चुनर मोरी कोरी-नया रास्ता १९७०
है. ये कभी भी याद आ जाते हैं. होली को बीते एक हफ्ता हो
गया है. दत्ताराम बाबूराव नायक सन १९५५ से सन १९८० तक
हिंदी फिल्म संगीत के क्षत्र में सक्रिय रहे. कम बजट वाली और
कम पूँजी वाले निरमता निर्देशकों के साथ काम करते करते उनके
पास भी धन की कमी रही. धन की कमी से मतलब फ़ाकाकशी
से कतई नहीं है.
इन फिल्मों के चक्कर में उनका गुणवत्ता वाला संगीत भी जनता
सुन नहीं पाई ढंग से. वो तो बी आर चोपड़ा की कुछ फिल्मों में
संगीत की वजह से उन्हें समय समय पर याद किया जाता रहा.
साहिर के साथ उनका काम उल्लेखनीय और सराहनीय है. कुछ
अविस्मरणीय धुनें उनके खाते में भी दर्ज हैं इसलिए संगीत रसिक
उन्हें याद करते रहेंगे. गीत में होली वाले सारे एलिमेंट्स हैं और
गौर फरमाएं इसके बोलों पर.
फिल्म नया रास्ता से ये तीसरा गीत है इस ब्लॉग पर. सुनते रहिये
और पढते रहिये........
गीत के बोल:
चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी
धीरे धीरे पिचकारी मारो
नहीं मारो बेदर्दी रे कस के
देखो देखो बैंया ना खींचो
मोरी रेशम की चोली ना मस्के
मोहे तुमरी कसम, मोहे लागे सरम
मानो मानो अरज मानो मोरी
चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी
भीगी भीगी चुनरी से झांके
तोरे मतवाले अंगों का जादू
आजा मेरी बाहों में छुप जा
गोरी घबरा के यूं ना सिमट तू
मिले तन से जो तन
बुझे मन की अगन
कहें हम भी के आई है होरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी
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.Chunar mori kori-Naya Rasta 1970
Artists-Jeetendra, Asha Parekh

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