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Nov 16, 2025

बाँधी रे काहे प्रीत-संकोच १९७६

रुपहले परदे का माया यही है जब आप चमक रहे होते हैं तो सब 
वाह वाह करते हैं और आपको दिल-ओ-जान से याद किया करते
हैं. एक बार आप हाशिये पर पहुंचे तो कोई पूछने वाला नहीं बचता

नवम्बर के इस महीने में कुछ दिल्मी कलाकार इस दुनिया को फानी
कह गए उनमें से एक हैं अपने ज़माने की खूबसूरत और प्रतिभा
संपन्न अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

अभिनेता संजीव कुमार से वो विवाह करना चाहती थीं. नियति 
को कुछ और मंजूर था. संजीव कुमार असमय संसार छोड़ चले
उसके बाद सुलक्षणा पंडित आजीवन अविवाहित रहीं. 

दर्शकों और सिने प्रेमियों से पूछा जाये तो अधिकांश यही बात 
कहेंगे कि इन दोनों का विवाह हो जाना था.

सुलक्षणा पंडित की आवाज़ में एक गीत सुनते हैं फिल्म 
संकोच का. इसे लिखा है एम् जी हशमत ने और धुना बनायींई
है कल्यानजी आनंदजी ने. अपने समय का ये एक बेहद चर्चित
गीत है.


गीत के बोल:

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

पास रही तो मैं ना समझी
दूर हुई तो जाना
दूर हुई तो जाना
प्यार में कैसे अपना बन के
कोई बने बेगाना

कैसे बचेगा अब जीवन
कैसे बचेगा अब जीवन
बिन साथी बिन मिलो

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

अंग लगी है पेड़ की बेला
लहर को मिले किनारा
लहर को मिले किनारा
बिन साजन के मैं हूँ अकेली
मेरा कौन सहारा
ऐसा सूना लागे जीवन
ऐसा सूना लागे जीवन
जैसे सुर बिन गीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत
बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत.
...............................................................................................
Bandhi re kaahe preet-Sankoch 1976

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Jul 27, 2020

लैला मैं लैला-क़ुर्बानी १९८०

बॉलीवुड में आज काफी सारे कलाकारों का जन्मदिन है उनमें से
कृति सेनन प्रमुख हैं. उसके अलावा सुपरस्टार राजेश खन्ना की
सुपुत्री रिंकी खन्ना, नायक विनय पाठक, नायक राहुल बोस और
प्रसिद्ध गायिका के एस चित्रा का भी आज जन्मदिवस है.

आज  बॉलीवुड के उत्तम कलाकारों में से एक और शोले फिल्म में
महाखलनायक की भूमिका निभाने वाले कलाकार अमजद खान
की पुण्यतिथि है.

फिल्म क़ुर्बानी से एक गाना सुनते हैं जिसमें अमजद खान ड्रम
बजाते नज़र आ रहे हैं.

गीत इन्दीवर का है जिसे कंचन और अमित कुमार ने गाया है.
संगीत कल्याणजी आनंदजी का है. गीत अपने ज़माने का बड़ा
हिट गाना है.





गीत  के बोल:

लैला मैं लैला
.
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.
.
.
..............................................................
Laila main laila-Qurbani 1980

Artists: Amjad Khan,

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Jul 12, 2020

मैं पीतल की पायलिया भी-कसम खून की १९७७

आज हिंदी फिल्म जगत की कई हस्तियों के जन्मदिन हैं जिनमें
से प्रमुख है निर्देशक बिमल रॉय और अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

बिमल रॉय को तो लगभग सभी गंभीर सिने प्रेमियों ने याद किया
ही होगा आज अपने अपने तरीके से अतः हम सुलक्षणा पंडित को
याद कर लेते हैं. आज वो काफी कष्ट में हैं और ईश्वर से यही
प्रार्थना है कि उन्हें स्वस्थ और चलने फिरने लायक रखे.

७० और ८० के दशक की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक सुलक्षणा
का फ़िल्मी कैरियर बतौर अभिनेत्री उलझन से शुरू हुआ. १९७१ की
फिल्म दूर का रही के लिए उन्होंने एक गीत गाया था. डबिंग
आर्टिस्ट के तौर पर उन्होंने संगीतकारों के साथ काम किया प्लेबैक
में पदार्पण के पहले. सन १९६७ की फिल्म तकदीर के गाने में भी
उनकी आवाज़ है-पप्पा जल्दी आ जाना.

एकमात्र फिल्मफेयर उन्हें अभिनय के लिए बल्कि गायकी के लिए
दिया गया-१९७५ की फिल्म संकल्प के एक गाने के लिए.

आज सुनते हैं सन १९७७ की फिल्म कसम खून की से अपने समय
में खूब बजा हुआ गाना जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. इस गीत
को लिखा है अनजान ने और इसकी धुन तैयार की है संगीतकार
जोड़ी कल्याणजी आनंदजी ने.



गीत के बोल:

मैं पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
सूरत भी क्या ख़ूबसूरत है मेरी
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों को शायद ज़रूरत हो मेरी
मैं अंग अपने जिसको सजा लूं
उसका नसीब खिल जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
तू मोल क्या मेरे दिल का चुकाये
वो हार मेरे गले का बनेगा
वो हार मेरे गले का बनेगा
जो प्यार में जान पर खेल जाये
मेरी नज़र से गिर जाये जो दिल
शोलों में वो ही घिर जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
………………………………………………
Main peetal ki payaliya bhi-Kasam khoon ki 1977

Artists: Sulakshana Pandit, Amjad Khan

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Jun 10, 2020

आगे आगे एक हसीना-प्रोफ़ेसर प्यारेलाल १९८१

हम बात कर रहे थे कि परदे के पीछे वाले कलाकार और
योगदानकर्ताओं के नाम प्रसिद्ध नहीं हो पाते. फिल्म बन
जाती है और उसके बाद गधेनुमा नायक नायिकाओं को भी
तथाकथित अपार लोकप्रियता मिल जाती है. जिस निर्देशक
ने उन्हें गधे से खच्चर या घोड़ा बनाया उसे कौन पूछता है.

कुछ निर्देशक और निर्माता फिल्मों से बड़े कद के हो जाते
हैं और जनता का एक हिस्सा उन्हें फिर यूँ पहचानता है-
फलाने की फिल्म है, ढिकाने की फिल्म है. जो कलाकार
निर्देशक की बात मान के चलते हैं उनसे सभी खुश रहते हैं
क्यूंकि निर्देशक के विज़न के अनुसार काम हो जाता है.

१० २० फ़िल्में कर लेने के बाद कई नायकों को निर्देशन की
खुजली होने लगती है और वे टांग अडाने का काम शुरू कर
देते हैं. सुझाव तक तो ठीक है मगर एक विधा से दूसरी विधा
में घुसने का ये प्रयत्न या तो फिल्म का कचरा कर बैठता है
या फिर नायक को निर्देशक बनने की ओर ले जाता है.

सन १९८१ की फिल्म प्रोफ़ेसर प्यारेलाल का निर्देशन बृज
सदाना ने किया था. कहा जाता है इस फिल्म को शूट करते
करते पूरे पांच साल लग गए और ९ घंटे की अजीब-ओ-गरीब
चीज़ों को एक ३ घंटे की फिल्म के ढाँचे में बिठाने के लिए
हृषिकेश मुखर्जी की मदद ली गई. उसके बाद भी फिल्म की
कहानी यूँ लगती है मानो ३-४ फिल्मों के उसल-मिसल हो.

फिल्म की दृश्यावलियाँ सुन्दर हैं और इस बात से कोई भी
इनकार नहीं कर सकता. वो समय था जब धर्मेन्द्र और इस
फिल्म की नायिका जीनत अमान के प्रशंसक बहुतेरे थे.

इस फिल्म के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं जीवन, अपने
ज़माने के मशहूर विलन. इस फिल्म में भी वे विलन की ही
भूमिका में हैं. आज उनकी पुण्यतिथि है अतः हम आपको ये
गीत सुनवा रहे हैं.
राजेंद्र कृष्ण गीत लेखक हैं और कल्याणजी आनंदजी संगीतकार.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:


हे आगे आगे
अरे आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

अरे शमा अभी तक
हे शमा अभी तक जली नहीं है आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने


होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
मयखाने भी अपने पैमाने भी अपने
मस्ती भरे है ज़माने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

मेरे हुजूर जाना ना दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
मेरे हुजुर जाना न दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
किसी से न कहना जी चुप चुप रहना
ये दिल पर लगे क्यों निशाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
गम है बिछड़ने का खेल है बिगड़ने का
बदलेंगे अब तो ठिकाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने
अरे शमा अभी तक जली नहीं है
आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
………………………………………..
Aage aage ek haseena-Professor Pyarelal 1981

Artists: Zeenat Aman, Jeevan, Others

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Jun 8, 2020

आ सपनों की रानी-तीन बहूरानियाँ १९६८

आज काफी सारी बॉलीवुड कलाकारों का जन्मदिन हैं उनमें
से प्रमुख हैं डिम्पल कपाडिया और शिल्पा शेट्टी, डिम्पल को
तो सोशल मीडिया पर खूब याद किया गया, शिल्पा शेट्टी को
भी उनके फैन्स ने याद किया मगर इक्का दुक्का जगहों पर
ही हास्य कलाकार राजेन्द्रनाथ का जिक्र है.

१९३१ में पेशावर में जन्मे राजेन्द्रनाथ मल्होत्रा फिल्मों में आने
से पहले नाट्य मंच से जुड़े. उन्हें शशधर मुखर्जी की फिल्म
दिल दे के देखो से संभवतः अपने फ़िल्मी कैरियर के उल्लेखनीय
सफ़र शुरुआत की थी.

उसके पहले वे हम सब चोर हैं फिल्म में एक छोटी सी भूमिका
में नज़र आये थे. कुछ जगह उल्लेख मिलता है कि उन्होंने १९३८
की फिल्म वचन में काम किया था. तथ्य शायद ये बतलाते हैं
कि ४० के दशक के उत्तरार्ध में प्रेमनाथ बम्बई आये उसके बाद
राजेन्द्रनाथ का आगमन हुआ मायानगरी में.

ढेर सारी फिल्मों के अलावा वे हम पांच सीरियल में नज़र आये
थे. मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम में वे हास्य से
अलग सामान्य सहायक कलाकार की भूमिका में थे जो दर्शकों
के लिए एक आश्चर्य जैसा था उस वक्त.

आपको पहले मेला फिल्म से राजेन्द्रनाथ पर फिल्माया गुआ एक
गाना सुनवा चुके हैं. आज सुनते हैं सन १९६८ की एक फिल्म
तीन बहुरानियाँ से उन पर फिल्माया गया गाना. उनके साथ हैं
शशिकला.

आनंद बक्षी का गीत है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत जिसे
किशोर कुमार और आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:

आ सपनों की रानी
आ आ आ सपनों की रानी
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम

आ सपनों के राजा
आ आ आ सपनों के राजा
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम

आ जा कर के इशारा हाँ
इशारा इशारा इशारा
मैंने तुझको पुकारा ओ हो
पुकारा पुकारा पुकारा
दिर दिर ताना दिर दिर ताना
जलता है तो जले ज़माना
तुम ता ना ना तुम ता ना ना
तिरकिट धा तिरकिट धा

आ आ आ सपनों की रानी
आ आ आ सपनों के राजा
नाचे गायें हम तुम लहराये हम तुम
मुस्कुराये हम तुम
आजा बम चिक बम चिक बम चिक
बम चिक बम चिक बम बम
………………………………………………………
Aa sapnon ki rani-Teen bahuraniyan 1968

Artists: Rajendranath, Shashikala

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Jun 7, 2020

मोहब्बत के दुश्मन-चमेली की शादी १९८६

फिल्मों में नाटकीयता तो पाई ही जाती है मगर नौटंकी के
अंश भी पाये जाते हैं. नौटंकी आम भाषा में थियेटर को भी
बोला जाता है. गांव के साथ ये शब्द ज्यादा जुडा हुआ है.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी चुस्त है और उसमें सीन
बदलने की रफ़्तार औसत से बेहतर है जो दर्शकों को बांधे
रखने की बड़ी वजह है. हमें सिनेमा की जितनी समझ है
उस अनुसार हम बतला देते हैं. क्रिटिकल ऐक्लैम, रिक्लेम
हमारी समझ में नहीं आता.

फिल्म में बादशाही सल्तनत को याद करते हुए ये गाना
फिल्माया गया है. शायद ये सलीम अनारकली के प्रेम के
प्रतीक के सबसे नज़दीक है, मेरे ख्याल से. ये एक खयाली
विचार जैसा है और जिसमें नायक के साथी दरबारियों में
तब्दील हो जाते हैं. गीत शुरू होते ही जिस मकान में वे
घुसते हैं उसके सामने की दीवार पे भगंदर का इलाज जैसा
कुछ लिखा होता है. ऐसे प्रतीक बारीकी से सिनेमा देखने
वाले ही देख और समझ पाते है.

गीत अनजान रचित है जिसे अनवर ने गाया है. इसकी धुन
तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.

गीत अनिल कपूर, पंकज कपूर और अमृता सिंह पर फिल्माया
गया है.




गीत के बोल:

फिर कोई बना मुग़ले आज़म
फिर कैद हुई अनारकली
पर आज सलीम झुकेगा नहीं
देखेगी तमाशा सारी गली

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

मोहब्बत को कोई तिज़ारत समझ के
या पत्थर की कोई ईमारत समझ के
ये ना सोच
ये ना सोच बाजार में बेच देगा
ये सौदा बहुत तुझको महँगा पड़ेगा
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत नहीं हैं मोहब्बत नहीं हैं
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत है इबादत मोहब्बत है पूजा

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

सितम ऐसे पहले भी तो हो चुके हैं
दीवाने मगर किसके आगे झुके हैं
दिलों पे न तेरी हुकूमत चलेगी
मोहब्बत ये ज़ंजीरो में न बँधेगी
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
मोहब्बत की दुनिया मोहब्बत की दुनिया
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
अगर कहीं हो वो सिकंदर भी ले ए

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

ये जोश-ए-जूनून जब बग़ावत पे आये
कटे तो कटे सर झुके न झुकाये
सितमगर है आया बुरा वक्त तेरा
दीवाना उलट देगा ये तख़्त तेरा
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
दिल के जोश-ए-जूनून का दिल के जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
जोश-ए-जूनून का जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
अगर मिल सके तो वो खंजर भी ले आ

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे न मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
………………………………………..
Mohabbat ke dushman-Chameli ki shadi 1986

Artists: Pankaj Kapoor, Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 6, 2020

उत्तर आई अखाड़े में-चमेली की शादी १९८६

इंसान को दो हाथ इसलिए दिये गए हैं कि वो उन्हें चला कर,
मेहनत कर के अपना पेट पाल सके. चलाना कैसे है उसके लिए
दिमाग दिया हुआ है. कभी कभी हाथ अपनी रक्षा और कुछ
विशेष हासिल करने के लिए भी चलाने पड़ते हैं.

फिल्म चमेली की शादी में नायक को नायिका आसानी से नहीं
मिलती. तरह तरह के दांव पेच, कुश्ती, ढिशुम ढिशुम, गायन,
नृत्य इत्यादि के बाद उसे मन का मीत प्राप्त होता है. अखाड़े
में नायिका जैसे दृश्य हमने डब्लू डब्लू एफ के महिला संस्करण
में ही देखे और वो भी ९० के बाद, जहाँ तक मेरा अनुमान ठीक
है. पुरुष प्रधान फ़िल्मी कथानकों में ऐसा देखने को मिला नहीं.

बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि वे मनुष्य योनि में पैदा
हो गये तो दो वक्त की रोटी और अन्य सुविधाओं पर उनका
जन्मसिद्ध अधिकार हो गया. वे हाथ पैर मारें या ना मारें उन्हें
भोजन मिलना चाहिए.

आसानी से मिलने वाली चीज़ों में प्रकृति द्वारा प्रदान वस्तुएं
जैसे पेड़ से स्वतः गिरे बेर, पक्षियों के खाए बेर ही मिला करते
हैं. इनमें आपके पास चॉईस नहीं होती. ताजा कोई चीज़ खानी
है तो पेड़ पर चढ़िये या तोड़ने का कोई जुगाड कीजिये तभी
प्राप्त होगा.

सहज कॉमेडी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक ने इसमें
अपनी पिछली फिल्मों की तुलना में कुछ अनूठे प्रयोग किये हैं.
अनूठा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि ऐसे कुछ प्रयोग श्वेत श्याम
युग की कुछ फिल्मों में भी हैं मगर समय की धूल भरी आंधी
में कई चीज़ें दब चुकी हैं बॉलीवुड की. कोशिश जारी है उन पर
से धूल हटाने की मगर पिछले दशकों में इतना कुछ सामने आ
चुका है कि ये प्रयत्न अपर्याप्त या यूँ कहें ऊँट के मुंह में जीरे
के समान लगता है. उसके अलावा स्वयं बॉलीवुड पुराने माल
को सहजने के प्रति गंभीर नहीं है.

सुनते हैं ये गीत मेल-फीमेल कुश्ती वाला जो अनजान का लिखा
हुआ है. कल्याणजी आनंदजी के संगीत निर्देशन में इसे गाया है
आशा भोंसले ने.



गीत के बोल:

अरे आ आ
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम है तो
अरे दम है तो आ कर ले
प्यार में पहलवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पंजा लड़ा की ना मारूं रे तुझको
नैना मिला के मैं मारूं
रसिया रे नैना मिला के मैं मारूं
प्यार का ऐसा दांव लगाऊँ
दंगल का भूत उतारूं
सर से दंगल का भूत उतारूं
मिल जायेगी
ओ मिल जाएगी मिटटी में
यहाँ तेरी जवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पी के यहाँ भांग आ संग मेरे
तूफां में तू भी उतर जा
रसिया रे तूफां में तू भी उतर जा

ये इश्क शोलों का दरिया है तो क्या
आ डूब के पार कर जा
प्यारे आ डूब के पार कर जा
पार तुझको
ऐ पार तुझको लगा देगी
तेरी प्रेम दीवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो सजना ओ सजना
मैंने यहाँ सेज फूलों की सजना
तेरे लिए हैं सजाई
हो ओ ओ सारे ज़माने को ठोकर लगा के
तुझसे लगन है लगाई
मैंने तुझसे लगन है लगाई
आ भी जा
अरे आ भी जा बाहों में
छोड़ दे आनाकानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम हैं तो आ
कर ले प्यार में पहलवानी
……………………………………..
Utar aayi akhade mein-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 5, 2020

तू जहाँ भी चलेगा-चमेली की शादी १९८६

क्या करें प्यार में तोतापरी आम भी अल्फांसो नज़र आता है.
अब इसका कोई हल नहीं है. ये तो फ्रीक्वेंसी मिलान की बात
है. मिले ससुर मेरा तुम्हारा. मेड फॉर ईच अदर.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी फ़िल्मी नाटकीयता से भरी
होने के बावजूद इर्द गिर्द की कहानी जैसी ही लगती है. आप
इसके कथानक में जैसे ही खोने लगते हैं, कोई गीत झटका मार
की आपकी तंद्रा भंग कर देता है और आप समझ जाते हैं कि
ये फिल्म ही है जो आप देख रहे हैं.

चमेली के गुणगान वाला एक और गीत है इस फिल्म में जिसे
परदे पर स्वयं चमेली गा रही है और आशा भोंसले परदे के पीछे.
गीत अनजान रचित है और संगीतकार वही हैं जो पिछले गीत
के लिए थे.

ये आम गीतों की तरह नहीं है. फ़िल्मी बरसात में रोमांस के
साथ ढिशुम ढिशुम भी है और नायक नायिका दोनों इसमें अपने
अपने तरीके से गुंडों से निपट रहे हैं. प्यार में वो तासीर है के
अकड़े जोड़ भी खुल जाते हैं. गीत के अंत में नायक यकायक
ज़ोरों से नाचना शुरू कर देता है और नायिका आश्चर्यचकित हो
जाती है ये अच्च्म्भा देख कर.



गीत के बोल:

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
हो तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
ओ जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
दिल की आहों में तू दिल ही राहों में तू
मेरी बाहों में तू है निगाहों में तू
मेरी रातों में नींदो में ख्वाबों में तू
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
हो करम या सितम हंस के झेलेंगे हम
प्यार होगा न कम टूटेगी न कसम
हर जनम में तू ही होगा मेरा सनम
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
…………………………………………….
Too jahan bhi chalega chaloongi-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 4, 2020

चमेली की शादी-शीर्षक गीत १९८६

आने जाने के सिलसिले में बॉलीवुड को एक और आघात
लगा बासु चटर्जी के अवसान से. दर्शकों के चहेते निर्देशक
बासु चटर्जी हालंकि काफी समय से फिल्म निर्देशन और
निर्माण से दूर रहे मगर उनकी उपस्थिति से शायद फिल्म
उद्योग के कल्पनाशील कलाकारों को बल ज़रूर मिलता था.

उनके योगदान को फ़िल्मी टेक्स्ट बुक के एक चैप्टर जैसा
समझा जा सकता था. अपने समकालीनों से वे कुछ मायनों
में अलग थे और वो है दर्शकों से जुड़ाव. उनकी फिल्मों से
दर्शक कब बंध जाता है उसे मालूम ही नहीं पड़ता है.

फिल्मों की सार्थकता एक गंभीर विषय है और उस पर
गंभीरता से कार्य करने वाले कुशल चितेरे बिरले ही हुए हैं
हम देश के सम्पूर्ण सिनेमा कि बात कर रहे हैं यहाँ पर.
सिनेमा केवल बॉलीवुड का नाम नहीं है उससे परे भी एक
दुनिया है जिसमें टी वी भी आता है. धारावाहिक एक और
माध्यम है अभिव्यक्ति का जो आज के समय में जनता से
ज्यादा जुडा है.

कुछ पोस्ट पहले ही हमने उन्हें याद किया था जब फिल्म
उस पार के गाने का जिक्त किया था. साहित्य से वे जुड़े
रहे और उनकी अधिकाँश फिल्मों के कथानक के मूल में
अच्छा साहित्य है. उन्होंने लेखक राजेंद्र यादव के उपन्यास
प्रेत बोलते हैं पर फिल्म बनाई-सारा आकाश जिसके संवाद
कमलेश्वर ने लिखे थे तो मन्नू भंडारी की कहानी यही सच है
पर रजनीगंधा फिल्म बनाई. ये संयोग हो सकता है कि
साहित्यकार पति-पत्नी दोनों की रचनाओं पर उन्होंने काम
किया.

अंग्रेजों के ज़माने से सरकारी दफ्तरों से आबाद, मध्यम वर्ग
और नौकरीपेशा लोगों के शहर अजमेर में जन्मे बासु चटर्जी
ने मध्यम वर्ग और उनकी जीवनचर्या पर काफ़ी फ़िल्में बनाईं.

दूरदर्शन के ज़माने में रजनी और ब्योमकेश बक्षी धारावाहिकों
ने काफ़ी प्रशंसा प्रसिद्धि अर्जित की. ये इस बात का प्रतीक है
कि शिद्दत से और समर्पण से किया गया कार्य किसी भी जगह
और माध्यम पर अपना रंग ज़रूर दिखाता है. सरलता भी ज़रूरी
है. दांत मांजने के लिए आपको जिमनास्टिक्स दिखलाने की
आवश्यकता नहीं है. सर्कस करने से दांत ज्यादा साफ होते हैं
ऐसा किसी वैज्ञानिक या डॉक्टर ने अभी तक कहीं नहीं लिखा.

बासु चटर्जी की फ़िल्में रजनीगन्धा और चितचोर की तो सभी बातें
किया करते हैं अतः हम उन फिल्मों के विवरण यहाँ रिपीट नहीं
करना चाहेंगे सिवाय इस बात के कि चितचोर का रीमेक जैसा
राजश्री ने मैं प्रेम की दीवानी हूँ में बनाया मगर वो समय की
कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया.

९० के दशक में उनकी एक फिल्म आई थी गुदगुदी जिसका
कथानक तो अच्छा था मगर उसके प्रभावशाली से नायक की
लुल्ल्पन वाली कॉमेडी ने फिल्म का प्रभाव कम कर दिया. इस
रोल में शायद फारूक शेख जैसा कलाकार ज्यादा उपयुक्त होता.
ढंग की कॉमेडी शायद अभी तक पब्लिक के समझ आई नहीं.
इन सब नामचीनों से तो राजपाल यादव बेहतर कर लेता है.
निर्देशक कभी कभी अपने आप को कितना असहाय मह्सूस
करता होगा जब उसे अपने मन माफिक काम या कलाकार ना
मिले.

हम याद करेंगे चमेली की शादी फिल्म को जिसे सभी वर्ग के
दर्शकों की सराहना मिली थी और सिनेमा हॉल का दृश्य भी उस
फिल्म के समय काफ़ी रोचक हो जाया करता था. पहलवानी और
ब्रह्मचारी चरणदास उर्फ अनिल कपूर, चरणदास के गुरु पहलवानी
के उस्ताद ओम प्रकाश, कल्लूमल कोयले वाला, उसकी बेटी चमेली,
कल्लूमल की बीबी के रोल में भारती अचरेकर, वकील के रोल में
अमजद खान, चरणदास के भाई के रोल में सत्येन कप्पू, भूतनी के
संवाद बोलने वाले अन्नू कपूर और राम सेठी जो अमिताभ की
फिल्मों के आवश्यक हिस्सा होते थे किसी समय प्यारेलाल के रूप
में, इन सभी के अभिनय ने इस फिल्म को यादगार बना दिया.
इस फिल्म के गीत खूब चले और बजे. 

फिल्म से सुनते हैं शीर्षक गीत जिसे अनिल कपूर और कोरस ने
गाया है. अनजान की रचना है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत.



गीत के बोल:

सब्र का फल मीठा होता है
बाद में पढ़ लेना
.
.
.
.
........................................................
Chameli ki shadi-Titlesong

Artists: Anil Kapoor

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Apr 12, 2020

मैं क्या जानूं काहे लागे-चंद्रसेना १९५९

सन १९५९ में रिलीज़ हुई फिल्मों में जो लता मंगेशकर के
उल्लेखनीय गीत हैं उनमें कुछ और भी हैं जैसे फिल्म
अनाड़ी के दो गीत-तेरा जाना और वो चाँद खिला जिसमें
से बाद वाला दत्ताराम ठेके के लिए जाना जाता है. ठेका
ढोलक का, वो दूसरा वाला नहीं जी.

गीत हम आपको और भी बतलाते रहेंगे जब जब १९५९
की फिल्मों का उल्लेख होगा.

भीषण गर्मी दस्तक दे रही है ऐसे में लिम्का शिमका पीने
के बजाये ये गाना सुन लेते हैं. सावन का नाम सुनते ही
कलेजे में ठंडक पड़ जाती है.

इस गीत के गीतकार और संगीतकार क्रमशः गुलशन बावरा
और कल्याणजी-आनंदजी हैं. इसे सुन के ऐसा आभास होता
है मानो ये धुन किसी और गीत में भी इस्तेमाल की गई
हो-जहाँ तक मेरा अंदाजा है किसी धार्मिक गीत में.



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
मैं क्या जानूं
मैं क्या जानूं काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे
मैं क्या जानूं  हे
मैं क्या जानूं काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे
हो जादू तुझ पर डाला

सर पे आँजन ठहरे आँचल फार फार उड़ता जाये
रह रह के गोरे मुखड़े पे लट आ के लहराये
सर पे आँजन ठहरे आँचल फर फर उड़ता जाये
रह रह के गोरे मुखड़े पे लट आ के लहराये
कौन है गोरी
कौन है गोरी तेरी उलझी लट सुलझाने वाला
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे

मैं क्या जानूं 
मैं क्या जानूं  काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला हो ओ
जादू तुझ पर डाला

आज मोहे यूँ लागे जैसे बजे कोई शहनाई
चन्दा की बारात गगन से तारों के संग आई
आज मोहे यूँ लागे जैसे बजे कोई शहनाई
चन्दा की बारात गगन से तारों के संग आई
आ जाओ कि
आ जाओ कि दुनिया में अब होने लगा उजाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे

मैं क्या जानूं 
मैं क्या जानूं  काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला हो ओ
जादू तुझ पर डाला
……………………………………………..
Main kay janoon-Chandrasena 1959

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Mar 30, 2020

दिल झूम झूम लहराये-चंद्रसेना १९५९

भूले बिसरे गीतों में अगला आपके लिए पेश है १९५९ की फिल्म चंद्रसेना
से. उल्लास वाला गीत है और कल्याणजी आनंदजी के शुरूआती धमाकों
में से एक है. गौरतलब है इसके गीतकार इन्दीवर हैं.

एक बार फिर हम कहेंगे इस साल जो उल्लेखनीयगीत आये लता के उनमें
-इंतज़ार और अभी फिल्म चार दिल चार राहें से, खोई खोई अँखियाँ नींद
बिना, चाँद फिल्म से, दिल को लाख संभाला-गेस्ट हाउस, दगा दगा वई वई
-काली टोपी लाल रुमाल, लव मैरिज का कहे झूम झूम रात ये सुहानी, 
चाचा जिंदाबाद का बैरन नींद ना आये, दिल का खिलौना-गूँज उठी शहनाई,
उन आँखों में नींद कहाँ-मिनिस्टर, नैन द्वार से मन में वो आ कर-सावन,
मैं तुम्ही से पूछती हूँ-ब्लैक कैट, भैया मेरे राखी के बंधन को-छोटी बहन,
मैं नशे में हूँ का गीत-सजन संग काहे नेहा लगाये, तुम हो साथ रात भी हसीं
है-मोहर, मैं तो जनम जनम की प्यासी फिल्म कवि कालिदास से, धानी
चुनर मोरी हाय रे फिल्म मधु का, तेरा जलवा जिसने देखा-उजाला, आ जा
भंवर सूनी डगर-रानी रूपमती, तेरा तीर ओ बेपीर-शरारत, ऐ दिल जुबां न
खोल-नाच घर, इसके अलावा चाँद फिल्म से एक और गीत-आ जा चांदनी.
अगर तेरे सुर और मेरे गीत-गूँज उठी शहनाई को शामिल नहीं किया तो
अन्याय होगा.

इन गीतों के साथ ब्ला-ब्ला अगड़म बगड़म लिख डालें और बन गई वो
महंगे वाले अंग्रेजी ब्लॉग की पोस्ट. Exquisite, elegant, magnificent, superb,
awesome, awful, subtle, intricate, fine, well executed,  la crème laga crème
जैसे शब्द घुसेडिये और ब्रिटिश पार्लियामेंट वाला भाषाई स्ट्रक्चर इस्तेमाल
कर के गुड़ बनाइये फिर देखिये सारी मक्खियाँ वहीँ बेहोश हो हो के गिरेंगी.




गीत के बोल:

दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये

ऐ मेरे दिल मुझको थामना
ऐ मेरे दिल मुझको थामना
होगा उनसे आज सामना
होगा उनसे आज सामना
पहला प्यार पहली ही बार
संहार हो ना जाये

दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये

मेरी प्रीत उनको पुकारती
मेरी प्रीत उनको पुकारती
लिए खड़ी आँखों में आरती
लिए खड़ी आँखों में आरती
लागे लाज क्यूँ ना जाने
जिया डोल डोल जाये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
…………………………………………..
Dil jhoom jhoom lehraye-Chandrasena 1959

Artist: Girijia

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Mar 27, 2020

हे अब्दुल्ला नागिन वाला आ गया-इशारा १९६४

हिंदी फिल्मों में कुछ सिचुएशनल सॉंग्स ऐसे भी बने हैं जो
नियमित रूप से भले ही ना बजते मिलें मगर उन्हें जब भी
सुनो आप आनंदित अवश्य होते हैं.

फिल्म अभिनेता जॉय मुखर्जी के हिस्से कुछ बढ़िया गीत आये
जिन्हें सुन कर उनके समकालीनों को रश्क अवश्य हुआ होगा.
ऐसा ही एक गीत है फिल्म इशारा से जो कि एक युगल गीत
है लता और रफ़ी का गाया हुआ.  मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे
गीत के लिए संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने.




गीत के बोल:

आप गीत पर नागिन डांस करें तब तक बोल हाज़िर
होते हैं.
आ आ आ आ आ आ आ
हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्ला नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की हो
हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला

नागिन जब लचके रहना ज़रा बच के
नागिन जब लचके रहना ज़रा बच के
ये नैना जिसपे मोड दे दीवाना कर के छोड़ दे
दीवानी दिलदार की हो

हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला

हम भी हैं कमाल के जादू नहीं डालते
अरे हम भी हैं कमाल के जादू नहीं डालते
पर अपनी बात बात पे रह जाये नाच नाच के
महफ़िल ये संसार की हो ओ

हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला
………………………………………………………………
He Abdullah nagin wala aa gaya-Ishara 1964

Artists: Joy Mukherji, Vaijayantimala

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Jan 22, 2020

सुनो रे सुनो एक बात-बैराग १९७६

खेत खलिहान हिट्स की ओर लौटते हैं एक बार फिर.
मस्ती भरा गीत है ये जिसमें छेड़ छाड़ भी है. १९७६
की हिट फिल्म बैराग का यह गीत है.

कैटेगरी बनाने वाले सयाने ऐसे गीतों को मियां-बीबी
हिट्स भी कहते हैं. ऐसे गीत जिसमें मियां बीबी हों.
दिलीप कुमार, सायरा बानो और ढेर सारे सहायक
कलाकारों पर फिल्माया गया गीत रफ़ी और लता ने
गाया है. आनंद बक्षी इसके रचनाकार हैं और इसका
संगीत कल्याणजी आनंदजी की देन है.




गीत के बोल:

अरे सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
ओए सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
झूठ है या सच है ये तुम जानो
अरे झूठ है या सच है ये तुम जानो
मैं बैरागी मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ

सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
अरे सुनो रे सुनो एक बात सुनाऊँ
झूठ है या सच है ये तुम जानो
झूठ है या सच है ये तुम जानो
मैं बैरागन मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ


ओ ओ ओ ओ ओ देखो इन बेदर्दों को छोड़ के लाज के पर्दों को
इन बेदर्दों को छोड़ के लाज के पर्दों को
गली-गली में औरतें छेड़ती फिरती हैं इन मर्दों को
आपने सच फ़रमाया है सच्चा शोर मचाया है
आपने सच फ़रमाया है सच्चा शोर मचाया है
मर्दों के दिन बीत गए औरत का ज़माना आया है
औरत का ज़माना आया है
मैं ना मानूं
तुम ना मानो
मैं क्या जानूँ
तुम क्या जानो
मैं तो सबका दिल बहलाऊँ

मैं बैरागी मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागी नाचूँ गाऊँ

हो ओ ओ ओ लिखने वाला लिखता है इक ऐसा चश्मा बिकता है
लिखने वाला लिखता है इक ऐसा चश्मा बिकता है
जिस चश्मे के अन्दर से भई अंधों को भी दिखता है
अंधों को भी दिखता है
जग में ऐसे बंदे हैं बंदों के ऐसे धंधे हैं
जग में ऐसे बंदे हैं बंदों के ऐसे धंधे हैं
क्या करना है देख के जग को अच्छे हैं जो अंधे हैं
तू अनजाना
तू अनजानी
तू दीवाना
तू दीवानी
दीवाने को क्या समझाऊँ

मैं बैरागन मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
मैं बैरागन नाचूँ गाऊँ
………………………………………………………
Suno re suno ek baat sunaoon-Bairaag 1976

Artists: Dilip Kumar, Saira Bano

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Nov 12, 2019

मैं हूँ मस्त मदारी-मदारी १९५९

श्वेत श्याम युग से एक मधुर युगल गीत सुनते हैं जो
सन १९५९ की फिल्म मदारी का शीर्षक गीत है. इस
गीत का मदारी मस्त है जैसा कि हमने इस गीत से
समझा.

पंडित मधुर का लिखा गीत है जिसे मुकेश ने गाया है
कल्याणजी आनंदजी की धुन पर.




गीत के बोल:

मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी

खेल-खेल में मेल हो दिल का ऐसा खेल दिखाऊँ
नज़रों की मैं डोर फेंक कर तेरा दिल उलझाऊँ
खेल-खेल में मेल हो दिल का ऐसा खेल दिखाऊँ
नज़रों की मैं डोर फेंक कर तेरा दिल उलझाऊँ
पागल को पागल पहचाने जाने नहीं अनाड़ी

हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी

छुपने वाले छुप कर आते छुप कर करें इशारा
लेकिन दर्द छुपाएँ कैसे तीर-ए-नज़र का मारा
छुपने वाले छुप कर आते छुप कर करें इशारा
लेकिन दर्द छुपाएँ कैसे तीर-ए-नज़र का मारा
एक अदा पे हम करते क़र्बान ये दुनिया सारी

मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
.......................................................
Main hoon mast madari-Madari 1959

Artist: Ranjan

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Nov 10, 2019

रूठे रूठे पिया-कोरा कागज़ १९७४

फिल्म कोरा कागज़ एक साफ़ सुथरी फिल्म है जिसके
कथानक में गंभीरता ज्यादा है. फिल्म में कुछ पल
ऐसे भी हैं जिनमें हास्य और छेड़ छाड है. आम तौर
पर नायक नायिका को छेड़ता नज़र आता है. प्रस्तुत
गीत में नायिका नायक को छेड़ रही है. खिसियाने से
दिख रहे नायक का नाम विजय आनंद है.

एम जी हशमत के लिखे गीत की धुन बनाई है जोड़ी
कल्याणजी आनंदजी ने और इसे लता मंगेशकर ने
गाया है. इस गीत के लिए लता मंगेशकर को फिल्मों
का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. फिल्म के संगीत के
लिए कल्याणजी आनंदजी को उस साल का फिल्मफेयर
पुरस्कार मिला था.



गीत के बोल:

रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
आज न जाने बात हुई क्या
क्यों रूठे मुझसे
जब तक वो न बोलें मुझसे
मैं समझूँ कैसे
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

वो बैठे हैं कुछ ऐसे
शादी में दुल्हन जैसे
क्या बन के दुल्हा मैं जाऊँ
और उनकी माँग सजाऊँ
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
जोड़ी सजे कैसे
रूठे रूठे हो रूठे रूठे
हाँ हाँ रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

क्या मुझसे हसीं हैं क़िताबें
पिया जिनको प्यार से थामे
मैं नैन मिलाना चाहूँ पर
नैन मिला ना पाऊँ
सौतन चश्मा बीच में आये
सौतन चश्मा बीच में आये
नैन मिलें कैसे
रूठे रूठे पिया

क्या बचपना कर रही हो
........................................................
Roothe roothe piya-Kora kagaz 1974

Artists: Jaya Bhaduri, Vijay Anand

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Oct 31, 2019

यार मेरा पैसे का दीवाना-आखिरी डाकू १९७८

मर्फी के नियम के अनुसार जिस चीज़ की सबसे ज्यादा
ज़रूरत आपको होती है वही उस समय नहीं होती. वही
चीज़ आपको अनुपलब्धता के चलते सबसे ज्यादा दुखी
करती है.

किसी ने कहा है-पैसा ही सब कुछ नहीं है मगर किसी
और प्रेक्टिकल किस्म के सयाने ने कहा है-पैसा सब कुछ
नहीं मगर ज़रूरतों को पूरी करने के लिए ज़रूरी है. रोड
पर चलते हुए सुबकने से बेहतर है मर्सीडीज़ में बैठ के
सुबकना. चीजों की टाइमिंग और प्लेसमेंट कितना मायने
रखता है. एक सड़ा हुआ पिज्ज़ा मूंगफली के ठेले पर
शायद ना बिके मगर वो किसी आलीशान रेस्तरां में बड़े
आराम से बिना अमूल माचो के बिक जायेगा. उस पर
परोसने वाले को टिप भी मिलेगी.

गीत की बात करते हैं. इसमें मसला गंभीर है मगर इस
गीत में नायिका इस बात को थोडा सहज भी बनाती है
आगे के अंतरे में. रेखा ही रेखा छाई हुई हैं पूरे गीत में.
दो चोटी वाली रेखा क्यूट और अडोरेबल दिखलाई दे रही
हैं. रणधीर कपूर फिल्म के एक्स्ट्रा कलाकार से दिखलाई
दे रहे हैं.





गीत के बोल:

बुरा अगर न माने तो सच बात कह दूं
बड़े लोग वो हैं जो दिल के बड़े हैं
ये सोना ये चांदी है भगवान जिनका
ज़माने में ऐसे तो लाखों पड़े हैं

यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना

जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
दौलत का मुझपे वो यूँ रौब डाले
जाने कोई लाटसाहब हो जैसे
वो सोने और चांदी की शमा का परवाना
मैं पागल दिलदार के
यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना

ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये बरसात दौलत की बरसी कहाँ से
कोई काम खोटा तो तूने किया रे
तू कागज़ के फूलों का सौदाई क्या जाने
रूत रंगीन बहार की

यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना
………………………………………………….
Yaar mera paise ka deewana-Akhiri Daku 1978

Artists: Rekha, Randhir Kapoor

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Oct 30, 2019

कभी ना जिया लागे तो-आखिरी डाकू १९७८

आखिरी शब्द से मतलब ये कतई नहीं है कि प्रस्तुत
वस्तु या पहलू आखिरी ही हो. ये तो मन को बहलाने
वाली बात है. सही है ना गुप्त, सुप्त और लुप्त से मित्रों.
इतिहास गवाह है सबसे बढ़िया और आखिरी शब्दों को
समय ने धता बताई है.

सुनते हैं आखिरी डाकू से एक गीत हेलन पर फिल्माया
गया. आशा भोंसले गायिका हैं. अनजान का लिखा गीत
है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत. गीत उम्दा है
मगर जब फ़िल्मी भैंस पानी में सरक जाती है तो गीत
संगीत क्या कर लेंगे. फिर एक और बात है-पञ्च वाली.
हाँ वही घूंसे वाला पञ्च. पूरे एल्बम में दम होगा तो
वो हिट ज़रूर होगा. कल्याणजी आनंदजी को फ़ोकट की
वाह वाह करने वाले फिल्म और संगीत समीक्षक नहीं
मिले.

गीत में आपको विनोद खन्ना और रणजीत भी नज़र
आयेंगे. इसे मुजरा गीत के नाम से पहचाना जाता है.
पुराने ज़माने के हीरो पी. जयराज पुलिस इन्स्पेक्टर के
रूप में नज़र आयेंगे जिन्होंने भेस बदल रखा है. उनके
साथ उनका साइड किक भी है जिसका नाम मुहे याद
नहीं आ रहा है अभी.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ हाय
घड़ियाँ गिन गिन दिन बीते
और तारे गिन गिन रैन
एक उमरिया वो आये
जब कहीं ना आये चैन हाय

कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
जो मांगे मिले ना हाँ मांगे मिले न
जो मांगे मिले न वो बिन मांगे पईयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो

आ आ आ आ आ आ आ
है नदिया में पानी हाँ सागर में पानी
है नदिया में पानी हाँ सागर में पानी
पानी बिना फिर भी प्यासी जवानी
जब दिल जलाये उमरिया दीवानी
जब दिल जलाये उमरिया दीवानी
तो नदिया किनारे ना जइयो ना जइयो
मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो

आ आ आ आ आ आ आ
ये अंगूरी रस में तो नकली नशा है
ये अंगूरी रस में तो नकली नशा है
असली नशा तो राजा दिल में बसा है
दिल पूछे पीने में कैसा मज़ा है
दिल पूछे पीने में कैसा मज़ा है
तो बोतल में डूब जइयो ना जइयो
मेरी गली अइयो

कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
जो मांगे मिले ना हाँ मांगे मिले न
जो मांगे मिले न वो बिन मांगे पईयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
………………………………………………
Kahin na jiya lage-Akhiri Daku 1978

Artists: Helen, Vinod Khanna, Ranjeet, Jairaj

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Sep 19, 2019

दुनिया वालों...गली गली-छलिया १९६०

नारी की स्तिथि पर ये गीत बनाया गया है. पुरुष परधान
समाज में उसके लिए क्या जगह है इस पर प्रकाश डालने
की कोशिश की गई है.




गीत के बोल:

दुनिया वालों राम सीता की नई कहानी सुन लो
वाल्मीक से ख़ूब सुनी अब मेरी ज़ुबानी सुन लो

गली गली सीता रोये आज मेरे देश में
सीता देखी राम देखा आज नए भेष में
……………………………………………..
Duniya walon gali gali-Chhalia 1960

Artist:

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Sep 17, 2019

मेरे टूटे हुए दिल से-छलिया १९६०

सुनते हैं फिल्म छलिया से मुकेश का गाया लोकप्रिय
गीत. इसे कमर जलालाबादी ने लिखा है और इसकी
दनु तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.

अपनी सूची पर गौर फरमाने के बाद मैं ये पाया इस
गीत को बहुत पहले शामिल कर लेना चाहिए था. हम
खा-म-खां रेयर और अनजाने गीतों के चक्कर में पड़
गए और मक्खियाँ उड़ के गुड वाले ब्लॉग पर जा
पहुंची.

दिल ही एक ऐसी चीज़ है इंसान के शरीर में जो पद्य
में टूटती है बिखरती है. दिल की नाज़ुक रगें भी टूट
जाती हैं ऐसा हमने गीतों के माध्यम से समझा. उसके
अलावा वास्तविकता में तो हड्डियां टूटा करती हैं.



गीत के बोल:

मेरे टूटे हुए दिल से कोई तो आज ये पूछे
के तेरा हाल क्या है के तेरा हाल क्या है
मेरे टूटे हुए दिल से

किस्मत तेरी रीत निराली, ओ छलिये को छलने वाली
फूल खिला तो टूटी डाली
जिसे उलफ़त समझ बैठा, मेरी नज़रों का धोखा था
किसी की क्या खता है
मेरे टूटे हुए दिल से

माँगी मुहब्बत पाई जुदाई, दुनिया मुझको रास न आई
पहले कदम पर ठोकर खाई
सदा आज़ाद रहते थे हमें मालूम ही क्या था
मुहब्बत क्या बला है
मेरे टूटे हुए दिल से
………………………………………….
Mere toote hue dil se-Chhalia 1960

Artist: Raj Kapoor

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Sep 15, 2019

मेरी जान कुछ भी कीजिए –छलिया १९६०

मुकेश और लता मंगेशकर का गाया एक युगल गीत.

फिल्म: छलिया
वर्ष: १९६०
गीत: कमर जलालाबादी
संगीत: कल्याणजी आनंदजी



गीत के बोल:

मेरी जान
मेरी जान कुछ भी कीजिये
चाहे जान मेरी लीजिए
पर दिल हमीं को दीजिए
पर दिल हमीं को दीजिए

कभी याद हमें भी कीजिये
कभी नाम हमारा लीजिए
सपनों में आया कीजिये
सपनों में आया कीजिये
…………………………………………..
Mei jaan kuchh bhi kijiye-Chhalia 1960

Artists: Raj Kapoor, Nutan

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