Mar 16, 2016

पिया ऐसो जिया में-साह्ब बीबी और गुलाम १९६२

कहीं कहीं मुझे अनूठे विवरण मिलते हैं गीत के साथ. जैसे
कि “एक बार की बात है मैं बॉम्बे सेंट्रल के एक होटल में
समोसे खा रहा था. उस समय मुझे एक गीता दत्त का गीत
सुनाई दिया. मैं इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि मेरे हाथ से
समोसा छूट कर चटनी की कटोरी में जा गिरा. उससे छींटे
उछले, बाजू वाले के कपड़ों पर जा लगे. बाजू वाला भी इस
प्रक्रिया से मंत्रमुग्ध हो गया"
.

ये किस्सा एक संगीत प्रेमी ने मुझे सुनाया था काफी समय पहले.
किस्सा काफी बड़ा है और इसे यहाँ संक्षिप्त में प्रस्तुत किया गया
है. वो गीत भी दूसरा था जिसे हम बाद में सुनेंगे कभी.

ऐसा इसलिए होता है जब दिमाग का लट्टू जल नहीं पा रहा
हो तो पाठकों को बाँधने के लिए ऐसा हथकंडे आजमाना पढते
हैं.काश हमें भी ऐसे किस्से गढ़ने की कला आती.

आगे ऐसे किस्से और सुनायेंगे, फिलहाल इस गीत को सुनें. इसे
मैंने तो बिना समोसे खाए सुना था और जब भी इसे सुनता हूँ
ध्यान ला आगे, बिना और कोई काम किये. गीत दत्त के गीत
वाकई में मंत्रमुग्ध कर देने वाले हैं.



गीत के बोल:


पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
के मैं तन मन की सुधबुध गवाँ बैठी
हर आहट पे समझी वो आय गयो रे
झट घूँघट में मुखड़ा छुपा बैठी

मोरे अंगना में जब पुरवैय्या चली
मोरे द्वारे की खुल गयी किवड़िया
मैंने जाना के आ गये सावारियाँ मोरे
झट फूलन की सजिया पे जा बैठी
पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे

मैंने सिंदूर से माँग अपनी भरी
रूप सैयां के कारण सजाया
इस डर से के पी की नज़र ना लगे
झट नैनन में कजरा लगा बैठी

पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
के मैं तन मन की सुधबुध गवाँ बैठी
हर आहट पे समझी वो आय गयो रे
झट घूँघट में मुखड़ा छुपा बैठी
…………………………………………………………….
Piya aiso jiya mein-Sahib biwi aur ghulam 1962

Artist: Meena Kumari, 

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