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Mar 1, 2020

दिल को तुम्हारी याद ने-मेरी कहानी १९४८

जोर का झटका धीरे से लगा गाने को सुन कर दिमाग
में कई विचार आने लगते हैं गीतों के बोलों को ले कर.
क्या इस बोल पर गीत बना है, फलाना शब्द कौन से
गीत में आया है?

हिलाना शब्द का ज्यादा प्रयोग गीतों में नहीं हुआ है.
इस शब्द को मुखड़े में इस्तेमाल किया गया है १९४८
की फिल्म मेरी कहानी के गीत में जिसे सुरेन्द्र ने
गाया है. अंजुम पीलीभीती से इसे लिखा है और धुन
तैयार की है के दत्ता उर्फ दत्ता कोरगांवकर ने.




गीत के बोल:

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया
अरमाँ जो सो चुके थे उन्हें फिर जगा दिया
अरमाँ जो सो चुके थे उन्हें फिर जगा दिया
उन्हें फिर जगा दिया
दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया

हमदर्द जब बने थे तुम्हीं दिल के दर्द के
बेदर्द बन के क्यूँ मेरे दिल को दुखा दिया
दिल को दुखा दिया

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
आ कर हिला दिया

मेरी ज़रा सी भूल की इतनी बड़ी सज़ा
आँसू बना के दिल को नज़र से गिरा दिया
नज़र से गिरा दिया

आँखों से दूर हो के भी रहते हो दिल के पास
रहते हो दिल के पास
तुमने तो ज़िंदगी को तमाशा बना दिया
तमाशा बना दिया

दिल को तुम्हारी याद ने आ कर हिला दिया
.....................................................
Dil ko tumhari yaad ne-Meri kahani 1948

Artist:

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Aug 26, 2018

आवाज़ दे कहाँ है-अनमोल घडी १९४६

इस शब्द में कितनी कशिश है, कितना दम है. इस को
ले कर बने मुखड़े अधिकाँश हिट साबित हुए हैं-आवाज़.

इस गाने की तारीफ में आप ना जाने कितने पन्ने और
किताबें पढ़ चुके हैं, वो सब कम हैं क्या जो और विवरण
की तलाश में हैं.





गीत के बोल:

आवाज़ दे कहाँ है दुनिया मेरी जवाँ है
आबाद मेरे दिल में उम्मीद का जहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है
आवाज़ दे कहाँ है

आ रात जा रही है यूं जैसे चाँदनी की बारात जा रही है
आ रात जा रही है यूं जैसे चाँदनी की बारात जा रही है

चलने को अब फ़लक से तारों का कारवाँ है
चलने को अब फ़लक से तारों का कारवाँ है
ऐसे में तू कहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है
आवाज़ दे कहाँ है

किस्मत पे छा रही है क्यों रात की सियाही
किस्मत पे छा रही है क्यों रात की सियाही
वीराँ है मेरी नींदें तारों से ले गवाही
वीराँ है मेरी नींदें तारों से ले गवाही
बरबाद मैं यहाँ हूँ आबाद तू कहाँ है
बरबाद मैं यहाँ हूँ आबाद तू कहाँ है
बेदर्द आसमाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है

आवाज़ दे कहाँ है
आवाज़ दे कहाँ है
…………………………………………………..
Aawaz de kahan hai-Anmol ghadi 1946

Artist: Noorjahan

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Jun 15, 2018

दिल आने के ढंग निराले हैं-मेरी कहानी १९४८

दिल ना हुआ कंजकटिवाईटिस हो गया जब चाहे आ
गया. गीत हास्य पुट वाला है और इसमें एक बात
का सन्देश भी है-कभी कभी पीछा छोड़ने से भी काम
बन जाता है. जिस चीज़ के पीछे ज्यादा भागो, वो
उतना ही ज्यादा भगाती है.

नक्शब के बोल, दत्ता कोरगांवकर का संगीत है और
सुरेन्द्र की आवाज़. कैची और तेज धुन है गीत की.





गीत के बोल:

दिल आने के
ओ दिल आने के ढंग निराले हैं
दिल आने के ढंग निराले हैं
दिल से मजबूर सब दिलवाले हैं
आ आ आ आ आ
दिल से मजबूर सब दिलवाले हैं
दिल आने के
ओ दिल आने के ढंग निराले हैं

कभी अँखियाँ मिलाने से आता है दिल
कभी अँखियाँ बचाने से आता है दिल
वो ही अँखियाँ जिन्हें हमसे मतलब नहीं
वो ही अँखियाँ जिन्हें हमसे मतलब नहीं
उन्हीं अँखियों के हम मतवाले हैं
हां हाँ हाँ हाँ हाँ
उन्हीं अँखियों के हम मतवाले हैं
दिल आने के
हो दिल आने के ढंग निराले हैं

प्यारी सूरत का गर सामना हो गया
हम पे लाखों अदाओं ने हमला किया
बड़ी हिम्मत से क़ाबू में रखा है दिल
बड़ी हिम्मत से क़ाबू में रखा है दिल
बड़ी मुश्क़िल से होश सम्भाले हैं
आ आ आ
बड़ी मुश्क़िल से होश सम्भाले हैं
हा आ आ आ आ
दिल आने के
हो दिल आने के ढंग निराले हैं
………………………………………..
Dil aane ked hang nirale hain-Meri kahani 1948

Artist: Surendra

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May 7, 2018

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे-ग्रामोफोन सिंगर १९३८

पुराने समय में लंबी लंबी लाइनों वाले गीत कम हुआ करते थे.
गीतों में एजेंडे भी कम होते थे मसलन इसी गीत को ले लीजिए
इसमें छोटा सा मंदिर बनाने की बात है और उसके बाद यूँ ही
जिंदगी बिताने की बात है. ज्यादा हीले-हवाले नहीं हैं और एक
सिंपल सा गीत सामने है.

जिया सरहदी ने इसे लिखा है, सुरेन्द्र ने गाया है और इस गीत
की धुन अनिल बिश्वास ने तैयार की है.




गीत के बोल:

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे

रोज़ फूलों से उसको सजायेंगे
रोज़ फूलों से उसको सजायेंगे
यूँ ही अपनी उमरिया बितायेंगे
यूँ ही अपनी उमरिया बितायेंगे

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
...................................................................................
Ek chhota sa mandir banayenge-Gramphone singer 1938

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May 5, 2018

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे-लाल हवेली १९४४

कवि क्या कहना चाहता है इसे समझ पाने के लिए कवि जैसा
दिमाग चाहिए या कॉमन सेन्स चाहिए ये समझ नहीं पड़ा. एक
तो लिखने वाला क्या लिखता है और दिखाने वाला क्या दिखाता
है इसमें भी अंतर आ जाता है. मसलन- दूर से देखा तो अंडे उबल
रहे थे पास जा के देखा तो गंजे उछल रहे थे,

हेरा फेरी का मतलब अलग है, हेर फेर का भी वही मतलब होता
है. हेरा फेरा का मतलब भी यही समझ लिया जाए. इसे ह्यूमर
वाले सेन्स में लिया गया है.



गीत के बोल:

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

मेरे जज़्ब-ए-दिल की कशिश देख लेना
मेरे जज़्ब-ए-दिल की कशिश देख लेना
के ख़ुद ही चले आयेंगे पास मेरे
के ख़ुद ही चले आयेंगे पास मेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

ज़मीं पर उतर आया चाँद आसमाँ से
ज़मीं पर उतर आया चाँद आसमाँ से
ग़रीबों के घर आज होंगे बसेरे
ग़रीबों के घर आज होंगे बसेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

कोई बात पूछे न पूछे हमें क्या
कोई बात पूछे न पूछे हमें क्या
दर-ए-यार पर अब लगाये हैं डेरे
दर-ए-यार पर अब लगाये हैं डेरे

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
………………………………………………………………
Yahi fikr hai-Lal aveli 1944

Artist: Surendra, Yakub

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May 3, 2018

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल-लाल हवेली १९४४

हवेली शब्द से से किसी भूतिया फिल्म का आभास होता
है. फिल्म तो नहीं अलबत्ता एक शब्द से ज़रूर भाषा का
भूत परेशान कर रहा है- गीत में गोल है के खोल है.
वैसे उस समय नूरजहाँ का चेहरा गोल ही नज़र आता
थे. फिल्म में सस्पेंस हो ना हो इस बात में ज़रूर है. वैसे
भी उम्र होने पर कान बजने शुरू हो जाते हैं, भैरवी के
साथ भीमपलासी सुनाई देने लगती है.

सुरेन्द्र और नूरजहाँ ने इस गीत को परदे पर और परदे
के पीछे दोनों जगह गाया है. शम्स लखनवी के बोल हैं
और मीर साहब का संगीत.





गीत के बोल:

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल

मन को हो किस तरह दिलासा
मन को हो किस तरह दिलासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
रूप बड़ा अनमोल रूप बड़ा अनमोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल

हाल जो तेरा वही है मेरा
हाल जो तेरा वही है मेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
प्रेम का अमृत घोल

प्रेम का अमृत घोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
.........................................................
Mohaniya sundar mukhda khol-Lal Haveli 1944

Artists: Surendra, Noorjahan

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Apr 6, 2018

आईने में एक चाँद सी सूरत-ऐलान १९४७

सन १९४७ की फिल्म ऐलान से एक गीत सुनते हैं. ये आज आपको
विंटेज युग से दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. उम्मीद के मुताबिक़ पाठक
संख्या आज सबसे कम होगी. नए छोरों को ये भाते नहीं और सयाने
पाठक यहाँ आते नहीं. उन्हें विंटेज युग का संगीत अंग्रेजी आलेखों
और बोलों में जल्दी समझ आता है.

खैर, वो सब तो चलता ही रहेगा, संसार है. कहा है-तुलसी इस संसार
में भाँति भाँति के लोग. गीत सुनते हैं जिसे सुरेन्द्र और अमीरबाई ने
गाया है. ज़िया सरहदी के बोल हैं और नौशाद का संगीत.




आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
हाँ आ आ सौ बार हुई जिसपे फ़िदा सारी ख़ुदाई
हो सूरत नज़र आई

आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
आँखों में तमन्नाओ का आबाद ज़माना
हर बात कुछ ऐसी के मोहब्बत का फ़साना
फूलों ने नज़ाक़त तेरे रुख़सार से पाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई

ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह-रह के दुआयें
ढलका हुआ आँचल हो क़यामत की अदायें
देता है मेरा दिल तुझे रह रह के दुआयें
आ आ आ हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
हाय हाय हुस्न सलामत रहे आबाद रहे तू
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
तू है तो तेरे दम से है आबाद ख़ुदाई
हो ओ ओ सूरत नज़र आई
आईने में एक चाँद सी सूरत नज़र आई
………………………………………………………..
Aaine mein ek chand si soorat-Elaan 1947

Artists: Munawwar Sultana, Shahnawaz

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Jun 24, 2017

तेरी नज़र में मैं-१८५७ १९४६

इस फिल्म का नाम १८५७ है. ये संग्राम के ऊपर
बनी हुई फिल्म है जो आजादी के लिए सबसे
पहले हुआ था. फिल्म सन १९४६ में रिलीज़ हुई
थी.

फिल्म से सुरेन्द्र और सुरैया का गाया युगल गीत
सुनते हैं. शेवन रिज़वी के बोल हैं और सज्जाद का
संगीत.



गीत के बोल:

तेरी नज़र में मैं रहूँ मेरी नज़र में तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ मेरी नज़र में तू
तेरी कहानी मेरी कहानी तेरी कहानी
तेरी कहानी मैं कहूँ मेरी कहानी तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ मेरी नज़र में तू

निखरी हुई हो चांदनी छाई हुई बहार
निखरी हुई हो चांदनी छाई हुई बहार
तुझसे जुदा ना मैं रहूँ
तुझसे जुदा ना मैं रहूँ और मुझसे जुदा ना तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ मेरी नज़र में तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ मेरी नज़र में तू

जलवे तेरे
जलवे तेरे नज़र में हों दिल में हो तेरी आरज़ू
जलवे तेरे
जलवे तेरे नज़र में हों दिल में हो तेरी आरजू
मुझको यही हो जुस्तजू
मुझको यही हो जुस्तजू लब पे मेरे हो तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ या मेरी नज़र में तू
तेरी नज़र में मैं रहूँ या मेरी नज़र में तू

इश्क पे छायें मस्तियाँ हुस्न पे शोखियाँ
इश्क पे छायें मस्तियाँ हुस्न पे शोखियाँ
मस्ती भरी जवानियाँ
मस्ती भरी जवानियाँ छेड़ें यही कहानियां
के तुझसे जुदा न मैं रहूँ
के तुझसे जुदा न मैं रहूँ और मुझसे जुदा ना तू

तेरी नज़र में मैं रहूँ या मेरी नज़र में तू
……………………………………………………..
Teri nazar mein main rahoon-1857 1946

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May 10, 2017

चैन तुमसे चैन तुमसे-पनिहारी १९४६

फिल्म पनिहारी से एक मधुर गीत सुनते हैं जिसे सुरेन्द्र ने
गाया है. इस गीत को लिखा है पंडित इन्द्र, ब्रजेन्द्र गौड़ और
राममूर्ति चतुर्वेदी में से किसी एक ने. संगीत एस एन त्रिपाठी
का है.

गीतकार का नाम जैसे ही कोई पाठक बतलायेगा, अपडेट कर
दिया जायेगा.  





गीत के बोल:

चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है

ज़िंदगी की बहार तुमसे है
ज़िंदगी की बहार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे

हमने खेली है जान की बाज़ी
हमने खेली है जान की बाज़ी
जीत तुमन्से जीत तुमन्से है हार तुमसे है
जीत तुमन्से जीत तुमन्से है हार तुमसे है
चैन तुमसे

दिल में आते हो हाय यूँ बन कर
दिल में आते हो हाय यूँ बन कर
बर्क़ को भी बर्क़ को भी क़रार तुमसे है
बर्क़ को भी बर्क़ को भी क़रार तुमसे है
चैन तुमसे

मुझको दुनिया की कुछ ख़बर ही नहीं
मुझको दुनिया की कुछ ख़बर ही नहीं
होश इतना होश इतना है प्यार तुमसे है
होश इतना होश इतना है प्यार तुमसे है
चैन तुमसे
...........................................................
Chain tumse-Panihari 1946

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Dec 27, 2016

क्यों याद आ रहे हैं-अनमोल घडी १९४६

फिल्म अनमोल घडी के गीत बने हुए कम से कम ७०
साल तो हो ही चुके हैं. फिल्म रिलीज़ हुई थी १९४६ में
तो हम मान लेते हैं इसके गीत १९४५ में बनना शुरू
हुए होंगे. ये पुराने संगीत का दम ही है जो हम इतने
पुराने गीत भी आज सुनते हैं.

तनवीर नकवी का लिखा, नौशाद द्वारा संगीतबद्ध और
सुरेन्द्र का गाया एक गीत सुनते हैं इसी फिल्म से. पूर्व
में हम आपको ३ गीत इस फिल्म से सुनवा चुके हैं



गीत के बोल:

क्यों याद आ रहे हैं
गुज़रे हुए ज़माने
ये दुःख भरे फ़साने
रोते हुए तराने
किसको सुना रहे हैं
क्यों याद रहे हैं

यूँ मुस्कुरा रहे हैं
देखो अगर तो समझो
आँसू बहा रहे हैं
यूँ मुस्कुरा रहे हैं
देखो अगर तो समझो
आँसू बहा रहे हैं

क्यों याद आ रहे हैं
गुज़रे हुए ज़माने

क्या बात है ना जाने
क्यों हिचकियों की लय पे
गाते हैं ग़म के गाने
क्या बात है ना जाने
क्यों हिचकियों की लय पे
गाते हैं ग़म के गाने
हम भोर के दिये हैं
हम भोर के दिये हैं
बुझते ही गा रहे हैं

क्यों याद आ रहे हैं
गुज़रे हुए ज़माने
......................................................................
Kyon yaad aa rahe hain-Anmol Ghadi 1946

Artist: Surendra

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Jul 15, 2016

पुजारी मोरे मन्दिर में आओ-जागीरदार १९३७

३० के दशक में मोतीलाल का जलवा था. ये जलवा १९३४
से शुरू हुआ. आज जागीरदार फिल्म से एक गीत सुनते हैं
जिसे बिब्बो और सुरेन्द्र ने गाया है. सागर निर्मित इस
फिल्म का निर्देशन महबूब ने किया. महबूब की बतौर
निर्देशक ये दूसरी ही फिल्म थी.

फिल्म के प्रमुख सितारे हैं मोतीलाल, बिब्बो, माया बैनर्जी,
सुरेन्द्र, जिया सरहदी, याकूब, पेसी पटेल और रामचंद्र मराठे.

गीत लिखा है पंडित इन्द्र ने और संगीत है अनिल बिश्वास
का. अनिल बिश्वास के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म
उस वर्ष आई थी-कोकिला जिसका निर्माण सागर ने किया
था.




गीत के बोल:

पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
नैंनों की गंगा जमुना में
नैंनों की गंगा जमुना में
साजन आओ नहाओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ

प्रेम देव की करो आरती
प्रेम देव की करो आरती
स्नेह सुधा बरसाओ
स्नेह सुधा बरसाओ
दिल के तारों पर सजनी तुम
दिल के तारों पर सजनी तुम
दीपक राग सुनाओ

पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ

बचपन रूठ गयो क्यूँ मोसे
बचपन रूठ गयो क्यूँ मोसे
कोई ये बतलाओ
बचपन रूठ गयो क्यूँ मोसे
कोई ये बतलाओ
जोबन रूठ न जाये बालम
जोबन रूठ न जाये बालम
ऐसी राह बताओ

पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ

चन्द्रग्रहण है चन्द्रमुखी
तुम आओ यहाँ छुप जाओ
चन्द्रग्रहण है चन्द्रमुखी
तुम आओ यहाँ छुप जाओ
रूप सुधा की मस्त प्याली
रूप सुधा की मस्त प्याली
पियो और पिलाओ

पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
पुजारी मोरे मन्दिर में आओ
.................................................................
Pujari more mandir mein aao-Jagirdar 1937

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Mar 17, 2016

जब अपना बेगाना हो जाए-नागन १९५०

पुराने संगीत के लिए कई जगह आपने ‘vintage’ शब्द
लिखा देखा होगा या इस शब्द का प्रयोग किसी विशेष
स्तिथि में देखा होगा. इस अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल
अंग्रेजी वाइन के साथ ज्यादा किया जाता रहा है. इस
शब्द को संगीत जगत से ज्यादा आजकल की नीली हरी
साइटें प्रयोग करती हैं.

विंटेज शब्द का प्रयोग अक्सर अच्छे सन्दर्भ में होता है.
किसी किसी आलेख में ये भ्रामक भी हो सकता है जब
वाचालता और कुटिलता से भरे लोग इसका प्रयोग करें
और किसी दोयम दर्जे की चीज़ को भी विंटेज क्लासिक
बताने लगें. हम नहीं चाहते कोई आपको जबरन जैम,
अचार, मुरब्बा, चटनी और सॉस बता बता के आपको
छिलकों की लुगदी खिला दे.

आइये सुनें एक विंटेज जैम(अंग्रेजी वाला gem).  फिल्म
का नाम है –नागन. ये सन १९५० की फिल्म है. सुरेन्द्र
उस समय के एक उल्लेखनीय गायक हुआ करते थे. उनके
जैसे कई कलाकार ५० के बाद धीरे धीरे नेपथ्य में चले
गए. गाना किसने लिखा है मालूम नहीं मगर इसका संगीत
पंडित अमरनाथ ने तैयार किया है. फिल्म में एक और
संगीतकार ने सेवाएं दी हैं-हरबंस लाल.

गीत के बारे में बाकी की जानकारी जैसे ही मिलेगी हम
आपको शीघ्र ही सूचित करेंगे.



जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
फिर निकले हाय अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए

हर रोज मुसीबत आती है
हर रोज मुसीबत आती है
एक नयी ही आफत लाती है
एक नई ही आफत लाती है

गम खाएं तो आखिर कब तक कब तक ठोकर खाएं

अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए

हम जिनके थे जो हमारे हैं
हम जिनके थे जो हमारे हैं
दुःख दर्द के वो भी मारे हैं
दुःख दर्द के वो भी मारे हैं
कोई ऐसी सूरत बन जाए हम दोनों ही मिल जाएँ
अँखियाँ नीर बहाये
जब अपना बेगाना हो जाए टूट दिल जाए
……………………………………………………..
Jab apna begana ho jaaye-Naagan 1950

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Jan 26, 2010

खायेगी ठोकरें ये जवानी-मिर्ज़ा साहिबान १९४७

फिल्म: मिर्ज़ा साहिबान
वर्ष: १९४७
संगीत : पं. अमरनाथ
गीतकार: कमर जलालाबादी
गायक : जी एम् दुर्रानी
कलाकार : नूरजहाँ, त्रिलोक कपूर, गुलाब, गोप




गीत के बोल:

खायेगी ठोकरें ये जवानी कहाँ कहाँ
खायेगी ठोकरें ये जवानी कहाँ कहाँ
बदनाम होगी मेरी कहानी कहाँ कहाँ
बदनाम होगी मेरी कहानी कहाँ कहाँ

ओ रोने वाले अब तेरा दामन भी फट गया
ओ रोने वाले अब तेरा दामन भी फट गया
पहुँचेगी आँसुओँ की रवानी कहाँ कहाँ
पहुँचेगी आँसुओँ की रवानी कहाँ कहाँ
खायेगी ठोकरें ये जवानी कहाँ कहाँ

जिस बाग़ पर निगाह पड़ी वो उजड़ गया
जिस बाग़ पर निगाह पड़ी वो उजड़ गया
बरसाम अपनी आँख का पानी कहाँ कहाँ
बरसाम अपनी आँख का पानी कहाँ कहाँ
खायेगी ठोकरें ये जवानी कहाँ कहाँ
फ़रियाद लब पे आंख में आंसू
जिगर में दाग
हमने छिपाई तेरी निशानी कहाँ कहाँ
हमने छिपाई तेरी निशानी कहाँ कहाँ

खायेगी ठोकरें ये जवानी कहाँ कहाँ
बदनाम होगी मेरी कहानी कहाँ कहाँ

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Dec 30, 2009

मेरी आशा के जीवन में आई बहार-औरत १९४०

ज़ोर का झटका धीरे से। आइये ३७ साल पीछे चलें। फ़िल्म जादू टोना
के गीत के बाद देखिये सन १९४० के एक गीत। ये फ़िल्म औरत से है
इसी फ़िल्म को बाद में महबूब ने १९५७ में मदर इंडिया की शक्ल दी।
गायिका हैं सरदार अख्तर और सुरेन्द्र , बोल है सफ़दर "आह" सीतापुरी
के और धुन है अनिल बिश्वास की। इस गीत की अंतिम पंक्तियाँ रोचक हैं।




गीत के बोल:

मेरी आशा के जीवन में आई बहार
मेरी आशा के जीवन में आई बहार

चले शीतल पवन खिले फूलों की डार
चले शीतल पवन खिले फूलों की डार
बनी अपने पिया के गले का मैं हार
बनी अपने पिया के गले का मैं हार

मेरी आशा के जीवन में आई बहार

सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
सुनो पंछी के राग
मची बागों में धूम
किये पत्ते निखार, मची बागों में धूम
किये पत्ते निखार, मची बागों में धूम
हुआ फूलों के गहने से बनता सिंगार
हुआ फूलों के गहने से बनता सिंगार

सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
आहा खेतों पे पड़ती है जल की फुहार
आहा खेतों पे पड़ती है जल की फुहार
पड़ी नैनों पे चोट, लगी दिल में कटार
पड़ी नैनों पे चोट, लगी दिल में कटार
चले छैला सजनवा जो छाती उभार
चले छैला सजनवा जो छाती उभार

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