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Nov 13, 2019

अश्कों ने जो पाया है-चांदी की दीवार १९६४

गुमनाम और अनदेखी फिल्मों में ऐसे ऐसे नायब मोती
बिखरे पड़े हैं कि जिनका कद फिल्मों से ऊंचा हो जाता
है कालांतर में. ठाकू जरनैल सिंह का गाना-हम तेरे बिन
जी न सकेंगे तो आपको याद ही होगा. क्या आपको
हेलन याद आती हैं जिन पर ये गीत फिल्माया गया है
या फिल्म के नायक शेख मुख्तार का नाम याद आता है
या फिर गीत के गीतकार असद भोपाली और संगीतकार
गणेश के नाम याद आते हैं? नहीं ना. ऐसा ही कुछ है
दिलीप बोस निर्देशित फिल्म चांदी की दीवार के गीत के
साथ. वैसे जनता तो ये भी भूल चुकी है कि बरसात का
गीत-मेरी आँखों में बस गया कोई रे किस पर फिल्माया
गया है-नर्गिस पर या निम्मी पर.

दिलीप बोस ने हिंदी में सन १९७१ की संसार और १९७३
की ठोकर का निर्देशन भी किया है. संयोग से १९७१ की
संसार में भी साहिर के लिखे गीत हैं. संगीत चित्रगुप्त का
है. दिलीप बोस ने भोजपुरी में कई उल्लेखनीय फ़िल्में
बनायीं हैं.

इस फिल्म से तलत महमूद का गाया गीत जिसकी एक
पंक्ति आज भी कान में किसी पंखों के बनाये हुए reamer
की तरह भेदन करती है-जो तार से निकली है वो धुन
सबने सुनी है, जो साज़ पे गुजरी है कसी दिल ने सुना
है.

गीत के बोल और संगीत दोनों उम्दा हैं और इस पर
किसी संगीत भक्त को रत्ती भर संदेह नहीं होना चाहिए.
साहिर लुधियानवी की रचना है और एन दत्ता का
संगीत.



गीत के बोल:

अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है के ज़माने को गिला है
अश्कों ने जो पाया है

जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो साज़ पे गुजरी है वो किस दिल को पता है

अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है के ज़माने को गिला है
अश्कों ने जो पाया है

हम फूल हैं औरों के लिए लाये हैं खुशबू
हम फूल हैं औरों के लिए लाये हैं खुशबू
अपने लिए ले दे के बस इक दाग मिला है

अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है के ज़माने को गिला है
अश्कों ने जो पाया है
………………………………………………….
Askhon ne jo paaya hai-Chandi ki deewar 1964

Artist: Bharat Bhushan

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Oct 26, 2019

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ-मिलाप १९५५

साहिर लुधियानवी कब दिमाग पे दे दे बत्ती पता ही
नहीं चलता. फिल्म मिलाप के एक गीत में पंक्ति है
-ये हसीं भूल कर के देख लो. वो गीत एक क्लब
सोंग है जिसमें नायिका गीता बाली डांस कर रही हैं
अपने कातिलाना एक्सप्रेशंस के साथ. गीता दत्त  की
आवाज़ उसे और कातिलाना बना रही है. गीत आप
सुन चुके है पहले.

सुनते हैं फिल्म से एक और गीत. इसे भी गीता दत्त
ने गाया है. गीत के पहले अंतरे की पंक्ति से एक गीत
का मुखडा बना है जिसे आशा भोंसले ने गाया है रफ़ी
के साथ.

राज खोसला की ये बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और
इसे गीत के फिल्मांकन को देख के लगता है वे कारदार
की फिल्मों के गीतों के फिल्मांकन के फैन हैं.


https://www.youtube.com/watch?v=dJH_9s2gVqE


गीत के बोल:

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ

आये हैं दूर से मिले हुजुर से
हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की
आये हैं दूर से मिले हुजुर से
हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की
आधी है रात अभी बाकी है बात अभी
छोडो ना साथ अभी बाबूजी जाते हो कहाँ

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ

दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के
बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के
दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के
बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के
थोड़ी सी चाह दे दो सीने में राह दे दो
दिल को पनाह दे दो बाबूजी जाते हो कहाँ

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
...........................................................
Jaate ho to jao par-Milap 1955

Artists: Geeta Bali, Dev Anand

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Jan 31, 2018

कासे कहूँ मन की बात-धूल का फूल १९५९

जैसा कि हमने आपको पहले बतलाया सन १९५९ की फिल्म
धूल का फूल के गीत चर्चित रहे हैं. फिल्म में अलग अलग
रंग के मधुर गीत हैं. आज उपशास्त्रीय संगीत वाला एक गीत
सुनवाते हैं सुधा मल्होत्रा की आवाज़ में. सुधा मल्होत्रा को
प्रसिद्धि दिलवाने वाला एक गीत ये भी है. इसे आपने रेडियो
पर ज़रूर एक ना एक बार सुन लिया होगा.

पूर्णिमा नाम की अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है और
दर्शक दीर्घा में आप फिल्म के प्रमुख सितारों को देख सकते
हैं. सुनते हैं ये गीत राग काफी पर आधारित है. बोल साहिर
के हैं और संगीत एन दत्ता का. गीत पर नृत्य करने वाली
अभिनेत्री का नाम है नाज़.



गीत के बोल:

कासे कहूँ मन की बात
हाँ कासे कहूँ मन की बात
बैरी बलमवा दुखिया कर गये
सुख को ले गये साथ
कासे कहूँ मन की बात
हाँ कासे कहूँ मन की बात
हर आहट पे आँख लगाये
हर आहट पे आँख लगाये
आ आ आ आ आ आ आ
हर आहट पे आँख लगाये
बैठी रही मैं सेज सजाये
हर आहट पे आँख लगाये
बैठी रही मैं सेज सजाये
बेदर्दी ने रैन बितायी
सौतनिया के साथ

कासे कहूँ मन की बात
हाँ कासे कहूँ मन की बात
प्रीत भी झूठी मीत भी झूठे
प्रीत भी झूठी मीत भी झूठे
आ आ आ आ आ आ आ
प्रीत भी झूठी मीत भी झूठे
ठेस लगी और सपने टूटे
प्रीत भी झूठी मीत भी झूठे
ठेस लगी और सपने टूटे
नैनन जल में डूब के रह गई
मधुर मिलन की आस

कासे कहूँ मन की बात
हाँ कासे कहूँ मन की बात
बैरी बलमवा दुखिया कर गये
सुख को ले गये साथ
कासे कहूँ मन की बात
कासे कहूँ मन की बात
कासे कहूँ मन की बात
..................................................................
Kaase kahoon man ki baat-Dhool ka phool 1959

Artist: Poornima, Naaz

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Jul 10, 2017

झुकती घटा गाती हवा-धूल का फूल १९५९

नन्हा सा दिल हिट्स के अंतर्गत अगला नगमा सुनिए सन १९५९
की फिल्म धूल का फूल से. घटा से अर्थ बादल होता है. झुकते
बादल तब दिखाई देते हैं जब पानी गिरने वाला होता है, अन्यथा
ये आसमान पर काफी ऊपर चमकते नज़र आते हैं.

गीत में नज़ारे महके हुए भी हैं और दहके हुए भी. गूढ़ अर्थ वाला
शब्द है. बहुत सारा कुछ समेट के एक शब्द में लिख दिया गया
है. गीतों में मामला केवल लहर तक सीमित होता है. लहर के
झकोले शब्द आपने शायद ही कभी वार्तालाप में प्रयोग किया हो.



गीत के बोल

झुकती घटा गाती हवा सपने जगाए
नन्हा सा दिल मेरा मचल-मचल जाए

महके हुए दहके हुए मस्त नज़ारे
निखरे हुए बिखरे हुए रंग के धारे
आज पवन हो के मगन हमको बुलाए,

झुकती घटा गाती हवा सपने जगाए
नन्हा सा दिल मेरा मचल-मचल जाए

रवाना है छोटी सी कश्ती हवाओं के रुख पर
नदी के साज़ पे मल्लाह गीत गाता है
तुम्हारा जिस्म हर इक लहर के झकोले से
ओ मेरी शरीर निगाहों में झूल जाता है

झुकती घटा गाती हवा सपने जगाए
नन्हा सा दिल मेरा मचल-मचल जाए

जिस्म मेरा जान भी मेरी तेरे लिये है
प्यार भरी दुनिया सजी तेरे लिये है
आँखों में छाए तेरे जलवों के साए

झुकती घटा गाती हवा सपने जगाए
नन्हा सा दिल मेरा मचल-मचल जाए
......................................................................
Jhukti ghata gaati hawa-Dhool ka phool 1959

Artists: Rajendra Kumar, Nanda

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May 7, 2017

आ आ आ छोरी-लाईट हाउस १९५८

लाईट हाउस फिल्म के पिछले गीत के वक्त हमने जिक्र किया था
एन दत्ता के बारे में. सभी प्रकार के गीत रच सकने में सक्षम इस
संगीतकार ने कई हलके फुल्के गीत भी बनाये हैं. गीत किस प्रकार
के हों इस बात का निश्चय गीतकार और संगीतकार के बजाये
फिल्म बनाने वाले किया करते हैं. कहानी की मांग और निर्माता
निर्देशक की मांग के अनुसार गीतों की रचना होती है.

एक हल्का फुल्का गीत सुनते हैं इसी फिल्म से गीता दत्त और रफ़ी
का गाया उया. बोल एक बार फिर से साहिर लुधियानवी के हैं और
गाने के मूड के हिसाब से इसे जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया है.





गीत के बोल:


आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
हे आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

रुक छोरी रुक सर पे ना झुक
अच्छे नहीं ये बहाने
रुक छोरी रुक सर पे ना झुक
अच्छे नहीं ये बहाने
अरे तक ज़रा तक जल्दी से बक
कहता है क्या ओ दीवाने

आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

होश करो तुम होश हुए गम
देखा जो मुखडा तुम्हारा
होश करो तुम होश हुए गम
देखा जो मुखडा तुम्हारा
आशिकों की सुन छोड़ मेरी धुन
ऐसे ही कर ले गुज़ारा

आ आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

मैंने कहा आ मैंने कहा जा
मिल कर बना आ जा
मैंने कहा आ मैंने कहा जा
मिल कर बना आ जा
मैंने कहा आ मैंने कहा ना
मैंने सुना आ आ

आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
…………………………………………………………..
Aa aa aa chhori-Light House 1958

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Mar 21, 2017

मैं जब भी अकेली होती हूँ-धर्मपुत्र १९६१

कुछ कथानक समय से आगे होते हैं और कुछ समय पर जनता
के सम्मुख आ नहीं पाते. दोनों किस्म के कथानक अक्सर दर्शक
नकार दिया करते हैं. सन १९६१ की फिल्म धर्मपुत्र एक अच्छा
विषय लेकर बनाई गयी फिल्म है जिसके गीत भी गंभीर किस्म
के हैं. सही मायने में ये सोचने को मजबूर करने वाली फिल्म है.

मनोरंजन अपनी जगह है, सन्देश देने वाली कहानियां कम आती
हैं देखने में. कुछ कहानियों में समस्यापूर्ति का अभाव होता है और
वे दर्शकों के सम्मुख एक बड़ा प्रश्नचिन्ह छोड़ जाती हैं मानो फिल्म
ही जनता से पूछ रही हो-क्या हल होना चाहिए समस्या का.

आशा भोंसले कुछ संगीतकारों ने ईमानदारी से कुछ गंभीर गीत भी
गाने को दिए उनमें ओ पी नैयर, एन दत्ता, रवि और आर डी बर्मन
प्रमुख हैं. नाम और भी हैं मगर उन नामों को जानने वाले पाठक
अंग्रेजी ब्लॉगों की पप्पी ही लिया करते हैं क्यूंकि उनका मानना
है भुट्टा खाने में मज़ा तब आता है जब उसको मेज़ या कोर्न बोला
जाए और स्वाद तभी आता है जब ५ रूपये का भुट्टा ५० रूपये में
खरीदा जाए. इसलिए इधर हम इन चार संगीतकारों के नाम तक ही
चर्चा सीमित रखते हैं. एन दत्ता गरीबों के संगीतकार ही रह गए और
उन्हें बी ग्रेड और सी ग्रेड फिल्मों में संगीत दे देकर ही अपनी रोटी
जुटानी पड़ी. क्या आप मान सकते हैं जिस संगीतकार ने धूल का फूल,
मिलाप जैसी फिल्मों के संगीत की रचना की, उसको मुख्य धारा में बाद
में काम नहीं मिला.

गीत पर बात की जाए जिसमें यादो के झरोखे से एक मन झाँक रहा
है कुछ अर्धपकी संभावनाओं के फलीभूत होने की ओर. अमूमन
गीतकार लिखते हैं-शरमाना, घबराना. यहाँ कोंफिडेंस लेवल कुछ डेंस
है इसलिए शब्द हैं-शरमाना और बल खाना. पहले की युवतियां
ज्यादा बल खाया करती थीं. आज की युवतियां तो बल खिला दिया
करती हैं.

ऐसे ड्रामाटिक गीत के लिए माला सिन्हा जैसी भाव प्रवण अभिनेत्री
उपयुक्त पसंद थी. गीत के बोलों के हिसाब से माला ने एक एक भाव
किसी मूक अभिनय के शो की तरह परदे पर फ्रेम दर फ्रेम स्केच
कर दिया है. निर्देशक का भी जवाब नहीं जिसके ज़रूरत से ज्यादा
किये गए प्रयास ज़रा भी खलते नहीं हैं. गीत पार्श्व में बज रहा है.



गीत के बोल:

मैं जब भी अकेली होती हूँ
मैं जब भी अकेली होती हूँ तुम चुपके से आ जाते हो
और झाँक के मेरी आँखों में बीते दिन याद दिलाते हो
बीते दिन याद दिलाते हो

मस्ताना हवा के झोंकों से हर बार वो परदे का हिलना
परदे को पकड़ने की धुन में दो अजनबी हाथों का मिलना
आँखों में धुंआ सा छा जाना
आँखों में धुंआ सा छा जाना साँसों में सितारे से खिलना
बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो

मुड मुड के तुम्हारा रस्ते में तकना वो मुझे जाते जाते
और मेरा ठिठक कर रुक जाना चिलमन के करीब आते आते
नज़रों का तरस कर रह जाना
नज़रों का तरस कर रह जाना एक और झलक पाते पाते
बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो

बालों को सुखाने की खातिर कोठे पे मेरा वो आ जाना
और तुमको मुक़ाबिल पाते ही कुछ शरमाना कुछ बल खाना
हमसायों के डर से कतराना
हमसायों के डर से कतराना घरवालों से डर के घबराना
बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो

बरसात के भीगे मौसम में
बरसात के भीगे मौसम में सर्दी की ठिठुरती रातों में
पहरों वो यूँ ही बैठे रहना हाथों को पकड़ कर हाथों में
और लंबी लंबी घड़ियों का
और लंबी लंबी घड़ियों का कट जाना बातों बातों में
बीते दिन याद दिलाते हो बीते दिन याद दिलाते हो

रो रो के तुम्हें खत लिखती हूँ
रो रो के तुम्हें खत लिखती हूँ  और खुद पढ़ कर रो लेती हूँ
हालत के तपते तूफान में ज़ज्बात की कश्ती खेती हूँ
कैसे हो कहाँ हो कुछ तो कहो
कैसे हो कहाँ हो कुछ तो कहो मैं तुमको सदाएं देती हूँ
मैं जब भी अकेली होती हूँ
मैं जब भी अकेली होती हूँ तुम पुचके से आ जाते हो
और झाँक के मेरी आँखों में बीते दिन याद दिलाते हो
बीते दिन याद दिलाते हो
...........................................................
Main jab bhi akeli hoti hoon-Dharmputra 1961

Artists: Mala Sinha, Rehman

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Mar 3, 2017

किस जगह जाएँ-लाईट हाउस १९५८

आज आशा भोंसले का एक शानदार गीत सुनते हैं. इस गीत
के संगीतकार हैं एन दत्ता जिन्होंने आशा से कई उल्लेखनीय
गीत गवाए हैं. गीत के लेखक हैं साहिर लुधियानवी.

एन दत्ता जीवन के उतार चढावों में ही गोते खाते रहे. रोज़ी
रोटी के चक्कर में एक गुणी संगीतकार कहीं खोता चला गया.
राज खोसला ने उन्हें सबसे पहले ब्रेक दिया था मिलाप में.
उसके बाद उन्हें बी आर चोपड़ा की फिल्म धूल का फूल का
संगीत तैयार करने का मौका मिला. बड़े बैनर आगे चल के
उनसे दूर होते गए. जी पी सिप्पी और बी आर चोपड़ा के
अलावा उनके संगीत में रूचि दिखाने वालों में कोई बड़ा नाम
नहीं बचा था सन १९७० तक.

सन १९६१ की फिल्म धर्मपुत्र जिसका निर्देशन यश चोपड़ा ने
किया था, एन दत्ता की आखरी उल्लखनीय फिल्म कही जा
सकती है जिसके गीत आज भी सुनने को मिल जाया करते
हैं. बी आर खेमे में रवि उर्फ रविशंकर शर्मा की एंट्री हो गयी
सन १९६२ की फिल्म गर्ल्स हॉस्टल से.



गीत के बोल:

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ

सारे जग में अपना कोई नहीं
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुःख का सपना कोई नहीं
हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ

दिल के अरमान पूरे हो ना सके
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
दिल के अरमान पूरे हो ना सके
हँसाना कैसा खुल कर रो ना सके

हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ
....................................................................
Kis jagah jaayen-Light House 1958

Artists: Nutan

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Jan 10, 2017

औरत ने जनम दिया मर्दों को-साधना १९५८

प्रगतिशील और सुधारवादी फ़िल्में बनती रहीं आजादी के बाद
समय समय पर. व्यावसायिक सिनेमा के फिल्मकारों में कुछ
ऐसे भी हैं जिन्होंने सार्थक फ़िल्में बनाने का सफल प्रयास किया
हैसे वी शांताराम, बी आर चोपड़ा इत्यादि. बी आर चोपड़ा ने
अलग अलग विषयों पर फ़िल्में बनायीं.

नारी की स्तिथि पर इससे बेहतर कविता शायद ही आपको मिले
हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में.




गीत के बोल:

औरत ने जनम दिया मर्दों को 
मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला 
जब जी चाहा दुत्कार दिया

तुलती है कहीं दीनारों में 
बिकती है कहीं बाज़ारों में
नंगी नचवाई जाती है 
ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज़्ज़त चीज़ है जो 
बंट जाती है इज़्ज़तदारों में

औरत ने जनम दिया मर्दों को

मर्दों के लिये हर ज़ुल्म रवाँ 
औरत के लिये रोना भी खता
मर्दों के लिये लाखों सेजें 
औरत के लिये बस एक चिता
मर्दों के लिये हर ऐश का हक़ 
औरत के लिये जीना भी सज़ा
औरत ने जनम दिया मर्दों को

जिन होठों ने इनको प्यार किया 
उन होठों का व्योपार किया
जिस कोख में इनका जिस्म ढला 
उस कोख का कारोबार किया
जिस तन से उगे कोपल बन कर 
उस तन को ज़लील-ओ-खार किया
औरत ने जनम दिया मर्दों को

मर्दों ने बनायी जो रस्में 
उनको हक़ का फ़रमान कहा
औरत के ज़िन्दा जलने को
 कुर्बानी और बलिदान कहा
इस्मत के बदले रोटी दी 
और उसको भी एहसान कहा
औरत ने जनम दिया मर्दों को

संसार की हर एक बेशर्मी 
गुर्बत की गोद में पलती है
चकलों ही में आ के रुकती है 
फ़ाकों से जो राह निकलती है
मर्दों की हवस है जो अक्सर 
औरत के पाप में ढलती है
औरत ने जनम दिया मर्दों को

औरत संसार की क़िस्मत है 
फ़िर भी तक़दीर की हेटी है
अवतार पयम्बर जनती है 
फिर भी शैतान की बेटी है
ये वो बदक़िस्मत माँ है जो 
बेटों की सेज़ पे लेटी है

औरत ने जनम दिया मर्दों को
........................................................................
Aurat ne janam diya mardon ko-Sadhna 1958

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Dec 30, 2016

धड़कने लगे दिल के तारों की-धूल का फूल १९५९

फिल्म धूल का फूल में कई लोकप्रिय और मधुर गीत
हैं जिनमें से आपने यहाँ केवल एक गीत सुना है. इस
सुनवाने की होड में कई बार कुछ गीत छूट जाते हैं.
नंबर लगते लगते कई साल बीत जाते हैं. इस फिल्म
से पहला गीत आपने इस ब्लॉग पर सन २००९ में सुना
था.

सुनते हैं इस फिल्म से एक युगल गीत आशा भोंसले
और महेंद्र कपूर का गाया हुआ. साहिर के बोल और
एन दत्ता के संगीत से सजी इस फिल्म का निर्देशन
बी अर्र चोपड़ा ने किया था.



गीत के बोल:

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
जो तुम मुस्कुरा दो
संवर जाए हम बेकरारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
जो तुम मुस्कुरा दो

जो तुम मुस्कुरा दो बहारें हँसें
सितारों की उजली कतारें हँसें
जो तुम मुस्कुरा दो नज़ारे हँसें
जवां धड़कनों के इशारे हँसें
जवां धड़कनों के इशारे हँसें

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
जो तुम मुस्कुरा दो

हवा में के ख़ुशबू की अँगड़ाईयाँ
ये आँखों पे ज़ुल्फ़ों की परछाईयाँ
ये मस्ती के धारे उबलते हुए
ये सीनों में तूफ़ां मचलते हुए
ये सीनों में तूफ़ां मचलते हुए

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
जो तुम मुस्कुरा दो

ये बोझल घटाएं बरसती हुई
ये बेचैन रूहें तरसती हुई
ये साँसों से शोले निकलते हुए
बदन आँच खा कर पिघलते हुए
बदन आँच खा कर पिघलते हुए

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
जो तुम मुस्कुरा दो
...................................................................
Dhadakne lage dil ke taron ki duniya-Dhool ka phool 1959

Artists: Mala Sinha, Rajendra Kumar

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Sep 7, 2016

हम से भी कर लो कभी-मिलाप १९५५

कहते हैं जुबां मीठी हो तो हर चीज़ पे काबू कर लेती है. ये बात
सही भी है. मीठा-मीठा बोलो और सबको लुभाओ. बोलने की कला
में मीठी जुबान का बड़ा महत्त्व है. कड़वी बोली केवल संतों के ही
मुखारविंद से अच्छी लगती है.

प्रस्तुत गीत में मीठी बातों के लिए निवेदन किया जा रहा है. एक
गीत में हमने कुछ पोस्ट पहले यमक अलंकार के प्रयोग की चर्चा
की थी. इस गीत में भी आपको थोडा इसका प्रयोग मिलेगा. रचना
साहिर लुधियानवी की है और संगीत एन दत्ता का. गीता दत्त ने इस
गीत को गाया है. गीत गीता बाली और देव आनंद पर फिल्माया
गया है. नायक किसी वाइरल बुखार से अभी अभी ठीक हुआ है
ऐसा जान पड़ता है, उसमें नायिका गीत के ज़रिये प्राणवायु का
संचार कर रही है. गीत में आप एक नामचीन हास्य कलाकार के
दर्शन भी कर पायेंगे.





गीत के बोल:

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें


मैं बहार का शोख फूल हूँ
अक़ल मर मिटे ऐसी भूल हूँ
मैं बहार का शोख फूल हूँ
अक़ल मर मिटे ऐसी भूल हूँ
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें

चुप हो किस लिये बात तो करो
हँस न पाओ तो आह ही भरो
चुप हो किस लिये बात तो करो
हँस न पाओ तो आह ही भरो
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें

दिल को प्यार से भर के देख लो
ये हसीन भूल कर के देख लो
दिल को प्यार से भर के देख लो
ये हसीन भूल कर के देख लो
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
...........................................................................
Hamse bhi kar lo-Milap 1955

Artists: Geeta Bali, Dev Anand

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Aug 31, 2016

लाल लाल गाल-मिस्टर एक्स १९५७

आज एक बिना विवरण का गीत सुनते हैं. पूर्व में भी बिना विवरण
और बिना चटनी संभार के आपको कई गीत सुनवाए हैं .हमारे ब्लॉग
के पाठक केवल गीत सुनने और देखने आते हैं तो उनके पूरे पैसे
वसूल होना चाहिए ना.

अगर पोस्ट नहीं होगी गीत के साथ तो क्या आप गीत नहीं सुनेंगे
और देखेंगे ? गीत तो गीत है उसके साथ कुछ ना भी हो तो क्या
फर्क पढता है? पोस्ट तो लिखी गयी हैं और लिखी जाती रहेंगी.
इतिहास एक बार बन चुका तो उसका विवरण रोज रोज बदलने
वाला नहीं है. हाँ व्याख्या के तरीके अलग हो जाते हैं.



गीत के बोल:

लाल लाल गाल जान पे हैं लागू
ओ देख देख देख दिल पे रहे काबु
चोर चोर चोर भाग परदेसी बाबू
लाल लाल गाल जान पे हैं लागू
ओ देख देख देख दिल पे रहे काबु
चोर चोर चोर भाग परदेसी बाबू

चोर चोर चोर ये नहीं हैं माल उधर के
के मोड़ मोड़ मोड़ ये तो हैं दिल-ओ-जिगर के
पीले पीले पीले इनके बाल हैं निराले
नीले नीले नीले इनकी अखियों के प्याले
चोर चोर चोर ये नहीं हैं माल उधर के
के मोड़ मोड़ मोड़ ये तो हैं दिल-ओ-जिगर के
पीले पीले पीले इनके बाल हैं निराले
नीले नीले नीले इनकी अखियों के प्याले

अजनबी पे बेधड़क खुली सड़क
चलाते हैं चलाते हैं ये जादू

लाल लाल गाल जान पे हैं लागू
ओ देख देख देख दिल पे रहे काबु
चोर चोर चोर भाग परदेसी बाबू

हाय हाय हाय ये निगाहों का निशाना
वाय वाय वाय कोई तीर खा न जाना
मान मान मान मेरी जान मेरा कहना
इनकी चाल-ढाल के खयाल में न रहना
हाय हाय हाय ये निगाहों का निशाना
वाय वाय वाय कोई तीर खा न जाना
मान मान मान मेरी जान मेरा कहना
इनकी चाल-ढाल के खयाल में न रहना

अजनबी पे बेधड़क खुली सड़क
चलाते हैं चलाते हैं ये जादू

लाल लाल गाल जान पे हैं लागू
ओ देख देख देख दिल पे रहे काबु
चोर चोर चोर भाग परदेसी बाबू
..................................................................
Laal laal gaal-Mr.X 1957

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Aug 1, 2016

ये बहारों का समां २-मिलाप १९५५

फिल्म आर्ट्स बैनर तले बनी फिल्म मिलाप का निर्देशन
राज खोसला ने किया था. देव आनंद और गीता बाली इस
फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं. राज खोसला की पदार्पण
फिल्म है बतौर निर्देशक. फिल्म मनोरंजन से भरपूर होने
के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी. फिल्म का संगीत
भी उत्तम गुणवत्ता वाला है लेकिन नियति का खेल किसने
जाना है?

प्रस्तुत गीत का हेमंत कुमार वाला संस्करण आप सुन चुके
हैं पहले. आज का संस्करण लता मंगेशकर का गाया हुआ है.
बोल इसके भी साहिर लुधियानवी ने लिखे हैं और संगीत
है एन दत्ता का.



गीत के बोल:

ये बहारों का समां
चाँद तारों का समां
खो ना जाए आ भी जा
ये बहारों का समां
चाँद तारों का समां
खो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा


जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
सांस आहें सर्द बन जाये
कहीं ऐसा ना हो
दिल तड़प कर नागहाँ,
सो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा

क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
मेरी राहों की तरफ से,
अपनी राहें फेर ली
ज़िन्दगी का कारवां,
खो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा
.....................................................................
Ye baharon ka sama(Lata)-Milap 1955

Artist:Geeta Bali

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Jun 15, 2016

मस्त हो के ज़रा झूम ले-चंद्रकांता १९५६

जी पी सिप्पी निर्देशित फिल्म चंद्रकांता के प्रमुख कलाकार हैं
भारत भूषण और बीना रॉय. फिल्म में काफी सारे गीत हैं उन
गीतों में से सबसे लोकप्रिय आप पहले सुन चुके हैं २०१० में .

आज सुनते हैं आशा भोंसले का गाया एक गीत. सारे गीत सुनेंगे
इस फिल्म के क्यूंकि साहिर के लिखे गीत हैं और हर गीत में
कुछ विशेष अवश्य है, जैसे इस गीत में ही सन्देश है अब आप
इसे व्यंग्य समझें या नसीहत ये आपके ऊपर है.

जी पी सिप्पी ने अदल-ए-जहाँगीर से निर्देशन शुरू किया था
जिसमें हुस्नलाल भगतराम का संगीत है. उसके बाद उन्होंने
लगातार ५ फिल्मों में सं १९५९ तक एन दत्ता की सेवाएं लीं.
जी पी सिप्पी का पूरा नाम है गोपालदास परमानन्द सिप्पी
बतौर निर्माता तो उन्होंने कई सफल फ़िल्में दीं मगर निर्देशक
के तौर पर उनको ज्यादा चर्चा नहीं मिली. शोले और १९७२
की सीता और गीता उनकी सबसे सफल और उल्लेखनीय
फ़िल्में हैं जिनका निर्देशन उनके पुत्र रमेश सिप्पी ने किया..



मस्त हो के ज़रा झूम ले
मस्त हो के ज़रा झूम ले
हुस्न की वादियों में घूम ले
हैं ये मस्तियों के दिन
प्यार की घड़ियाँ न गिन
झूम ले झूम ले झूम ले झूम ले
मस्त हो के ज़रा झूम ले
सारे नज़ारे तेरे हैं
हम तो क्या चाँद तारे तेरे हैं
सारे नज़ारे तेरे हैं
हम तो क्या चाँद तारे तेरे हैं
धरती की कलियाँ अम्बर के मोती
सारे के सारे तेरे हैं
धरती की कलियाँ अम्बर के मोती
सारे के सारे तेरे हैं
हैं ये मस्तियों के दिन
प्यार की घड़ियाँ न गिन
झूम ले झूम ले झूम ले झूम ले
मस्त हो के ज़रा झूम ले

बाहें कड़ी हैं पसारे
तेरे दर पे हजारों बहारें
बाहें कड़ी हैं पसारे
तेरे दर पे हजारों बहारें
हो बढती उमंगें चढती तरंगें
रह रह के तुझको पुकारें
हो बढती उमंगें चढती तरंगें
रह रह के तुझको पुकारें

हैं ये मस्तियों के दिन
प्यार की घड़ियाँ न गिन
झूम ले झूम ले झूम ले झूम ले
मस्त हो के ज़रा झूम ले
हैं ये मस्तियों के दिन
प्यार की घड़ियाँ न गिन
झूम ले झूम ले झूम ले झूम ले
मस्त हो के ज़रा झूम ले
................................................................
Mast ho ke zara jhoom le-Chandrakanta 1956

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Apr 2, 2016

चुनर मोरी कोरी-नया रास्ता १९७०

होली गीतों को होली के दिन ही याद करने की कोई वजह नहीं
है. ये कभी भी याद आ जाते हैं. होली को बीते एक हफ्ता हो
गया है. दत्ताराम बाबूराव नायक सन १९५५ से सन १९८० तक
हिंदी फिल्म संगीत के क्षत्र में सक्रिय रहे. कम बजट वाली और
कम पूँजी वाले निरमता निर्देशकों के साथ काम करते करते उनके
पास भी धन की कमी रही. धन की कमी से मतलब फ़ाकाकशी
से कतई नहीं है.

इन फिल्मों के चक्कर में उनका गुणवत्ता वाला संगीत भी जनता
सुन नहीं पाई ढंग से. वो तो बी आर चोपड़ा की कुछ फिल्मों में
संगीत की वजह से उन्हें समय समय पर याद किया जाता रहा.
साहिर के साथ उनका काम उल्लेखनीय और सराहनीय है. कुछ
अविस्मरणीय धुनें उनके खाते में भी दर्ज हैं इसलिए संगीत रसिक
उन्हें याद करते रहेंगे. गीत में होली वाले सारे एलिमेंट्स हैं और
गौर फरमाएं इसके बोलों पर.

फिल्म नया रास्ता से ये तीसरा गीत है इस ब्लॉग पर. सुनते रहिये
और पढते रहिये........



गीत के बोल:

चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी


धीरे धीरे पिचकारी मारो
नहीं मारो बेदर्दी रे कस के
देखो देखो बैंया ना खींचो
मोरी रेशम की चोली ना मस्के
मोहे तुमरी कसम, मोहे लागे सरम
मानो मानो अरज मानो मोरी
चुनर मोरी कोरी, उमर मोरी बाली
धीरे रंग डारो, करो ना जोरा जोरी

भीगी भीगी चुनरी से झांके
तोरे मतवाले अंगों का जादू
आजा मेरी बाहों में छुप जा
गोरी घबरा के यूं ना सिमट तू
मिले तन से जो तन
बुझे मन की अगन
कहें हम भी के आई है होरी
बरस भरे बीते, तब आये कहीं होरी
झिझक नहीं हमसे, निकट आजा गोरी
........................................................................................
.Chunar mori kori-Naya Rasta 1970

Artists-Jeetendra, Asha Parekh

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Jan 23, 2011

दुनिया में आया है तो-मेरे अरमान मेरे सपने १९६३

आपको पहले  फिल्म 'मेरे अरमान मेरे सपने' का एक मर्मस्पर्शी
गीत सुनवाया था -तेरा आना भी धोखा था। अब सुनिए इसी
फिल्म से एक और मधुर गीत रफ़ी की आवाज़ में। गीत पार्श्व
में बज रहा है और कुछ यादों के साये विडियो में लहरा रहे हैं।
प्रदीप कुमार और जयश्री गढ़कर आपको परदे पर दिखाई देंगे।
गीत प्रेरणादायक है और दुनिया से इंसान को अपने जाने के पहले
क्या करना चाहिए का सन्देश दे रहा है।



गीत के बोल:

दुनिया में आया है तो फूल खिलाए जा
आँसू किसी के ले के ख़ुशियाँ लुटाए जा

छोटी सी ज़िन्दगी तेरी हँस के गुज़ार दे
अपनी बिगाड़ के किसी की सँवार दे,किसी की सँवार दे
जो हो बेगाना यहाँ अपना बनाए जा
आँसू किसी के ले के ख़ुशियाँ लुटाए जा

दुनिया में आया है तो फूल खिलाए जा
दुनिया में आया है तो

आया था प्यार से तो जाना भी प्यार से
कर ना गिला कोई जाती बहार से
आया था प्यार से तो जाना भी प्यार से
कर ना गिला कोई जाती बहार से, जाती बहार से
दिल पर जो बीत रही है दिल में छुपाए जा
आँसू किसी के ले के ख़ुशियाँ लुटाए जा

दुनिया में आया है तो फूल खिलाए जा
दुनिया में आया है तो

फूलों पे आज होता तेरा भी आशियाँ
आज तेरी आरज़ू बन गई दास्ताँ, बन गई दास्ताँ
बुझ गई शमा तेरी किसी की जलाए जा
आँसू किसी के ले के ख़ुशियाँ लुटाए जा

दुनिया में आया है तो फूल खिलाए जा
दुनिया में आया है तो
..................................................
Duniya mein aaya hai to-Mere armaan mere sapne 1963

Artist: Jayshri Gadkar, Pradeep Kumar

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Feb 2, 2010

तेरा आना भी धोखा था-मेरे अरमान मेरे सपने १९६३

रफ़ी के गाये सबसे संजीदा गीतों में से एक आपके लिए प्रस्तुत है ।
धुन है एन. दत्ता की जिनको हम नारायण दत्ता के नाम से नहीं जानते हैं।
उनका  पूरा नाम है-दत्ताराम बाबूराव नायक. नारायण दत्ता एक अलग
शख्सियत का नाम है.

गीत के बोल हैं राजेंद्र कृष्ण की। गीत जितना मधुर है उसको प्रसिद्धि
उतनी नहीं मिली। इसकी खासियत है इसको एक बार सुनकर आपकी
दोबारा सुनने की इच्छा अवश्य होगी। ये ऐसी धुन है जो संगीतकार
के खजाने से अनायास निकल आती है। ऐसे गीतों को हम क्लासिक
या समय के बंधन से मुक्त नगमे कहते हैं। सरल सी सुनाई पढ़ती धुन
मर्म पर गहरी चोट करती है । नायिका की भावनाएं व्यक्त करता पुरुष
आवाज़ का गीत अनूठा है । नायिका हैं कुमारी नाज़ जो ठीक-ठाक भाव
प्रदर्शित कर पा रही हैं।



गीत के बोल:

तेरा आना भी धोखा था
तेरा आना भी धोखा था
तेरा जाना भी धोखा है
मेरा दिल तो ना मानेगा
जो इन आँखों ने देखा है

तेरा आना भी धोखा था

तुझे पाकर हर एक शय की
तमन्ना छोड़ बैठे थे
हमें अब ये ना समझाना
मोहब्बत एक तमाशा है
मोहब्बत एक तमाशा है
जो इन आँखों ने देखा है

तेरा आना भी धोखा था
तेरा जाना भी धोखा है
मेरा दिल तो ना मानेगा
जो इन आँखों ने देखा है

तेरा आना भी धोखा था

जो दिल मेरा नहीं बदला
नज़र तेरी भी क्यूँ बदले
मगर दुनिया तो ये कहती है
यहाँ ऐसा भी होता है
यहाँ ऐसा भी होता है
जो इन आँखों ने देखा है

तेरा आना भी धोखा था
तेरा जाना भी धोखा है
मेरा दिल तो ना मानेगा
जो इन आँखों ने देखा है

तेरा आना भी धोखा था
................................................................
Tera aana bhi dhokha tha-Mere armaan mere sapne  1963

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Jan 20, 2010

तोरा मनवा क्यूँ घबराए -साधना १९५९

गीता दत्त की आवाज़ एं भजन सुनना एक अलौकिक अनुभव है।
फिल्म साधना के इस भजन को सुनकर आप खुद अनुभव कीजिये।
साहिर के बोलों को सुरों में पिरोया है एन दत्ता ने। फिल्म इतिहास के
अच्छे भजनों में इसको गिना जाता है। इस भजन कि धुन एक पुराने
भजन से प्रेरित है जो सन १९४९ में गीता ने गाया था संगीतकार
अविनाश व्यास के लिए। उसका लिंक भी नीचे दिया हुआ है। ये
गुजराती भाषा में है



गुजराती भजन



गीत के बोल:

तोरा मनवा क्यूँ घबराए रे
लाखों दीन दुखियारे प्राणी
जग में मुक्ति पायें
हे, राम जी के द्वार से

तोरा मनवा क्यूँ घबराए रे
लाखों दीन दुखियारे प्राणी
जग में मुक्ति पायें
हे, राम जी के द्वार से

बंद हुआ ये द्वार कभी ना
जुग कितने ही
जुग कितने ही बीतें
सब द्वारों पे हारने वाले
इस द्वारे पर, इस द्वारे पर जीतें

लाख पतित लाखों पछ्ताएं
हे, लाख पतित लाखों पछ्ताएं
पवन होकर आये रे,
राम जी के द्वार से

तोरा मनवा,
तोरा मनवा क्यूँ घबराए रे
लाखों दीन दुखियारे प्राणी
जग में मुक्ति पायें
हे, राम जी के द्वार से

हम मूरख जो काज बिगाड़ें
राम वो काज संवारें
राम वो काज संवारें
ओ महानंदा हो कि अहिल्या
सब को पार उतारे
हे, सब को पार उतारे
जो कंकर चरणों को छू ले
जो कंकर चरणों को छू ले
वो हीरा हो जाए
राम जी के द्वार से

तोरा मनवा,
तोरा मनवा क्यूँ घबराए रे
लाखों दीन दुखियारे प्राणी
जग में मुक्ति पायें
हे, राम जी के द्वार से

ना पूछें वो जात किसी कि
ना गुण अवगुण
ना गुण अवगुण जांचें
वही भगत भगवन को प्यारा
जो हर वाणी
जो हर वाणी बांचे
जो कोई श्रद्धा लेकर आये
जो कोई श्रद्धा लेकर आये
झोली भर के जाए रे
राम जी के द्वार से

तोरा मनवा,
तोरा मनवा क्यूँ घबराए रे
लाखों दीन दुखियारे प्राणी
जग में मुक्ति पायें
हे, राम जी के द्वार से

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Jan 15, 2010

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना-चन्द्रकांता १९५६

आज इस दशाब्दी का पहला सूर्य ग्रहण है। सूर्य ग्रहण के दिन
सारे चाँद वाले गाने याद आ रहे हैं। कम्पूटर भी शायद चाँद को
याद कर रहा है। ऐसे समय बहुत से गीत याद आ रहे हैं, जो सबसे
पहले याद आया वो प्रस्तुत है इधर, फिल्म चन्द्रकान्ता से जो सन
१९५६ में आई थी। भारत भूषण और बीना राय इस फिल्म के
प्रमुख कलाकार हैं। फिल्म का निर्देशन जी पी सिप्पी ने किया था।
ये जी पी सिप्पी शोले फिल्म वाले हैं। फिल्म में संगीत एन दत्ता
का है और बोल लिखे हैं साहिर लुधियानवी ने। साहिर के बारे में कहा
जाता है कि वे गाना कैसा बन रहा है उसपर नज़र रखा करते थे,
शायद इसी वजह से उनके लिखे अधिकांश गीत हमें मधुर सुनाई देते
हैं। कभी कभी उनका दखल ज्यादा हो जाया करता था। जिस संगीतकार
को उनके इस स्वाभाव से कोई शिकायत नहीं थी वे उनके साथ लगातार
काम करते रहे। एन दत्ता ऐसा ही एक नाम है। ये एक निराशावादी गीत
है और कई मदिराप्रेमियों को मैंने सुरूर में आने के बाद इसको सुनते हुए
देखा है।




गीत के बोल:

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझको रातों की सियाही के सिवा कुछ ना मिला
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

मैं वो नगमा हूँ जिसे प्यार कि महफ़िल ना मिली
मैं वो नगमा हूँ जिसे प्यार कि महफ़िल ना मिली
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंजिल ना मिली
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंजिल ना मिली
ज़ख्म पायें हैं बहारों की तमन्ना की थी

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

किसी गेसू किसी आँचल का सहारा भी नहीं
किसी गेसू किसी आँचल का सहारा भी नहीं
रास्ते में कोई धुन्धला सा सितारा भी नहीं
रास्ते में कोई धुन्धला सा सितारा भी नहीं
मेरी नज़रों ने नज़ारों की तमन्ना की थी

मैंने चाँद और सितारों कि तमन्ना की थी
मुझको रातों की सियाही के सिवा कुछ ना मिला
मैंने चाँद और सितारों कि तमन्ना की थी

मेरी राहों से जुदा हो गयीं राहें उनकी
मेरी राहों से जुदा हो गयीं राहें उनकी
आज बदली नज़र आती हैं निगाहें उनकी
आज बदली नज़र आती हैं निगाहें उनकी
जिनसे इस दिल ने सहारों की तमन्ना की थी

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

प्यार माँगा तो सिसकते हुए अरमान मिले
प्यार माँगा तो सिसकते हुए अरमान मिले
चैन चाह तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले
चैन चाह तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझको रातों की सियाही के सिवा कुछ ना मिला
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

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Dec 4, 2009

क्या देखा नैनों वाली -धर्म पुत्र १९६१

सन १९५९ की फ़िल्म धूल का फूल में माला सिन्हा बिन ब्याही माँ बनी
थीं। इस फ़िल्म के निर्देशक यश चोपड़ा थे और इसका निर्माण किया था
बी आर चोपड़ा, उनके बड़े भाई ने। सन १९६१ में एक फ़िल्म और बनाई
बी आर चोपड़ा ने-धर्म पुत्र इसका निर्देशन भी यश चोपड़ा ने किया। इसमे
भी माला सिन्हा ने एक बार फ़िर मिलता जुलता सा रोल किया जिसमे
उसे उसका प्रेमी छोड़ के चला जाता है। फ़िल्म के बारे में चर्चा किसी और
गाने के समय। फिलहाल इस गीत पर चर्चा की जाए। ये इस फ़िल्म का
एक कम सुना गया गीत है। गायिका हैं आशा भोंसले और संगीतकार
एन. दत्ता।

साहिर का सोचने का ढंग जुदा होने के कारण अगर खोजे जाएँ तो हमें
थोड़ा उनके दर्शन को समझने का मौका मिलेगा. साहिर की ज़िन्दगी
इतने उतार चढ़ाव भरी थी कि एक संवेदनशील रचनाकार का "यूँ" ही
प्रभावित होना सहज ही समझ आता है। जिस व्यक्ति ने अमीरी से लेकर
फुटपाथ पर फाकाकशी तक सभी रंग देखें हों, वही व्यक्ति इतने करीबी
और संजीदा बयान अपने शब्दों में पिरो सकता है।

उदाहरण के लिए इसी नग्मे में:
नायिका का अंतर्मन पूछ रहा है- "क्या देखा नैना वाली नैंना क्यूँ भर आये"
नैना वाली से मतलब- नैना तो सभी प्राणियों की इश्वर ने सामान दिए हैं.
नैनों से भावाभिव्यक्ति का गुण भी बहुत से प्राणियों को दिया है। नैनों से
मतलब यहाँ दो हो सकते हैं-सुन्दर नयन वाली या फिर बुद्धिमान दृष्टि वाली।
अब जिसको जो समझना है समझ ले।

जवाब उसका चेतन मन देता है-
"कोख भरी और गोद है खाली, नैना यूँ भर आये"

यहाँ मन और अंतर्मन का द्वंद बहुत ही अनूठे ढंग से दर्शाया गया है।
शायद ही कभी नेट पर किसी जगह इस गाने और इसके विडियो का जिक्र
होते मैंने देखा है। यही विडम्बना है हमारे संगीत प्रेमियों और समीक्षाकारों
की, उन्होंने कभी भी एन दत्ता और साहिर के युग्म पर चर्चा नहीं करना चाही।
वे हमेशा एस. डी. बर्मन और साहिर के संगम का गुणगान करते रह गए।

सवाली शब्द का सबसे ज्यादा प्रचार जिस गाने ने किया वो है "हो के मायूस
तेरे दर से सवाली न गया " फिल्म लैला मजनू से, उल्लेखनीय बात ये है कि
इस गाने के शब्द भी साहिर की लेखनी से छूटे थे।

सवाली का सीधा अर्थ भिखारी से लगाना शायद किसी के आत्मसम्मान
को चोट पहुँचाना होता है, इसलिए कवि या शायर अपनी बात कहने के लिए
बहु अर्थी शब्द खोजा करते हैं । ' सवाली' भी एक बहु-अर्थी शब्द है जिसका
यहाँ मतलब "भिखारी" भी हो सकता है और "याचक" भी। याचक कहने से
मर्म को चोट थोडी कम पहुँचती है।



गीत के बोल:

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
कोख भरी और गोद है खाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

माँ बन कर भी माँ न बनी मैं
बदनामी के डर से
दूध मेरे बोझल सीने को
आंसू बन बन बरसे
अपना धन और आप सवाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
नैना क्यूँ भर आए
कोख भरी और गोद है खाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

जी भी सकी तो जीते जी ये
रहेगा मुझको
बोलेगा पर मेरा मुन्ना
माँ न कहेगा मुझको
माँ कहलाना बन गया गाली
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए
नैना यूँ भर आए

क्या देखा नैनों वाली
नैना क्यूँ भर आए
नैना क्यूँ भर आए
.........................................................
Kya dekha nainon waali-Dharmputra 1961

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Dec 2, 2009

दामन में आग लगा बैठे-धूल का फूल १९५९

"धूल का फूल " का अर्थ हिन्दी भाषी अवश्य जानते हैं। ये
फ़िल्म राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा को लेकर बनाई थी
सन १९५९ में बलदेव राज चोपड़ा ने। सामाजिक समस्याओं पर
उन्होंने काफ़ी सार्थक काम किया। ये एक अनब्याही माँ
मीना(माला सिन्हा) की कहानी है जिसे महेश (राजेंद्र कुमार)
धोखा देकर अपने माँ बाप की पसंद की हुई लड़की से शादी कर
लेता है। मीना को उसके रिश्तेदार घर से बहार निकल देते हैं।
मीना एक बच्चे जो जम देकर उसे जंगल में छोड़ देती है । उसके
बाद शुरू होता है उस बच्चे का किस्सा। समय के थपेड़ों से गुज़र
कर गुनाह के रास्ते से होते हुए एक दिन वो अपने बाप ,जो कि
अब तक न्यायाधीश बन चुका है, के सामने पेशी के लिए हाज़िर
किया जाता है। इस फ़िल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया है।
त्रिकोण और प्रेम त्रिकोण से उनका संयोग शायद शुरू से ही रहा
है। उनके विषयों में शायद लाल त्रिकोण-परिवार नियोजन ही बचा है।

ये गीत हीरो कि बारात के अवसर पर फिल्माया गया है। कातर और
बेबस हिरोइन बाजू से गुज़र रही है, लुटी हुयी असहाय सी। स्तिथि आज
भी वही है जो उस समय काल में थी उसमे ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है
सिवाय इसके कि आज गर्भपात का विकल्प मौजूद है। समाज का
नजरिया वैसा ही है लगभग ।



गीत के बोल:

खता के नाम पे, कितने गुनाह होते हैं
ये उनसे पूछे कोई, जो तबाह होते हैं
हाय हो, ओ,ओ, ओ, ओ, ओ, ओ, ओ
दामन में दाग लगा बैठे

दामन में दाग लगा बैठे
हम प्यार में धोखा खा बैठे
हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय , हाय

छोटी सी भूल जवानी की
छोटी सी भूल जवानी की
जो तुमको याद न आयेगी
इक भूल के ताने दे दे कर
दुनिया हमको तडपाएगी
उठते ही नज़र झुक जायेगी, ई ई ई
उठते ही नज़र झुक जायेगी
हो, हो, हो हो हो हो
उठते ही नज़र झुक जायेगी
आज ऐसी ठोकर खा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय, हो, हाय

चाहत के लिए जो रस्मों को
चाहत के लिए जो रस्मों को
ठुकरा के गुजरने वाले थे
जो साथ ही जीने वाले थे
और साथ ही मरने वाले थे
तूफ़ान के हवाले करके हमें
तूफ़ान के हवाले करके हमें
हो, हो, हो हो हो हो, ओ, ओ
तूफ़ान के हवाले करके हमें
ख़ुद दूर किनारे जा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय, ओ हाय

लो आज मेरी मजबूर वफ़ा
लो आज मेरी मजबूर वफ़ा
बदनाम कहानी बनने लगी
जो प्रेम निशानी पायी थी
वो पाप निशानी बनने लगी
दुःख दे के हमें जीवन भर का, आ आ आ
दुःख दे के हमें जीवन भर का
हो, हो, हो हो हो हो, ओ, ओ
दुःख दे के हमें जीवन भर का
वो सुख की सेज सजा बैठे

हम प्यार में धोखा खा बैठे
दामन में दाग लगा बैठे
हाय ओ हाय

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