क़ुबूल कीजिये-दर्द १९८१
खय्याम के संगीत वाली एक फिल्म उमराव जान भी १९८१ में
रिलीज़ हुई थि जिसमें आशा के एक से बढ़ कर एक गाये गीत
हैं. ये गीत उमराव जान के एक्सटेंशन सा है. गीत की गति
थोड़ी ज्यादा है मगर कसावट भरा गीत है.
रंजीता और मजहर खान पर इसे फिल्माया गया है. इस गीत
को लिखा है नक्श लायलपुरी ने.
गीत के बोल:
क़ुबूल कीजिये पहले सलाम आँखों का
क़ुबूल कीजिये पहले सलाम आँखों का
फिर आप चाहें तो
फिर आप चाहें तो हाज़िर है जाम आँखों का
क़ुबूल कीजिये
दिलों में शम्मा सी रोशन हुई मोहब्बत की
दिलों में शम्मा सी रोशन हुई मोहब्बत की
हुआ है आँखों से
हुआ है आँखों से जब भी कलाम आँखों का
हुआ है आँखों से जब भी कलाम आँखों का
क़ुबूल कीजिये
निगाह-ए-नाज़ से बहला के लूट लेती है
निगाह-ए-नाज़ से बहला के लूट लेती है
खबर है आपको
खबर है आपको ये भी है काम आँखों का
खबर है आपको ये भी है काम आँखों का
क़ुबूल कीजिये
मैं बेकरार हूँ
मैं बेकरार हूँ
मैं बेकरार हूँ ले लीजे मुझको बाहों में
खुली किताब है जाना पयाम आँखों का
खुली किताब है जाना पयाम आँखों का
क़ुबूल कीजिये पहले सलाम आँखों का
फिर आप चाहें तो हाज़िर है जाम आँखों का
क़ुबूल कीजिये
क़ुबूल कीजिये
क़ुबूल कीजिये क़ुबूल कीजिये
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Qubool kijiye-Dard 1981
Artists: Ranjeeta, Mazhar Khan

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