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Mar 9, 2020

मल दे गुलाल मोहे-कामचोर १९८२

होली के अवसर पर एक गीत सुनते हैं फिल्म कामचोर
से. अपने समय का और चूंकि ये होली गीत है अतः होली
के अवसर पर जगह जगह बजता मिल जाता है.

फिल्म के कथानक पर हम पिछले पोस्टों में टोर्च हैलोजन
की रौशनी डाल चुके हैं अतः इस गीत को बिना किसी लंबे
निबंध के सुन लेते हैं.

किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाजें प्रमुख हैं इस
गीत में जिसे इन्दीवर ने लिखा है. इसकी धुन राजेश रोशन
ने बनाई है. वीडियो गीत में पहला अन्तरा गायब है.



गीत के बोल:

मल दे गुलाल मोहे
मल दे गुलाल मोहे
आई होली आई रे
मल दे गुलाल मोहे
मल दे गुलाल मोहे
आई होली आई रे
आई होली आई रे

चुनरी पे रंग सोहे
चुनरी पे रंग सोहे
आई होली आई रे

सात रंग सात फूल आज मिले साथ रे
बजने लगी बांसुरी जमने लगी बात रे
हो ओ ओ ओ
भीगी भीगी पवन सारी
भीगी भीगी पवन सारी

के आई होली आई रे

मल दे गुलाल मोहे
मल दे गुलाल मोहे
आई होली आई रे

आज कोई उनको भी भेज दे संदेस रे
राह तके दुल्हनिया जाने को परदेस रे
ओ ओ ओ ओ
आई आई रे याद आई
आई आई रे याद आई
ऐ आई होली आई रे

चुनरी पे रंग सोहे
चुनरी पे रंग सोहे
आई होली आई रे

प्यार से गले मिलो भेदभाव छोड़ दो
लोक लाज की दीवार आज सनम तोड़ दो
रहे दामन न कोई खाली
रहे दामन न कोई खाली
के आई होली आई रे

मल दे गुलाल मोहे
मल दे गुलाल मोहे
आई होली आई रे
हो ओ ओ ओ ओ ओ
चुनरी पे रंग सोहे
चुनरी पे रंग सोहे
आई होली आई रे
……………………………………..
Mal de gulaal mohe-Kaamchor 1982

Artists: Rakesh Roshan, Jaya Prada, Nita Mehta, Suresh Oberoi

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Mar 1, 2018

पिया संग खेलो होली-फागुन १९७३

एक आकर्षक धुन में बंधा होली गीत सुनते हैं सन १९७३ की
कम लोकप्रिय फिल्मन फागुन से.

वहीदा रहमान पर फिल्माए गए इस गीत को सुन कर होली
पर आनंद आ जाता है. देखने को मिल जाए तो सोने पे सुहागा.

मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं और एस डी बर्मन का संगीत.

इस ब्लॉग के गुप्त पाठकों और कॉपी पेस्टरों को होली की प्रकट
शुभकामनाएं. सुप्त पाठकों को हैप्पी हैप्पी. लुप्त पाठकों से एक
बार कम से कम त्यौहार पर आने का निवेदन.





गीत के बोल:

ओ ओ ओ पिया संग खेलो होली
पिया संग खेलो
पिया संग खेलो होली
हो फागुन आयो रे
चुनरिया भिगो ले गोरी
फागुन आयो रे
हो फागुन आयो रे

देखूं जिस ओर मच रहा शोर
गली में अबीर उड़े हवा में गुलाल
कहीं कोई हाय तन को चुराय
चली जाए देती गारी पोंछे जाये गाल
करे कोई जोरा जोरी
करे कोई जोरा जोरी
फागुन आयो रे
हो फागुन आयो रे

ओ ओ
कोई कहे सजनी सुनाओ पुकार
बरस बाद आये तोहरे द्वार
आज तो मोरी गेंदे की कली
होली के बहाने मिलो एक बार

तन पे है रंग मन पे है रंग
किसी मतवारे ने क्या रंग दियो डार
उई फुलवा पे पार गोरी तोरे गार
नैनों में गुलाबी डोरे मुख पे बहार
भीगी सारी भीगी चोली
फागुन आयो रे
हो फागुन आयो रे
...............................................................
Piya sang khelo holi-Phagun 1973

Artists: Waheeda Rehman, Dharmendra

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मोहे छेड़ो ना-लम्हे १९९१

फाल्गुन का त्यौहार हो और नन्द के लाला का जिक्र ना हो ऐसा
हो ही नहीं सकता. फ़िल्मी गीतकारों ने भी तबियत से स्याही उड़ेल
उड़ेल कर होली के गीत लिखे हैं. ये तो उस ज़माने का गीत है
जब जैल पेन हमारे देश में नहीं आया था. गाढ़ी स्याही वाला
डॉट पेन चला करता था. उसके अलावा फाउंटन पेन के भी शौक़ीन
थे जो ९० के दशक में कम होते चले.

सुनते हैं होली के अवसर पर फिल्म लम्हे का गीत. आनंद बक्षी की
रचना को स्वर दिया है लता मंगेशकर ने शिव हरि की धुन पर.



गीत के बोल:

मोहे छेड़ो ना
हो मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला
के मैं हूँ बृजबाला नहीं मैं राधा तेरी
मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला
के मैं हूँ बृजबाला नहीं मैं राधा तेरी
मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला

काहे पकड़ ली मेरी कलाई
तेरी दुहाई ओ कृष्ण कन्हाई
काहे पकड़ ली मेरी कलाई
तेरी दुहाई ओ कृष्ण कन्हाई
हरजाई तू बंसरी वाला
के मैं हूँ बृजबाला नहीं मैं राधा तेरी
मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला

राधा से होगी तेरी ठिठोली
आँख मिचौली तुम हमजोली
होली में क्यों मुझे रंग डाला
के मैं हूँ बृजबाला नहीं मैं राधा तेरी

मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला
के मैं हूँ बृजबाला नहीं मैं राधा तेरी
मोहे छेड़ो ना नन्द के लाला
………………………………………………………
Mohe chhedo na-Lamhe 1991

Artists: Sridevi, Anil Kapoor

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Jun 30, 2017

मेरी पहले ही तंग थी चोली-सौतन १९८३

फिल्म सौतन के २-३ गीत काफी लोकप्रिय हुए हैं. फिल्म में एक
होली वाला गीत भी है. गीतों में किसी शब्द के प्रयोग से कभी कभी
अलग अर्थ भी निकलते हैं. गद्य और पद्य में यही अंतर है. पद्य
की महिमा को अक्सर सन्दर्भ सहित भावार्थ में बखाना जाता है.
कल्पना करने का स्कोप काफी होता है दोनों में अगर कन्फ्यूज़न
हो तो याद करने का एक तरीका है-जो गधे के भी समझ आ जाए
वो गद्य. वेरी सिंपल.

एक शब्द है-तंग. इसके दो अर्थ हैं-परेशान और टाईट. कपडे तंग
होते हैं और व्यक्ति भी तंग हो सकता है. गीत में प्रयुक्त शब्द से
दोनों अर्थ लगाये जा सकते हैं. दोनों ही अर्थ में गीत पर कोई
फर्क नहीं पड़ेगा. तंग शब्द का तंज कसने में भी इस्तेमाल
किया जाता है.



गीत के बोल:

रंग लाल पीला नीला हरा नीला नीला
रंग लाल पीला नीला हरा नीला नीला
ओ मेरी पहले ही तंग थी चोली
ऊपर से आ गई बैरन होली
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
ओ हो
मैं तो सरम से पानी पानी हो ली

हो तुझको सिलवा दूंगा नई चोली
के अब तू सोलह बरस की हो ली
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
ओ हो हो
बिना बन्दूक चल गई गोली
ओ मेरी पहले ही तंग थी चोली

नई ना नई ना नई ना नई ना नई नई नई
नई ना नई ना नई ना नई ना नई नई नई

रंगीला रंगीला मौसम रंगीला मौसम आया
रंगीला रंगीला मौसम रंगीला मौसम आया
तेरे मेरे प्यार के चर्चे
होने लगे हैं गली गली
तेरे मेरे प्यार के चर्चे
होने लगे हैं गली गली
दुनिया वाले करने लगे हैं
बातें अब तो जली जली
दुनिया वाले करने लगे हैं
बातें अब तो जली जली
ओ हो हो
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
मैं तो सरम से पानी पानी हो ली
मेरी पहले ही तंग थी चोली

साजन अब तो तुम बिन
हमसे रहा न जाएगा
ओ साजन अब तो तुम बिन
हमसे रहा न जाएगा
जल्दी ही दीवाना तेरा
डोली लेकर आएगा
जल्दी ही दीवाना तेरा
डोली लेकर आएगा

ए हाँ
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
बिना बन्दूक चल गई गोली
हो तुझको सिलवा दूंगा नई चोली
के अब तू सोलह बरस की हो ली
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
ओ हो हो
ज़ुल्म तूने कर डाला
प्यार में रंग डाला
मैं तो सरम से पानी पानी हो ली
मेरी पहले ही तंग थी चोली
……………………………………………………………………
Meri pehle hi tang thi choli-Souten 1983

Artist: Rajesh Khanna, Tina Munim

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Mar 14, 2017

देखो होली आई रे-मशाल १९८४

ये है फिल्म मशाल से एक लोकप्रिय होली गीत.

फिल्म: मशाल
वर्ष: 1984
गीतकार:जावेद अख्तर
गायक: किशोर, लता, महेंद्र कपूर
संगीत:: हृदयनाथ मंगेशकर



गीत के बोल:

ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे
ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे
खेलो खेलो रंग है
कोई अपने संग है
भीगा भीगा अंग है
ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे
ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे
बहकी बहकी चाल है
चेहरा नीला लाल है
दीवाने क्या हाल है
हो मस्तों पर है मस्ती छाई
देखो होली आई रे
ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे


जो लाये रंग जीवन में
उसे होली में पाया है
जो लाये रंग जीवन में
उसे होली में पाया है
बताऊँ क्या तुम्हें यारों
किसे मैंने बुलाया है
या मत बुला या बता
दिल की बातें ना छुपा
दुनिया से चोरी है क्या
ये लड़की है या काली माई
देखो होली आई रे

ओ होली आई होली आई
देखो होली आई रे

यही दिन था यही मौसम
ज़ुबान जब हमने खोली थी
कहाँ अब खो गए वो दिन
के जब अपनी भी होली थी
तुम हो तो हर रात दिवाली
हर दिन मेरी होली है
अरे ये क्या चक्कर है भाई
देखो होली आई रे

हमारा कौन दुनिया में
यहाँ जो है पराया है
मगर अपना लगा कोई
ये ऐसा कौन आया है
इतना क्या मजबूर है
दिल क्यों गम से चूर है
तू ही सबसे दूर है
दिलों के पास बहुत ले आई
देखो होली आई रे
…………………………………………………………..
Dekho holi aayi re-Mashal 1984

Artists: Dilip Kumar, Waheeda Rehman, Anil Kapoor, Rati Agnihotri

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होली रे होली रंगों की डोली-पराया धन १९७१

एक और होली गीत सुन लेते हैं आखिर को होली की खुमारी
पूरे पांच दिन पंचमी तक रहती है.

ये है फिल्म पराया धन से जिसे आशा भोंसले संग मन्ना डे
ने गाया है. आनंद बक्षी के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है
आर डी बर्मन ने.



गीत के बोल:

होली रे होली रंगों की डोली
आई तेरे घर पे मस्तों की टोली
मुख ना छुपा ओ रानी सामने आ
होली रे होली रंगों की डोली
आई तेरे घर पे मस्तों की टोली
मुख ना छुपा ओ राजा सामने आ


जान ना पहचान अरे मैं तेरा मेहमान
हाय रे
जान ना पहचान अरे मैं तेरा मेहमान
काहे मारी पिचकारी तूने बेईमान
हा हा हाय रे हा हा हाय रे
जान ना पहचान अरे मैं तेरा मेहमान
काहे मारी पिचकारी तूने बेईमान
फागुन की बहार एक शर्मीली नार
नहीं समझे रे प्यार की बोली
होली है

होली रे होली रंगों की डोली
आई तेरे घर पे मस्तों की टोली
मुख ना छुपा हो राजा सामने आ

फेंकूं मैं गुलाल के डालूं रंग लाल
हाय रे
फेंकूं मैं गुलाल के डालूं रंग लाल
आगे आगे राधा दौड़े पीछे नन्दलाल
हो हा हा हाय रे हा हा हाय रे
फेंकूं मैं गुलाल के डालूं रंग लाल
आगे आगे राधा दौड़े पीछे नन्दलाल
काहे करे तंग मैं ना खेलूं तेरे संग
भीगा मेरा अंग अंग भीगी चोली

होली रे होली रंगों की डोली
आई तेरे घर पे मस्तों की टोली
मुख ना छुपा ओ रानी सामने आ
होली है

नैना मत जोड़ तू बैयाँ मेरी छोड़
हाय रे
नैना मत जोड़ तू बैयाँ मेरी छोड़
हाँ हाँ हाँ
हो हा हा हाय रे हा हा हाय रे
नैना मत जोड़ तू बैयाँ मेरी छोड़
मर जाऊं मैं ना मानूं चूडियाँ न तोड़
अरे हो जा रज़ामंद मुझे कर ले पसंद
कर खिड़की ना बंद हमजोली
……………………………………………………..
Holi re holi-Paraya Dhan 1971

Artists: Unidentifiable filmi objects

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Mar 13, 2017

देखो आई होली-मंगल पांडे २००५

एक होली गीत और सुनते हैं, इसमें जो शब्द आपने फ़िल्मी
होली गीतों में पहले नहीं सुने होंगे, मौजूद हैं. जावेद अख्तर
इस गीत के रचयिता हैं और रहमान धुनकर्ता. उदित नारायण
की आवाज़ पहचान में आ जाती है आसानी से. बाकी लोगों
की आवाजें पहचानिये जो होली के रंगों जैसी घुली मिली है.


मंगल पाण्डे द राइजिंग का ये होली गीत सरप्राइजिंग है. इस
होली गीत की विशेषता है इसमें राजस्थानी गीतों में की जाने
वाली आ आ और पारंपरिक होली गीतों का जोगीरा ता रा रा
रा के अलावा रहमान के टिपिकल दक्षिण भारतीय अंदाज़ वाली
हो ओ ओ भी है.



गीत के बोल:

होली है
हे होली आई  रंग फूट पड़े
ये छलक छलक  वो ढलक ढलक
फिर बाजे घुँघरू ढोल बड़े
ये छलक छलक  वो धमक धमक
सब निकले हैं पी पी के घड़े
ये लपक लपक  वो धुमक धुमक
छम छम नाचे परियों की धुनें
ये थिरक थिरक  वो मटक मटक
ये छलक छलक  वो ढलक ढलक
ये छलक छलक  वो धमक धमक
ये लपक लपक  वो धुमक धुमक
ये थिरक थिरक  वो मटक मटक

हे हे हे हे हे हे
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
देखो आई होली  रंग लायी होली
चली पिचकारी उड़ा है गुलाल
होली की है घटा  मन झूम उठा
रंग छलके हैं नीले हरे लाल
देखो आई होली  रंग लायी होली
चली पिचकारी उड़ा है गुलाल
होली की है घटा  मन झूम उठा
रंग छलके हैं नीले हरे लाल
रंगरेली मैं रंग खेलूंगी  रंग जाऊँगी
रंग गहरे हैं  अबके साल
अब हमें कोई रोके नहीं  अब हमें कोई टोके नहीं
अब होने दो हो जो भी हाल
देखो आई होली  रंग लायी होली
चली पिचकारी उड़ा है गुलाल
होली की है घटा  मन झूम उठा
रंग छलके हैं नीले हरे लाल

भीगी चोली चुनरी भी गीली हुई
सजना जी देखो मैं रंगीली हुई
थोड़ी थोड़ी तू जो नशीली हुई
पतली कमर लचकीली हुई
मन क्यों ना बहके  तन क्यों न दहके
तुम रह रह के  हां
मत फेंको ये नज़रों का जाल
अब हमें कोई रोके नहीं  अब हमें कोई टोके नहीं
अब होने दो हो जो भी हाल

देखो आई होली  रंग लायी होली
आज हुआ ये कैसा कमाल
रंग ऐसे उड़े देखने में लगे 
कोई रंगे हवाओं के बाल
चांदी की थाल से ले के गुलाल
अब राधा से खेलेंगे होली मुरारी
राधा भी नटखट है  पलटी वो झटपट है
मारे कन्हैया को है पिचकारी
देखने वाले तो दंग हुए हैं
के होली में दोनों जो संग हुए हैं
तो राधा काँन्हा एक रंग हुए हैं
कौन है राधा  कौन है काँन्हा
कौन ये समझा  कौन ये जाना

होली में जो सजनी से नयन लड़े
थामी हैं कलाई के बात बढ़े
तीर से जैसे मेरे मन में गड़े
तेरी ये नजरिया जो मुझपे पड़े
जो ये रास रचे  जो ये धूम मचे  कोई कैसे बचे
हमसे पूछो ना तुम ये सवाल
अब हमें कोई रोके नहीं  अब हमें कोई टोके नहीं
अब होने दो हो जो भी हाल

देखो आई होली  रंग लायी होली
चली पिचकारी उड़ा है गुलाल
होली की है घटा  मन झूम उठा
रंग छलके हैं नीले हरे लाल
देखो आई होली  रंग लायी होली
चली पिचकारी उड़ा है गुलाल
होली की है घटा  मन झूम उठा
रंग छलके हैं नीले हरे लाल

जोगीरा ता रा रा रा
जोगीरा ता रा रा रा
……………………………………………….
Dekho holi aayi-mangal Pandey 2005

Artists: Aamir Khan, Rani Mukherji

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होली के दिन दिल खिल जाते हैं-शोले १९७५

हिंदी सिनेमा इतिहास के शायद सबसे बड़े मील के पत्थर कही
जाने वाली फिल्म शोले में भी एक होली गीत है. अब आप इस
बात से अनुमान लगाइए इस त्यौहार का हमारे कथानकों में
कितना अहम स्थान रहा है.

सुनते हैं किशोर, लाता और कोरस का गाया हुआ ये लोकप्रिय
होली गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और आर डी बर्मन का
संगीतबद्ध किया हुआ. इसे सुनते समय हमेशा ये लगता है
दूसरी पंक्ति में एक शब्द कम सा है मगर इसे होली पर सुन
लिया करते हैं.





गीत के बोल:

चलो सहेली चलो रे साथी
ए पकड़ो पकड़ो रे इसे न छोड़ो
अरे बैंया न तोड़ो
ज़रा ठहर जा भाभी अरे जा रे सराबी
क्या ओ राजा गली में आ जा
होली होली भांग की गोली
ओ नखरे वाली दूँगी मैं गाली
अरे रामू की साली
होली रे होली

होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिक़वे भूल के दोस्तों
दुश्मन भी गले मिल जाते हैं
होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं

गोरी तेरे रंग जैसा थोड़ा सा मैं रंग बना लूँ
आ तेरे गुलाबी गालों से थोड़ा सा गुलाल चुरा लूँ
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू
छेड़ ना मुझे बेसरम
पूछ ले ज़माने से ऐसे ही बहाने से
लिए और दिए दिल जाते हैं

होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं

यही तेरी मरज़ी है तो अच्छा चल तू ख़ुश हो ले
पास आ के छूना ना मुझे चाहे मुझे दूर से भिगो ले
हीरे की कनी है तू मट्टी से बनी है
हीरे की कनी है तू मट्टी से बनी है
तू छूने से टूट जाएगी
काँटों के छूने से फूलों से नाज़ुक नाज़ुक
बदन छिल जाते हैं

होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिक़वे भूल के दोस्तों
दुश्मन भी गले मिल जाते हैं
होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
.........................................................
Holi ke din dil-Sholay 1975

Artists: Dharmendra. Hema Malini, Amitabh Bachchan

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अंग से अंग लगाना सजन-डर १९९३

होली के शुभ अवसर पर एक गीत सुनते हैं फिल्म डर से. फिल्म
का नाम अंग्रेजी में पढ़ने पर डर्र सा लगता है. आनंद बक्षी की
कलम से निकले ढेर सारे होली गीतों में से ये भी एक लोकप्रिय
गीत है.

अलका याग्निक, सुदेश भोंसले और विनोद राठौड द्वारा गाये गए
इस गीत की धुन बनाई है शिव हरि की जोड़ी ने.




गीत के बोल:

जो जी में आए
अरे जो जी में आए  तुम आज कर लो
चाहो जिसे इन बाँहो में भर लो

अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
गालों से ये गाल लगा के  नैनों से ये नैन मिला के
होली आज मनाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना

ऊपर ऊपर रंग लगय्यो  ना करियो कुछ नीचे
मोसे कुछ ना बोल  खड़ी रे चुप से अँखियाँ मीचे
हो बच के पड़ोसन जाने ना पाए
जाये तो वापस आने ना पाए
जुल्मी ने ऐसे बाजू मरोड़ा
कजरा ना गजरा  कुछ भी ना छोड़ा
रपट लिखा दो रपट लिखा दो थाने में
हम भर देंगे जुर्माना
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना

रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे
हो रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे

अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना

भीगे भीगे तेरे बदन से  जैसे शोले लपक रहे हैं
अपना रस्ता देख मुसाफिर  तेरे नैना भटक रहे हैं
मैं भूला रास्ता  रस्ते पे आ जा
मैं थाम लूं बैय्याँ  मत छेड़ो सैयां
तुम दिल मत तोड़ो  तुम आँचल छोड़ो
तुम काहे रूठी  मेरी चूड़ी टूटी
दिल मेरा टूटा  चल हट जा झूठा
तू नाच मैं गाऊं  तू बैठ मैं जाऊं
मुश्किल है जाना  तू है दीवाना
मुझे अंग लगा ले  बस रंग लगा ले
नीला के पीला  नीला न पीला
क्या लाल गुलाबी  तू बोल ओ भाभी
चुटकी भर सिन्दूर मंगाकर  इसकी मांग सजाना
हे अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
.............................................................................
Ang se ang lagana-Darr 1993

Artists: Various

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Mar 12, 2017

होली खेलत नन्दलाल-गोदान १९६३

होली के शुभ अवसर पर सुनते हैं सन १९६३ की फिल्म गोदान
से एक मधुर गीत जिसे अनजान ने लिखा और जिसकी धुन
तैयार की पंडित रविशंकर ने. रफ़ी ने इसे गाया है.

ब्रज की होली प्रसिद्ध है. इसका अपना अलग ही रंग है. यहाँ
होली की परंपरा सदियों से चली आ रही है. होली के दिन कृष्ण
मंदिरों में विशेष धूम होती है. बांके बिहारी भी इस दिन होली
खेलते हैं और भक्त भी उन्हें रंग गुलाल अर्पित कर त्यौहार का
आनंद लेते हैं.




गीत के बोल:

जोगीरा ता रा रा रा
जोगीरा ता रा रा रा
जोगीरा ता रा रा रा
जोगीरा ता रा रा रा
ता रा रा रा ता रा रा रा

होली खेलत नन्दलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
ग्वाल बाल संग रास रचाए
ग्वाल बाल संग रास रचाए
नटखट नन्द गोपाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
होली खेलत नन्दलाल

बाजत ढोलक  झांज  मंजीरा
बाजत ढोलक  झांज  मंजीरा
गावत सब मिल आज कबीरा
गावत सब मिल आज कबीरा
नाचत दे दे ताल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल

भर भर मारे रंग पिचकारी
भर भर मारे रंग पिचकारी
रंग गए बृज के नर नारी
रंग गए बृज के नर नारी
उड़त अबीर गुलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल

ऐसी होली खेली कन्हाई
ऐसी होली खेली कन्हाई
जमुना तट पर धूम मचाई
जमुना तट पर धूम मचाई
रास रचें नन्दलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
बिरज में होली खेलत नन्दलाल
…………………………………………..
Holi khelat Nandlal Godaan-1963

Artist: Mehmood

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Feb 3, 2017

नीला पीला हरा गुलाबी-आप बीती १९७६

आइये एक रंगों वाला गीत सुनते हैं जिसमें गांव की जनता एक महँगी
गाडी में चली आ रही है होली खेलने. देश प्रगति के पथ की और अग्रसर
है ये दिखलाना फिल्म में ज़रूरी है. फिल्म से ही पता चलता है देश
कितना प्रगतिशील है. बाकी का काम का तो आजकल चैनल वाले कर
देते हैं. देश के ५ प्रतिशत हिस्से को कवर कर के वो ऐसा सब्ज़ बाग
दिखाते हैं कि जनता दांतों तले उँगलियाँ क्या हथेली तक दबा ले.

दूसरे ब्लोगरों की भांति अगर हम सारे होली गीत होली पर ही पोस्ट करें
ये सोच कर कि होली पर क्या पोस्ट करेंगे तो जनाब होली गीत खूब हैं
फिली खजाने में और आगे भी बनते रहेंगे.

आपबीती फिल्म से ये गीत लता मंगेशकर, मन्ना डे और महेंद्र कपूर ने
गाया है. हेमा मालिनी, प्रेमनाथ और अशोक कुमार गीत में प्रमुख कलाकार
दिखलाई देते हैं.





गीत के बोल:

नीला  पीला  हरा  गुलाबी  कच्चा-पक्का रंग
रंग डाला मेरा अंग-अंग
राम दुहाई छोड़ कलाई
ओए मामा
ओ मेरे मामा क्या बाजू मेरा तोड़ेगा

आगे-पीछे  ऊपर-नीचे
कोई कितना दौड़ेगा
बहादुर नहीं छोड़ेगा  बहादुर नहीं छोड़ेगा
बहादुर नहीं छोड़ेगा  बहादुर नहीं छोड़ेगा

हो ओ ओ नीला  पीला  हरा  गुलाबी  कच्चा-पक्का रंग
रंग डाला मेरा अंग-अंग

अरे छेड़छाड़ मत करना  करके होली का बहाना
छेड़छाड़ मत करना  करके होली का बहाना
आज का दिन है प्यार का दिन
कोई मार न मुझसे खाना
कुर्ता ढील  तंग पजामा  गुस्सा रहने दे रे मामा
हाथ मिला ले प्रेम की रेखा
तुमने दुनिया में क्या देखा क्या देखा
अरे तुमने देखे प्रेम के नाटक
तुमने देखे प्रेम के नाटक
हमने देखी जंग
रंग डाला  मेरा अंग-अंग

नीला  पीला  हरा  गुलाबी  कच्चा-पक्का रंग
रंग डाला रे मेरा अंग-अंग

रंग वाले से रंग करवाओ
अरे रंग वाले से रंग करवाओ

तो वो माँगे पैसे
मुफ़्त में हमने रंग डाले हैं
मुखड़े कैसे कैसे
दर्पन देखो तो दीवानी  अरे सूरत न जाये पहचानी
तू कोई बदमाश है पक्का
मारा मुझको ज़ोर से धक्का
मैं गिर पड़ी ज़मीं पे जैसे ओ
मैं गिर पड़ी ज़मीं पे जैसे
कट के गिरे पतंग
रंग डाला  मेरा अंग-अंग

राम दुहाई  छोड़ कलाई
बेदर्दी क्या बाजू मेरा तोड़ेगा

आगे-पीछे  ऊपर-नीचे
कोई कितना दौड़ेगा
बहादुर नहीं छोड़ेगा  बहादुर नहीं छोड़ेगा
बहादुर नहीं छोड़ेगा  बहादुर नहीं छोड़ेगा
.....................................................................
Neela peela hara gulabi-Aap beeti 1976

Artists: Ashok Kumar, Nirupa Rai, Hema Malini, Premnath

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Dec 20, 2016

हम तोहरे सैयां हैं-मेरा दोस्त मेरा दुश्मन १९८४

आपको एक रेयर गीत सुनवाते हैं-सैयां हिट्स की श्रेणी में. होली
अवसर का गीत है मगर इसे आप कभी भी सुन सकते हैं. इसमें
एक अनूठा पेयर है-शत्रुघ्न सिन्हा और स्मिता पाटिल.

किशोर कुमार और आशा भोंसले का गाया युगल गीत लिखा है
कविराज आनंद बक्षी ने और इस गीत का संगीत तैयार किया है
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने. मधुर गीत है ये. होली के अवसर पर
अमूमन धिनचक किस्म के गीत ज्यादा बजते हैं.

इस गीत को सुन कर एक गीत याद आता है जीतेंद्र की फिल्म
खानदान से-बस्ती के लोगों में हुए बदनाम वो भी किशोर कुमार
का गाया हुआ है मगर उस गीत के संगीतकार खय्याम हैं. हिंदी
फ़िल्मी गीतों का भाईचारा जो जगजाहिर है. ये कहीं कहीं तो इतने
उदार हैं कि अंतर्राष्ट्रीय गीतों से भी भाईचारा बना लेते हैं. भाई
पाठक लोग थोडा हमारे ज्ञान पर दाद खुजली वगैरह जो बन पड़े
दे दो थोडा सा.




गीत के बोल:

हम तोहरे सैयां हैं हम तोहरे सैयां
हम तोहरे सैयां हैं हम तोहरे सैयां
सैयां तो बैयाँ मरोड़ेंगे
कल तुझे छोड़ दिया
कल तुझे छोड़ दिया
आज मगर नहीं छोड़ेंगे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे

मैं रेशम की नाजुक सी डोरी
मोसे ना कर
हो मोसे ना कर जोरा जोरी हो
हो मोसे ना कर जोरा जोरी
ऐसी नाजुक थी तो गोरी
प्यार किया क्यूँ चोरी चोरी हो ओ ओ ओ
ये हो गयी मुझसे भूल बड़ी रे
ये हो गयी मुझसे भूल बड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे

खुल के बिखरी जो ज़ुल्फ़ तेरी
दिन में हो गयी रात अँधेरी
दिन में हो गयी रात अँधेरी
देख कलाई छोड़ दे मेरी मेरी
देख कलाई छोड़ दे मेरी
या कहती हूँ बात वो तेरी हाँ
काटें चुभोये फूलों की छड़ी रे
काटें चुभोये फूलों की छड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे

बातों में ना बात छुपा रे
बातों में ना बात
क्या मर्ज़ी है साफ़ बता दे
क्या मर्ज़ी है साफ़
मेरे तन की प्यास मिटा दे
मेरे तन की प्यास मिटा दे
मेरे दिल की आग बुझा दे
लाऊँ कहाँ से मैं सावन की झड़ी रे
लाऊँ कहाँ से मैं सावन की झड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
कैसे बेदर्दी से आँख लड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
राम कसम मुश्किल में जान पड़ी रे
....................................................................
Ham tohre saiyan hain-Mera dost mera dushman 1984

Artists: Shatrughan Sinha, Smita Patil

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Apr 2, 2016

चुनर मोरी कोरी-नया रास्ता १९७०

होली गीतों को होली के दिन ही याद करने की कोई वजह नहीं
है. ये कभी भी याद आ जाते हैं. होली को बीते एक हफ्ता हो
गया है. दत्ताराम बाबूराव नायक सन १९५५ से सन १९८० तक
हिंदी फिल्म संगीत के क्षत्र में सक्रिय रहे. कम बजट वाली और
कम पूँजी वाले निरमता निर्देशकों के साथ काम करते करते उनके
पास भी धन की कमी रही. धन की कमी से मतलब फ़ाकाकशी
से कतई नहीं है.

इन फिल्मों के चक्कर में उनका गुणवत्ता वाला संगीत भी जनता
सुन नहीं पाई ढंग से. वो तो बी आर चोपड़ा की कुछ फिल्मों में
संगीत की वजह से उन्हें समय समय पर याद किया जाता रहा.
साहिर के साथ उनका काम उल्लेखनीय और सराहनीय है. कुछ
अविस्मरणीय धुनें उनके खाते में भी दर्ज हैं इसलिए संगीत रसिक
उन्हें याद करते रहेंगे. गीत में होली वाले सारे एलिमेंट्स हैं और
गौर फरमाएं इसके बोलों पर.

फिल्म नया रास्ता से ये तीसरा गीत है इस ब्लॉग पर. सुनते रहिये
और पढते रहिये........



गीत के बोल:

चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी


धीरे धीरे पिचकारी मारो
नहीं मारो बेदर्दी रे कस के
देखो देखो बैंया ना खींचो
मोरी रेशम की चोली ना मस्के
मोहे तुमरी कसम, मोहे लागे सरम
मानो मानो अरज मानो मोरी
चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी

भीगी भीगी चुनरी से झांके
तोरे मतवाले अंगों का जादू
आजा मेरी बाहों में छुप जा
गोरी घबरा के यूं ना सिमट तू
मिले तन से जो तन
बुझे मन की अगन
कहें हम भी के आई है होरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी
........................................................................................
.Chunar mori kori-Naya Rasta 1970

Artists-Jeetendra, Asha Parekh

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Mar 24, 2016

तन रंग लो जी आज मन रंग लो–कोहिनूर १९६०

संगीतकार नौशाद की धुनों पर बने होली गीत काफी चर्चित
हुए हैं. उन्हीं चर्चित गीतों में से एक होली के अवसर पर आज
आपके लिए प्रस्तुत है फिल्म कोहिनूर से जिसे लता और रफ़ी
ने गाया है. बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीतकार का नाम
हम आपको पहले ही बतला चुके हैं.

फिल्म कोहिनूर सन १९६० की फिल्म है जिसका निर्माण किया
वी एन सिन्हा ने और इसका निर्देशन किया एस यू सनी ने.
फिल्म उस वर्ष की बड़ी हिट फिल्म कहलाती है. इसके गीत भी
खासे चर्चित हुए.



गीत के बोल:

तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,
तन रंग लो
खेलो खेलो, उमंग भरे रंग प्यार के ले लो,
रंग लो
तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,
तन रंग लो

आज नगरी में रंग है बहार है
गली गली देखो रस की फुहार है
पिचकरियों में रंग भरा प्यार है
इसी रंग में जीवन रंग लो

तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,

नाचो नाचो री सखी रे होली आई रे
घर-घर में रंगीली रुत छाई रे
आज दुनिया ने मस्ती लुटाई रे
आशाओं का दामन रंग लो

तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,

आज मुखड़े से घूँघटा हटा लो जी
हो, ज़रा सजना से अँखियाँ मिला लो जी
रंग झूठे मोरे तन पे न डालो जी
मन प्यार में साजन रंग लो

तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,

राधा संग होली खेले रे बनवारी हो
अंग-अंग पे चलाए पिचकारी हो
कहे बैंया पकड़ के अनाड़ी
दिल रंग लो जी, धड़कन रंग लो

तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,
तन रंग लो
खेलो खेलो, उमंग भरे रंग प्यार के ले लो,
रंग लो
तन रंग लो जी, आज मन रंग लो,
तन रंग लो
…………………………………………………………..
Tan rang lo ji aaj man rang lo-Kohinoor 1960

Artists: Dilip Kumar, Meena Kumari

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Mar 23, 2016

आज न छोड़ेंगे बस हमजोली-कटी पतंग १९७०

होली के शुभ अवसर पर सुनते हैं फिल्म कटी पतंग
का ये गीत जिसमें उमंग उल्लास के साथ दुःख की
लकीर भी है. दुःख को भगाने का भरसक प्रयत्न कर
रही है सारी जनता, जो गाने में दिखलाई दे रही है.

गीत संदेशात्मक भी है जो जीवन में आगे बढ़ने की
प्रेरणा भी दे रहा है.

गीत आनंद बक्षी का है जिसे किशोर कुमार, लता
और कोरस ने गाया है.

फिल्म रिलीज़ हुई थी १९ मार्च को और सन १९७० में
होली का दिन था २३ मार्च. ये महज संयोग था या फिर
फिल्म की कहानी में जानबूझ कर होली गीत ठूंसा
गया था.



गीत के बोल:

ओये बबुआ होली है
ओये सा रा रा रा रा
होये होये होये होये होये
ओये सा रा रा रा रा
होये होये होये होये होये

हे आज ना छोड़ेंगे
धीक ता धी धी धीक ता धी धीक ता धी धीक ता
हाँ आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली
खेलेंगे हम होली खेलेंगे हम होली
चाहे भीगे
धीक ता धी धी धीक ता धी धीक
चाहे भीगे तेरी चुनरिया चाहे भीगे रे चोली
ओये खेलेंगे हम होली
होली है

अपनी अपनी किस्मत है ये कोई हँसे कोई रोये
हाँ कोई हँसे कोई रोये
हो ओ ओ रंग से कोई अंग भिगोये रे कोई
अंसुअन से नैन भिगोये
हो अंसुअन से नैन भिगोये

भुर्र रहने दो यह बहाना क्या करेगा ज़माना
हो ओ ओ तुम हो कितनी भोली
होये खेलेंगे हम होली

आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली
खेलेंगे हम होली
हो हो हाँ जानो हाँ जानो हो हो नाना रा ना ना
हो हो हो हो हो हो
ऐसे नाता तोड़ गये हैं मुझसे ये सुख सारे
हाँ मुझसे ये सुख सारे
हो ओ ओ जैसे जलती आग किसी बन में
छोड़ गये बंजारे हो गये बंजारे
भुर्र दुःख है इक चिंगारी भर के ये पिचकारी
हो ओ ओ ओ आई मस्तों की टोली
होये खेलेंगे हम होली

आज ना छोड़ेंगे
धीक ता धी धी धीक ता धी धीक ता धी धीक ता
हाँ आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली
खेलेंगे हम होली ओये खेलेंगे हम होली
चाहे भीगे तेरी चुनरिया चाहे भीगे रे चोली
ओये खेलेंगे हम होली
हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे
होली है
…………………………………………………..
Aaj na chhodenge bas hamjoli-Kati patang 1970

Artists: Rajesh Khanna, Asha Parekh

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Jul 31, 2015

रंग दी प्रीत ने रंग दी-धनवान १९९३

जिन निर्देशकों को ज्यादा सम्मान दिया जाता है फिल्म उद्योग में,
उनमें से एक हैं के. विश्वनाथ. इनका पूर्ण नाम है-काशीनाथुनी
विश्वनाथ. फिल्म धनवान की कहानी उन्होंने ही लिखी है और
फिल्म में नायक के चरित्र का नाम काशीनाथ है. फिल्म के नायक
हैं अजय देवगन और उनके साथ हीरोईन हैं-करिश्मा कपूर. हिंदी
में हीरोईन को अभिनेत्री कहा जाता है.

फिल्म के निर्देशक को संगीत कीगहरी समझ है. गौरतलब है उन्होंने
जैकी-माधुरी अभिनीत हिंदीफिल्म ‘संगीत’ का भी निर्देशन किया है.
आपको ऋषि कपूर औरजया प्रदा वाली संगीतमय ‘सरगम’ तो याद
ही होगी.

इस फिल्म से एक मस्ती भरा होली गीत सुनते हैं. आज इस गीत
की याद आ गयी. वैसे तो होली का कोई मौसम नहीं है मगर
बरसात ज़रूर आनंद दे रही है अभी. बरसात में भी ऐसे गीत सुने
जा सकते हैं. गीत लिखा है समीर ने और इसके संगीतकार हैं
आनंद मिलिंद. ३ गायक हैं -नितिन मुकेश, कविता कृष्णमूर्ति और
सुरेश वाडकर. गीत में आप जलेबी बनती देख सकते हैं.





गीत के बोल:

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी
रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी

गोरी के रंग रंगा सांवरा
गोरी के रंग रंगा सांवरा
सांवरे के रंग रंगी गोरी

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी

गोरी के रंग रंगा सांवरा
गोरी के रंग रंगा सांवरा
सांवरे के रंग रंगी गोरी

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी

जागी उमंगें पागल तरंगें
छेड़ा बसंती बयारो ने
जागी उमंगें पागल तरंगें
छेड़ा बसंती बयारो ने
तन मेरा डूबा, मन मेरा डूबा
वो रंग डाला बहारों ने
क्या कह रहा काजल तेरा
छोड़ो ज़रा आँचल मेरा
धरती गगन खुशबू चमन
खोये हैं मस्ती की बाहों में
भांग दे भांग दे, थोड़ी सी भांग दे
हम भी मानेंगे होली
भांग दे भांग दे, थोड़ी सी भांग दे
हम भी मानेंगे होली

फागुन ने पागल किया है
फागुन ने पागल किया है
नैना मिले हमसे चोरी

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी

साँसों ने जोड़ा साँसों से नाता
बेला यही तो मिलन की है
साँसों ने जोड़ा साँसों से नाता
बेला यही तो मिलन की है
सतरंगी चोली सपनों की डोली
पलकों में सूरज दुल्हन की है
देखूं तुझे चूड़ी बजे
सिन्दूर की बिंदिया सजे
खुशियों भरी शहनाई
बजती है सारी फिज़ाओं में

ऐ. रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी

गोरी के रंग रंगा सांवरा
गोरी के रंग रंगा सांवरा
सांवरे के रंग रंगी गोरी

रंग दी रंग दी प्रीत ने रंग दी
बाली उमर कोरी कोरी
.......................................................................
Rang di rang di-Dhanwan 1993

Artists: Ajay Devgan, Karishma Kapoor, Manisha Koirala, Kadar Khan

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Mar 5, 2015

होली आई रे कन्हाई-मदर इण्डिया १९५७

आज होली का पर्व है. होली का त्यौहार हमारे देश में धूम धाम से
मनाया जाता है. होली का इतिहास सदियों पुराना है. एक पूरी
वेबसाईट होली पर बनी हुयी है. विस्तार से जानकारी वहां मिलेगी
आपको-होलीउत्सव . इस ब्लॉग के पाठकों और मित्रों को होली की
शुभकामनाएं.

बरसों पहले बनी फिल्म मदर इण्डिया जो एक चेतना को जगाने वाली
फिल्म थी, से ये गीत लिया गया है. फिल्म के गंभीर कथानक वाली
होने के बावजूद इसमें होली वाला हल्का फुल्का मगर गरिमामय गीत है.
शकील बदायूनी के बोलों को संगीत से संवारा है नौशाद ने. इसे गाया है
शमशाद बेगम ने. गीत एक कोरस गीत है जिसमें आपको पुरुष और नारी
दोनों प्रकार के कोरस की ध्वनियाँ सुनाई देंगी. ज़ाहिर है इस गीत ने कई
लोगों को रोज़गार प्रदान करवाया होगा.

इस ब्लॉग पर आप मदर इण्डिया के चार गीत पहले सुन चुके हैं.
ये पांचवा गीत है.



गीत के बोल:

होली आई रे कन्हाई, होली आई रे
होली आई रे कन्हाई
रंग छलके सुना दे ज़रा बांसुरी

होली आई रे कन्हाई
रंग छलके सुना दे ज़रा बांसुरी
होली आई रे, आई रे, होली आई रे

बरसे गुलाल रंग मोरे आंगनवा
अपने ही रंग में रंग दे मोहे सजनवा
हो देखो नाचे मोरा मनवा
बरसे गुलाल रंग मोरे आंगनवा,
जी मोरे आंगनवा
अपने ही रंग में रंग दे मोहे सजनवा
तोरे कारन घर से आई, तोरे कारन हो
तोरे कारन घर से आई हूँ निकल के
सुना दे ज़रा बांसुरी

होली आई रे कन्हाई
रंग छलके सुना दे ज़रा बांसुरी
होली आई रे, आई रे, होली आई रे

छूटे ना रंग ऐसी रंग दे चुनरिया
धोबन ये धोये चाहे सारी उमरिया
हो मन को रंग देगा साँवरिया
छूटे ना रंग ऐसी रंग दे चुनरिया, जी
रंग दे चुनरिया
धोबन ये धोये चाहे सारी उमरिया
मोहे भाये ना हरजाई, मोहे भाये ना
मोहे भाये ना हरजाई
रंग हलके सुना दे ज़रा बांसुरी

होली आई रे कन्हाई
रंग छलके सुना दे ज़रा बांसुरी

...............................................
Holi aayi re-Mother India 1957

Artists: Nargis, Rajkumar, Sunil Dutt, Rajendra Kumar

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Mar 27, 2013

आई आई रे होली-आबरू १९६८

एक होली गीत सुनते हैं जी एल रावल के बोलों वाला. हमने सभी
नामचीन शायरों और गीतकारों के होली गीत सुन रखे हैं. ये कम
सुना हुआ मगर अच्छा गीत है.

और गीतों की तरह इसमें भी एक आवश्यक तत्व मोहन-राधा का
जिक्र है और उपमाओं और अलंकारों काभी इसमें सुन्दर प्रयोग है.

फिल्म आबरू से इसे लिया गया है. सन १९६८ की फिल्म आबरू में
सोनिक ओमी का संगीत है. आवाजें आशा भोंसले और मन्ना डे की
है.



गीत के बोल:

आई आई रे होली ओ रंग लाई रे होली
ओ नाचो नाचो
बहारें संग लायी रे होली

होंठ गुलाबी, नैन शराबी
मस्त जवानी छायी है
मुखड़े से जो बच गयी लाली
वो फूलों पे आई है

आज मेरे घर साजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये
कहीं लगे न चाँद की नजरिया
बड़ी दुश्मन है जुल्मी नजरिया
हाय मैं तो रख लूँगा सारी उमरिया
प्यार में ऐसा शाम ना करना
राधा को बदनाम ना करना
मेरी कोरी है लाज की चुनरिया
हाय रंग डालो ना मुझपे सांवरिया
मैं तो आई हूँ रंग में तेरे हो के बावरिया
आज मेरे घर सजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये

युग युग से है साथ हमारा
तु है नदिया मैं हूँ किनारा
भारत की चले रंग की धारा
तुझ बिन सूनी मेरी बांसुरिया
प्यार में ऐसे शाम ना करना

मर मर जाऊं लाज की मारी
ताने देंगी सखियाँ सारी
है गुलाल रंग झूमें नर नारी
क्यूँ रंग डारी मेरी चुनरिया
आज मेरे घर साजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये

तु है राधा मेरी, मैं तेरा मोहन
टूटे ना ये प्यार का बंधन
होली आई है गले लगा लो सजना
आज मुझको तुम अपना बना लो सजना
……………………………………………………….
Aayi aayi re holi-Aabroo 1968

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Mar 1, 2010

अरे जा रे नटखट-नवरंग १९५९

सी रामचंद्र के कैरियर में एक और मील का पत्थर आया वो थी
फिल्म नवरंग। इस फिल्म में लता मंगेशकर का एक भी गीत नहीं
है। मन्ना डे, आशा भोंसले और महेंद्र कपूर की आवाजों का बेहतर
इस्तेमाल करके सी रामचंद्र ने अद्भुत रचनाएँ की। इस फिल्म का
एल पी रिकॉर्ड आपको संगीत प्रेमियों के खजाने में अवश्य मिलेगा।
वी शांताराम की इस फिल्म का संगीत लोकप्रियता की चरम सीमा
तक पहुंचा।

फिल्म का होली गीत बहुत लुभावना है और इसका छायांकन भी दमदार
है। वी शांताराम की बाकी फिल्मों के नृत्य की तरह इसमें भी नायिका
जिमनास्टिक्स के अंदाज़ वाला नृत्य कर रही है। ऐसा उनकी फिल्मों में
क्यूँ होता है ये रिसर्च का विषय हो सकता है ।



गीत के बोल:


धागे ना तिनक धिन
धागे ना तिनक धिन
धागे ना तिनक धिन

अटक अटक झटपट पनघट पर
चटक मटक इक नार नवेली
गोरी गोरी ग्वालन की छोरी चली
चोरी चोरी मुख मोरी मोरी मुस्काये अलबेली
कंकरी गले में मारी कंकरी कन्हैया ने
पकरी बांह और की अटखेली
भरी पिचकारी मारी
सा रा रा रा रा रा रा रा
भोली पनिहारी बोली

आ रा रा रा रा रा रा रा

अरे जा रे हट नटखट
ना छू रे मेरा घूंघट
पलट के दूँगी आज तुझे गाली रे
अरे जा रे हट नटखट
ना छू रे मेरा घूंघट
पलट के दूँगी आज तुझे गाली रे
मुझे समझो ना तुम भोली भाली रे

ध रा रा रा रा रा रा रा
आया होली का त्यौहार
उड़े रंग कई बौछार
तू है नार नखरेदार मतवाली रे
आज मीठी लगे है तेरी गाली रे

हो ओ ओ, हाँ हाँ हाँ
हा आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तक तक ना मार पिचकारी की धार
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तक तक ना मार पिचकारी की धार
कोमल बदन सह सके ना ये मार
तू है अनाड़ी बड़ा ही गंवार
कजरे में तूने अबीर दिया डार
तेरी झकझोरी से बाज़ आई होरी से
चोर तेरी चोरी निराली रे
मुझे समझो ना तुम भोली भाली रे

अरे जा रे हट नटखट
ना छू रे मेरा घूंघट
पलट के दूँगी आज तुझे गाली रे
मुझे समझो ना तुम भोली भाली रे

हो ओ ओ ओ ओ ओ
धरती है लाल आज अम्बर है लाल
हो ओ ओ ओ ओ ओ
धरती है लाल आज अम्बर है लाल
उड़ने दे गोरी गालों का गुलाल
मत लाज का आज घूंघट निकाल
दे दिल की धड़कन पे धिनक धिनक ताल
झांझ बजे शंख बजे
संग में मृदंग बजे
अंग में उमंग खुशियाली रे
आज मीठी लगे है तेरी गाली रे

अरे जा रे हट नटखट
ना छू रे मेरा घूंघट
पलट के दूँगी आज तुझे गाली रे
मुझे समझो ना तुम भोली भाली रे
..................................
Are ja re hat natkhat-Navrang 1959

Artist: Sandhya

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जोगी जी वाह जोगी जी-नदिया के पार १९८२

'ठुमका' शब्द से कुछ विशेष गीत याद आते हैं। होली के अवसर पर
ठुमकेदार गीत देखने का आनंद ही कुछ और होता है। विजया इत्यादि
के सेवन उपरान्त चाल ढाल सब रंगीली हो जाया करती है जनता की।
आइये नदिया के पार चलें और देखें होली के अवसर पर क्या हो रहा
है। पुरुष भेस बदल कर नाच रहा है ढोलक की थाप पर।

सचिन और साधना सिंह होली के अवसर पर गाँव वालों के साथ नाच
रहे हैं। गीत सुन कर ऐसा आभास होता है जैसे कोई जोगी नाम के
शख्स के लिए हुंकार भरी जा रही हो । फिल्म नदिया के पार राजश्री
प्रोडक्शंस के एक बड़ी हिट फिल्म थी और इसके गीत इतने बजे कि
लोगों के कैसेट, विनायिल रिकॉर्ड बज बज के घिस गए। रवीन्द्र जैन
ने गीत लिखा और इसकी धुन भी बनाई है।

जसपाल सिंह और हेमलता की आवाज़ के साथ इसमें चन्द्राणी मुखर्जी
और सुशील कुमार की आवाजें हैं जो कि अक्सर ३-४ गायकों वाले गानों
में ही गाते पाए जाते थे। फिल्म सन १९८२ में आई थी और इसने जगह
जगह सिल्वर जुबली मनाने का रिकॉर्ड कायम किया था।



गीत के बोल

जोगी जी धीरे धीरे,
जोगी जी वाह जोगी जी
नदी के तीरे तीरे,
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा
कोई ढूंढें मोतिया,
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जोगी जी ढूंढ के ला दो,
जोगी जी वाह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो,
जोगी जी वाह जोगी जी

फागुन आयो ओ मस्ती लायो
भर के मारे पिचकारी
सा रा रा रा रा
रंग ले के, ओ जंग ले के
गावे जोगी रातें जागी सारी
आ रा रा रा रा रा
जोगी रा
अर रा रा रा रा
जोगी रा
आर रा रा रा रा रा
जोगी जी नींद ना आवे,
जोगी जी वाह जोगी जी
सजन की याद सतावे,
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दावा जड़ी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खरी,
जोगी जी वह जोगी जी

सारे गाँव की गोरियां
रंग गयीं हमपे डार
पर जिसके रंग हम रंगे
छुप गयी वो गुलनार
छुप गयी वो गुलनार
जोगी जी सूना है संसार
छुप गयी वो गुलनार
जोगी जी सूना है संसार
बिना उसे रंग लगाये,
जोगी जी वह जोगी जी
ये फागुन लौट ना जाये,
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा कोई ढूंढें मोतिया
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जोगी जी ढूंढ के ला दो,
जोगी जी वह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो,
जोगी जी वह जोगी जी

छुपती डोले राधिका
ढूंढ सके घनश्याम
कान्हा बोले लाज का
आज के दिन क्या काम
लाज का है क्या काम
के होली खेले सारा गाँव
लाज का है क्या काम
के होली खेले सारा गाँव
रंगी है कब से राधा
जोगी जी वाह जोगी जी
मिलन में फिर क्यूँ बाधा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दावा जदी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खारी,
जोगी जी वाह जोगी जी

हमरी जोगन का पता
उसके गहरे नैन
नैनन से घायल करे
बैनन से बेचैन
देखन को वो नैन जोगी जी
मनवा है बेचैन
देखन को वो नैन जोगी जी
मनवा है बेचैन
लड़कपन जाने को है
जोगी जी वह जोगी जी
जवानी आने को है
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी कोई ढूंढें मूंगा कोई ढूंढें मोतिया
हम ढूँढें अपनी जोगनिया को,
जो तेरा प्रेम है सच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगनिया मिलेगी बच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी

जंतर मंतर टोटका
घट में आ ताबीज़
जी को बस में कर सके
दे दो ऐसी चीज़
दे दो ऐसी चीज़
जोगी जी साजन जाए रीझ
दे दो ऐसी चीज़
जोगी जी साजन जाए रीझ
हमारे पीछे पीछे
जोगी जी वाह जोगी जी
चले वो आँखे मींचे
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी प्रेम का रोग लगा हमको
कोई इसकी दवा जदी हो तो कहो
बुरी है ये बीमारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
लगे है दुनिया खारी,
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगी जी धीरे धीरे
जोगी जी वाह जोगी जी
नदी के तीरे तीरे
जोगी जी वह जोगी जी
जोगी जी ढूंढ के ला दो
जोगी जी वाह जोगी जी
मिला दो हमें मिला दो
जोगी जी वाह जोगी जी
जो तेरा प्रेम है सच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
जोगनिया मिलेगी बच्चा
जोगी जी वाह जोगी जी
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Jogi ji wah jogi ji-Nadiya ke paar 1982

Artists: Sachin, Sadhana Singh,

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