जब अपना बेगाना हो जाए-नागन १९५०
लिखा देखा होगा या इस शब्द का प्रयोग किसी विशेष
स्तिथि में देखा होगा. इस अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल
अंग्रेजी वाइन के साथ ज्यादा किया जाता रहा है. इस
शब्द को संगीत जगत से ज्यादा आजकल की नीली हरी
साइटें प्रयोग करती हैं.
विंटेज शब्द का प्रयोग अक्सर अच्छे सन्दर्भ में होता है.
किसी किसी आलेख में ये भ्रामक भी हो सकता है जब
वाचालता और कुटिलता से भरे लोग इसका प्रयोग करें
और किसी दोयम दर्जे की चीज़ को भी विंटेज क्लासिक
बताने लगें. हम नहीं चाहते कोई आपको जबरन जैम,
अचार, मुरब्बा, चटनी और सॉस बता बता के आपको
छिलकों की लुगदी खिला दे.
आइये सुनें एक विंटेज जैम(अंग्रेजी वाला gem). फिल्म
का नाम है –नागन. ये सन १९५० की फिल्म है. सुरेन्द्र
उस समय के एक उल्लेखनीय गायक हुआ करते थे. उनके
जैसे कई कलाकार ५० के बाद धीरे धीरे नेपथ्य में चले
गए. गाना किसने लिखा है मालूम नहीं मगर इसका संगीत
पंडित अमरनाथ ने तैयार किया है. फिल्म में एक और
संगीतकार ने सेवाएं दी हैं-हरबंस लाल.
गीत के बारे में बाकी की जानकारी जैसे ही मिलेगी हम
आपको शीघ्र ही सूचित करेंगे.
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
फिर निकले हाय अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
हर रोज मुसीबत आती है
हर रोज मुसीबत आती है
एक नयी ही आफत लाती है
एक नई ही आफत लाती है
गम खाएं तो आखिर कब तक कब तक ठोकर खाएं
अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
हम जिनके थे जो हमारे हैं
हम जिनके थे जो हमारे हैं
दुःख दर्द के वो भी मारे हैं
दुःख दर्द के वो भी मारे हैं
कोई ऐसी सूरत बन जाए हम दोनों ही मिल जाएँ
अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
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Jab apna begana ho jaaye-Naagan 1950

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