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Oct 6, 2017

मेरी बात रही मेरे मन में-साहब बीबी और गुलाम १९६२

आशा भोंसले का गाया एक गीत सुनते हैं ६२ की चर्चित फिल्म
साहब बीबी और गुलाम से. शकील बदायूनीं के बोल हैं और इसे
हेमंत कुमार की धुन प्राप्त हुई.

फिल्म से आपको पूर्व में पांच गीत सुनवा चुके हैं. मीना कुमारी
और वहीदा रहमान फिल्म की नायिकाएं हैं.



गीत के बोल:

मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में
मेरे सपने अधूरे  हुए नहीं पूरे
आग लगी जीवन में
मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में


ओ रसिया  मन बसिया
रग रग में हो तुम ही समाये
मेरे नैना करे बैना
मेरा दर्द न तुम सुन पाये
जिया मोरा प्यासा रहा सावन में
मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में

कुछ कहते  कुछ सुनते
क्यों चले गये दिल को मसल के
मेरी दुनिया हुई सूनी
बुझा आस का दीपक जल के
छाया रे अन्धेरा मेरी अखियन में
मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में

तुम आओ कि न आओ
पिया याद तुम्हारी मेरे संग है
तुम्हे कैसे ये बताऊँ
मेरी प्रीत का निराला एक रंग है
लागा हो ये नेहा जैसे बचपन में
मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में
मेरे सपने अधूरे  हुए नहीं पूरे
आग लगी जीवन में
मेरी बात रही मेरे मन में
कुछ कह न सकी उलझन में
……………………………………………………..
Meri baat rahi mere man mein-Sahib biwi aur ghulam 1962

Artist: Waheeda Rehman

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May 19, 2016

कोई दूर से आवाज़ दे-साहब बीबी और गुलाम १९६२

गीता दत्त की गायकी लाजवाब है और उनकी आवाज़ की आज तक
कोई डुप्लिकेट आवाज़ नहीं सुनने को मिली. डुप्लिकेट से मतलब
क्लोन से है. थोड़ी बहुत मीना कपूर की आवाज़ उनकी आवाज़ के
नज़दीक सुनाई देती थी, बस. इसके अलावा कोई भी महिला गायिका
उनकी गायकी के अंदाज़ के निकट नहीं पहुँच पाई.

प्रस्तुत गीत एक माइलस्टोन सॉंग है. फिल्म साहब बीवी और गुलाम
का ये गीत बेहतरीन दर्दीले गीतों में शामिल है. असहाय और कातर
से स्वर में नायिका पुकार रही है जिसका कि पुकारे जाने वाले पर
कोई असर नहीं हो रहा फिल्म में.

फिल्म से ये पांचवा गीत है ब्लॉग पर. इसके पहले आपको गीता के
गाये दो गीत और आशा के गाये दो गीत सुनवाए जा चुके हैं.



गीत के बोल:

जिया बुझा-बुझा  नैना थके-थके
पिया धीरे-धीरे चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ

रात-रात भर इंतज़ार है
दिल दर्द से बेकरार है
साजन इतना तो ना तड़पाओ
चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ

आस तोड़ ,के मुख मोड़ के
क्या पाओगे साथ छोड़ के
बिरहन को अब यूँ ना तरसाओ,
चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ
....................................................................................
Koi door se awaaz de chale aao-Sahib Biwi aur Ghulam 1962

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Mar 16, 2016

पिया ऐसो जिया में-साह्ब बीबी और गुलाम १९६२

कहीं कहीं मुझे अनूठे विवरण मिलते हैं गीत के साथ. जैसे
कि “एक बार की बात है मैं बॉम्बे सेंट्रल के एक होटल में
समोसे खा रहा था. उस समय मुझे एक गीता दत्त का गीत
सुनाई दिया. मैं इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि मेरे हाथ से
समोसा छूट कर चटनी की कटोरी में जा गिरा. उससे छींटे
उछले, बाजू वाले के कपड़ों पर जा लगे. बाजू वाला भी इस
प्रक्रिया से मंत्रमुग्ध हो गया"
.

ये किस्सा एक संगीत प्रेमी ने मुझे सुनाया था काफी समय पहले.
किस्सा काफी बड़ा है और इसे यहाँ संक्षिप्त में प्रस्तुत किया गया
है. वो गीत भी दूसरा था जिसे हम बाद में सुनेंगे कभी.

ऐसा इसलिए होता है जब दिमाग का लट्टू जल नहीं पा रहा
हो तो पाठकों को बाँधने के लिए ऐसा हथकंडे आजमाना पढते
हैं.काश हमें भी ऐसे किस्से गढ़ने की कला आती.

आगे ऐसे किस्से और सुनायेंगे, फिलहाल इस गीत को सुनें. इसे
मैंने तो बिना समोसे खाए सुना था और जब भी इसे सुनता हूँ
ध्यान ला आगे, बिना और कोई काम किये. गीत दत्त के गीत
वाकई में मंत्रमुग्ध कर देने वाले हैं.



गीत के बोल:


पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
के मैं तन मन की सुधबुध गवाँ बैठी
हर आहट पे समझी वो आय गयो रे
झट घूँघट में मुखड़ा छुपा बैठी

मोरे अंगना में जब पुरवैय्या चली
मोरे द्वारे की खुल गयी किवड़िया
मैंने जाना के आ गये सावारियाँ मोरे
झट फूलन की सजिया पे जा बैठी
पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे

मैंने सिंदूर से माँग अपनी भरी
रूप सैयां के कारण सजाया
इस डर से के पी की नज़र ना लगे
झट नैनन में कजरा लगा बैठी

पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे
के मैं तन मन की सुधबुध गवाँ बैठी
हर आहट पे समझी वो आय गयो रे
झट घूँघट में मुखड़ा छुपा बैठी
…………………………………………………………….
Piya aiso jiya mein-Sahib biwi aur ghulam 1962

Artist: Meena Kumari, 

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Jun 9, 2015

न जाओ सैयां छुडा के बैयाँ-साहब बीबी और गुलाम १९६२

हिंदी सिनेमा का एक और मील का पत्थर जिसका नाम है
साहब बीबी और गुलाम. मीना कुमारी, गुरु दत्त और वहीदा
रहमान इन तीनों के कैरियर के लिए ये फिल्म अहम साबित
हुई. बिमल मित्रा के इसी नाम से पब्लिश हुए उपन्यास पर
आधारित इस फिल्म का निर्माण हुआ था. इसका स्क्रीनप्ले
अबरार अलवि ने तैयार किया था जिन्होंने फिल्म निर्देशित
भी की. वैसे आपको फिल्म पर गुरु दत्त के निर्देशन की छाप
नज़र आएगी.

फिल्म के कैमरामैन वी. के. मूर्ती ने कमाल की सिनेमाटोग्राफी
की है. मूर्ती को हिंदी सिनेमा के कई नायब रत्नों जिन्हें हम
मास्टरपीस कहते हैं से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त है. गुरुदत्त
के बैनर के बाहर उनकी उल्लेखनीय फ़िल्में हैं कमाल अमरोही
की पाकीज़ा और रज़िया सुल्तान. फिल्म रज़िया सुल्तान का
गीत-ऐ दिल-ए-नादान आपको अवश्य याद होगा जो फ़िल्मी
गीतों के इतिहास में एक मील का पत्थर है.

आइये सुना जाए गीता दत्त की आवाज़ में एक दर्द भरा गीत
फिल्म साहब बीबी और गुलाम से. गीत शकील बदायूनी का है
और संगीत हेमंत कुमार का.




गीत के बोल:

न जाओ सैय्याँ, छुड़ा के बैय्याँ 
कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी
मचल रहा है सुहाग मेरा
जो तुम ना होगे, तो क्या करूँगी

ये बिखरी ज़ुल्फें, ये खिलता गजरा
ये महकी चुनरी, ये मन की मदिरा
ये सब तुम्हारे लिए है प्रीतम
मैं आज तुम को ना जाने दूँगी,
जाने ना दूँगी

न जाओ सैय्याँ, छुड़ा के बैय्याँ 
कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी

मैं तुम्हारी दासी, जनम की प्यासी
तुम ही हो मेरा सिंगार प्रीतम
तुम्हारे रस्ते की धूल ले कर
मैं मांग अपनी सदा भरूँगी,
सदा भरूँगी

न जाओ सैय्याँ, छुड़ा के बैय्याँ 
कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी

जो मुझसे अँखियाँ चुरा रहे हो
तो मेरी इतनी अरज भी सुन लो
तुम्हारे चरणों में आ गयी हूँ
यहीं जिऊँगी, यहीं मरूँगी,
यहीं मरूँगी

न जाओ सैय्याँ, छुड़ा के बैय्याँ 
कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी
…………………………………………………
Na jao saiyan chhuda ke baiyan-Sahib biwi aur ghulam 1962

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Jan 9, 2015

साकिया आज मुझे नींद-साहब बीबी और गुलाम १९६२



साकिया आज मुझे नींद नहीं आएगी, सुना है तेरी महफ़िल में 
रतजगा है. 1962  की फिल्म 'साहब बीबी और गुलाम' का ये गीत 
चर्चित गीत रहा है. संगीत के कदरदानों और आकाओं ने बड़े बड़े 
संगीतकारों पर चर्चा की है मगर हेमंत कुमार के संगीत पर लिखने 
वाले बिरले ही हैं, आज भी. पढ़ने वाले भी तो चाहिए आखिर. चतुर 
लिखने वाले उन्हीं पे चर्चा करते हैं जो मार्केट में ज्यादा चलता है. 
आज भी मैं रेडियो के ज़माने के संगीत प्रेमियों की कद्र करता हूँ 
जिहोनें वाकई ज्ञान अर्जित किया कड़ी मेहनत के साथ.  

गीत पर लौटा जाए एक बार फिर से. विवरण इस प्रकार से है.
गीत मीनू मुमताज़ पर फिल्माया गया है जो महमूद की बहन हैं. 
संगीत का ज्यादा लुत्फ़ उठाने वाले ठाकुर की भूमिका में हैं-रहमान 
जिन्होंने फिल्म वक्त में चिनाय सेठ की भूमिका निभाई थी

गीत शकील बदायूनीं का लिखा हुआ है और संगीत हेमंत कुमार का 
है. गायक स्वर आशा भोंसले का है.



गीत के बोल:

साकिया साकिया साकिया
आज मुझे, नींद नहीं, आएगी
नींद नहीं आएगी

साक़िया आज मुझे नींद नहीं आएगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
आँखों आँखों में यूँ ही रात गुजार जायेगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है

साक़िया आज मुझे नींद नहीं आएगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
आँखों आँखों में यूँ ही रात गुजार जायेगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
साकी है और शाम भी, उल्फत का जाम भी
हो ओ ओ , तकदीर है उसी की जो ले इंतकाम भी
रंग-ऐ-महफ़िल है रात भर के लिए
रंग-ऐ-महफ़िल है रात भर के लिए
सोचना क्या भी सहर के लिए
सोचना क्या भी सहर के लिए
रंग-ऐ-महफ़िल है रात भर के लिए
सोचना क्या भी सहर के लिए
तेरा जलवा हो तेरी सूरत हो
और क्या चाहिए नज़र के लिए
और क्या चाहिए नज़र के लिए

आज सूरत तेरी बेपर्दा नज़र आएगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है

साक़िया आज मुझे नींद नहीं आएगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है

हाँ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुहब्बत में जो मिट जाता है
वो कुछ कह नहीं सकता
हाँ हाँ हाँ हाँ, ये वो कूचा है जिसमें
दिल सलामत रह नहीं सकता
किसकी दुनिया यहाँ तबाह नहीं
किसकी दुनिया यहाँ तबाह नहीं
कौन है जिसके लब पे आह नहीं
कौन है जिसके लब पे आह नहीं
किसकी दुनिया यहाँ तबाह नहीं
कौन है जिसके लब पे आह नहीं
उस पर दिल ज़रूर आएगा
इससे बचने की कोई राह नहीं
इससे बचने की कोई राह नहीं

जिंदगी आज नज़र मिलते ही लुट जायेगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
हो हो हो हो हो हो हो हो

साक़िया आज मुझे नींद नहीं आएगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
आ आ आ आ आ आ आ
आँखों आँखों में यूँ ही रात गुजार जायेगी
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
सुना है तेरी महफ़िल में रस जगा है
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Saakiya aaj mujhe neend nahin-Sahib biwi aur ghulam 1962

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Jun 28, 2011

भँवरा बड़ा नादान हाय-साहब बीबी और गुलाम १९६२

आओ री ओ बावरी , आओ री, इतना मत इतराओ री। थोड़ा सा लड़ियाओ री।
आइये आज आपको सुनवाते हैं एक चर्चित फिल्म साहब बीबी और गुलाम
से से एक मस्त गीत। आशा भोंसले इसको गा रही हैं परदे पर वहीदा रहमान
के लिए। शकील बदयूनीं साहब ने इस गीत को लिखा है जिसकी तर्ज़ बनाई है
हेमंत कुमार ने। सन १९६२ से यह गीत श्रोताओं को लुभाता रहा है। मनमोहक
अंदाज़ में 'हाय' बोली जा रही है और मुंह बनाने का क्रैश कोर्स है ये गीत लड़कियों
और युवतियों के लिए।



गीत के बोल:

भँवरा बड़ा नादान हाय
भँवरा बड़ा नादान हाय
बगियन का मेहमान हाय
फिर भी जाने न जाने न जाने न
कलियन की मुस्कान हाय

भँवरा बड़ा नादान हाय
बगियन का मेहमान हाय
फिर भी जाने न जाने न जाने न
कलियन की मुस्कान हाय

भँवरा बड़ा नादान

कभी उड़ जाये कभी मंडराये
भेद जिया के खोले न
कभी उड़ जाये कभी मंडराये
भेद जिया के खोले न
सामने आये नैन मिलाये
मुख देखे कुछ बोले न,
वो मुख देखे कुछ बोले न

भँवरा बड़ा नादान हाय

अखियों में रच के चले बच बच के
जैसे हो कोई बेगाना
अखियों में रच के चले बच बच के
जैसे हो कोई बेगाना
रहे सँग दिल के मिले नहीं मिल के
बन के रहे वो अन्जाना,
हो बन के रहे वो अन्जाना

भँवरा बड़ा नादान हाय

कोई जब रोके कोई जब टोके
गुन गुन करता भागे रे
न कुछ पूछे न कुछ बूझे
कैसा अनाड़ी लागे रे,
वो कैसा अनाड़ी लागे रे

भँवरा बड़ा नादान हाय
बगियन का मेहमान हाय
फिर भी जाने न जाने न जाने न
कलियन की मुस्कान हाय

भँवरा बड़ा नादान हाय
.......................
Bhanwra bada nadaan-Sahib Biwi aur Ghulam 1962

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