सुन गोरी खोल ज़रा-फूल बने अंगारे १९६३
पहचानती है. उन्होंने सभी प्रकार के गीत गाये हैं. उनके गाये
रोमांटिक गीत भी काफी चर्चित हुए हैं. आज आपको १९६३ की
फ़िल्म फूल बने अंगारे से एक गीत सुनवाते हैं जो रफ़ी और
कमाल बारोट का गाया हुआ युगल गीत है. इस नाम से कुल
दो फ़िल्में बन चुकी हैं. ८० के दशक में रेखा अभिनीत फ़िल्म
भी बनी है.
आपको पूर्व में मुकेश का गाया गीत-चंद आहें भरेगा सुनवा
चुके हैं, अब सुनते हैं अगला गीत. हास्य गीत है और इसे
सुन कर आपको आनंद आयेगा.
गीत के बोल:
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
याद है तुझे चौपाटी का वो फुटपाथ
हुई थी हमारी जहाँ पहली मुलाकात
देखूं ज़रा तू है वही या है कोई और
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
मैं हूँ तेरा हसबैंड तू है मेरी वाइफ
यही तो अफ़सोस रहेगा सारी लाइफ़
लाइफ़ पे करेंगे हम फिर कभी गौर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
याद है तुझे वो मेरा कान तोड़ तान
कौन था कहेगा वो थी मुर्गे की बांग
तूने उसी बांग पे कहा था वंस मोर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
सुन गोरी खोल ज़रा घूंघट का डोर
होने भी दे अँखियाँ फोर
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Sun gori khol zara-Phool bane angaare 1963

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