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Jul 24, 2020

मंज़िल वही है प्यार की-कठपुतली १९५७

आज २४ जुलाई है. जुलाई माह का २४ वां दिन और कोरोना
के चलते लॉकडाउन के चार माह पूरे हो गए हैं और ऊपर से
दो दिन और गुज़र गये है. इस पूरे समय ने हमारी जीवन शैली
में बदलाव ला दिया है. हालांकि कई जगह लॉकडाउन से राहत
मिली है और उनमें से कई स्थानों पर मरीजों की संख्या तेजी
से बढ़ी है. वैक्सीन का ही इंतज़ार है अब तो जिससे इसके
रोकथाम में गति आये.

आज बॉलीवुड के जिन चर्चित हस्तियों का जन्मदिन है उनमें
प्रमुख है-नायक चंद्रमोहन, प्रख्यात बांसुरी वादक पन्नालाल घोष,
अभिनेता मनोज कुमार और गायक सुबीर सेन.

मनोज कुमार पर दिन भर से सोशल मीडिया पर काफी चर्चा
हो रही है. अतः हम सुबीर सेन के बारे में बात करते हैं. गायक
सुबीर सेन मूलतः बंगाली गीतों के लिए ही जाने जाते हैं. उनके
कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत भी उपलब्ध हैं जिनमें से एक आज हम
सुनेंगे. सुबीर सेन डिब्रूगढ़ आसाम में वर्ष १९३४ को पैदा हुए.

सुबीर सेन ने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया है जिनमें से
अधिकाँश बंगाली भाषा की फ़िल्में है. हिंदी फ़िल्म अनुभव में
वे दिखाई दिए थे.

सुनते हैं शैलेन्द्र का लिखा और शंकर जयकिशन द्वारा संगीतबद्ध
गीत फ़िल्म कठपुतली से जिसे बलराज साहनी और वैजयंतीमाला
पर फिल्माया गया है.





गीत के बोल:

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

दुनिया की नज़रों से दूर
दुनिया की नज़रों से दूर जाते हैं हम तुम जहाँ
उस देश की चाँदनी गायेगी ये दास्ताँ
मौसम था वो बहार का दिल खिल मचल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

छुप न सके मेरे राज
छुप न सके मेरे राज नग़मों में ढलने लगे
रोका था दिल ने मगर पहलू बदलने लगे
ये दिन ही कुछ अजीब थे जो आज कल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
…………………………………………………..
Manzil wahi hai pyar ki-Kathputli 1957

Artists: Balraj Sahni, Vaijayantimala

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Mar 18, 2020

ओ जी ओ जी छोडो भी दुपट्टा-चम्पाकली १९५७

ए जी ओ जी हिट्स के अंतर्गत अगला गीत सुनते
हैं सन १९५७ की फिल्म चम्पाकली से.

छेड़ छाड़ हर युग की फिल्मों में दिखलाई देती है.
इसका स्वरुप समय के साथ साथ बदलता चला.
छेड़ छाड़ और छिछोरियाई में अंतर है और इसे भी
हमने फिल्मों के माध्यम से ज्यादा समझा.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण की रचना जिसका संगीत तैयार
किया है हेमंत कुमार ने और इसे लता मंगेशकर
संग स्वयं संगीतकार ने गाया है. पर्यावरण प्रेमी गीत
है ये इसमें आपको ढेर सारी भेडें भी दिखलाई देंगी
जिन्हें देख के आपको लगेगा नायक नायिका के
हिलने डुलने की गति जयादा है. हर चीज़ कम्पेरेटिव
जो है.



गीत के बोल:

ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
देखो मेरे नैनों को न देना इल्ज़ाम
नहीं देना इल्ज़ाम जी
गली गली कहीँ हो न जाऊँ बदनाम
हो न जाऊँ बदनाम जी
हाँ जी हाँ जी तुझे मशहूर करे नैना तेरे ज़ालमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा

बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
बोलो कैसे रखूँ मैं ये मुखड़ा छुपाय के
छुपेगा न चाँद का ये टुकड़ा छुपाये से
ये चाँद का टुकड़ा छुपाये से

लो जी लो जी नित नये छेड़ करे जादूगर बालमा
ना जी ना जी हमें मजबूर करें नैना तेरे ज़ालिमा
ओ जी ओ जी छोड़ो भी दुपट्टा मेरा जादूगर बालमा
जादूगर बालमा
…………………………………………….
O ji chhodo ji-Champakali 1957

Artists: Bharat Bhushan, Suchitra Sen, Shubha Khote

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Nov 7, 2019

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी-शेरू १९५७

कैफ इरफानी का लिखा और मदन मोहन के संगीत
से सजा गीत सुनते हैं फिल्म शेरू से जिसे मन्ना डे
ने गाया है.

शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत का सम्बन्ध देसी हिंदी
सिनेमा से काफ़ी पुराना है और समय समय पर हमें
कुछ उम्दा सामान सुनने को उपलब्ध हो जाता है.

यू ट्यूब के आगमन के पूर्व मन्ना डे के दुर्लभ गाने
सुन पाना एक दुर्लभ अनुभव सरीखा ही होता था. जब
मुकेश, रफ़ी और किशोर के दुर्लभ गीत ही सुनने को
नहीं मिला करते थे तो मन्ना डे के कहाँ मिलते?



गीत के बोल:

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
मुस्कान के फूल सजाये हुए
नैनों के दीप जलाये हुए
निकली थी ???? ????? को
मन में अपना विश्वास लिए

प्रभु द्वार चली प्रभु की दासी
एक आस लिए एक प्यास लिए
प्रभु द्वार चली

तराना........

तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
तेरो नाम ओमकार गावत सब बार बार
लाज मेरी तेरे हाथ जगत के खिवैया

तराना........
...........................................................
Prabhu dwar chali-Sheroo 1957

Artist:

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Jul 21, 2019

ऐ प्यासे दिल बेज़ुबान-बेगुनाह १९५७

शंकर जयकिशन के खजाने से एक गीत सुनते हैं आज.
इसका ओर्केस्ट्राईज़ेशन ज़बरदस्त है. इसी वजह से इसके
मुरीद ओर्केस्ट्रा वाले ज्यादा हैं. शंकर जयकिशन के गाने
गाने में आसान लगते हैं मगर ऐसा नहीं है. गाने का
मेलोडी कंटेंट तब तक पूरा नहीं होता जब तक साथ में
वाद्य यंत्र ना बजें.

मुकेश के गाये इस गीत की रचना की है शैलेन्द्र ने.




गीत के बोल:

ए प्यासे दिल बेज़ुबान तुझको ले जाऊं कहां
ए प्यासे दिल बेज़ुबान तुझको ले जाऊं कहां
आ आ आ आ आ आ
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलाएगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

घटा झुकी और हवा चली तो हमने किसी को याद किया
चाहत के वीराने को उनके गम से आबाद किया
घटा झुकी और हवा चली तो हमने किसी को याद किया
चाहत के वीराने को उनके गम से आबाद किया
ए प्यासे दिल बेज़ुबान मौसम की ये मस्तियां
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलायेगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

तारे नहीं अंगारे हैं वो अब चांद भी जैसे जलता है
नींद कहां सीने पर कोई भारी कदमों से चलता है
तारे नहीं अंगारे हैं वो अब चांद भी जैसे जलता है
नींद कहां सीने पर कोई भारी कदमों से चलता है
ए प्यासे दिल बेजुबान दर्द है तेरी दास्तां
आ आ आ आ आ आ
आग को आग में ढाल के कब तक जी बहलाएगा
ए प्यासे दिल बेज़ुबान

कहां वो दिन अब कहां वो रातें तुम रूठे किस्मत रूठी
गैर से भेज छुपाने को हम हंसते फिरे हंसी झूठी

ए प्यासे दिल बेज़ुबान दुःख के रहा तेरा जहां
आ आ आ आ आ आ आ
...............................................................
Ae pyase dil bezuban-Begunah 1957

Artist:

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Jul 20, 2019

सो जा रे मेरे लाल सो जा-आधी रोटी १९५७

भरत व्यास रचित एक लोरी सुनते हैं फिल्म आधी रोटी से.
इस फिल्म से कुछ मधुर गीत आप सुन चुके हैं पहले. छोटे
बच्चे अपनी मर्जी से सोते हैं और अपनी मर्जी से उठ जाते हैं.
उनका नींद का सिस्टम अनूठा होता है. उन्हें सुलाना आसान
काम नहीं होता. छोटा कोमल सा दिमाग कभी लोरी के आनंद
से तो कभी कन्फ्यूज़न से थक कर सो जाता है.

सुनते हैं गीता दत्त के आवाज़ में ये गीत जिसे अविनाश व्यास
ने संगीत में बाँधा है.



गीत के बोल:

सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
निंदिया की नगरी में खो जा
मेरे लाल सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा
सोया है गगन सोया है पवन
सोया है गगन सोया है पवन
तू भी सो जा निर्धन के धन
सो जा
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा

ना कोई रेशम झूल झुलाये
ना कोई पंखा डुलाए
सो जा कन्हैया तुझको तेरी
मैया की माता सुलाये
सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा

तू जो सोये संग संग तेरे
सोयेंगे दुखड़े हमारे
अपने दुलारे के मोहन मुखड़े
पे वार मैं नहा नख तारे

सो जा रे सो जा मेरे लाल सो जा.
……………………………………………………………….
So ja re so ja mere laal-Aadhi roti 1957

Artist: Sulochana

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Sep 16, 2018

कली एक तुमसे पूछूँ बात-साक्षी गोपाल १९५७

कवि ह्रदय जब हिलोरे लेता है तो उस के अंदर से कुछ यूँ
निकलता है जैसा इस गीत में है. नोक झोंक को बड़े ही
खूबसूरत अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है और गोरे-काले के
नेचुरल कोबिनेशन के उदाहरण भी दिए गए हैं. लैला मजनू
कलर के मामले में अलग थे जिसमें लैला का रंग काला था
और मजनू गोरा.

भंवरा और कली के ऊपर जितने भी गीत बने हैं उनमें
गीतकारों को ४ पंक्तियों में ही मजमूं को निष्कर्ष पर पहुंचाने
की जल्दी होती है. स्टेप बाय स्टेप नियंत्रित गति से चलने
में जो आनंद है वो उछ्लम कूदम में नहीं है. कभी भी पैदल
चाल की प्रतियोगिता में स्टीपल चेज़ को घुसेड़ा जा सकता
है क्या. हालांकि, बहुत से गीत प्रश्नचिन्ह छोड़ते हुए समस्या
पूर्ति के सामान जैसे ज़ल्द समाप्त हो जाते हैं. टी वी चैनलों
की तोतई भाषा में बोलें तो सवाल खड़ा कर जाते हैं.

गीत भरत व्यास की कलम से निकला है और धुन चित्रगुप्त
के तबेले से. वो क्या है अंग्रेजी में संगीत भक्त स्टेबल जैसा
कुछ बोलते हैं जिसका अनुवाद घुडसाल या तबेला ही होता
है. गीत एक युगल गीत है जिसे रफ़ी और लता ने गाया है.




गीत के बोल:


कली एक तुमसे पूछूँ बात के जब होती है आधी रात
कौन भँवरा बन के चुपचाप तेरी बगिया में आता है
चुरा के तेरा मन ले जाता है
हो ओ ओ ओ ओ

कली से काहे पूछे बात
कली से काहे पूछे बात प्यार में होती है ये घात
नैन के चलते हैं जब बान बान का जादू छाता है
बिचारा खिंच खिंच आता है
कली से काहे पूछे बात

हो ओ ओ ओ ओ ओ
निर्दयी भँवरा क्यों कुंजन की गली गली में घूमता
निर्दयी भँवरा क्यों कुंजन की गली गली में घूमता
कौन भरोसा करे जो फिरता कली कली को चूमता
कली कली को चूमता
परख करता भँवरा दिन-रात कौन वो कली जो देवे साथ
कमलिनी से जब मिलते नैन चैन मन का खो जाता है
रैन भर बँध-बँध जाता है
कली से काहे पूछे बात

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
संग निभे ना कली है गोरी भँवर का काला रंग रे
संग निभे ना कली है गोरी भँवर का काला रंग रे
कारे बदरवा से पूछो जो रखे बिजुरिया संग रे
रखे बिजुरिया संग रे
मधुर गोरे काले का साथ के ज्यूँ मिलते हैं दिन और रात
रात कारी संग गोरा चाँद मिलन का रास रचाता है
कली संग भँवरा गाता है

कली एक तुमसे पूछूँ बात के जब होती है आधी रात
कौन भँवरा बन के चुपचाप तेरी बगिया में आता है
चुरा के तेरा मन ले जाता है

कली से काहे पूछे बात प्यार में होती है ये घात
नैन के चलते हैं जब बान बान का जादू छाता है
बिचारा खिंच खिंच आता है
कली एक तुमसे पूछूँ बात
.....................................................................
Kali ek poochhoon tumse baat-Sakshi Gopal 1957

Artists:

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Jun 27, 2018

सो गया सारा ज़माना-मिस मैरी १९५७

खुशनुमा पलों में जिंदगी खूबसूरत नज़र आती है. चाहे वो छोटे
पल हों या समय का थोडा बड़ा अंतराल, चहुँ ओर खुशियाँ बिखरी
नज़र आती हैं. खुशियोंके पल शायद पंख लगा के आते हैं इसलिए
उनके जाने की खबर भी नहीं लग पाती और मानव अपने आप को
किसी स्वप्न के बीत जाने के बाद वाली अवस्था में पाता है जिसे
दूसरे शब्दों में तन्द्रा भंग होना भी कहते हैं.

एक खुशनुमा गीत सुनते हैं फिल्म मिस मैरी से जिसे मीना कुमारी
पर फिल्माया गया है. मीना कुमारी पर फिल्माए गए खुशनुमा गीत
थोड़े अलग से ही लगते हैं क्यूंकि उनके नाम के साथ ट्रेजेडी क्वीन
शब्द जुड गया था.

राजेंद्र कृष्ण के बोलों को एक बढ़िया धुन में पिरोया है संगीतकार
हेमंत कुमार ने. गायिका की आवाज़ को आप पहचान ही लेंगे ऐसा
हमारा अनुमान है.



गीत के बोल:

सो गया सारा ज़माना नींद क्यूँ आती नहीं
सो गया सारा ज़माना नींद क्यूँ आती नहीं
ऐ हवा जा कर उसे तू पास क्यूँ लाती नहीं
सो गया सारा ज़माना नींद क्यूँ आती नहीं
सो गया
.
.
.
आगे के बोल बाद में क्यूंकि हमें नींद आ रही है
इस गीत को सुनते सुनते
.
.
.
................................................................................
So gaya saara zamana-Miss Mary 1957

Artists: Meena Kumari, Gemini Ganeshan

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May 2, 2018

अंखियों के नूर-बड़े सरकार १९५७

फिल्म बड़े सरकार किशोर साहू निर्देशित फिल्म है जिसमें
किशोर साहू और कामिनी कौशल प्रमुख कलाकार हैं. फिल्म
में गीता दत्त, आशा भोंसले और रफ़ी के गाये गीत हैं.

सामान्य चेहरे मोहरे वाले नायकों में हम किशोर साहू को
भी गिन सकते हैं. उन्होएँ एक्टिंग और निर्देशन दोनों विधाओं
पर तबियत से हाथ साफ़ किया. बतौर निर्देशक वे ज्यादा
सफल रहे.

उनके निर्देशन वाली फ़िल्में हैं कुंवारा बाप, राजा, शरारत,
साजन, सिन्दूर, नदिया के पार, सावन आया रे, काली घटा,
हैमलेट, मयूरपंख, किस्मत का खेल, बड़े सरकार, दिल अपना
और प्रीत परायी, घर बसा के देखो, गृहस्थी, पूनम की रात,
हरे कांच की चूडियाँ, पुष्पांजलि और धुंए की लकीर. इनमें
से सावन आया रे तक की फ़िल्में ४० के दशक की हैं. १९४८
की नदिया के पार और १९६० की दिल पाना और प्रीत पराई
बड़ी म्यूजिकल हिट फ़िल्में रहीं.



गीत के बोल:

अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर
मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर

दिल तोड़ देना था तो
दिल को लुभाया क्यूँ
तूने मेरे सोये हुए
प्यार को जगाया क्यूँ
दिल तोड़ देना था तो
दिल को लुभाया क्यूँ
तूने मेरे सोये हुए
प्यार को जगाया क्यूँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ 
तू ही था भरोसा मेरा
तू ही था गुरूर
बोल मेरा क्या कसूर
मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर

सब से छिपाए हुए
दुःख तेरे प्यार का
खोयी खोयी फिरती हूँ
मैं सपने को हार के
सब से छिपाए हुए
दुःख तेरे प्यार का
खोयी खोयी फिरती हूँ
मैं सपने को हार के
कुछ तो बता जा
काहे मुझसे है दूर
बोल मेरा क्या कसूर

मेरी अंखियों के नूर
प्यार में तेरे सैयां जिया मजबूर
बोल मेरा क्या कसूर
...........................................................................
Ankhiyon ke noor-Bade sarkar 1957

Artists: Kamini Kaushal, Kishore Sahu

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Mar 10, 2018

आज सजन मोहे अंग लगा लो-प्यासा १९५७

हिंदी सिनेमा इतिहास में निवेदन गीत बहुत से बने हैं जिनमें से एक
उल्लेखनीय गीत है-आती क्या खंडाला. आज के दौर में इससे भी आगे
बढे हुए गीत बन चुके हैं.

हम चूंकि घिसे पिटे जून पुराने अंदाज़ वाले हैं इसलिए हमें काले पीले
दौर के गाने ज्यादा सुहाते हैं. एक उत्कृष्ट(इस शब्द का काफी दिन से
प्रयोग नहीं किया है) कोटि का गीत श्रवणते हैं चलचित्र प्यासा से. इस
चलचित्र के प्रमुख पात्रों को आप पहचानते है अतः नाम पुनः छापने में
कोई अर्थ नहीं.

साहित्यिक गीत सामने आते ही हमें वो सब याद आने लगता है-बीती
विभावरी जाग री, चारु चंद्र की चंचल किरणें, वो तोडती पत्थर के
साथ साथ चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदी के चम्मच से वेज
सूप पिलाया.



गीत के बोल:

सखी री बिरहा के दुखड़े सह सह कर
जब राधे बेसुध हो ली
तो इक दिन अपने मनमोहन से जा कर यूँ बोली

आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
हृदय की पीड़ा देह की अग्नि
सब शीतल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

करूं लाख जतन मोरे मन की तपन
मोरे तन की जलन नहीं जाये
करूं लाख जतन मोरे मन की तपन
मोरे तन की जलन नहीं जाये
कैसी लागी ये लगन कैसी जागी ये अगन
कैसी लागी ये लगन कैसी जागी ये अगन
जिया धीर धरन नहीं पाये
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

मोहे अपना बना लो मेरी बाँह पकड़
मैं हूँ जनम जनम की दासी
मोहे अपना बना लो मेरी बाँह पकड़
मैं हूँ जनम जनम की दासी
मेरी प्यास बुझा दो मनहर गिरिधर प्यास बुझा दो
मनहर गिरिधर प्यास बुझा दो
मनहर गिरिधर मैं हूँ अन्तर्घट तक प्यासी
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

कई जुग से हैं जागे मोरे नैन अभागे
कई जुग से हैं जागे मोरे नैन अभागे
कहीं जिया नहीं लागे बिन तोरे
सुख देखे नहीं आगे
सुख देखे नहीं आगे
दुःख पीछे पीछे भागे
जग सूना सूना लागे बिन तोरे
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
हृदय की पीड़ा देह की अग्नि
सब शीतल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
..................................................................
Aaj sajan mohe ang laga lo-Pyasa 1957

Artist: Waheeda Rehman, Guru Dutt

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Feb 19, 2018

तू है या नहीं भगवान-जनम जनम के फेरे १९५७

फिल्म जनम जनम के फेरे से एक गीत सुनते हैं भरत व्यास का
लिखा हुआ. ईश्वर है या नहीं इस गीत में ये संवाद हो रहा है.

लता, मन्ना डे और रफ़ी का गाया ये गीत दुर्लभ है. हिंदी फिल्मों
के कई अच्छे गीत अनसुने से रह गए और कॉमन मास तक ना
पहुँच पाए.
   



गीत के बोल:

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान
कभी होता भरोसा कभी होता भरम
पड़ा उलझन में है इंसान
कभी होता भरोसा कभी होता भरम
पड़ा उलझन में है इंसान
तू है या नहीं भगवान

मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
तेरे सोचे बिना जब होता है सब
तो समझ ले कहीं है भगवान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान

वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई
वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई कैसी ये उल्टी रीत है
वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई कैसी ये उल्टी रीत है
झूठा है वो उसके झूठे ही भय से झूठा जगत भयभीत है
घन घन गरजती हुई ये घटायें
घन घन गरजती हुई ये घटायें किसका सुनाती गीत हैं
लहराते सागर की लहरों में गूँजे
लहराते सागर की लहरों में गूँजे किसका अमर संगीत है
किसका अमर संगीत है
जो दाता है सबका महान हो ओ ओ ओ ओ ओ
जो दाता है सबका महान
दिया जिसने जनम दिया जिसने ये तन
क्यूँ न उसको सका तू पहचान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान

बालक की ममता रोती है क्यूँ
बालक की ममता रोती है क्यूँ अनहोनी जग में होती है क्यूँ
मंदिर में दीप जलाते हैं जो उनके घर की बुझती ज्योति है क्यूँ
अनहोनी जग में होती है क्यूँ

जीवन-मरण हानि और फ़ायदा कर्मों का फल है उसका भी क़ायदा
इंसान की कुछ भी चलती नहीं करनी अपनी कभी टलती नहीं
भक्ति के भाव से उसको तू जान ले
श्रद्धा की आँखों से उसको तू पहचान ले
होता नहीं क्या अचंभा बड़ा आकाश किसके सहारे खड़ा
आकाश किसके सहारे खड़ा
फूलों में रंग झरनों में तरंग धरती में उमंग जो उठाता
वो कौन क्या तुम
बादल में बिजली पहाड़ों में फूल जो खिलाता
वो कौन क्या तुम
वो है सर्वस्त्रशक्तिमान
वो है सर्वस्त्रशक्तिमान
कण-कण में बसे पर दिखाई न दे
उसकी शक्ति को तू पहचान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
तेरे सोचे बिना जब होता है सब
तो समझ ले कहीं है भगवान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
………………………………………………………..
Too hai ya nahin bhagwan-Janam janama ke phere 1957

Artists: Nirupa Roy, Manhar Desai,  Unknown Babaji

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Feb 16, 2018

किसके लिए रुका है-एक साल १९५७

चिनप्पा देवर ने जो करिश्माई फ़िल्में बनाईं पशुओं और चौपायों को
ले कर उन्हें देख कर इंसान आश्चर्य करता है कि वे भी कलाकारों
जैसा और उनसे बेहतर अभिनय कर सकते हैं. सभी पालतू पशुओं
पर लगभग गीत बन चुके हैं या गीतों में उनका उल्लेख किया जा
चुका है.

मगरमच्छ और घड़ियाल पर शायद गीत नहीं बने हैं. एक घड़ियाल
वाला गीत ज़रूर है मगर ये घड़ियाल वो नहीं है जो आप समझ रहे
हैं. ये हैं बड़ी घडी जिसे हम घड़ियाल कहते हैं. पुराने कई शहरों में
आप ऐसी बड़ी घडी देख सकते हैं चालू या बंद. इन्हें चलने के लिए
बड़े बड़े मेकेनिज्म लगे होते हैं. काफी बड़ी घड़ियों में चाबी भरने के
लिए तो हृष्ट पुष्ट व्यक्ति की ज़रूरत होती है.

प्रेम धवन का गीत है जिसे रफ़ी ने गाया है. इसकी संगीत रचना
रवि की है. गीत फिल्म में टुकड़ों टुकड़ों में बजता है. गाफिल का
अर्थ है असवाधान या बेसुध और गरदूँ का अर्थ है समय.




गीत के बोल:

ग़ाफ़िल तुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
गरदूँ ने घड़ी उम्र की एक और घटा दी

किसके लिए रुका है किसके लिए रुकेगा
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है किसके लिए रुकेगा
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

पानी का बुलबुला है इन्सान की ज़िन्दगानी
दम भर का ये फ़साना पल भर की ये कहानी
हर साँस साथ अपने पैग़ाम ला रहा है
हर साँस साथ अपने पैग़ाम ला रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

दुनिया बुरा कहे तो इल्ज़ाम ये उठा ले
खुद मिट के भी किसी की तू ज़िन्दगी बचा ले
दिल का चिराग़ तुझको रस्ता दिखा रहा है
दिल का चिराग़ तुझको रस्ता दिखा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है

काँटे जो बोये तूने तो फूल कैसे पाए
तेरे गुनाह ही आख़िर हैं आज रंग लाए
अब सोच में क्यों पगले घड़ियाँ गंवा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
करना है जो भी कर ले ये वक़्त जा रहा है
ये वक़्त जा रहा है
किसके लिए रुका है
…………………………………………………………..
Kiske liye ruka hai-Ek saal 1957

Artist: Ashok Kumar

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Dec 9, 2017

उलझ गये दो नैना देखो-एक साल १९५७

वे फिल्में जिनके नाम में समय से सम्बंधित कोई शब्द है उनमें
से एक है सन १९५७ की एक साल. फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं
अशोक कुमार और मधुबाला.

फिल्म से एक ब्यूटीफुल, ब्यूटीफुलर अथवा ब्यूटीफुलेस्ट(जो आप इसे
समझना चाहें) एक गीत सुनते हैं जिसे लिखा और संगीत से सजाया
है संगीतकार रवि ने. इसे लता मंगेशकर और हेमंत कुमार ने
गाया है.



गीत के बोल:

उलझ गये दो नैना देखो
उलझ गये दो नैना
उलझ गये दो नैना देखो
उलझ गये दो नैना

प्रीतम उलझी लट सुलझाये
गोरी का चन्दा सा मुख शरमाये
प्रीतम उलझी लट सुलझाये
गोरी का चन्दा सा मुख शरमाये
प्रीत की डोरी में बंध कर दोनो
मन ही मन मुसकाये रे देखो
उलझ गये दो नैना

जब तक घर न आये साँवरिया
तड़पे है गोरी जैसे जल बिन मछरिया
बाट तकत अपने साजन की
राह में नैन बिछाये देखो
उलझ गये दो नैना

रात रुपहली तारों की छैंय्या
सैयां के हाथों में गोरी गोरी बैयाँ
रात रुपहली तारों की छैयां
सैयां के हाथों में गोरी गोरी बहियां
लाज भरे नैनों से मन की बात कही न जाये देखो
उलझ गये दो नैना
उलझ गये दो नैना देखो
उलझ गये दो नैना
...................................................................
Ulajh gaye do naina-Ek saal 1957

Artists: Ashok Kumar, Madhubala

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Nov 24, 2017

फिर वही दर्द है-अपराधी कौन १९५७

मास्टरपीस क्या होता है इस गीत को सुन कर जानिए. सैटायर का
पुट है इस गीत में. गीतकार क्या लिखना चाहता है और उससे
फिल्मवाले क्या लिखवाते हैं उसमें बड़ा फर्क होता है. हाँ, बीच बीच
में वो अपनी लेखनी का कमाल दिखला ही जाता है चुपके से.

गायकी मन्ना डे ने जितनी आसान बनाई उतनी शायद किसी ने
सपने में भी ना सोची होगी. सलिल चौधरी भी एक कमाल के
संगीतकार थे. सभी विधाओं में पारंगत. उन्हें कोम्प्लेक्स किस्म की
ध्वनियाँ ज्यादा प्रिय थीं. मजे कि बात ये है वो सारा कोम्प्लेक्स
मिक्सचर सुनने में बड़ा ही सरल मालूम पड़ता.

आप चाहे जो समझ लें मगर किसी हास्य गीत को फिल्माना आसान
काम नहीं होता, जब उसे सोबर भी रखना हो और ये भी कि वो
कहीं बोर ना बन जाए. असरार हसन खान उर्फ मजरूह साहब ने
अपना कलम वाला नाम मजरूह(जिसका अर्थ है-hurt, smitten).
उनकी सबसे बड़ी खूबी थी प्रासंगिक बने रहना.

उनके ऊपर एक अच्छा आलेख इधर है-अक्षय मनवानी की नज़र 
में मजरूह. अक्षय ने मजरूह के पॉपुलर गीत सुन कर ये सब लिखा है
या फिर वे क्या कहना चाहते हैं उसके उदाहरण देने के लिए उन्होंने
पॉपुलर गीत ही चुने, खैर जो भी मसला हो, आर्टिकल अच्छा है और
उसमें मजरूह की लेखनी के लगभग सारे पहलू उन्होंने कवर कर लिए
हैं. उन्हें, मगर, मजरूह के, अभी और भी गीत सुनने की आवश्यकता है.




गीत के बोल:

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

हम तो समझे दुश्मनों का हाथ कट गया
दो दिलों के बीच से पहाड़ हट गया
हम तो समझे दुश्मनों का हाथ कट गया
दो दिलों के बीच से पहाड़ हट गया
गम के भारी दिन गए गुजर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर

तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
आई प्यार के मधुर मिलन की चांदनी
तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
आई प्यार के मधुर मिलन की चांदनी
लेकिन थोड़ी रह गयी कसर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया असर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

मैंने चाहा भूल जाऊं क्यूँ रहूँ खराब
पर तेरा ये हुस्न जैसे दाल में गुलाब
मैंने चाहा भूल जाऊं क्यूँ रहूँ खराब
पर तेरा ये हुस्न जैसे दाल में गुलाब
थोडा थोडा है वही असर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
.....................................................................
Phir wahi dard hai-Apradhi Kaun 1957

Artists: Dhumal, Kumud Tripathi, Lilian

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Nov 3, 2017

मैं गोरी गोरी गोरी-आधी रोटी १९५७

सन १९५७ की फिल्म आधी रोटी का निर्देशन चंद्रकांत ने किया
था. इस फिल्म में रूप कुमार, मनोरमा, भगवान, अल नासिर,
उल्हास, प्रेम अदीब, डब्बू, और सुलोचना लटकर जैसे कलाकारों
ने काम किया.

फिल्म से अगला गीत सुनते हैं जिसे भरत व्यास ने लिखा है
और अविनाश व्यास ने संगीतबद्ध किया. गीता दत्त इस गीत की
गायिका हैं. फिल्म और उसके कलाकारों के बारे में हमने इसी
फिल्म के एक गीत पर चर्चा करते वक्त काफी प्रकाश डाला था.
वो पोस्ट देख लें एक बार.




गीत के बोल:

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी

मेरी पतली कमर में कहाँ है तसर
मेरी तिरछी नज़र का जी देखो असर
उल्फत का ये शोला भडकता जिधर
लगे आग इधर लगे आग उधर

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी

एक शमा
एक शाम परवाने हज़ार
किससे किससे करूं मैं प्यार
कोई काला कोई गोरा
रंग रंगीला कोई छोरा
छोरे तेरी मोहब्बत मान गई
मेरे हुस्न की अब ये आन गई
झुकी झुकी ये नज़र पहचान गई
तेरे दिल में छुपा है वो जान गई

मैं गोरी गोरी गोरी छोरी
करती हूँ दिलों की चोरी
ज़रा बच के ज़रा हट के
फेंकूँगी नज़र की डोरी
...............................................................
Main gori gori gori-Aadhi roti 1957

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Oct 7, 2017

ले ले दर्द पराया-छोटे बाबू १९५७

हेमंत कुमार अगर गायन में अपनी विशिष्ट शैली के लिए
जाने जाते थे तो अपने संगीत में भी एक अलग अंदाज़
के लिए पहचाने जाते थे.

अधिकांश दूसरे संगीतकारों ने भी उनसे उनकी शैली में ही
गीत गवाए. प्रस्तुत गीत मदन मोहन के संगीत वाला है,
फिल्म का नाम है छोटे बाबू. इस फिल्म से शायद हमने
आपको दो गीत सुनवाये है पहले. फिल्म के सभी गीत
लगभग बढ़िया है. इस गीत को चंद्रशेखर पाण्डे ने लिखा
है. उन्होंने और कौन से गीत लिखे और उनसे इस फिल्म
में एकमात्र गीत क्यूँ लिखवाया गया उसके लिए आप ही
खोजिये इंटरनेट पर कहीं पांच पन्ने का निबंध आपको
पढ़ने को मिल जायेगा.




गीत के बोल:

ले ले दर्द पराया
आ आ आ आ आ आ

ले ले दर्द पराया कर दे दूर ग़म का साया
तेरी खुशी तुझको मिल ही जायेगी
ले ले दर्द पराया कर दे दूर ग़म का साया
तेरी खुशी तुझको मिल ही जायेगी

खुशी और को दे के तू ले ले ग़म
तेरी हार भी जीत से कुछ न कम
खुशी और को दे के तू ले ले ग़म
तेरी हार भी जीत से कुछ न कम
जीत से कुछ न कम
जो किसी के काम आया
जिस ने रोतों को हँसाया
उसकी तट भी किनारे लग ही जायेगी

ले ले दर्द पराया कर दे दूर ग़म का साया
तेरी खुशी तुझको मिल ही जायेगी

जिया अपनी खातिर तो वो क्या जिया
किया ख़ुद को खुशहाल तो क्या किया
जिया अपनी खातिर तो वो क्या जिया
किया ख़ुद को खुशहाल तो क्या किया
तो क्या किया
तू बहार बन जा सारी दुनिया पे छा
मुरझाई कली भी खिल ही जायेगी

ले ले दर्द पराया कर दे दूर ग़म का साया
तेरी खुशी तुझको मिल ही जायेगी

तू दुनिया में अपना निशां छोड़ जा
रहे याद वो दास्ताँ छोड़ जा
तू दुनिया में अपना निशां छोड़ जा
रहे याद वो दास्ताँ छोड़ जा
दास्ताँ छोड़ जा
जो हो ज़िंदगी से हारा बन जा उस का सहारा
तेरी मंज़िल भी तुझे मिल ही जायेगी

ले ले दर्द पराया कर दे दूर ग़म का साया
तेरी खुशी तुझको मिल ही जायेगी
…………………………………………
Le le dard paraya-Chhote Babu 1957

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Jul 7, 2017

ओ निगाहे मस्ताना-पेइंग गेस्ट १९५७

ये है म्यूजिकल ऊं हूँ, हूँ हूँ हिट गीत. फिल्म का नाम है
पेइंग गेस्ट. देव आनंद और नूतन अभिनीत इस फिल्म के
गीत लाजवाब हैं. लाजवाब होने की बराबर वजहें हैं-एक तो
गीत के बोल बढ़िया हैं और धुनें भी एक से बढ़ कर एक
हैं.

फिल्म का निर्देशन सुबोध मुखर्जी ने किया था और निर्माण
संस्था का नाम है फिल्मिस्तान. फिल्मिस्तान की सन १९५७
में अभिमान, बड़े सरकार, चम्पाकली, पेइंग गेस्ट, तुमसा नहीं
देखा और जामन फ़िल्में आयीं. चम्पाकली का लता का
गया एक गीत काफी लोकप्रिय हुआ. फिल्म तुमसा नहीं देखा
फिल्म के गाने भी खूब चले.



गीत के बोल:

ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

कोई देखे नशीले आँखें मल मल के
दिल कैसे बने न दीवाना
शम्मा करे है इशारे जब जल जल के
कहो क्या करे परवाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

दामन न बचाना मेरे हाथों से
शरमा के गले से लग जाना
जले चाँद सितारे जिन बातों से
सुन जा वही अफ़साना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना

बस्ती के दियों को बुझ जाने दे
लहरा के न रुक रुक जाना
चाहत का लबों पे नाम आने दे
यही प्यार का है ज़माना

ओ निगाह-ए-मस्ताना
देख समां है सुहाना
तीर दिल पे चला के
आ ज़रा झुक जाना
ओ निगाह-ए-मस्ताना
………………………………………………
O nigah-e-mastana-Paying guest 1957

Artists: Dev Anand, Nutan

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Jul 1, 2017

माँग के साथ तुम्हारा-नया दौर १९५७

घिसे हुए गीत अर्थात खूब बजे हुए गीतों के बारे में क्या
कहा जाए.  बस इतना कह देते हैं इसे एक बार और सुन
लें.

नया दौर से एक युगल गीत रफ़ी और आशा की आवाजों
में. बोल साहिर के हैं और संगीत ओ पी नैयर का. तांगा
है तो घोड़े की टाप वाला संगीत होगा ही. गीत में रेलगाड़ी
के इंजन की आवाज़ तो नहीं आएगी ना !?



गीत के बोल:

माँग के साथ तुम्हारा मैंने माँग लिया संसार
माँग के साथ तुम्हारा मैंने माँग लिया संसार
माँग के साथ तुम्हारा मैंने माँग लिया संसार
माँग के साथ तुम्हारा

दिल कहे दिलदार मिला हम कहें हमें प्यार मिला
दिल कहे दिलदार मिला हम कहें हमें प्यार मिला
प्यार मिला हमें यार मिला इक नया संसार मिला
प्यार मिला हमें यार मिला इक नया संसार मिला
आ आ आ आ आ आ आ आस मिली अरमान मिला
हो हो हो हो हो हो हो हो हो जीने का सामान मिला
मिल गया एक सहारा हा हा हा हा

माँग के साथ तुम्हारा मैंने माँग लिया संसार
माँग के साथ तुम्हारा

दिल जवां और रुत हसीं चल यूं ही चल दें कहीं
दिल जवां और रुत हसीं चल यूं ही चल दें कहीं
तू चाहे ले चल कहीं तुझपे है मुझको यकीं
तू चाहे ले चल कहीं तुझपे है मुझको यकीं

ओ ओ .......जान भी तू है दिल भी तू ही
आ आ.........राह भी तू मंज़िल भी तू ही
और तू ही आस का तारा

माँग के साथ तुम्हारा मैंने माँग लिया संसार
माँग के साथ तुम्हारा
…………………………………………………………..
Maang ke sath tumhara-Naya daur 1957

Artists: Dilip Kumar, Vaijayantimala

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Jun 25, 2017

चाँद फ़िर निकला-पेइंग गेस्ट १९५७

चाँद शब्द से शुरू होने वाला एक खूबसूरत गीत सुनते और
देखते हैं फिल्म पेइंग गेस्ट से. फिल्म की कहानी का जो
पेइंग गेस्ट है वो कुछ भी पे नहीं करता है, हाँ परिभाषा
अनुसार वो पेइंग गेस्ट कहलाता है. फिल्म से ये तो पता
चलता है कि ये कंसेप्ट पुराना है. पहले की बम्बई और
आज की मुंबई में ये बरसों से चलन में है. दूसरे शहरों
में भी ये शुरू हो चुका है. एक कमरे में भेड़ बकरियों जैसे
लोगों को भर लो और उन्हें कहो- पेइंग गेस्ट. परिभाषा
और कंसेप्ट दोनों का कचरा हो गया है.

गीत की तरफ लौटते हैं. नायिका उसी फक्कड नायक का
इंतज़ार कर रही है और काफी रिच किस्म का गीत गा
रही है. कुछ फटीचरों की किस्मत काफी बुलंद होती है.
उन्हें काम धंधा मिले ना मिले खूबसूरत लड़की अवश्य
मिल जाती है प्रेम का राग अलापने के लिए.

ऐसी किस्मत वालों को देख के अधिकांश के सुलगते हुए
सीनों से धुंआ सा उठता है. आधुनिक युग में दिल की
जगह दूसरे क्षेत्र ने ले ली है. गीत मजरूह सुल्तानपुरी का
है और संगीत एस डी बर्मन का. लता मंगेशकर ने इसे
गाया है.



गीत के बोल:

चाँद फिर निकला  मगर तुम न आये
जला फिर मेरा दिल  करुँ क्या मैं हाय
चाँद फिर निकला

ये रात कहती है वो दिन गये तेरे
ये जानता है दिल के तुम नहीं मेरे
ये रात कहती है वो दिन गये तेरे
ये जानता है दिल के तुम नहीं मेरे
खड़ी मैं हूँ फिर भी निगाहें बिछाये
मैं क्या करूँ हाय के तुम याद आये
चाँद फिर निकला

सुलगते सीने से धुंआ सा उठता है
लो अब चले आओ के दम घुटता हैं
सुलगते सीने से धुंआ सा उठता है
लो अब चले आओ के दम घुटता हैं
जला गये तन को बहारों के साये
मैं क्या करुँ हाय के तुम याद आये

चाँद फिर निकला  मगर तुम न आये
जला फिर मेरा दिल  करुँ क्या मैं हाय
चाँद फिर निकला
……………………………………………………….
Chand fir nikla-Paying guest 1957

Artists: Nutan

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Jun 20, 2017

आ जा पंछी अकेला है-नौ दो ग्यारह १९५७

हम एक बार फिर से गिनती वाली और जोड़ बाकी वाली फिल्मों
की ओर लौट आये. नौ दो ग्यारह से अगला गीत सुनते हैं जिसे
जनता पंछी गीत कहती है. कोई इसको अकेला गीत नहीं कहता है.
कितना पॉजिटिव ऐटिट्यूड है ना जी. वैसे तो इस अकेले पंछी को
कुछ हिदायतें दी जा रही हैं इस गीत में.

रियलिस्टिक(real) और रीलिस्टिक(reel) कभी कभी एक ही बिंदु को
छूने का प्रयास करते प्रतीत होते हैं जैसे कि अफसाना और हकीकत
कभी कभी एक ही समान लगने लगते हैं. जी हाँ हम इस गीत के
बारे में भी ऐसा कुछ समझ रहे हैं.

मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत है, एस डी बर्मन का संगीत और
रफ़ी-आशा की आवाजें, देव आनंद और कल्पना कार्तिक कलाकार.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
ओ ओ ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
ओ ओ ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है

उड़ गई नींद यहां मेरे नैन से
बस करो यूं ही पड़े रहो चैन से
उड़ गई नींद यहां मेरे नैन से
बस करो यूं ही पड़े रहो चैन से
लागे रे डर मोहे लागे रे
ओ ओ ओ ये क्या डरने की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
ओ ओ ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है

ओ हो हो हो कितनी घुटी सी है ये फ़िज़ा
हा हा हा कितनी सुहानी है ये हवा
ओ हो हो हो कितनी घुटी सी है ये फ़िज़ा
हा हा हा कितनी सुहानी है ये हवा
मर गये हम निकला दम मर गये हम
हो ओ ओ मौसम कितना अलबेला है
हो ओ ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है

बिन तेरे कैसी अंधेरी ये रात है
दिल मेरा धड़कन मेरी तेरे साथ है
बिन तेरे कैसी अंधेरी ये रात है
दिल मेरा धड़कन मेरी तेरे साथ है
तन्हा है फिर भी दिल तन्हा है
हो ओ ओ लागा सपनों का मेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
हो ओ ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ ओ ओ आ जा पंछी अकेला है
………………………………………………..
Aa ja panchhi akela hai-Nau do gyarah 1957

Artists: Dev Anand, Kalpana Kartik

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May 31, 2017

माँ तेरी ममता कितनी प्यारी-बंसरी बाला १९५७

एक माता भजन सुनते हैं फिल्म बंसरी बाला से. इसे मन्ना डे
ने गाया है. पंडित फणि ने इसके बोल लिखे हैं और संगीत
तैयार किया है कमल मित्रा ने.




गीत के बोल:

माँ तेरी ममता कितनी प्यारी
कितना प्यार जताती है
कितना प्यार जताती है
माँ तेरी ममता कितनी प्यारी
कितना प्यार जताती है
कितना प्यार जताती है

श्वास-श्वास की रक्षा करती
श्वास-श्वास की रक्षा करती
पग पग प्राण बचाती है
कितना प्यार जताती है

तू ऋषियों की ऋद्धि सिद्धि
तू ब्रह्मा की भक्ति माँ
तू विष्णु की माया देवी
तू शंकर की शक्ति माँ
तू ऋषियों की ऋद्धि सिद्धि
तू ब्रह्मा की भक्ति माँ
तू विष्णु की माया देवी
तू शंकर की शक्ति माँ
तू माँ सोते भाग जगाने
भागी-भागी आती है
कितना प्यार जताती है

तू काली महाकाली दुर्गा
तू ही बाल भवानी है
तू पुराणों का सार शारदा
तू वेदों की वाणी है
तू काली महाकाली दुर्गा
तू ही बाल भवानी है
तू पुराणों का सार शारदा
तू वेदों की वाणी है
तू बालक को गोद में लेकर
जीवन गीत सुनाती है
कितना प्यार जताती है

माँ तेरी ममता कितनी प्यारी
कितना प्यार जताती है
कितना प्यार जताती है

माता दुर्गा भगवती की जय
माता दुर्गा भगवती की जय
……………………………………………………..
Maa teri mamta kitni pyari-Bansari bala 1957

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