिला कारवाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ हाय
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ

तिनके चुन चुन के हमने बसाया था घर
तिनके चुन चुन के हमने बसाया था घर
कितने सपनों से हमने सजाया था घर
ना वो तिनके रहे
ना वो तिनके रहे ना रहा आशियाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ

सारी दुनिया से पूछा मिला ना निशाँ
चुप रही ये ज़मीं चुप रहा आसमाँ
तुझको ढूँढ़ूँ तो ढूँढ़ूँ कहाँ
तुझको ढूँढ़ूँ ओ सजना कहाँ
…………………………………………….
Saari duniya se poochha-Milan 1958

Artist: Nalini Jaywant

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Dec 27, 2019

सोच समझ ले ओ परवाने-अपना घर १९६०

ये जो फ़िल्में हैं जिनके नाम में घर शब्द आता है
उसे कहीं कहीं मैंने ghar की जगह ghur लिखा देखा.
हिंदी में घुर पढ़ने में आता. घर घर की कहानी बन
जाती घुर घुर की कहानी.

मधुमती, लक्ष्मी छाया, फरयाल इत्यादि के अलावा भी
कई ऐसी सहायक अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने अपने होने
का आभास दिया फिल्म उद्योग को. प्रस्तुत गीत कम्मो
नाम की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.

गीत प्रेम धवन का है और इसकी धुन तैयार की है
रवि ने. गायिका को आप पहचान ही गए होंगे.



गीत के बोल:

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
मै इतनी तो नादान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
कौन सा ऐसा दिल वाला है
कौन सा दिल वाला है जो मुझ पर कुर्बान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गयी
मै इतनी तो नादाँ नहीं
सोच समझे ओ परवाने
जल जाना आसान नाही

इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया
इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया

ये भी अदायें ना जाने तू
ये भी अदायें ना जाने तू इतना तो अनजान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
.................................................................
Soch samajh le o parwane-Apna Ghar 1960

Artists: Kammo, Premnath

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Dec 26, 2019

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा-अपना घर १९६०

कहते हैं जो अपना स्वयं सम्मान नहीं करता उसका
सम्मान दूसरे भी नहीं करते. कुछ वैसे ही शरीर की
इन्द्रियों का भी उचित सम्मान आवश्यक है. ये तो
व्यक्ति पे स्वयं निर्भर है कि वो इनका उपयोग किस
प्रकार से और कितना करे..

शरीर की प्रमुख इन्द्रियों में आँखों को सबसे उच्च
स्थान दिया गया है. ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्रमा
को सीधे आँखों से ना देखें. धार्मिक दृष्टि से देखें या
वैज्ञानिक दृष्टि से, दोनों ही मामले से ये बात सटीक
है.

सुनते हैं फिल्म अपना घर से अगला गीत जिसे
मोहम्मद रफ़ी और आरती मुखर्जी ने गाया है.

प्रेम धवन की रचना है और रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि
का संगीत.




गीत के बोल:

कोई न हो इस जग में दाता
आँखों से मजबूर
दुनिया में रह कर भी हम है
इस दुनिया से दूर

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
हम है जहाँ पर उस दुनिया में
कभी न हुआ सवेरा
सूरज चाँद सितारे सबको
सूरज चाँद सितारे सबको
देखा हमने काला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
फिरते है अपने कंधे पर
अपनी लाश उठाये
जीवन भी इक बोझ बना है
जीवन भी इक बोझ बना है
कब तक जाये संभाला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कब तक यूँ ही सहते जायें
दुनिया के तानों को

नूर तो छीना दाता बहरा भी कर दे कानों को
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला तेरा खेल निराला
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
…………………………………………….
Aankhen badi hain nemat-Apna Ghar 1960

Artists:

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Dec 24, 2019

कैसे भीगे भीगे-अपना घर १९६०

आइये सुनें एक साइकिल सोंग. साईकिल सोंग वो होता
है जिसमें साईकिल गाती है. श्रेणी बनाने वालों की साइटों
से हमने ऐसा ही समझा, क्या किया जाए. वो तो हमें
भी समझ आ रहा है गाना किसने गाया मगर जब श्रेणी
बनाने के तरीके देखते हैं तो सर चकराता है. किसी गीत
में नायक ने सीधा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग
श्रेणी, उल्टा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग श्रेणी.

नायक नायिका साइकिल पर चले जा रहे हैं. किसी ज़माने
में साईकिल भी स्टेटस सिम्बल हुआ करती थी. प्रीति सागर
के पिताजी मोती सागर को भी किसी ज़माने में अभिनय
का शौक हुआ करता था. मल्हार, मक्खीचूस, बर्मा रोड,
छोटी छोटी बातें और अपना घर उनके अभिनय वाली कुछ
उल्लेखनीय फ़िल्में हैं.

सुनते हैं सुमन कल्यानपुर और रफ़ी का गाया गीत जिसे
लिखा है प्रेम धवन ने और इसकी धुन रवि ने बनाई है.
गीत के अंतरे से आपको अनाड़ी फिल्म के गीत का
अंतरा याद आएगा-वो चाँद खिला वो तारे हँसे.



गीत के बोल:

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटे
अपनी पलकों से उठा लूँ
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटें
अपनी पलकों से उठा लूँ
तू मेरा प्यार मेरी बहार
मेरा सिंगार सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
सारे जग को छोड़
लिया तुझ से जोड़
जीवन ये मैंने अपना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
कहो दिल की बात
दिन हो या रात
रहूँ तेरे साथ सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………..
Kaise bheege bheege-Apna ghar 1960

Artists: Moti Sagar, Nanda

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Nov 19, 2019

लूटा है ज़माने ने-दोराहा १९५२

बहुत दिनों बाद कोई फरमाईश आई है अतः हम आपको
एक गीत उसी फिल्म से सुनवायेंगे जिससे कल एक सुनवाया
था.

अनिल बिश्वास को हिंदी फिल्म संगीत जगत में पितामह
का दर्ज़ा हासिल है. उन्होंने हिंदी गाने के फॉर्मेट और उसकी
जमावट पे जो काम किया उसे काफी संगीतकारों ने अपनाया
और इसका फायदा ५० के दशक में साफ़ नज़र आने लगा.

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ एक बढ़िया गीत
फिल्म दोराहा से. प्रेम धवन की रचना है. तीनों अंतरे अलग
अलग तरीके से गाये गए हैं. ये करिश्मा आपको अनिल बिश्वास
के संगीत में खूब मिलेगा.




गीत के बोल:

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
इक बार हँसाया था
इक बार हँसाया था सौ बार रुलाया है
लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है

दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
ये दुनिया भी देखी है
ये दुनिया भी देखी है जो धोखा भी खाया है

इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
कब दीप जलाया था
कब दीप जलाया था कब दीप बुझाया है

ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
उमडे हुये अश्क़ों को
उमडे हुये अश्क़ों को पलकों में छुपाया है

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
…………………………………………………….
Loota hai zamane ne-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Nov 18, 2019

घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की-दोराहा १९५२

घड़ियों का ज़माना बीत चुका. मेरा आशय हाथ-घड़ियों से
है. मोबाइल ने इनकी उपियोगिता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया
है. किसी ज़माने में ये फैशन का सामान भी हुआ करती थीं.
पहनने को तो आज भी पब्लिक पहनती है मगर आबादी
का छोटा हिस्सा.

घंटे-घड़ियाल हिट्स के अंतर्गत हमने आपको अभी तक ५-६
गीत सुनवा दिए हैं. एक और सुन लेते हैं जो बेचारा सुने
जाने को बेताब है.

गीत है दोराहा फिल्म से जिसे प्रेम धवन ने लिखा है और
अनिल बिश्वास ने संगीत से संवारा. इसे लता मंगेशकर ने
गाया है



गीत के बोल:


घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की

वो भीगी भीगी राह
वो दिल से नज़र की बात
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की

तुमसे तो हर तरफ थे गुल्चां खिले हुए
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की

दुनिया की कुछ खबर है ना अपना ही होश है
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
………………………………………………….
Ghadiyan gini hain maine-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Sep 4, 2019

सुंदरी ओ सुंदरी-लाजवाब १९५०

फिल्म लाजवाब का ये लाजवाब गीत इतना लाजवाब है कि
ये भविष्य की एक फिल्म के गीत-मनचली ओ मनचली की
याद दिला देता है. है न जादू. इसमें महिला और पुरुष कोरस
की पंक्तियां ओवरलैप करती हैं जो एक तरीके का अनूठापन है.

अनिल बिश्वास, बीनापानी मुखर्जी और लता मंगेशकर संग
ढेर सारे कलाकारों द्वारा गाया गया ये गीत सोहन और रेहना
अभिनीत फिल्म से है. इस फिल्म में प्रस्तुत गीत के लेखक
प्रेम धवन ने भी काम किया है. संगीतकार हैं अनिल बिश्वास.
फिल्म के अन्य गीत नाचे रे गोरी डिंगू में संगीतकार की
आवाज़ अलग सी लगती है. लगता है ये गुण भी सी रामचंद्र
ने अपने गुरु से ही ग्रहण किया था.




गीत के बोल:

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी
दो दिनों की जिंदगी में क्यूँ कमाए गीत
दो दिनों की जिंदगी में क्यूँ कमाए गीत
मारे जा मारे जा गोरी
मारे जा मारे जा गोरी  नैननवा के तीर तीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री
सुंदरी ओ सुंदरी हाय दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
काली काली जुल्फें तेरी गोरे गोरे गाल
ओ गोरी
गोरे गोरे गाल
ओ छोरी
गोरे गोरे गाल
ठुमक ठुमक चाले छोरी मोरनी की चाल
छोरी मोरनी की चाल होए
ठुमक ठुमक चाले छोरी मोरनी की चाल
छोरी मोरनी की चाल
होये होये होये होये होये होये होये होये

झूठे तेरे वादे जा रे झूठे तेरे गीत
जा रे झूठे तेरे गीत
हमको नहीं भाये तेरी प्रीत की ये रीत
तेरी प्रीत की ये रीत
जब तू ही मुंह फेर ले तो
हो छोरी हो गोरी
जब तू ही मुंह फेर ले तो कैसे धारूं धीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टन टना टन माडल बाजे
ढोल बाजे ढमा ढम ढोल बाजे
जिया बोले धक धक जिया बोले धक धक
हो ओ ओ ओ ओ
दो दिनों की जिंदगी में दिल लगाये कौन
हाँ दिल लगाये कौन
प्रेम की अग्नि में भला जी जलाये कौन
भला जी जलाये कौन
फिर नैन मिला के काहे डारी
हो गोरी हो छोरी
फिर नैन मिला के काहे डारी प्यार की ज़ंजीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
सुंदरी
...........................................................
Sundari o sundari-Lajawab 1950

Artist:

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Sep 1, 2018

सुन रे सजन....नरम करेजवा-आरजू १९५०

गीत याद आने की कुछ अजीब वजहें भी होती हैं.
किसी गीत में नरम शब्द होता है तो अमोल पालेकर
की फिल्म नरम गरम याद आ जाती है और याद
आती है नरम भिन्डी.

गीत में नरम करेजवा की बात हो रही है. वो डोलता
भी है. कमजोर है, नाजुक है तो हिलेगा डुलेगा तो सही.
डोलना शब्द एक नियमित लय में कोई चीज़ हिलती
है उसके लिए प्रयुक्त होता है. जैसे पेंडुलम डोलता है.
थाली में बैंगन लुडकता है. नरम करेजवा क्या यहाँ
तो पूरा शरीर डोल रहा है और नायिका के गायकी से
आन्दोलित नायक की बांसुरी भी लय में आ गयी. बस
ढोलकिये के झाडी में से प्रकट होने का इंतज़ार है.

प्रेम धवन की लिखी रचना सुनते हैं लता मंगेशकर की
मधुर आवाज़ में जिसे संगीतबद्ध किया है अनिल बिश्वास
ने.



गीत के बोल:

सुन रे सजन सुन सुन मन की बतिया रे
नैनों को भाय गयली तोरी सुरतिया
आ आ आ आ आ आ आ आ

मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई प्यार की बोली बोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

छुप छुप के कोई आता है
और प्रेम की बंसी बजाता है
और प्रेम की बंसी बजाता है
 नस नस में अमृत घोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
नस नस में अमृत घोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

तन मन की सुध बुध खो बैठी
मैं आज किसी की हो बैठी
मैं आज किसी की हो बैठी
कोई नैनन से दिल तोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई नैनन से दिल तोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

मोहे अँखियों ने बदनाम किया
मोहे अँखियों ने बदनाम किया
मेरी प्रीत का चर्चा आम किया
मेरी प्रीत का चर्चा आम किया
कोई लाज का घूँघट खोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई लाज का घूँघट खोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

कोई प्यार की बोली बोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
…………………………………………………
Sun re sajan..naram karejwa-Arzoo 1950

Artist: Kamini Kaushal

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Jul 25, 2018

उन्हें खो कर...वो और भी-आरज़ू १९५०

फिल्म का नाम अगर कद्दू-लौकी हो तो शीर्षक गीत
में ये नाम ज़रूर मिलेंगे. सन १९५० की फिल्म आरज़ू
के शीर्षक गीत हम आज आपको सुनवा रहे हैं. शुरू की
दो पंक्तियों में फिल्म का नाम आया है. उसके बाद इसे
आप ढूंढते रह जायेंगे.

गीत मजरूह का है और संगीत अनिल बिश्वास का. इस
फिल्म में लता के ढेर सारे गाने हैं. कभी कभी ऐसा
लगता है मानो संगीतकार को यकीन नहीं के गायक
गानों के लिए बाद में स्टूडियो आने वाला हो, जितने गाने
गवाना है इकट्ठे गवा लो.




गीत के बोल:

उन्हें खो कर उन्हीं की आरज़ू है किसलिये दिल को
है कौन ऐसा जो अब आसान कर दे मेरी मुश्किल को

उन्हें हम जो दिल से भुलाने लगे
उन्हें हम जो दिल से भुलाने लगे
वो कुछ और भी याद आने लगे
वो कुछ और भी याद

न पूछो न पूछो हमें क्या हुआ
न पूछो न पूछो हमें क्या हुआ
लगी ठेस आँसू बहाने लगे
लगी ठेस आँसू बहाने लगे
वो कुछ और भी याद

जिये हाय मर मर के हम इस तरह
जिये हाय मर मर के हम इस तरह
चले ना और डगमगाने लगे
चले ना और डगमगाने लगे
वो कुछ और भी याद

ज़माना हुआ जिनको बीते वो दिन
ज़माना हुआ जिनको बीते वो दिन
घटा बन के आँखों में छाने लगे
घटा बन के आँखों में छाने लगे
वो कुछ और भी याद आने लगे
वो कुछ और भी याद
……………………………………………..
Wo kuchh aur yaad-Arzoo 1950

Artist: Kamini Kaushal

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Jul 18, 2018

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी-अपना घर १९६०

गीता दत्त का कोई गीत सुने काफी दिन हो गए. आज सुनते हैं
एक युगल गीत मुकेश और गीता दत्त का गाया हुआ. सन १९६०
की फिल्म अपना घर के लिए इसे लिखा प्रेम धवन ने और इसकी
धुन तैयार की संगीतकार रवि ने.

फिल्म शबनम के गीत ‘किस्मत में बिछडना था’ और बावरे नैन के
गीत ‘ख्यालों में किसी के’ काफी लोकप्रिय गीत हैं जहाँ तक मुकेश
और गीता दत्त के गाये युगल गीतों का सवाल है. इन दोनों के गाये
युगल गीत लगभग १५-२० की संख्या में हैं. प्रस्तुत गीत भी लोकप्रिय
है जिसे आप लंबे समय तक सुन सकते हैं.



गीत के बोल:

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
अपने ही दिल से पूछ लो किसका हो प्यार तुम
तुम से ही मेरी ज़िंदगी

गाती हुई हवाओं में तेरा ही गीत है
तेरा ही गीत है
साजन मेरे निगाहों में तेरी ही प्रीत है
तेरी ही प्रीत है
चंदा का रूप चाँदनी मेरा श्रृंगार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

ये मुस्कुराता आसमान ये झूमती ज़मीं
ये झूमती ज़मीं
मुझको ज़रा संभालना खो जाऊँ ना कहीं
खो जाऊँ ना कहीं
ऐसे में अपना कह भी दो बस एक बार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

आती है ऐसी प्यार की घड़ियाँ नसीब से
घड़ियाँ नसीब से
ये दिल की धड़कनें ज़रा सुन लो क़रीब से
सुन लो क़रीब से
आये हो ले के प्यार के सपने हज़ार तुम

अपने ही दिल से पूछ लो किसका प्यार हो तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी
................................................................................
Tumse hi meri zindagi-Apna ghar 1960

Artists: Premnath, Shyama

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Jul 8, 2018

आई बहार आई-आरजू १९५०

कामिनी कौशल अपने ज़माने के प्रमुख अभिनेत्रियों में
शामिल थीं. श्वेत श्याम युग की कुछ अभिनेत्रियां ऐसी
हैं जिन्हें हमने लंबे समय तक रुपहले परदे पर देखा.
चरित्र भूमिकाओं के ज़रिये उन्होंने अपनी उपस्थिति
को लंबे समय तक कायम रखा.

उम्र के साथ शरीर साथ देना छोड़ देता है. ऐसे में अपना
एनर्जी लेवल बनाया रखना बेहद मुश्किल काम होता है.
आज के समय में महानायक का एनर्जी लेवल अपने से
कम उम्र के अभिनेताओं से बेहतर नज़र आता है. कहीं
ना कहीं आत्मबल और मन की शक्ति वो जुटा ही लेती
है जिसकी व्यक्ति को चाह होती है.

प्रेम धवन जिनके नाम में ही प्रेम है उन्होंने कई सफल
रोमांटिक और खुशनुमा गीतों की रचना की है. इनकी भी
पारी लंबी चली है हिंदी फिल्म जगत में. प्रस्तुत गीत को
गाया है लता मंगेशकर और कोरस ने अनिल बिश्वास की
धुन पर.



गीत के बोल:

आई बहार आई  आई बहार
आई बहार आई  आई बहार
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
जगा है प्यार मन बोले मोरा
मन बोले मोरा मन बोले रे
मन बोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे

कैसे कहूँ री हाय मन की बतियाँ
धड़के जिया मोरा फड़के अखियाँ
धड़के जिया मोरा फड़के अखियाँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
कोई नैनन को भाया मोरी डोल गयी काया
कोई नैनन को भाया मोरी डोल गयी काया
डोल गई डोल गई डोल गई रे
डोल गई डोल गई फैल गई रे
कोई मन में समाया हौले हौले रे
कोई मन में समाया हौले हौले रे
हौले हौले रे

आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे

सावन आया री सखी धूम मचाता
सखी धूम मचाता
सावन आया री सखी धूम मचाता
सखी धूम मचाता
रिमझिम रिमझिम रिमझिम गाता
रिमझिम रिमझिम रिमझिम गाता
रिमझिम झिम रे रिमझिम झिम रे
रिमझिम झिम रे रिमझिम झिम रे
करो सोलह सिंगार चलो साजन के द्वार
करो सोलह सिंगार चलो साजन के द्वार
धीरे धीरे धीरे धीरे घूँघट पट खोले रे
धीरे घूँघट पट खोले रे
धीरे घूँघट पट खोले रे

जागा है प्यार मन बोले मोरा आ आ आ
…………………………………………………
Aayi nahar aai-Arzoo 1950

Artists: Kamini Kaushal

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May 20, 2018

तेरी दुनिया से दूर-ज़बक १९६१

५० से ६० के दशक में आते ही रंगीन फ़िल्में ज्यादा देखने को
मिलने लगीं. फ़िल्में रंगीन हुईं तो फिल्म बनाने के खर्चे भी बढे.
फिल्म के भव्यता अवश्य बढ़ी. नायक नायिकाओं के चेहरे ज्यादा
दमकने लगे. प्रस्तुत गीत में ही आपको नायिका का मेकअप कुछ
ज्यादा नज़र आएगा.

सुनते हैं महिपाल और श्यामा पर फिल्माया गया लोकप्रिय युगल
गीत जिसे लता और रफ़ी ने गाया है.




गीत के बोल:

तेरी दुनिया से दूर चले हो के मजबूर हमें याद रखना
तेरी दुनिया से दूर चले हो के मजबूर हमें याद रखना
जाओ कहीं भी सनम तुम्हें इतनी क़सम हमें याद रखना
जाओ कहीं भी सनम तुम्हें इतनी क़सम हमें याद रखना
ओ तेरी दुनिया से दूर

आयेंगी बहारें तो तेरे ही फ़साने सुनायेंगी हमें
आयेंगी बहारें तो तेरे ही फ़साने सुनायेंगी हमें
होगी तन्हाई तो आ के तेरी यादें रुलायेंगी हमें
रुलायेंगी हमें तड़पायेंगी हमें
कभी देखी थी बहार कभी हमसे था प्यार ज़रा याद रखना
जाओ कहीं भी सनम तुम्हें इतनी क़सम हमें याद रखना
ओ तेरी दुनिया से दूर

ले जा जाने वाले दुआएं मेरे दिल की किसी से क्या गिला
ले जा जाने वाले दुआएं मेरे दिल की किसी से क्या गिला
तेरी ही खता है ना मेरी ही खता है जो होना था हुआ
जो होना था हुआ है किसी से क्या गिला
देखो रोये मेरा प्यार कहे दिल की पुकार हमें याद रखना
तेरी दुनिया से दूर चले हो के मजबूर हमें याद रखना
जाओ कहीं भी सनम तुम्हें इतनी क़सम हमें याद रखना
ओ तेरी दुनिया से दूर
..................................................................
Teri duniya se door-Zabak 1961

Artists: Mahipal, Shyama

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Mar 24, 2018

आ सपने तुझे बुलाएँ-हमदर्द १९५३

किसी गाने की कभी कभी यूँ तारीफ करने का मन करता है-
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

एक कवि समेलन में मंच पर बैठे कवि ने किसी दूसरे कवि की
रचना की तारीफ में ९६ बार वाह वाह की लगातार जैसे सुई अटक
गयी हो. हमने सोचा जब कोई अति गदगद हो जाता है तब ऐसे
ही वाह वाह कर उठता है. हमने दो बार ज्यादा कर दी इधर.

सुनते हैं गीता दत्त का गाया फिल्म हमदर्द का गीत जिसे लिखा है
प्रेम धवन ने और जिसकी धुन तैयार की है अनिल बिश्वास ने.
गीत में संगीत ज्यादा है और बोल कम.




गीत के बोल:

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा
आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा

गोरी गोरी गरम गरम बाहों में
काली काली जुल्फों की घटाओं में
मुस्कुराती गुनगुनाती प्यार की फिजाओं में

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा
आ

हुस्न की जहाँ हैं मेहरबानियाँ
इश्क कहता है जहाँ कहानियां
खेलती जवानियों से है जहाँ जवानियाँ

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा
आ

गैर की निगाहों से बचा लूंगी आ
………………………………………………………………..
Aa sapne tujhe bulayen-Hamdard 1953

Artist: Smriti Biswas

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Mar 9, 2018

कभी न बिगड़े किसी की मोटर-मोती महल १९५०

अगर शब्दकोष में समाहित असंख्य शब्दों का प्रयोग फिल्मों के नामों
में हो चुका है तो फिल्मों के गीत भी विभिन्न विषयों और पहलुओं से
अछूते नहीं बचे हैं.

मोटर कार बिगड़ने के ऊपर भी एक गीत मौजूद है. कार की सर्विसिंग
पर एक गीत आपन सुन चुके हैं जिसमें कार सुधारने का जिक्र नहीं है.
वो गीत किशोर कुमार और मधुबाला पर फिल्माया गया है. गौरतलब
है इस गीत में ‘चलती का नाम गाडी’ शब्द भी आये हैं और उस फिल्म
की अभिनेत्री का नाम भी. ये गीत १९५२ की फिल्म का है.

प्रेम धवन की रचना है और हंसराज बहल का संगीत. सुरैया ने इसे
गाया है थोड़े अलग से अंदाज़ में.
   



गीत के बोल:

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
खड़े रहो बस बेबस होकर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

कपड़े हों मैले मुँह काला काला
हो वो सुरैया या मधुबाला आ हा
हो वो सुरैया या मधुबाला
बड़े बड़े भी बन जाया करते हैं जोकर रस्ते में
बड़े बड़े भी बन जाया करते हैं जोकर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

बार बार हैंडल बदलवाया
धक्के दे दे सर चकराया
धक्के दे दे सर चकराया
निकल गया है अपना तो कचूमर रस्ते में
निकल गया है अपना तो कचूमर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

तेल पिलाया डाला पानी
पर ज़ालिम ने एक न मानी
पर ज़ालिम ने एक न मानी
याद आती है हमको नानी अब रो रो कर रस्ते में
याद आती है हमको नानी अब रो रो कर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में

सच कहती है दुनिया सारी
चलती का ही नाम है गाड़ी
चलती का ही नाम है गाड़ी
मोटर भी छकड़ा है जब हो जाये पंक्चर रस्ते में
मोटर भी छकड़ा है जब हो जाये पंक्चर रस्ते में

कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
खड़े रहो बस बेबस होकर रस्ते में
कभी न बिगड़े किसी की मोटर रस्ते में
…………………………………………………………………………..
Kabhi na bigde kisi ki motor-Moti mahal 1952

Artist: Suraiya

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Feb 16, 2018

किसके लिए रुका है-एक साल १९५७

चिनप्पा देवर ने जो करिश्माई फ़िल्में बनाईं पशुओं और चौपायों को
ले कर उन्हें देख कर इंसान आश्चर्य करता है कि वे भी कलाकारों
जैसा और उनसे बेहतर अभिनय कर सकते हैं. सभी पालतू पशुओं
पर लगभग गीत बन चुके हैं या गीतों में उनका उल्लेख किया जा
चुका है.

मगरमच्छ और घड़ियाल पर शायद गीत नहीं बने हैं. एक घड़ियाल
वाला गीत ज़रूर है मगर ये घड़ियाल वो नहीं है जो आप समझ रहे
हैं. ये हैं बड़ी घडी जिसे हम घड़ियाल कहते हैं. पुराने कई शहरों में
आप ऐसी बड़ी घडी देख सकते हैं चालू या बंद. इन्हें चलने के लिए
बड़े बड़े मेकेनिज्म लगे होते हैं. काफी बड़ी घड़ियों में चाबी भरने के
लिए तो हृष्ट पुष्ट व्यक्ति की ज़रूरत होती है.

प्रेम धवन का गीत है जिसे रफ़ी ने गाया है. इसकी संगीत रचना
रवि की है. गीत फिल्म में टुकड़ों टुकड़ों में बजता है. गाफिल का
अर्थ है असवाधान या बेसुध और गरदूँ का अर्थ है समय.




गीत के बोल:

ग़ाफ़िल तुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
गरदूँ ने घड़ी उम्र की एक और घटा दी

किसके लिए रुका है किसके लिए रुकेगा
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है किसके लिए रुकेगा
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

पानी का बुलबुला है इन्सान की ज़िन्दगानी
दम भर का ये फ़साना पल भर की ये कहानी
हर साँस साथ अपने पैग़ाम ला रहा है
हर साँस साथ अपने पैग़ाम ला रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

दुनिया बुरा कहे तो इल्ज़ाम ये उठा ले
खुद मिट के भी किसी की तू ज़िन्दगी बचा ले
दिल का चिराग़ तुझको रस्ता दिखा रहा है
दिल का चिराग़ तुझको रस्ता दिखा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

काँटे जो बोये तूने तो फूल कैसे पाए
तेरे गुनाह ही आख़िर हैं आज रंग लाए
अब सोच में क्यों पगले घड़ियाँ गंवा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है
…………………………………………………………..
Kiske liye ruka hai-Ek saal 1957

Artist: Ashok Kumar

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Jan 30, 2018

चाहे कितनी कठिन डगर हो-जीत १९४९

कथनी और करनी में अंतर खत्म होने पर ही आदमी महात्मा
कहलाता है. सुनने में आसान लगता है मगर कंटकाकीर्ण मार्ग
से ताउम्र निकलना पडता है और सभी बाधओं को स्वीकारते
हुए उनसे पार भी पाना पडता है.

गांधी जी ने असम्भव सी लगने वाली इस देश की आजादी की
राह आसान बनाने में अपना बड़ा योगदान दिया. आज के दिन
एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं सन १९४९ की फिल्म जीत से.

इसे लिखा है प्रेम धवन ने और इसका संगीत तैयार किया है
अनिल बिश्वास ने. शंकर दासगुप्ता और सुरैया ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

चाहे कितनी कठिन डगर हो
हम क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो
हम क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

जिस पथ पर तुम चरण धरोगे
जिस पथ पर तुम चरण धरोगे
अपने नैन बिछाऊँगी
तुमरे पथ के काँटों को
पलकों से उठाती जाऊँगी
तुमरे पथ के काँटों को
पलकों से उठाती जाऊँगी
जब लग प्रान रहेंगे
जब लग प्रान रहेंगे
एक दूजे का साथ निभायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

इस दुखियारे जग में तुम ही
नैनन का उजियारा हो
सूने लम्बे जीवन-पथ का
तुम ही एक सहारा हो
सूने लम्बे जीवन-पथ का
तुम ही एक सहारा हो
तुम संग हो तो पाँव मेरे
कभी न ठोकर खायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

हमको मिल कर इस दुखियारे
जग को स्वर्ग बनाना है
हमको मिल कर इस दुखियारे
जग को स्वर्ग बनाना है
 सब अपने हैं सबको
मानवता का प्यार सिखाना है
सब अपने हैं सबको
मानवता का प्यार सिखाना है
जो सबको उजियारा दे
जो सबको उजियारा दे
एक ऐसी ज्योत जलायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो
…………………………………………………………
Chahe kitni kathin dagar ho-Jeet 1949

Artists: Dev Anand, Suraiya

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Jan 26, 2018

ऐ वतन ऐ वतन-शहीद १९६५

देशभक्ति का जज्बा हर व्यक्ति के अंदर होना चाहिए. आज सुनते
हैं सन १९६५ की फिल्म शहीद से एक गीत रफ़ी की आवाज़ में.
इसे हमने कई बार पहले भी सुना है और ये २६ जनवरी और
१५ अगस्त को खूब बजा करता है.आज एक बार और सुनते हैं.

प्रेम धवन की रचना है और उन्हीं का संगीत.



गीत के बोल:

जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसी का जीना है
जो मरना वतन पे जाने

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन
............................................................
Ae watan ae watan-Shaheed 1965

Artist: Manoj Kumar

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Jan 25, 2018

ऐसी भी क्या जल्दी है-राजा १९६३

प्रेम धवन का लिखा एक गीत सुनते हैं सन १९६३ की फिल्म
राजा से. एस एन त्रिपाठी इसके संगीतकार हैं और आशा भोंसले
गायिका.

फिल्म से हमने एक गीत आपको पहले सुनवाया था. इस गीत की
संभावित श्रेणियाँ इस प्रकार से हैं-ऐसी भी हिट्स, जल्दी हिट्स और
ठहरो हिट्स. श्रेणी को केटेगरी कहा जाता है जैसे कारीगरी, बाजीगरी
वगैरह.

गीत के शुरू शुरू में आशा भोंसले ने तरह तरह की आवाजें निकाली
हैं जिनमें वो भी शामिल है जैसी किसी के सर पर ठंडा पानी डालने
के बाद उसके मुंह से निकलती हैं. गीत में हाथी के चिंघाड जैसी भी
कुछ ध्वनियाँ हैं जो एक वाद्य यन्त्र द्वारा निकाली गई हैं.




गीत के बोल:

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा ऐ

रोक लेंगी ये निगाहें तेरी राहों को
जाओगे क्या तुम झटक के मेरी बाहों में
रोक लेंगी ये निगाहें तेरी राहों को
जाओगे क्या तुम झटक के मेरी बाहों में
क़दमों में तेरे डाला है जालिम दिल का खज़ाना

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा ऐ

जाते हो तो ये भी दिल में सोच के जाना
रह सकेगा शमा से क्या दूर परवाना
जाते हो तो ये भी दिल में शोच के जाना
रह सकेगा शमा से क्या दूर परवाना
ओ जाने वाले मुश्किल है हमसे दामन चुराना

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
....................................................
Aisi bhi kya jaldi hai-Raja 1963

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Oct 22, 2017

तोरे नैना रसीले-हमदर्द १९५३

गायकी का आनंद लेना हो तो मन्ना डे के गाने सुनो. सरल
प्रवाह से बहते मन्ना डे के गीत कोमलता से आपके मन को
गुदगुदाते हैं.

सुनते हैं अनिल बिश्वास की अद्भुत रचना फिल्म हमदर्द से जो
सन १९५३ में रिलीज़ हुई थी. गीत प्रेम धवन का लिखा हुआ
है. प्रेम धवन अपने समकालीनों की तरह गीत की हर विधा में
दक्ष थे. फिल्म इतिहास के कुछ सबसे बड़े गीत उनके नाम
भी दर्ज हैं.

प्रस्तुत क्लिप जिन महानुभाव ने अपलोड की है उसमें दो गीत
हैं. पहला वही है जो हम आपको आज सुनवा रहे हैं. परदे पर
गीत गा रहे हैं शेखर नाम के अभिनेता और नायिका को आप
पहचान ही गए होंगे-निम्मी.




गीत के बोल:

हो ओ ओ घायल करते हैं खुद ही
बदल गया रंग महफ़िल का
जब तुम महफ़िल में आये
बदल गया रंग महफ़िल का
जब तुम महफ़िल में आये
रंग उड़ा है फूलों का
दिल शमा का बैठा जाए
रंग उड़ा है फूलों का

इन नज़रों के आगे कोई
इन नज़रों के आगे कोई
इन नज़रों के आगे कोई
कैसे नज़र उठाये
हाँ कैसे नज़र उठाये
हाय राम कैसे नज़र उठाये
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
तोरे नैना रसीले कंटीले हाय राम
तोरे नैना रसीले कंटीले हाय राम
तोरे नैना

झूम रही है नागन जुल्फें मुख पर हलके हलके
झूम रही है नागन जुल्फें मुख पर हलके हलके
सर पे आँचल ढलका जाये
सर पे आँचल ढलका जाये
बैठो ज़रा संभल के
सर पे आँचल ढलका जाये
ना जाने क्या कर बैठे दिल
ना जाने क्या कर बैठे दिल
ना जाने क्या कर बैठे दिल मेरा आज मचल के
दिल मेरा आज मचल के
हाय दिल मेरा आज मचल के
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
तोरे नैना रसीले कंटीले हाय राम
तोरे नैना रसीले कंटीले हाय राम
तोरे नैना

यूँ मुंह फेर के तन जाना भी है एक अदा निराली
यूँ मुंह फेर के तन जाना भी है एक अदा निराली
और भी रंग ले आई मुख पे ये गुस्से की लाली
और भी रंग ले आई
इस लाली पे मैंने तो
इस लाली पे मैंने तो
इस लाली पे मैंने तो
दुनिया कुर्बान कर डाली
दुनिया कुर्बान कर डाली
हाय दुनिया कुर्बान कर डाली
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
तोरे नैना रसीले कंटीले हाय राम
तोरे नैना
………………………………………………………….
Tore naina raseele-Hamdard 1953

Artists: Shekhar, Nimmi

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