Jul 31, 2015

हैं सबसे मधुर वो गीत-पतिता १९५३

हिंदी सिनेमा इतिहास का एक मील का पत्थर फिल्म है पतिता.
ढर्रे पर फिल्म बनाने वाले तो हुए मगर अलग हट के और कुछ
सार्थक विषयों पर फिल्म बनाने का साहस कुछ ही फिल्मकार
जुटा पाए. अमिय चक्रवर्ती नाम की दो प्रसिद्ध शख्सियतें हुईं
हैं बंगाल में-एक तो कवि अमिय जो १९६३ के साहित्य अकादमी
पुरस्कार विजेता शख्स हैं, दूसरे फिल्म निर्देशक अमिय.

१९१२ में जन्मे अमिय ने २८ वर्ष की उम्र में ही फिल्मों से जुड
गए आधिकारिक तौर पर. उनकी पहली फिल्म थी-बन्धन. इसमें
उनकी भूमिका लेखन तक सीमित रही. सन १९४१ में आई फिल्म
अनजान में उन्होंने लेखन के साथ निर्देशन भी किया १९५२ की
फिल्म दाग जिसमें दिलीप कुमार नायक हैं, जिसका निर्देशन और
निर्माण दोनों उन्हीं का है. दाग के लिए दिलीप कुमार को उनके
कैरियर का प्रथम फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ था. दिलीप कुमार
की खोज का श्रेय देविका रानी के साथ साथ अमिय को भी दिया
जाता है. उल्लेखनीय है अमिय की बतौर निर्देशक पहली फिल्म में
देविका रानी और अशोक कुमार ने अभिनय किया.

अंग्रेजी में शैली की की कविता ‘To a Skylark’ की कुछ पंक्तियाँ है-
"Our sweetest songs are those that tell of saddest thought." –
जिससे प्रेरित होकर गीतकार शैलेन्द्र ने इस खूबसूरत गीत की रचना
की. शैलेन्द्र के सर्वश्रेष्ठ गीतों में इसे गिना जाता है.

ये कड़वी सच्चाई है कि बिना दर्द आत्मा के भीतर की आवाज़ नहीं
निकलती. जब खुशी और दर्द दोनों पहलुओं से मनुष्य रु-ब-रु हो
जाता है तभी कुछ तत्व उभरना शुरू होता है. फिल्म की सफलता में
इस गीत का भी बहुत बड़ा योगदान है.




गीत के बोल:

हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें
हम दर्द के सुर में गाते हैं
जब हद से गुज़र जाती है खुशी
आँसू भी छलकते आते हैं
हैं सबसे मधुर वो गीत

काँटों में खिले हैं फूल हमारे
रंग भरे अरमानों के
नादान हैं जो इन काँटों से
दामन को बचाये जाते हैं
हैं सबसे मधुर वो गीत

जब ग़म का अन्धेरा घिर आये
समझो के सवेरा दूर नहीं
हर रात का है पैगाम यही
तारे भी यही दोहराते हैं
हैं सबसे मधुर वो गीत

पहलू में पराये दर्द बसा के
तू हँसना हँसाना सीख ज़रा
तूफ़ान से कह दे घिर के उठे
हम प्यार के दीप जलाते हैं

हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें
हम दर्द के सुर में गाते हैं
जब हद से गुज़र जाती है खुशी
आँसू भी छलकते आते हैं
हैं सबसे मधुर वो गीत
………………………………………
Hain Sabse Madhur Wo Geet-Patita 1953

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