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Mar 23, 2016

सुनिए तो-यस बॉस १९९७

सन १९९७ की म्यूजिकल हिट फिल्म है यस बॉस. इसके
तीन गीत आप सुन चुके हैं पहले. जावेद अख्तर के लिखे
गीत और जतिन ललित के संगीत से सजी फिल्म का चौथा
गीत सुना जाए जो एक पार्टी में गाया जा रहा है. फिल्म
को आप सम्पूर्ण नहीं तो ९० प्रतिशत मनोरंजन कह सकते
हैं. पैसे वसूल फिल्म है ये. हास्य फिल्मों में इसे गिना जाता
है.

शाहरुख खान और जूही चावला की जोड़ी कुछ समय के लिए
हिट मानी जाती थी. ये उसी दौर की फिल्म है. बॉलीवुड की
प्रमुख हीरोइनों में गिनी जाने वाली जूही चावला आजकल किसी
किसी फिल्म में चरित्र किरदार निभाती नज़र आती हैं. उसके
अलावा वे अपने घर संसार में व्यस्त हैं.





गीत के बोल:


सुनिए तो रुकिए तो
क्यूँ हैं खफा अरे कहिये तो
ऐसी क्या जल्दी जाने की
दीवाना हूँ मैं सुनिए दीवाने की

सुनिए तो रुकिए तो
क्यूँ हैं खफा अरे कहिये तो
ऐसी क्या जल्दी जाने की
दीवाना हूँ मैं सुनिए दीवाने की

ये शाम का दिलकश मंज़र ये साहिल और समुन्दर
कहते हैं आप ना जाएँ हम प्यार का करम फरमाएं
ये शाम का दिलकश मंज़र ये साहिल और समुन्दर
कहते हैं आप ना जाएँ हम प्यार का करम फरमाएं

सुनिए तो
कहती हैं बलखाती लहरें
आप ज़रा कुछ देर तो ठहरें

सुनिए तो रुकिए तो
क्यूँ हैं खफा अरे कहिये तो
ऐसी क्या जल्दी जाने की

दीवाना हूँ मैं सुनिए दीवाने की

इठलाती शोल्झ हवाएं भीगी रंगीन फिजाएं
जो आपको देखे जाए तो सीखे और अदाएं
इठलाती शोल्झ हवाएं भीगी रंगीन फिजाएं
जो आपको देखे जाए तो सीखे और अदाएं

सुनिए तो
ये जुल्फें जो देखें बादल
सारे बरस बरसें वो बादल

हे सुनिए तो रुकिए तो
क्यूँ हैं खफा अरे कहिये तो
ऐसी क्या जल्दी जाने की
दीवाना हूँ मैं सुनिए दीवाने की

हे सुनिए तो रुकिए तो
हाँ क्यूँ हैं खफा अरे कहिये तो
ऐसी क्या जल्दी जाने की
दीवाना हूँ मैं सुनिए दीवाने की
....................................................................
Suniye to-Yes Boss 1997

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Mar 21, 2016

मैं कोई ऐसा गीत गाऊं-यस बॉस १९९७

सन १९९७  की फिल्म यस बॉस से एक और लोकप्रिय गीत
सुनते हैं आज. कुमार सानू के युग में अभिजीत ने भी अपना
एल अलग स्थान बना लिया था हिंदी फिल्म संगीत के क्षेत्र
में.

फिल्म-यस बॉस
वर्ष-१९९७
बोल- जावेद अख्तर
संगीत- जतिन ललित
गायक-अभिजीत, अलका याग्निक



गीत के बोल:

मैं कोई ऐसा गीत गाऊँ
कि आरजू जगाऊँ
अगर तुम कहो
तुमको बुलाऊँ
कि पलके बिछाऊँ
कदम तुम जहाँ जहाँ रखो
ज़मीं को आसमां बनाऊँ
सितारोँ से सजाऊँ
अगर तुम कहो

मैं तितलियों के पीछे भागूं
मैं जुगनूओं के पीछे जाऊँ
ये रंग हैं वो रोशनी हैं
तुम्हारे पास दोनों लाऊँ
जितनी खुश्बूएं बाग में मिले
मैं लाऊँ  वहां पे  के तुम हो जहाँ
जहाँ पे एक पल भी ठहरूं
मैं गुलसितां बनाऊँ
अगर तुम कहो

अगर कहो तो मैं सुनाऊँ
तुम्हें हंसी कहानियाँ
सुनोगे क्या मेरी जुबानी
तुम एक परी की दास्ताँ
या मैं करूँ  तुम से बयाँ
कि राजा  से रानी मिली थी कहाँ
कहानियों के नगर में
तुम्हें ले के जाऊँ
अगर तुम कहो
…………………………………………………………………………………..
Main koi aisa geet gaaon-Yes Boss 1997

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Mar 20, 2016

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा-दीवाना १९९२

बहुत दिनों के बाद किसी की फरमाईश आई है ब्लॉग पर.
आइये सुना जाए ऋषि कपूर, दिव्या भारती, शाहरुख खान
अभिनीत फिल्म दीवाना से एक और गीत जो काफी बड़ा
हिट गीत है. 

फिल्म-दीवाना
साल-१९९२
गायक-कुमार सानू
गीत-समीर
संगीत-नदीम श्रवण
परदे पर-ऋषि कपूर, दिव्या भारती




गीत के बोल:

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा
तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

नसीबा भी क्या रंग लाया
कहाँ ला के हमको मिलाया
नसीबा भी क्या रंग लाया
कहाँ ला के हमको मिलाया

अपनी वफ़ा के गुल खिल ना पाए
मिल के भी तुझसे हम मिल ना पाए
दर्द-ए-दिल हम कैसे सहें
दूर भी हम कैसे रहें
तेरा गम तेरे जाने के बाद रहा
तेरा गम तेरे जाने के बाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

जान-ए-वफ़ा तुझको क्या दे
दिल कह रहा है दुआ दे
जान-ए-वफ़ा तुझको क्या दे
दिल कह रहा है दुआ दे
अरमान बुझे है सपने धुंआ है
मर मर के हम तो जिंदा यहां है
बेखुदी मे हम खो गए
फिर जुदा तुझसे हो गए
चाहत का जहां बुर्बाद रहा
चाहत का जहां बुर्बाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा
..........................................................
Tere dard se dil aabad raha-Deewana 1992

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Feb 16, 2016

धीरे जलना-पहेली २००५

फिल्मों से कलात्मकता आप खतम नहीं कर सकते. इससे
जड़ें खत्म होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है. साहित्यिक
कृतियों पर काम करना आसान नहीं होता क्यूंकि लेखक की
कल्पना को आप हू-ब-हू परदे पर कभी नहीं उतार सकते.
एक हद तक निर्देशक सफल हो जाता है मगर कहीं कहीं उसे
माध्यम की लिमिटेशंस को ध्यान में रखते हुए कथानक या
चित्रण में बदलाव करने पढते हैं.

बरसों पहले(१९७३) मणि कौल ने एक फिल्म बनाई थी चारण
साहित्यकार विजय दान देथा की एक कहानी पर जिसका
नाम था दुविधा. कथानक ग्रामीण राजस्थान पर आधारित है.
फिल्म की विशेषता एक और है- राजस्थानी लोक कलाकारों
द्वारा संगीत दिया जाना. आपको देखने को मिले तो ये फिल्म
ज़रूर देखें एक बार.

उसी कथानक को फिर से लेकर २००५ में अमोल पालेकर ने
पहेली फिल्म का निर्माण किया. शाहरुख खान और रानी मुखर्जी
मुख्य कलाकार हैं और अमिताभ विशेष भूमिका में हैं. फिल्म
का सबसे चर्चित गीत यही है जो आज प्रस्तुत है. गुलज़ार ने
गीत लिखे हैं और एम् एम् क्रीम से इसका संगीत तैयार किया
है. इसे गा रहे हैं सोनू और श्रेया.



गीत के बोल:

धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना
ज़िन्दगी की लौ पे जलना
धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे जलना
ज़िन्दगी की लौ पे जलना
कांच का सपना, गल ही न जाए
सोच समझ के आंच रखना

धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना
धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना
धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे जलना
होना है जो होना है
वो होने से तो रुकता नहीं
आसमान तो झुकता नहीं
धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना

तेरे रूप की हलकी धूप में
दो ही पल हैं, जीने हैं
तेरी आँख में देख चुका हूँ
वो सपने हैं, सीने हैं
आँखों में सपनों की
किरचें हैं, चुभती हैं
धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना

सोचा ना था, ज़िन्दगी ऐसे
फिर से मिलेगी जीने के लिए
आँखों को प्यास लगेगी
अपने ही आंसू पीने के लिए
धीरे जलना, धीरे जलना, धीरे जलना
...........................................................................
Dheere jalna-Paheli 2005

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Jan 22, 2016

चल छैयां छैयां-दिल से १९९८

फिल्म “दिल से” में जो संगीत ए आर रहमान ने दिया है
उसमें दक्षिण भारतीय शैली की खुशबू काफ़ी अंदर तक घुसी
हुई है. बावजूद इसके फिल्म के गीत कर्णप्रिय हैं. आपको इस
फिल्म से पहले छैयां छैयां नहीं करवाई थी. आज सुनते हैं इस
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत जो सुखविंदर, सपना अवस्थी
और साथियों ने गाया है.

फिल्म दिल से की कहानी काश्मीर की पृष्ठभूमि में घूमती है.
फिल्म में मनीषा कोइराला ने बढ़िया अभिनय किया है. इस
गीत में हालांकि मलाईका अरोरा ने अभिनय किया है. वे इस
गीत में ही नज़र आती हैं. लिरिल गर्ल प्रिटी की शायद ये
पहली फिल्म थी. रेल के ऊपर फिल्माया गीत हिंदी फिल्म में
काफ़ी दिन बाद देखने को मिला है.




गीत के बोल:


जिनके सर हो इश्क की छाँव
पाँव के नीचे जन्नत होगी
जिनके सर हो इश्क की छाँव

चल छैयां छैयां छैयां छैयां
चल छैयां छैयां छैयां छैयां

सारे इश्क की छाँव, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां छैयां

चल छैयां छैयां छैयां छैयां

वो यार है जो खुशबू की तरह
है जिसकी जुबान उर्दू की तरह
मेरी शाम रात मेरी कायनात
वो यार मेरा सैयां सैयां

चल छैयां छैयां छैयां छैयां

गुलपोश कभी इतराए कहीं
महके तो नज़र आ जाए कहीं
तावीज़ बना के पहनूं उसे
आयत की तरह मिल जाए कहीं
वो यार है जो ईमान की तरह
मेरा नगमा वही मेरा कलमा वही
मेरा नगमा नगमा मेरा कलमा कलमा

यार मिसाल-ए-ओस चले
पाँव के तले फिरदौस चले
कभी डाल-डाल कभी पात-पात
मैं हवा पे ढूंढूं उसके निशाँ

सरे इश्क की छाँव, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां

चल छैयां छैयां छैयां छैयां  

मैं उसके रूप का सौदाई
वो धुप छांव सा हरजाई
वो शोख नज़र बदलता है
मैं रूप रंग का सौदाई

जिनके सर हो इश्क की छाँव
पाँव के नीचे जन्नत होगी
जिनके सर हो इश्क की छाँव

चल छैयां छैयां छैयां छैयां
चल छैयां छैयां छैयां छैयां

सारे इश्क की छाँव, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां छैयां
पाँव चलत चले, चल छैयां छैयां

चल छैयां छैयां छैयां छैयां
चल छैयां छैयां छैयां छैयां
..................................................................................
Chal chhaiyan chhaiyan-Dil se 1998

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Dec 4, 2015

मितवा-कभी अलविदा ना कहना २००६

कई बार सोचा इस गीत को आपको सुनवाऊं मगर ये रह ही
जाता था पोस्ट करने के लिए. आज सुना इसे तो याद रखा
कि इसे ब्लॉग के पाठक और मित्रों को भी सुनवाना है.

पहले पहल इस गीत को सुना था कहीं तो ऐसा लगा था कि
इसको या तो के-के ने गाया है या शंकर महादेवन ने. फिर
एक दिन इसे ध्यान से सुना तो गायक अलग सा लगा और
आवाज़ कुछ ज्यादा सधी सी सुनाई पड़ी. विवरण देखने पर
मालूम पड़ा कि इसे शफ़कत अमानत अली ने गाया है. अच्छा
गीत है, इसे जावेद अख्तर ने लिखा है और शंकर-एहसान-लॉय
की तिकड़ी ने इसे संगीतबद्ध किया है. शफ़कत अमानत अली
पटियाला घराना के गायक हैं और पाकिस्तानी मूल के हैं.

किशोर कुमार का एक गीत है ‘चलते चलते’ फिल्म से जिसकी
पंक्तियाँ हैं-कभी अलविदा ना कहना. इसी नाम से फिल्म बन
गयी २००६ में.

उनके बॉलीवुड में आगमन की कहनी भी दिलचस्प है . शंकर
महादेवन ने रेडियो पर उनका एक गीत ‘आँखों के सागर’ सुना
उसके बाद उन्होंने शफकत का नंबर ढूंढ निकला और उसके बाद 
कभी अलविदा ना कहना के गीत के लिए शफ़कत की सेवाएं
ली गईं. ये गीत अपने अवतरण के साथ ही प्रसिद्धि के चरम
पर पहुँच गया. आइये सुनें यही गीत.



गीत के बोल:

मेरे मन ये बता दे तू, किस ओर चला है तू
क्या पाया नहीं तुने, क्या ढूँढ रहा है तू
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या
मितवा
ये खुद से तो ना तू छुपा

जीवन डगर में, प्रेम नगर में
आया नज़र में जब से कोई हैं
तू सोचता है, तू पूछता हैं
जिसकी कमी थी क्या ये वही है
हाँ ये वही है, हाँ ये वही है
तू एक प्यासा और ये नदी हैं
काहे नहीं इसको तू खुलके बताये
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या

तेरी निगाहें, पा गयी राहें
पर तू ये सोचे, जाऊं ना जाऊं
ये ज़िन्दगी जो, है नाचती तो
क्यूँ बेड़ियों में है तेरे पाँव
प्रीत की धुन पर, नाच ले पागल
उड़ता अगर है, उड़ने दे आँचल
काहे कोई अपने को ऐसे तरसाए
जो है अनकही, जो है अनसुनी
वो बात क्या है बता
मितवा
कहे धड़कने तुझसे क्या
......................................................................................
Mitwa-Kabhi alvida na kehna 2006

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Jun 21, 2015

दो पल रुका-वीर ज़ारा २००४

कुछ गीत किसी कारण से विशेष बन जाते हैं. विशेष
का मतलब कुछ भी हो सकता है. प्रस्तुत गीत ने मेरा
ध्यान आकृष्ट किया कुछ शब्दों “तुम थे” के प्रयोग की
वजह से. यह गीत है फिल्म वीर ज़ारा से, जिसे शायर
जावेद अख्तर साहब ने लिखा है.

सोनू निगम की खुशकिस्मती है उन्हें लता मंगेशकर के
साथ कुछ गीत गाने का मौका मिला. लता मंगेशकर ने
९३-९४ के बाद गीत गाना बहुत कम कर दिया था, नहीं
के बराबर कह सकते हैं. केवल कुछ विशेष आग्रह पर
उन्होंने कुछ गीत गाये, जैसे इक्का दुक्का रहमान के लिए.
ये धुनें मदन मोहन की हैं, अतः उनका गाना तो ज़रूरी
था ही, उसके अलावा फिल्म यश चोपड़ा की है.

अब इस गीत को सुना और देखा जाए. इस ब्लॉग पर ये
इस फिल्म से चौथा गीत है.




गीत के बोल:


दो पल रुका, ख्वाबों का कारवाँ
और फिर, चल दिए, तुम कहाँ, हम कहाँ
दो पल की थी, ये दिलों की दास्ताँ
और फिर, चल दिए, तुम कहाँ, हम कहाँ


तुम थे के थी कोई उजली किरण
तुम थे या कोई कली मुस्काई थी
तुम थे या सपनों का था सावन
तुम थे के खुशियों की घटा छाई थी
तुम थे के था कोई फूल खिला
तुम थे या मिला था मुझे नया जहां
दो पल रुका, ख्वाबों का कारवाँ

तुम थे या खुशबू हवाओं में थी
तुम थे या रंग सारी दिशाओं में थे
तुम थे या रोशनी राहों में थी
तुम थे या गीत गूँजे फ़िज़ाओं में थे
तुम थे मिले या मिली मंज़िलें
तुम थे के था जादू भरा कोई समां
दो पल रुका, ख्वाबों का कारवाँ
...................................................
Do pal ruka-Veer Zaara 2004

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Jun 15, 2015

जिया जिया रे-जब तक है जान २०१२

नयी पीढ़ी के संगीतकारों में रहमान ही एक ऐसे हैं जिन्होंने किसी
एक गायक गायिका के भरोसे अपनी गाडी नहीं धकाई. उन्होंने कई
गायकों की सेवाएं ली हैं और उनकी बदौलत कई प्रतिभाएं अपने
मुकाम तक पहुँच पाई हैं. इस बात से एक फायदा है कि संगीतकार
का मूल्य बना रहता है. काश पुराने ज़माने के संगीतकार भी ऐसा
कर पाते.

दूसरा पहलू ये भी है कि जैसा गाना हो वैसा गायक या गायिका. इससे
सहूलियत भी हो जाती है. एक कटु सत्य ये है कि किसी गीतकार या
संगीतकार को जनता तवज्जो नहीं देती जितना कि गायक या गायिका
को. ये ट्रेंड अब थोडा बदला है. जैसे जैसे हमारी शिक्षा प्रणाली में
सुधर होता जा रहा है वैसे वैसे जनता अब संगीतकारों को पहचानने
लगी है भले ही उसे अपने पडोसी राज्य की राजधानी का नाम याद न
हो.

आपने फिल्म शोले का एक गीत अवश्य सुना होगा जो डाकुओं के अड्डे
पर हेमा मालिनी फिल्म में गाती है-आ, जब तक है जान, जाने-जहाँ
मैं नाचूंगी. आपको इस फिल्म का नाम शोले के गाने में मिल जायेगा.

गीत गुलज़ार ने लिखा है और इसे गाया है नीति मोहन के साथ सोफिया
अशरफ ने. यकीन मानिये इस गीत को सुनने के पहले तक मुझे सिर्फ
नीति मोहन का नाम मालूम था , उनका गाया कोई गीत भी मुझे याद
नहीं था इसे सुनने के पहले तक.




गीत के बोल:

चली रे, चली रे
जुनूं को लिए
कतरा, कतरा
लम्हों को पीये
पिंजरे से उड़ा
दिल का शिकरा
खुदी से मैंने इश्क किया रे
जिया, जिया रे जिया रे

छोटे-छोटे लम्हों को
तितली जैसे पकड़ो तो
हाथों में रंग रह जाता है
पंखों से जब छोडो तो
वक़्त चलता है
वक़्त का मगर रंग
उतरता है अक्किरा
उड़ते-उड़ते फिर एक लम्हा
मैंने पकड़ लिया रे
जिया जिया रे जिया रे

हलके-हलके पर्दों में
मुस्कुराना अच्छा लगता है
रौशनी जो देता हो तो
दिल जलाना अच्छा लगता है
एक पल सही, उम्र भर इसे
साथ रखना अक्किरा
ज़िन्दगी से फिर एक वादा
मैंने कर लिया रे
जिया जिया रे जिया रे
…………………………………………………………
Jiya jiya re-Jab tak hai jaan 2012

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Jun 13, 2015

प्यार हमको भी है-चलते चलते २००३

आज सुनिए फिल्म चलते चलते से एक गीत. यह फिल्म
रानी मुखर्जी के वेट लोस कार्यक्रम के बाद की पहली फिल्म
है. शाहरुख खान फिल्म में हीरो हैं. विलायती फिल्मों की
तरह इस फिल्म में काफी लंबे लंबे संवाद और बहस दिखाई
गयी है. जनता ने इसे भी पसंद किया. 

अभिजीत और अलका याग्निक ने इस युगल गीत को गाया है.
जावेद अख्तर के बोल हैं और जतिन ललित का संगीत है.
फिल्म का सबसे उल्लेखनीय गीत शायद यही है. एक और है
जिसे सुन सकते हैं जिसमें गायक खुद कह रहा है-सुनो ना
सुनो ना सुन लो ना.



गीत के बोल:

प्यार हमको भी है, प्यार तुमको भी है
तो ये क्या सिलसिले हो गये
बेवफा हम नहीं, बेवफा तुम नहीं
तो क्यों इतने गिले हो गये
चलते चलते, कैसे ये फासले हो गये
क्या पता कहाँ हम चले

प्यार हमको भी है, प्यार तुमको भी है
तो ये क्या सिलसिले हो गये
बेवफा हम नहीं, बेवफा तुम नहीं
तो क्यों इतने गिले हो गये
चलते चलते, कैसे ये फासले हो गये
क्या पता कहाँ हम चले

दुनिया जो पूछे तो क्या हम कहें, कोई ये हमको समझायें
ठेस लगी तो पल में टूट गये, शीशे के थे क्या सब वादे
जाता है, कोई क्यों, सपनों को ठुकरा के
पायेगा, ये दिल क्या, किसी को बता के
चलते चलते, राख हम बिन जले हो गये
बुझ गये दिये प्यार के
क्या पता कहाँ हम चले


डूब गया है जैसे दर्द में दिल, आँसू भरी है अब आँखें
तनहाईयों की जो रुत आ गई, उजड़ी हुई हैं सब राहें
सोचा था पायेंगे दोनों एक मंज़िल को
राहें जो बदली तो तुम ही बता दो
चलते चलते, गुम कहाँ काफ़िले हो गये
खो गये कहाँ हम चले
क्या पता कहाँ हम चले
...........................................................................................
Pyar hamko bhi hai-Chalte chalte 2003

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Feb 2, 2015

क्यूँ हवा आज-वीर ज़ारा २००४



कुछ गानों को सुनने के पीछे कोई संगीतमय वजह नहीं
होती. बस यूँ ही सुन लेते हैं, मसलन ये यश चोपड़ा की
फिल्म का गाना है, ये मदन मोहन के संगीत वाला गाना
है, ये लता मंगेशकर का गाया हुआ गाना है.

प्रस्तुत गीत को भी सुन लेते हैं, बस, कभी कभी, यूँ ही.
आपको भी सुनवा रहे हैं जैसे कई गीत सुनवाते हैं यूँ ही ,
कभी कभी. यूँ कि, यूँ भी, यूँ ही.


गीत के बोल:

एक दिन जब सवेरे सवेरे
सुरमई से अंधेर की चादर हटा के
एक परबत के तकिये से
सूरज ने सर जो उठाया तो देखा
दिल की वादी में चाहत का मौसम है
और यादों की डालियों पर
अनगिनत बीते लम्हों की कलियाँ महकने लगी हैं
अनकही, अनसुनी आरज़ू
आधी सोयी हुई, आधी जागी हुई
आँखें मलते हुए देखती है
लहर दर लहर, मौज दर मौज
बहती हुई ज़िन्दगी
जैसे हर एक पल नयी है
और फिर भी वही
हाँ, वही ज़िन्दगी
जिसके दामन में एक मोहब्बत भी है, कोई हसरत भी है
पास आना भी है, दूर जाना भी है
और ये एहसास है
वक़्त झरने सा बहता हुआ, जा रहा है
ये कहता हुवा
दिल की वादी में चाहत का मौसम है
और यादों की डालियों पर
अनगिनत बीते लम्हों की कलियाँ महकने लगी हैं

क्यूँ हवा आज यूँ गा रही है 
क्यूँ फिजा, रंग छलका रही है
मेरे दिल बता आज होना है क्या
चांदनी दिन में क्यूँ छा रही है
ज़िन्दगी किस तरफ जा रही है
मेरे दिल बता क्या है ये सिलसिला

क्यूँ हवा आज यूँ गा रही है 
क्यूँ फिजा, रंग छलका रही है

जहाँ तक भी जाएँ निगाहें, बरसते हैं जैसे उजाले
सजी आज क्यूँ है ये राहें, खिले फूल क्यूँ हैं निराले
खुश्बूयें, कैसी ये बह रही है
धड़कनें जाने क्या कह रही है
मेरे दिल बता ये कहानी है क्या

क्यूँ हवा आज यूँ गा रही है 
क्यूँ फिजा, रंग छलका रही है

ये किसका है चेहरा जिससे मैं, हर एक फूल में देखता हूँ
ये किसकी है आवाज़ जिसको, न सुन के भी मैं सुन रहा हूँ
कैसी ये आहटें आ रही हैं, कैसे ये ख्वाब दिखला रही है
मेरे दिल बता कौन है आ रहा

क्यूँ हवा आज यूँ गा रही है 
क्यूँ फिजा, रंग छलका रही है
...........................................................................
Kyun hawa aaj-Veer Zaara 2004

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Jan 22, 2015

ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं-दीवाना १९९२

एक दीवाना फिल्म आई थी सन १९५२ में तो दूसरी
आई सन १९९२ में. ४० साल बाद. फिल्म ऋषि कपूर
की फिल्म उद्योग से विदाई के संकेत का आरम्भ था
तो नए युग के सुपरस्टार शाहरुख के आगमन का
बिगुल. फिल्म का शीर्षक गीत सुनते हैं आज जो कि
बेहद लोकप्रिय हुआ था. अप्पको पहले एक गीत सुनवा
चुके हैं इस फिल्म से. ये गीत विनोद राठौड और अलका
याग्निक ने गाया है. शाहरुख खान और दिव्या भारती
पर इसे फिल्माया गया है. गीत समीर का और संगीत
नदीम-श्रवण का है.



गीत के बोल:

ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं
ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं
मैंने इसलिए जानेजाना दीवाना
तेरा नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया
हाँ, नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया
मेरा नसीब है जो मेरे यार ने
हंस के प्यार से बेखुदी में दीवाना
मेरा नाम रख दिया, मेरा नाम रख दिया
हाँ, नाम रख दिया, मेरा नाम रख दिया

तूने पहली नज़र में सनम मेरे दिल को चुराया
ओ तूने पहली नज़र में सनम मेरे दिल को चुराया
हुई दुनिया से परायी तुझे अपना बनाया
बिना देखे तुझे अब न आये करार
हर घडी है मुझे अब तेरा इंतज़ार
ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं
मैंने इसलिए जानेजाना दीवाना
तेरा नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया
हाँ, नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया

तेरी चाहत की चांदनी, मेरी आँखों में बस गयी
तेरी चाहत की चांदनी, मेरी आँखों में बस गयी
ये खुशबू तेरे जिस्म की मेरी सांसों में बस गयी
तू मेरी आरजू तू है मेरी वफ़ा
जिंदगी में कभी अब न होंगे जुदा
ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं
मैंने इसलिए जानेजाना दीवाना
तेरा नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया
हाँ, नाम रख लिया, तेरा नाम रख लिया
मेरा नसीब है जो मेरे यार ने
हंस के प्यार से बेखुदी में दीवाना
मेरा नाम रख दिया, मेरा नाम रख दिया
हाँ, नाम रख दिया, मेरा नाम रख दिया
जानेजाना दीवाना, तेरा नाम रख दिया
...........................................
Aisi deewangi-Deewana 1992

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Dec 18, 2014

ऐसा देस है मेरा-वीर ज़ारा २००४

आज आपको नया मसाले से छोंकी हुई पुरानी धुन पर बना एक गीत
सुनवाते हैं. ये है फिल्म वीर ज़ारा से. मदन मोहन के नाम पार जिनकी
धुनें हैं इसे काफी प्रचारित किया गया. अब गानों में कितना दम है इसे
आप महसूस कर सकते हैं आज, दस साल बाद. शायद ही अब इसके गाने
सुनाई देते हों. मदन मोहन स्वयं होते तो बात अलग थी, वे सरल सी सुनाई
देने वाली धुनों को भी आकर्षक बना दिया करते थे. अब न तो वैसे गायक
बचे हैं न वैसे गीतकार, न साजिन्दे.

वैसे इस गीत को जावेद अख्तर ने लिखा है और गाया है चार गायकों ने-
लता मंगेशकर, गुरदास मान, उदित नारायण और पृथा मजूमदार ने. इस
गीत को यहाँ एक फ़रमाइश के चलते चिपकाया जा रहा है. काफी लोग इसे
पसंद करते हैं, और मेरा अनुमान है इसे शाहरुख खान फैन ज्यादा सुनते हैं.




गीत के बोल:

अंबर हेठाँ धरती वसदी, एथे हर रुत हँसदी
किन्ना सोणा देस है मेरा

धरती सुनहरी अंबर नीला
हर मौसम रंगीला
ऐसा देस है मेरा

बोले पपीहा कोयल गाये
सावन घिर घिर आये
ऐसा देस है मेरा

गेंहू के खेतों में कंघी जो करे हवाएं
रंग-बिरंगी कितनी चुनरियाँ उड़-उड़ जाएं
पनघट पर पनहारन जब गगरी भरने आये
मधुर-मधुर तानों में कहीं बंसी कोई बजाए, लो सुन लो
क़दम-क़दम पे है मिल जानी कोई प्रेम कहानी
ऐसा देस है मेरा...

बाप के कंधे चढ़ के जहाँ बच्चे देखे मेले
मेलों में नट के तमाशे, कुल्फ़ी के चाट के ठेले
कहीं मिलती मीठी गोली, कहीं चूरन की है पुड़िया
भोले-भोले बच्चे हैं, जैसे गुड्डे और गुड़िया
और इनको रोज़ सुनाये दादी नानी इक परियों की कहानी
ऐसा देस है मेरा...

मेरे देस में मेहमानों को भगवान कहा जाता है
वो यहीं का हो जाता है, जो कहीं से भी आता है

तेरे देस को मैंने देखा, तेरे देस को मैंने जाना
जाने क्यूँ ये लगता है, मुझको जाना पहचाना
यहाँ भी वही शाम है, वही सवेरा
ऐसा ही देस है मेरा जैसा देस है तेरा
.....................................................................................
Aisa desh hai mera-Veer Zaara 2004

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Oct 25, 2011

चने के खेत में-अंजाम १९९४

गोरी बाजरे के खेत में दिखे या चने के खेत में, गोरी ही रहेगी और हमेशा
सुन्दर और प्यार करने लायक दिखाई देगी। हिंदी फिल्मों की फिलासफ़ी
के अनुसार ऐसा कई गीतों में और दृश्यों में अनुभव किया होगा दर्शक ने।
युग परिवर्तन के साथ साथ केवल नायक नायिका की वेश भूषा ही बदली
होगी, मूल भाव जस का तस है।

खेत एक समय(आज भी हैं) भांति भांति के क्रियाकलापों का केंद्र हुआ
करते थे। इसमें कूटनीति की चर्चा, मसाला कुटाई की चर्चा से लगा कर
भावनाओं की कुटाई तक कई मसले हल किये जाते रहे। अब इतने
महत्पूर्ण पहलू का दोहन अगर कवि और गीतकार नहीं करेंगे तो ये तो
खेत और खलिहान की उपेक्षा वाली बात हो जाएगी न।

आपको पिछले वर्ष एक गीत सुनवाया था फिल्म चाचा जिंदाबाद से
जिसमें एक पंक्ति है-बाजरे के खेत में सुरतिया दिखा जा गोरी


आज आपको चने के खेत पर केंद्रित गीत सुनवा रहे हैं। इसे आप कृषि
प्रधान या पर्यावरण प्रेमी गीत की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं। फिल्म का
नाम है अंजाम जिसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की प्रमुख
भूमिकाएं हैं। गीत गाया है खटिया पटिया गीतों से चर्चा में आई गायिका
पूर्णिमा ने। पूर्णिमा ने कई गीत गाये हैं मगर उनके वे गीत सबसे ज्यादा
पसंद किये जाते हैं जिनमें उत्तेजना जगाने वाला भाव होता है। ये उनकी
आवाज़ का ही कमाल है जो सुनने वालों को उनकी आवाज़ का दीवाना
बना देता है, ये पहलू उनकी कई समकालीन गायिकाओं की आवाज़ से
नदारद है।



गीत के बोल:

अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में

पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में
तू तू तू तू, तू तू तू तू

मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हाँ, मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हारी मैं हारी पुकार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाँ, जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाथों में कंगना सजा के चली थी
चूड़ी टूटी
चूड़ी टूटी चने के खेत में
जोरा जोरी चने के खेत में

तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
क्या क्या हुआ मेरे साथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
बालों में गजरा लगा के चली थी
बाली छूटी
बाली छूटी चने के खेत में
ओ जोरा जोरी चने के खेत में

अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
पहले तो जुल्मी ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबाई
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
...............................
Chane ke khet mein-Anjaam १९९४

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Aug 7, 2011

देखा तुझे तो-कोयला १९९७

क से कोट , क से कोयला. फिल्म निर्देशकों ने नायक शाहरुख खान को
उनकी शुरूआती फिल्मों में खूब ओवर साइज़ कोट पहनाए. आइये सुनें
राकेश रोशन निर्देशित कोयला फिल्म से एक हिट गीत. फिल्म ज्यादा
नहीं चली मगर इसके गीत थोड़े बहुत बजे जिसमें सबसे ज्यादा बजा
प्रस्तुत गीत . यह गीत अलका याग्निक और कुमार सानू की आवाजों
में है. नायिका को तो आप पहचान ही गए होंगे-हुसैन की गज-गामिनी.

कुमार सानू की "हो" उनके अधिकतर गीतों में जबरन ठूंसी हुई लगती
है. शायद किसी ने भी उनको ये नहीं बताया कि उनकी "हों हों " सुनने
में कतई कर्णप्रिय नहीं लगती है.

गीत माधुरी दीक्षित पर ही केंद्रित है और नायक इसमें एक सहायक कलाकार
जितनी भूमिका निभा रहा है. माधुरी की उपस्थिति से भी फिल्म की जो
बॉक्स ऑफिस की स्तिथि थी उस पर कोई सुधार नहीं आया.





गीत के बोल:

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

तेरे संग जीने को आया
तन मन अपना देने लाया

देखा तुझे तो जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम


खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया
आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया
आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा
मांगने तेरा हाथ मैं आया
देने सारा जीवन लाया

देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम

चाहना न चाहना किसके बस की बात है
दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चाहना न चाहना किसके बस की बात है
दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है
पहले प्यार को मिटते न देखा
ये तो है पत्थर कि रेखा

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

तेरे संग जीने को आया
तन मन अपना देने लाया

देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम
...............................................
Dekha tujhe to-Koyla 1997

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Jul 7, 2011

ये काली काली ऑंखें-बाज़ीगर १९९३

फिल्म बाज़ीगर(१९९३) का सबसे लोकप्रिय गीत आपको सुनवाते
हैं आज। फिल्म के ३ गीत आपको पहले सुनवा चुके हैं। ये
चौथा गीत है जिसे देव कोहली ने लिखा है। फिल्म में संगीत
अन्नू मलिक का है। गीत मुख्यतः कुमार सानू की आवाज़
में है जिसमें बीच में अन्नू मलिक ने भी अपनी आवाज़ ठूंसी है।

उल्लेखनीय है कि काली-काली और कजरारी ऑंखें वाले कुछ सबसे
लोकप्रिय गीत जिन अभिनेत्रियों पर फिल्माए गये हैं उनकी ऑंखें
या तो भूरी हैं या बिल्लौरी । उच्कूदो किस्म का नृत्य हो रहा है
गीत पर जिसकी कोरिओग्राफी की है ३ काबिल लोगों ने।




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ, हो ओ ओ ओ ओ
हो हो ओ ओ ओ ओ

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

देखा जो तुझे जानम
हुआ है बुरा हाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

मैं मिला, तू मिली
ऐ तू मिली, मैं मिला
मैं मिला, तू मिली
तू मिली, मैं मिला
दुनिया जले तो जले
प्यार करेंगे तुझपे मरेंगे
धक् धक् दिल ये करे, हा

उफ़ तेरी दिल्लगी दिल को जलाने लगी
गैरों कि बाहों मैं इठला के जाने लगी
ये तेरी पैरों कि मुझको सताने लगी
छोडो जी छोडो सनम
जिद अपनी छोडो सनम
नाज़ुक ये दिल है मेरा
दिल को ना तोड़ो सनम
दिल को ना तोड़ो सनम

ये लम्बी लम्बी रातें
आ कर ले मुलाकातें
जाने क्यों दिल ये मेरा
तेरा ही होना चाहे
जाने क्यूँ दिल ये मेरा
तेरा ही होना चाहे
गुस्से में लाल ना कर
ये गोरे गोरे गाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

ना तू कर ख़टपट
कर प्यार झट पट
मेरी आजा तू निकट
कटे प्यार का टिकट
ना तू जुल्फें झटक
ना तू पैर पटक
अरे ऐसे ना मटक
दिल गया है भटक

चेहरे पे तेरे सनम
लैला की है शोखियाँ
हीर सी बढ़ के है
आखों की ये मस्तियाँ
जुलिएट की तरह होंटों पे हैं सुर्खियाँ
देख ले खुद को तू
नज़र से मेरी जान-ए-जान

देखी जो तेरी अदा
मैं फिदा हो गया
सीने से लग जा मेरे
जीने का आये मज़ा

ये बिखरी बिखरी जुल्फें
ये झुकी झुकी पलकें
ये गोरी गोरी बाहें
हम क्यूँ ना तुम्हे चाहें
ऐसा तो हमने पहले
देखा नहीं कमाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
तू रु रु तू रु रु
ये तीखी तीखी नज़रें
तू रु रु तू रु रु
ये हिरनी जैसी चाल
तू रु रु तू रु रु

देखा जो तुझे जानम
हुआ है बुरा हाल

ये काली काली आखें
तू रु तू रु रु
ये गोरे गोरे गाल
.............................
Ye kaali kaali ankhen-Baazigar 1993

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Jun 21, 2011

चूड़ी बजी है-यस बॉस १९९७

अज़ीज़ मिर्ज़ा निर्देशित फिल्म यस बॉस के गीत कर्णप्रिय हैं और नई
पीढ़ी द्वारा बेहद पसदं किये गये। कुछ पुरानी और अर्ध-पुरानी पीढ़ी के
लोग भी सुनते मिले मुझे इस फिल्म के गीत। ये एक युगल गीत है
जो शाहरुख़ खान और जूही चावला पर फिल्माया गया है। जावेद अख्तर
के बोलों को सुरों में पिरोया है जतिन ललित ने। गीत गा रहे हैं गायक
उदित नारायण और गायिका अलका याग्निक ।

प्रकृति के सौंदर्य के अलावा प्रेमालाप के दृश्यों से भरपूर ये गीत देखने
लायक है। एक ही चीज़ आपको अटपटी लग सकती है वो है शाहरुख़
खान द्वारा पहना गया एक्स्ट्रा लार्ज साइज़ का पीले रंग का कोट पैंट ।



गीत के बोल:

चूड़ी कुछ कहे
कंगना क्यों बजा
क्या पता क्या हुआ

चूड़ी बजी है कहीं दूर छन छन छन छन
कंगना बजा है कहीं दूर खन खन खन खन
हो, चूड़ी बजी है कहीं दूर छन छन छन छन
कंगना बजा है कहीं दूर खन खन खन खन
ये तेरा कजरा, ये तेरा गजरा
लुटा दूं आज इस पे तन मन धन

चूड़ी बजी है कहीं दूर छन छन छन छन
कंगना बजा है कहीं दूर खन खन खन खन

गिन गिन तारे रात गुज़ारूं
दिन दिन भर मैं तुझे पुकारूँ
संवरे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
गिन गिन तारे रात गुज़ारूं
दिन दिन भर मैं तुझे पुकारूँ
गूंजती है पवन जैसे सन सन सन सन सन

हो ओ ओ,चूड़ी बजी है कहीं दूर छन छन छन छन
कंगना बजा है कहीं दूर खन खन खन खन

खिलते खिलते गुल खिलते हैं
मिलते मिलते दिल मिलते हैं
गोरिये ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
खिलते खिलते गुल खिलते हैं
मिलते मिलते दिल मिलते हैं
दिल मिलें तो बजे साज झन झन झन झन झन

हाँ,
चूड़ी बजी है
कंगना बजा है

ओ ओ चूड़ी बजी है कहीं दूर छन छन छन छन
कंगना बजा है कहीं दूर खन खन खन खन
ये तेरा कजरा, ये तेरा गजरा
लुटा दूं आज इस पे तन मन धन
लुटा दूं आज इस पे तन मन धन
.........................................C
Choodi baji hai-Yes boss 1997

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Jun 14, 2011

चाँद तारे तोड़ लाऊँ-यस बॉस १९९७

शाहरुख़ खान जब ९० के दशक में फिल्मों में आये
तो जल्दी ही नई पीढ़ी के प्रतिनिधि बन गये। चाँद तारे
तोड़ लाने वाली बात तो सदियों पुरानी है मगर गीत
में कुछ और भी है। जो भी चाहूं वो मैं पाऊँ -के ज़रिये
शायद वे अपने आने वाले सुनहरे भविष्य की तरफ
इशारा कर रहे हैं। गीत लगता है मानो उनके लिए ही
बनाया गया हो। उन्होंने सफलता का एक नया
इतिहास जो रचा बाद में।

किसी सार्वजनिक जगह पर बैठ के प्यानो बजाने का काम
केवल फिल्मों में ही संभव है। गीत कर्णप्रिय है और इसे गा
रहे हैं अभिजीत जिन्होंने किशोर कुमार के गीतों के कवर
वर्जन गा गा कर अपने कैरियर की शुरुआत की थी।



गीत के बोल:

जो भी चाहूं वो मैं पाऊँ
ज़िन्दगी में जीत जाऊं

चाँद तारे तोड़ लाऊँ
सारी दुनिया पर मैं छाऊँ
बस इतना सा ख्वाब है
बस इतना सा ख्वाब है

चाँद तारे तोड़ लाऊँ
सारी दुनिया पर मैं छाऊँ
बस इतना सा ख्वाब है
बस इतना सा ख्वाब है

यार तू भी सुन ज़रा
आरजू मेरी है क्या
मैं क्या बन जाना चाहता हूँ
मैं कहाँ ख़राब हूँ
मैं तो लाजवाब हूँ
मैं ये मनवाना चाहता हूँ
मान जा खुदा
इतनी सी है दुआ
मैं बन जाऊं सबसे बड़ा
मैं बन जाऊं सबसे बड़ा

मेरे पीछे, मेरे आगे
हाथ जोड़े दुनिया भागे
बस इतना सा ख्वाब है
बस इतना सा ख्वाब है

शान से रहूँ सदा
मुझपे लोग हों फ़िदा
हसीनाएं भी दिल हों खोती
दिल का ये कमल खिले
सोने का महल मिले
बरसने लगे हीरे मोती
मान जा खुदा
इतनी सी है दुआ
मैं ज्यादा नहीं मांगता
मैं ज्यादा नहीं मांगता

सारी दौलत सारी ताकत
सारी दुनिया पर हुकूमत
बस इतना सा ख्वाब है
बस इतना सा ख्वाब है
बस इतना सा ख्वाब है
...........................................
Chand taare tod laoon-Yes Boss 1997

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Jun 6, 2011

तू मेरे साथ साथ चल-राजू बन गया जेंटलमैन १९९२

लम्बे नाम वाली फिल्म-राजू बन गया जेंटलमैन से तीसरा गीत सुनिए.
अलका याग्निक और कुमार सानू की आवाजें फिट की गई हैं अमृता सिंह
और शाहरुख़ खान पर। गरीब मगर महत्वकांक्षी नायक को कृतिम
चमक दमक वाली दुनिया में आने का न्योता दिया जा रहा है गीत के
ज़रिये। गीत कर्णप्रिय है। पीने के बाद आदमी की दबी इच्छाएं बाहर आ
जाती हैं चाहे वो उछलने या कूदने की ही क्यूँ ना हों , फिल्म का चरित्र
यही बताने की कोशिश कर रहा है। निर्देशक अज़ीज़ मिर्ज़ा का सेंस ऑफ़
ह्यूमर ज़बरदस्त है।

अमृता सिंह इस फिल्म तक काफी मंज चुकीं थीं अभिनय में। इस फिल्म
में उनका किरदार ज्यादा बड़ा नहीं है मगर उल्लेखनीय अवश्य है। उनके
किरदार का नाम सपना है और वे नायक को महत्वकांक्षी सपने देखने के
लिए प्रेरित करती हैं।

गीत का फिल्मांकन बढ़िया है और इस फिल्म के सिनेमाटोग्राफर मतलब
छायाकार बिनोद प्रधान हैं। शोले फेम जी पी सिप्पी इसके निर्माता हैं। प्रस्तुत
गीत महेंद्र देहलवी का लिखा हुआ है जिन्होंने पुराने गीतकारों की याद ताज़ा
करवा दी।



गीत के बोल:

तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
नई है मंजिलें नए हैं रास्ते
नया नया सफ़र है तेरे वास्ते
नई नई है ज़िन्दगी

तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
नई है मंजिलें नए हैं रास्ते
नया नया सफ़र है तेरे वास्ते
नई नई है ज़िन्दगी

हुस्न है शाम है
उठा ले जाम तू ख़ुशी का
वक़्त है यह तेरा
मन ले जसं ज़िन्दगी का
ये शाम आज की तेरे ही नाम है
तेरे नसीब भी तेरा गुलाम है
क्या हसीं ये मुकाम है

तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
नई है मंजिलें नए हैं रास्ते
नया नया सफ़र है तेरे वास्ते
नई नई है ज़िन्दगी

हुस्न से भी हस्सें
है ख्वाब मेरी ज़िन्दगी के
इस ख़ुशी से परे
हैं मोड़ और भी ख़ुशी के
मैन देखता नहीं कभी इधर उधार
बस अपनी मंजिलों पे है मेरी नज़र
देख मुझको मेरे हमसफ़र

तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
नई है मंजिलें नए हैं रास्ते
नया नया सफ़र है तेरे वास्ते
नई नई है ज़िन्दगी

तू मेरे साथ साथ आसमान से आगे चल
तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल
नई है मंजिलें नए हैं रास्ते
नया नया सफ़र है तेरे वास्ते
नई नई है ज़िन्दगी
.................................
Too mere sath sath aasman se aage chal-Raju ban gaya gentleman 1992

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Nov 21, 2010

अपुन बोला-जोश २०००

बॉलीवुड के नायक नायिकाओं को गाने का शौक
अपने बुजुर्गों से लगा है। प्रथम पीढ़ी के अभिनेता
गायन भी किया करते थे। जब तक पार्श्व गायन
अस्तित्व में नहीं आया था नायक नायिकाओं को
गीत खुद ही गाने पढ़ते। पार्श्व गायन आने के बाद भी
कुछ नायक नायिकाओं ने गीत गाये उनमे नायक
राज कपूर, दिलीप कुमार, अभिनेत्री नूतन प्रमुख हैं।
नूतन ने तो स्नेहल भाटकर की एक फिल्म के लिए
४ गीत गाये हैं। नए दौर में आपने आमिर खान का
"क्या बोलती तू" सुना। परंपरा को जारी रखते हुए
शाहरुख़ ने भी फिल्म जोश के लिए एक गीत गा लिया।
पेश है वही गीत जिसमे उनका साथ दिया है गायिका
हेमा सरदेसाई ने। नितिन रैकवार के लिखे बोलों को
धुन पहनाई है अन्नू मालिक ने।



गीत के बोल:

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

एक काम कर उस को बुला,
होटल में खाना खिला
समुन्दर किनारे लेजा के रे, बोल
बोल दे खुल्लम खुल्ला
अरे मैंने उसे बुलाया,
कोकम करी खिलाया
फिर देख के मौका,मारा चौका
दिल की बात बताया रे

ऐ क्या बताया रे?

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

सौ लफड़े देखे मैंने,
तेरा लफड़ा हट के है
सब कुछ क्लेअर होके भी,
तू किस में अटके है

अपुन बोला तू मेरी लै...

घर से भगा के ले जा,
समझेगी तेरी बात तो
अरे, घर से भगा के ले गया था,
उस को आधी रात को

ऐ सैटिंग हुई क्या?

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
ये उसका स्टाइल होइंगा
होठों पे ना दिल में हाँ होइंगा
आज नहीं तो कल बोलेगी
ऐ तू टेंशन काई को लेता रे

अपुन बोला तू मेरी लैला
वो बोली फेंकता है साला
अपुन जब ही सच्ची बोलता
ऐ उसको झूठ काई को लगता है

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Nov 19, 2010

हम भी हैं जोश में -जोश २०००

एक नया गीत देखा जाए जो फुल ढिशुम ढिशुम वाले अंदाज़ में
गाया जा रहा है। कुछ नया सा है, अलग हट के है वगैरह वगैरह।
अनु मालिक का संगीत है, शाहरुख़ अभिनीत फिल्म जोश से ये
गीत लिया गया है। तरह तरह की आवाजें हैं गीत में साईकिल की
चैन, डब्बे की खड खड , रेलगाड़ी के चलने की आवाजों से मिलती
जुलती कुछ आवाज़, कुल मिलकर जो भी है सुर ताल में है। गीत
युवा पीढ़ी को बहुत पसंद आया था। गीत लिखा है समीर ने, इसे
गाया है सुरेश पीटर और मानो ने।



गीत के बोल:

हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

देखे हैं तेरे जैसे, तेरा इरादा क्या है बता
जा रे यहाँ ना आ रे, ना हमसे करना कोई खता
देखे है तेरे जैसे, तेरा इरादा क्या है बता
जा रे यहाँ ना आ रे, ना हमसे करना कोई खता
तू बोल दे चल भूल जा
बाते ना कर, यूँ ना डरा
सुन बेखबर, जो दम है अगर
आ रूबरू, करें जुंग शुरू
समझा है तुने क्या
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हे
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हा
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हो
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे

बच के, ज़रा सा बच के, तू रहना हमसे, प्यारे यहाँ
हट के, ज़रा सा हट के, है डरता हमसे, सारा जहाँ
बचके, ज़रा सा बच के, तू रहेना हमसे, प्यारे यहाँ
हटके, ज़रा सा हट के, है डरता हमसे, सारा जहाँ
यूँ सोचकर है लड़ना अगर, तो मैदान में आ, ना सर को छुपा
खबरदार हूँ, मैं तैयार हूँ, औकात क्या, तेरी जात क्या
ये तो मुझे बता

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
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Saila ru saila re kya bola fir-Josh 2000

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