Nov 10, 2015

बार बार तोहे क्या समझाए-आरती १९६२

सदाबहार शब्द जब मैंने पहली बार सुन था तब कुछ
ऐसा लगा जैसे किसी ताज़ी सब्जी की बात हो रही हो,
या हरियाली की. बहार शब्द को हरियाली से जोड़ के
देखा करते थे. शब्द सीखने का अधिकांश लोगों का
तरीका एक सा होता है. कुछ शब्द किसी घटना या
प्रसंग विशेष की याद दिलाते हैं.

आपको आज एक सदाबहार युगल गीत सुनवाते हैं जो
फिल्म आरती से लिया गया है. इसे लता और रफ़ी ने
गाया है. प्रदीप कुमार औए मीना कुमारी अभिनीत इस
फिल्म के गाने ज़बरदस्त हिट हैं. मजरूह सुल्तानपुरी
के लिखे गीत हैं और संगीत रोशन का. गीत की धुन
काफी आकर्षक है और इसे आसानी से गुनगुनाया भी
जा सकता है.




गीत के बोल:

बार बार तोहे क्या समझाये
बार बार तोहे क्या समझाये पायल की झनकार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार
चुप चुप के करता हैं इशारें चंदा सौ सौ बार
आ तोहे सजनी ले चलूँ नदियाँ के पार

चलते चलते रुक गये क्यों सजन मेरे
मिलते मिलते झुक गये क्यों नैन तेरे
झुके झुके नैना करते हैं तुमसे ये इकरार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार

दरिया ऊपर चांदनी आई संभल संभल
इन लहरों पर मन मेरा गया मचल मचल
एक बात कहता हूँ तुमसे ना करना इन्कार
आ तोहे सजनी ले चलूँ नदियाँ के पार

ना बीते ये रात हम मिलते ही रहे
बस तारों की छाँव में चलते ही रहे
नाम तेरा ले ले कर गाये धड़कन का हर तार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार
………………………………………………………………….
Baar baar tohe kya samjhaye-Aarti 1962

0 comments:

© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP