दीप जलेंगे दीप दिवाली आयी हो–पैसा १९५७
शुभकामनाएं. दीपों की जगमग सरीखा आपका जीवन भी
सदैव आलोकित रहे इसी कामना के साथ..................
आज दीपावली के अवसर पर दीपों वाला एक गीत हो जाए.
दीवावली है तो इस अवसर पर एक गीत होना ही चाहिए.
ये हमारा दस्तूर है कि त्यौहार आया तो उसे मनाना अवश्य
चाहिए, चाहे तुवर दाल २०० रूपये किलो हो जाये चाहे प्याज
८० रूपये किलो हो. सामजिक मजबूरी के तहत हमें दिखावे
के लिए भी त्यौहार मनाना पढता है. एक अच्छी बात बस
ये है कि झूठ मूठ की खुशी ही सही थोड़ी देर के लिए, हमें
थोड़ा आनंदित कर जाती है.
आइये सुनें गीत दत्त और रफ़ी का गाया, राम गांगुली के
संगीत निर्देशन में बना सन १९५७ की फिल्म पैसा से एक
गीत.
गीत के बोल:
आ रही है मन वीणा के तार हिलाने वाली
आ रही प्रिया प्रेम आलाप सुनने वाली
झनन झनन बाज रही है नूपुर की शहनाई
दीप जलेंगे दीप दिवाली आई हो..
नील गगन की गोरी ने पहनी है नीली साड़ी
नैनों में काजल चमकाता रोली मांग संवारी
काली रात अमावस की हो
सब देख-देख मुस्काये हो
दीप जलेंगे दीप दिवाली आई हो...
पूजा अर्चना करने को
उठ सजनी थाल सजा ले
चुन-चुन फूल गूंथ ले माला
घी के दीप जला ले
आज देव के दर्शन होंगे यही संदेशा लाई है
हो दिवाली आई हो
दीप जलेंगे दीप दिवाली आई हो...
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Deep jalenge diwali aayi-Paisa 1957

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