मितवा-कभी अलविदा ना कहना २००६
जाता था पोस्ट करने के लिए. आज सुना इसे तो याद रखा
कि इसे ब्लॉग के पाठक और मित्रों को भी सुनवाना है.
पहले पहल इस गीत को सुना था कहीं तो ऐसा लगा था कि
इसको या तो के-के ने गाया है या शंकर महादेवन ने. फिर
एक दिन इसे ध्यान से सुना तो गायक अलग सा लगा और
आवाज़ कुछ ज्यादा सधी सी सुनाई पड़ी. विवरण देखने पर
मालूम पड़ा कि इसे शफ़कत अमानत अली ने गाया है. अच्छा
गीत है, इसे जावेद अख्तर ने लिखा है और शंकर-एहसान-लॉय
की तिकड़ी ने इसे संगीतबद्ध किया है. शफ़कत अमानत अली
पटियाला घराना के गायक हैं और पाकिस्तानी मूल के हैं.
किशोर कुमार का एक गीत है ‘चलते चलते’ फिल्म से जिसकी
पंक्तियाँ हैं-कभी अलविदा ना कहना. इसी नाम से फिल्म बन
गयी २००६ में.
उनके बॉलीवुड में आगमन की कहनी भी दिलचस्प है . शंकर
महादेवन ने रेडियो पर उनका एक गीत ‘आँखों के सागर’ सुना
उसके बाद उन्होंने शफकत का नंबर ढूंढ निकला और उसके बाद
कभी अलविदा ना कहना के गीत के लिए शफ़कत की सेवाएं
ली गईं. ये गीत अपने अवतरण के साथ ही प्रसिद्धि के चरम
पर पहुँच गया. आइये सुनें यही गीत.
गीत के बोल:
मेरे मन ये बता दे तू, किस ओर चला है तू
क्या पाया नहीं तुने, क्या ढूँढ रहा है तू
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या
मितवा
ये खुद से तो ना तू छुपा
जीवन डगर में, प्रेम नगर में
आया नज़र में जब से कोई हैं
तू सोचता है, तू पूछता हैं
जिसकी कमी थी क्या ये वही है
हाँ ये वही है, हाँ ये वही है
तू एक प्यासा और ये नदी हैं
काहे नहीं इसको तू खुलके बताये
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या
तेरी निगाहें, पा गयी राहें
पर तू ये सोचे, जाऊं ना जाऊं
ये ज़िन्दगी जो, है नाचती तो
क्यूँ बेड़ियों में है तेरे पाँव
प्रीत की धुन पर, नाच ले पागल
उड़ता अगर है, उड़ने दे आँचल
काहे कोई अपने को ऐसे तरसाए
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या
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Mitwa-Kabhi alvida na kehna 2006

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