जी भर के देख लूं मैं तुम्हें-दीदार १९७०
आनंद लेने का. हम उनकी बात कर रहे हैं-Die hard fans.
इसका हिंदी भाषा अनुवाद है-मर-सख्त भक्त. अगर शब्दों
का ऐसे ही अनुवाद होता हो तो मतलब कुछ और ही
निकल आयेगा. हर कलाकार के कुछ ‘डाई हार्ड फैन्स’
होते हैं जिन्हें हम हिंदी में “परम भक्त’ कहते हैं. ये
शब्द कुछ ठीक सुनाई देता है.
कुछ किशोर कुमार भक्तों का ऐसा अनुमान है की किशोर
के गाने केवल देव आनंद और राजेश खन्ना के ऊपर ही
अच्छे लगते हैं. इनमें से २-३ भक्त अमिताभ का नाम
भी शामिल कर लेते हैं. इन्हें छोड़ के तो उन्होंने बाकी
के नायक और कलाकारों की धज्जियाँ अपने अंदाज़ में
उडाई हैं.
प्रस्तुत गीत भी कुछ वैसा ही है. एक किशोर कुमार भक्त
का कहना था-हीरो को मलेरिया जैसा कुछ बुखार हो गया
था उसके ठीक होने के तुरंत बाद ये गीत फिल्म लिया.
उसकी कमेन्ट्री यूँ थी- गीत शुरू होता है और कैमरा नीचे
को घूम जाता है. हीरो की टाइमिंग ठीक नहीं थी, गाना
शुरू होने के साथ उसके होंठ गाना गाने के बजाये कुछ
और कर रहे हैं. कैमरामैन समझदार था उसने कैमरा घुमा
लिया. इतनी देर में चोटी पे बैठे नायक नायिका झरने में
कूद जाते हैं. गाने की आवाज़ पर कोई फर्क नहीं पढता.
हिंदी फिल्मों के हीरो सुपरमैन होता है वो कुछ भी कैसे
भी कर सकता है. वो चाहे तो शीर्षासन करते करते भी
गाना गा सकता है.
वैसे हिंदी फिल्मों के नायक को अगर हम ओलिम्पिक में
भेजना शुरू कर दें तो पदकों का टोटा खत्म हो सकता है.
गीत में नायक नायिका के भाव गीत से मेल नहीं खा रहे
हैं. ये भी एक जगह सुनने पढ़ने को मिला था मुझे बरसों
पहले. उसके अलावा जो एक चीज़ मिली सुनने को वो थी-
गीत के संगीत के बारे में. कुछ भक्तों का कहना था-ये तो
बर्मन के अंदाज़ वाला संगीत है. ये उन भक्तों का अनुमान
है जो किशोर और आर डी बर्मन के संयुक्त भक्त हैं मतलब
दोनो के ही ‘डाई हार्ड फैन्स’. ऐसे गीत जो किशोर ने गाये
हैं और जिनका संगीत आर डी बर्मन ने तैयार किया वे गीत
उनकी नज़र में संगीत जगत के सबसे अनूठे गीत हैं. ये
उन भक्तों के विचार हैं. वास्तविकता अलग है और हमेशा ही
होती आई है.
एक बात कही जाती है कर्णप्रिय गीतों के बारे में विशेषकर
उन गीतों के लिए जो तथाकथित “बी” ग्रेड की फिल्मों में
पाए जाते हैं. फिल्म न चलने पर कहा जाता है गीत वेस्ट
हो गया. खैर एक बात पर मैं सहमत हूँ उन भक्तों से, वो
ये कि संगीतकार उषा खन्ना ने किशोर के लिए एक बेहद
उम्दा किस्म का गीत बनाया. इसके गीतकार वर्मा मलिक
को भी तहे-दिल धन्यवाद. ‘’शीशे की पालकी में जैसे शराब
हो’’. वाह वाह क्या उपमा है. यूनीक है !
गीत के बोल:
जी भर के देख लूं मैं तुम्हें
जी भर के देख लूं मैं तुम्हें, जुल्फें इधर कर लो
सारा जहाँ है उधर तुम नज़र जिधर कर लो
जी भर के देख लूं मैं तुम्हें
सुर्खी तेरे रुखसार की बदलेगी रंग बहार के
महक उठी फिजाएं भी ज़ुल्फ़ तेरी संवार के
अपनी हया की शोखियाँ अब तो इधर कर लो
सारा जहाँ है उधर तुम नज़र जिधर कर लो
जी भर के देख लूं मैं तुम्हें
भीगे लिबास में बदन लगता है जैसे गुलाब हो
शीशे की पालकी में कोई जैसे भरी शराब हो
बह्हों में बाहें डाल के दिल पे असर कर दो
सारा जहाँ है उधर तुम नज़र जिधर कर लो
जी भर के देख लूं मैं तुम्हें
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Jee bhar ke dekh loon main-Deedar 1970

2 comments:
धन्यवाद
स्वागत है आपका
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