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Jun 10, 2020

आगे आगे एक हसीना-प्रोफ़ेसर प्यारेलाल १९८१

हम बात कर रहे थे कि परदे के पीछे वाले कलाकार और
योगदानकर्ताओं के नाम प्रसिद्ध नहीं हो पाते. फिल्म बन
जाती है और उसके बाद गधेनुमा नायक नायिकाओं को भी
तथाकथित अपार लोकप्रियता मिल जाती है. जिस निर्देशक
ने उन्हें गधे से खच्चर या घोड़ा बनाया उसे कौन पूछता है.

कुछ निर्देशक और निर्माता फिल्मों से बड़े कद के हो जाते
हैं और जनता का एक हिस्सा उन्हें फिर यूँ पहचानता है-
फलाने की फिल्म है, ढिकाने की फिल्म है. जो कलाकार
निर्देशक की बात मान के चलते हैं उनसे सभी खुश रहते हैं
क्यूंकि निर्देशक के विज़न के अनुसार काम हो जाता है.

१० २० फ़िल्में कर लेने के बाद कई नायकों को निर्देशन की
खुजली होने लगती है और वे टांग अडाने का काम शुरू कर
देते हैं. सुझाव तक तो ठीक है मगर एक विधा से दूसरी विधा
में घुसने का ये प्रयत्न या तो फिल्म का कचरा कर बैठता है
या फिर नायक को निर्देशक बनने की ओर ले जाता है.

सन १९८१ की फिल्म प्रोफ़ेसर प्यारेलाल का निर्देशन बृज
सदाना ने किया था. कहा जाता है इस फिल्म को शूट करते
करते पूरे पांच साल लग गए और ९ घंटे की अजीब-ओ-गरीब
चीज़ों को एक ३ घंटे की फिल्म के ढाँचे में बिठाने के लिए
हृषिकेश मुखर्जी की मदद ली गई. उसके बाद भी फिल्म की
कहानी यूँ लगती है मानो ३-४ फिल्मों के उसल-मिसल हो.

फिल्म की दृश्यावलियाँ सुन्दर हैं और इस बात से कोई भी
इनकार नहीं कर सकता. वो समय था जब धर्मेन्द्र और इस
फिल्म की नायिका जीनत अमान के प्रशंसक बहुतेरे थे.

इस फिल्म के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं जीवन, अपने
ज़माने के मशहूर विलन. इस फिल्म में भी वे विलन की ही
भूमिका में हैं. आज उनकी पुण्यतिथि है अतः हम आपको ये
गीत सुनवा रहे हैं.
राजेंद्र कृष्ण गीत लेखक हैं और कल्याणजी आनंदजी संगीतकार.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:


हे आगे आगे
अरे आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

अरे शमा अभी तक
हे शमा अभी तक जली नहीं है आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने


होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
होते हो यार क्यों बेक़रार
आने ही वाली है देखो बहार
मयखाने भी अपने पैमाने भी अपने
मस्ती भरे है ज़माने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

मेरे हुजूर जाना ना दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
मेरे हुजुर जाना न दूर
होने लगा है मुझे प्यार का सुरूर
किसी से न कहना जी चुप चुप रहना
ये दिल पर लगे क्यों निशाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने

ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
ऐसा जवां रंगीन समां
घडी दो घडी का है मेहमां
गम है बिछड़ने का खेल है बिगड़ने का
बदलेंगे अब तो ठिकाने

हे हे हे
आगे आगे एक हसीना पीछे कुछ दीवाने
दीवाने अनजाने के सब हैं दीवाने
अरे शमा अभी तक जली नहीं है
आ पहुँचे परवाने
ये कैसे परवाने के सब हैं दीवाने
………………………………………..
Aage aage ek haseena-Professor Pyarelal 1981

Artists: Zeenat Aman, Jeevan, Others

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May 7, 2020

सपनों का घरोंदा टूटा-हमसे बढ़ कर कौन १९८१

सपने देखने चाहिए ऐसा आशावादी कहते हैं. सपने ज़रूर
देखने चाहिए. ये स्पष्ट नहीं है कि कैसे देखने चाहिए. कैसे
सपने साकार होने की क्षमता रखते हैं और कैसे सपने पानी
में भैंस के माफिक डूब जाने की योग्यता ये तो समय ही
बतलाता है. कई थ्योरोटिकल सपनों को प्रेक्टिकल दुनिया
बालावस्था में ही मार देती है.

दर्द केवल पेट दर्द, कमर दर्द और हमदर्द का नाम नहीं
है. उच्छिन्न मन में दर्द की तरंगें उठती हैं. ये सूक्ष्म भी
हो सकती हैं और ज्वार भाटे के समान विकराल रूप की
भी. महसूस करने की क्षमता भी तो सभी की जुदा जुदा
है. चार्ली चैप्लिन के हास्य में छुपी दर्द की बारीक सी
लकीर को कितनों ने देखा और समझा.

खुशी ऊँगली के पोर पर टिकी पानी की बूँद के समान है
कब ढुलक जाए किसे पता. पानी की उस बूँद से जाने
कितनों ने जीवन के कैनवास पर खुशियों के बाग उकेरने
के प्रयास कर लिये. रंग भी घोल लिये लघु चित्त ने उसमें.

बड़ी मुश्किल से भावनाओं का सैलाब बैठता है और शान्ति
उभर के ऊपर आने को होती है तभी उसे फिर कोई आ के
घंघोल जाता है.

सुनते हैं रवींद्र रावल का लिखा हुआ गीत जिसे भूपेंद्र ने
गाया है. संगीत राम लक्ष्मण का है. राम लक्ष्मण के संगीत
में काफी ऊर्जा है मगर ये शायद राम लक्ष्मण के मन से
निकली आवाज़ है. ऊर्जा का रूपांतरण भी होता है ना.

राम लक्ष्मण के हाथों को चूमने की इच्छा होती है केवल
इसी एक गीत के लिए. भूपेंद्र ने बेसहारों और समय के मारों
के लिए एक अपना सा गीत दे दिया है. इसे सुन के अटके हुए
भाव और आँखों के लुब्रिकेशन को बाहर आने में मदद मिल
जाती है.



गीत के बोल:

बसते बसते बसा न के मन
बरसों में आबाद हुआ
एक सैयाद की नज़र लगी तो
पल भर में बरबाद हुआ

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
हालत के इस तूफां में
तिनके से तिनका छूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा

जाने अब ये नेक बने
या के बदी के शिकार बने
अपनी मंजिल पर पहुंचे
या राहों के खार बने
जाने अब ये नेक बने
या के बदी के शिकार बने
अपनी मंजिल पर पहुंचे
या राहों के खार बने
किस मोड़ पे मासूमों से
ममता का साया छूटा

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा

दिल के टुकड़े भी खोये
मांग से लाली रूठ गई
दुःख की अगन में जाली दुखिया
कोयला बनी ना राख बनी
दिल के टुकड़े भी खोये
मांग से लाली रूठ गई
दुःख की अगन में जाली दुखिया
कोयला बनी ना राख बनी
आँचल का सुख भी खोया
काजल नैनों से रूठा

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
हालत के इस तूफां में
तिनके से तिनका छूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
…………………………………………..
Sapnon ka gharonda toota-Hamse badh kar kaun 1981

Artist:

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Jan 9, 2020

सांवरे सुनाओ बांसुरी-बसेरा १९८१

फ़िल्मी भजन प्रस्तुत है फिल्म बसेरा से. सुन्दर भजन
है. गुलज़ार इसके रचयिता हैं!! आर डी बर्मन धुन
तैयार करने वाले. गायिका को आप पहचानते हैं.

वीडियो में सांवरे के दर्शन कम और भक्त-भक्तन के
दर्शन ज्यादा होते हैं. वाह रे निर्देशक. अब निर्देशक
रमेश तलवार हैं तो इस बात की वैलिड वजह भी है.
घूंघट में से नायिका का हेयर-कट दिखना भी ज़रूरी है.

गीत में जो कलाकार आपको दिखलाई देंगे उनके नाम
इस प्रकार से हैं-पूनम ढिल्लो, राजकिरण, एक बच्चा
जो अब जस अरोरा नाम से पहचाना जाता है, रेखा,
शशि कपूर और परदेसी.




गीत के बोल:

साँवरे सुनाओ बांसुरी
साँवरे सुनाओ बांसुरी
वृन्दाबनी राधा बनूँ
दुनिया कहे बांवरी
साँवरे सुनाओ बांसुरी
हो वृन्दाबनी राधा बनूँ
दुनिया कहे बांवरी
साँवरे सुनाओ बांसुरी

अपने आँगन बीज ले
अपने अंग में
अपने रंग में जो सींच ले
हो हो हो अपने आँगन बीज ले
अपने अंग में
अपने रंग में जो सींच ले
ऐसी फलूँ तेरी गली
दुनिया कहे सांवरी

साँवरे सुनाओ बांसुरी
हो वृन्दाबनी राधा बनूँ
दुनिया कहे बांवरी
साँवरे सुनाओ बांसुरी

तेरे मंदिर दीप में
तू जो भर दे अपनी ज्योति
इस सीप में
हो हो हो तेरे मंदिर दीप में
तू जो भर दे अपनी ज्योति
इस सीप में
तेरे चरण ऐसे पडूं
जैसे पड़े सांच्ली

साँवरे सुनाओ बांसुरी
हो वृन्दाबनी राधा बनूँ
दुनिया कहे बांवरी
साँवरे सुनाओ बांसुरी
………………………………………..
Sanwre sunao bansuri-Basera 1981

Artist: Poonam Dhillon

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Dec 23, 2019

अपने प्यार के सपने-बरसात की एक रात १९८१

लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गाये युगल गीतों
में सबसे ज्यादा लोकप्रिय एस डी बर्मन, आर डी बर्मन
और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत वाले युगल गीत हैं.

आज सुनते हैं फिल्म बरसात की एक रात से एक गाना.
ये फिल्म बंगाली और हिंदी दोनों भाषा में बनी थी.

गीत आनंद बक्षी का है और इसे अमिताभ बच्चन और
राखी पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

अपने प्यार के सपने सच हुए आ हा हो हो
अपने प्यार के सपने सच हुए
होठों पे गीतों के फूल खिल गए
सारी दुनिया छोड़ के मनमीत मिल गए
अपने प्यार के सपने सच हुए
अपने प्यार के सपने सच हुए

पल भर को मिले जो अँखियाँ
देखूँ मैं सुनी हैं जो बतियाँ
पढ़ लूँ तोरे नैनों की पतियाँ
पल भर को मिले जो अँखियाँ
देखूँ मैं सुनी हैं जो बतियाँ
बिना देखे तुम देखो मेरी आँखों से

अपने प्यार के सपने सच हुए
अपने प्यार के सपने सच हुए

काँटों से भरी थी जो कलियाँ
उनमें खिली हैं अब गलियाँ
झूमो नाचो मनाओ रंगरलियाँ
काँटों से भरी थी जो गलियाँ
उनमें खिली हैं अब कलियाँ
चलो सजना कहें चल के सारे लोगों से

अपने प्यार के सपने सच हुए
अपने प्यार के सपने सच हुए

जब जब मिले जीवन ओ सजना
तुम ही मुझे पहनाओ कंगना
तेरी डोली रुके मेरे अंगना
ओ ओ ओ ओ
जब जब मिले जीवन ओ सजना
तुम ही मुझे पहनाओ कंगना
मेरा घूंघटा तुम खोलो अपने हाथों से

अपने प्यार के सपने सच हुए
होठों पे गीतों के फूल खिल गए
सारी दुनिया छोड़ के मनमीत मिल गए
अपने प्यार के सपने सच हुए
…………………………………………………
Apne pyar ke sapne sach hue-Barsaat ki ek raat 1981

Artists: Amitabh Bachchan, Rakhi, Amjad Khan

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Dec 21, 2019

नदिया किनारे पे-बरसात की एक रात १९८१

सुनते हैं फिल्म बरसात की एक रात से लता मंगेशकर
का गाया हुआ एक गाना जिसे आनंद बक्षी ने ल्लिखा है.
गीत में एक नदी का उल्लेख है-तीस्ता. बरसों पहले आपने
दूरदर्शन पर एक गीत सुना होगा येसुदास की आवाज़ में
जिसमें तीस्ता नदी की चंचलता का जिक्र है.

तीस्ता नदी हमारे देश की नदियों में सबसे ज्यादा वेग से
बहने वाली नदी है. पहाड़ों के बीच में सुन्दर प्रकृति के दृश्यों
के बीच बहती ये नदी अनूठी है.




गीत के बोल:

नदिया किनारे पे हमरा बागान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान
हो ओ ओ ओ
नदिया किनारे पे हमरा बागान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान

दर्पण सा चमके रे तीस्ता का पानी
मुख देखे पानी में भोर सुहानी
दर्पण सा चमके रे तीस्ता का पानी
मुख देखे पानी में भोर सुहानी
हो ओ ओ ओ
शिव जी के मंदिर में जागे भगवान
हमरे बगानों से झूमे आसमान
हो ओ ओ ओ

नदिया किनारे पे हमरा बागान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान

पंछी हो कोई तो पिंजरा बनाऊँ
बंदी हो कोई तो मैं पहरा बिछाऊँ
हो पंछी हो कोई तो पिंजरा बनाऊँ
बंदी हो कोई तो मैं पहरा बिछाऊँ
हो ओ ओ ओ
बस में न आये रे मन बेईमान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान
हो ओ ओ ओ

नदिया किनारे पे हमरा बागान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान

किसी जादूगर ने चंदा सूरज बनाये.
एक निकाले बाहर एक छुपाये
हो किसी जादूगर ने चंदा सूरज बनाये.
एक निकाले बाहर एक छुपाये
हो ओ ओ ओ
खेल है जादू सा सारा जहान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान
हो ओ ओ ओ

नदिया किनारे पे हमरा बागान
हमरे बगानों पे झूमे आसमान
झूमे आसमान झूमे आसमान
…………………………………………
Nadiya kinare pe-Barsaat ki ek raat 1981

Artist: Rakhi

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Jul 22, 2019

छू कर मेरे मन को-याराना १९८१

आपको फिल्म बेगुनाह से मुकेश का गाया गीत सुनवाया
उसी बीच फिल्म याराना का गीत-सारा ज़माना याद आ
गया. वजह क्या है आप दोनों गीतों को सुनें तो समझ
आ जायेगी.

अब आप सारा ज़माना गीत सुन चुके हैं अतः फिल्म से
एक दूसरा उम्दा गीत सुनते हैं-जिसके बोल लाजवाब हैं.
बोल अनजान के हैं और संगीत राजेश रोशन का. गीत
परदे पर अमिताभ बच्चन और नीतू सिंह पर फिल्माया
गया है. फिल्म का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला
गीत भी यही है. क्यूँ ना हो दिल को छू जाता है.



गीत के बोल:

छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा

तू जो कहे जीवन भर तेरे लिए मै गाऊँ
तेरे लिए मैं गाऊँ
गीत तेरे बोलो पे लिखता चला जाऊं
लिखता चला जाऊं
मेरे गीतों मे तुझे ढूँढे जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा


आ जा तेरा आँचल ये प्यार से मै भर दूं
प्यार से मै भर दूं
खुशियाँ जहाँ भर की तुझको नज़र कर दूं
तुझको नज़र कर दूं
तू ही मेरा जीवन तू ही जीने का सहारा

छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
...............................................................................
Chhoo kar mere man ko-Yaarana 1981

Artists: Amitabh Bachchan, Neetu Singh

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May 15, 2018

तुम्हें छोड़ के-बसेरा १९८१

सुनते हैं फिल्म बसेरा से एक युगल गीत जो फिल्म के टाइटल्स
पर फिल्माया गया है.

कुछ विचित्र सा संगीत है इसमें शुरू में जो ऐसा लगता है मानो
अगली शताब्दी में आने वाली किसी मोटर-साइकिल की ध्वनि
हो. गीत मधुर है इसलिए इसे चुप चाप सुन लेते हैं बिना ज्यादा
दिमाग खपाए.

किशोर कुमार और आशा भोंसले की आवाजें हैं. गुलज़ार के बोल हैं
और आर डी बर्मन का संगीत. सिंपल से गाने में भी चाँद पर बसने
की ख्वाहिश ज़ाहिर कर दी गयी है.




गीत के बोल:

तुम्हें छोड़ के हो अब जीने को जी तो नहीं
तुम्हें छोड़ के हो मर जाने को जी करता है
हो ओ ओ तुम्हारे बिना जीना मरना क्या
तुम्हें छोड़ के हो अब जीने को जी तो नहीं

तेरे प्यार में दिल जला तो जला
तेरी साँस से जिस्म भी जल गया
तेरे प्यार में दिल जला तो जला
तेरी साँस से जिस्म भी जल गया
तेरे प्यार में जलके बुझना क्या

तुम्हें छोड़ के हो यूँ जीने को जी तो नहीं

ज़मीं पे नहीं हम पुकारो हमें
चाँद हो गये हैं उतारो हमें
ज़मीं पे नहीं हम पुकारो हमें
चाँद हो गये हैं उतारो हमें
तुम जो नहीं चाँद पे बसना क्या

तुम्हें छोड़ के हो अब जीने को जी तो नहीं

आँखों ने कही और ज़ुबाँ हो गई
छोटी सी क़सम दास्ताँ हो गई
आँखों ने कही और ज़ुबाँ हो गई
छोटी सी क़सम दास्ताँ हो गई
कहते हुए दास्ताँ रुकना क्या

तुम्हें छोड़ के हो अब जीने को जी तो नहीं
रू रू रू रू
तुम्हें छोड़ के हो मर जाने को जी करता है
रू रू रू रू
हो तुम्हारे बिना जीना मरना क्या
ऊ ऊ ऊ
तुम्हें छोड़ के हो अब जीने को जी तो नहीं
हो जी तो नहीं
हो जी तो नहीं
हो जी तो नहीं
....................................................
Tumhen chhod ke-Basera 1981

Artists: Rajkiran, Poonam Dhillon

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May 12, 2018

आऊँगी एक दिन-बसेरा १९८१

कुछ कलाकार ऐसे हैं फिल्म जगत के जिनकी उपस्थिति से
गाने कुछ विशेष बन जाया करते हैं. इनमें से कुछ नाम हैं
राजेश खन्ना और रेखा. पूर्व की पीढ़ी में से एक नाम हम
आपको बतलाये देते हैं-देव आनंद.

आपको फिल्म बसेरा से एक-दो गीत सुनवा चुके हैं. आज
सुनते हैं इसी फिल्म से एक और गीत जो आशा भोंसले की
आवाज़ में है. घरेलू किस्म का गीत है और इसमें आप घर
के तमाम काम काज देख सकते हैं. मनोरंजक गीत है ये.



गीत के बोल:

आ जाऊं
आऊँगी एक दिन आज जाऊं
हो आऊँगी एक दिन आज जाऊं
कहिये अगर अपना पता दे जाऊं
दे जाऊं

एक ही रात में सोचा ना था बदल जाओगे
रात बड़ी ही चिकनी है आज फिसल जाओगे
अरे शायद मुझे पकड़ना पड़े रूक जाऊं
रूक जाऊं

हम भी तो आखिर घर ही के है हमसाये नहीं
आपके माना और भी हैं हम पराये नहीं
अरे जान भी है हाज़िर अभी पान लाऊं
अरे बाबा पान है पान

होश उड़ जाएँ दोनों को जो बहलाना पड़े
एक को खिलाना दूजे को जो नहलाना पड़े
अरे छोटे को तुम बड़े को मैं नहलाऊं
क्यों नहलाऊं
.................................................................
Aaaongi ek din-Basera 1981

Artist: Rekha, Shashi Kapoor, Rakhi, Etc.

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Apr 12, 2018

जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें-बसेरा १९८१

आपको हमने फिल्म बीबी ओ बीबी का युगल गीत सुनवाया
था. अब सुनते हैं फिल्म बसेरा से लता मंगेशकर का गाया
एक गीत. सन १९८१ की फिल्म है ये भी और इस गीत को
सुन कर आपको लगेगा कि जिस गीत के बारे में हमने पहली
पंक्ति में चर्चा की है और प्रस्तुत गीत एक ही फोर्मेट पर बने
हैं.

फ़िल्मी भाषा में इसको अलग ट्रीटमेंट बोला जाता है. ये कुछ
ऐसा ही है जैसे आप आलू से दम आलू बना लें या आलू प्याज
की सब्जी. आलू अचारी बनायें या आलू का रायता, आलू का
स्वाद ज़रूर आएगा.

बसेरा का ये गीत लाजवाब है और आज भी सुनने में वही
आनंद देता है जो सन १९८१ में दिया करता था. गुलज़ार का
गीत है और आर डी बर्मन का संगीत.





गीत के बोल:

जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें
जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें
मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें
जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें
मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें
जाने कैसे बीतेंगी

धुआं धुआं सा रहता है बुझी बुझी सी आँखों में
धुआं धुआं सा रहता है बुझी बुझी सी आँखों में
सुलग रहे हैं गीले आंसू
आग लगाती है बरसातें
मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें
जाने कैसे बीतेंगी

भरा हुआ था दिल शायद छलक गया है सीने में
भरा हुआ था दिल शायद छलक गया है सीने में
बहने लगे हैं सारे शिकवे
बड़ी ग़मगीन है दिल की बातें
मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें

जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें
मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें
जाने कैसे बीतेंगी
…………………………………………………………….
Jaane kaise beetengi-Basera 1981

Artist: Rekha

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Apr 11, 2018

एक नहीं दो नहीं-बीबी ओ बीबी १९८१

एक सॉफ्ट किस्म का युगल गीत सुनते हैं सन १९८१ की फिल्म
बीबी ओ बीबी से. जो टाइमलेस नाम की चीज़ होती है वो इस गीत
से टेनजेंट(Tangent) हो कर गुजर गयी है. सृष्टि में कण कण का
प्रारब्ध होता है वैसे ही गीतों का भी होना चाहिए. किसी की धुन मधुर
हो तब भी वो अनसुनासा रह जाता है और किसी की धुन सामान्य
होते हुए भी वो हिट हो जाता है.

दो संगीतकार हुए हैं फिल्म जगत में जिनका उल्लेख सबसे ज्यादा
मिलता है नेट पर और जिन्हें संगीत क्षेत्र के लोग तबियत से याद
करते हैं-मदन मोहन और आर डी बर्मन. दोनों के साथ ही ये कहानी
ज्यादा रही कि फ़िल्में नहींचलीं मगर संगीत खूब चला. व्यावसायिक
समीकरण समय के हिसाब से आज ज्यादा मुनाफे वाले हो गए हैं.
आज के समय में संगीत से जुड़े लोगों को भी पैसा पहले की तुलना
में अच्छा मिलता है.

दोनों संगीतकारों में फर्क जो है वो ये कि आर डी बर्मन ने कभी इस
बात की शिकायत नहीं की कि उनकी मेहनत को सराहना नहीं मिली.
ये गिला मदन मोहन को ताउम्र रहा औरसमय समय पर उनकी ये
बात सुनाई देती रही. आउटपुट की बात की जाए तो आर डी बर्मन के
संगीत वाली फिल्मों की संख्या मदन मोहन के संगीत वाली फिल्मों
की लगभग सवा दो गुना है.

एक बेसिक सी चीज़ है कि श्रोता क्या सुनना चाहता है और उसे क्या
पसंद है इस बात पर निर्भर करता है हिट/फिट का मामला. आज तो
गायन में शरीर के विभिन्न स्थानों से आने वाली आवाजों का प्रयोग
हो रहा है फिर भी पब्लिक पसंद कर ही रही है ना. बदलते समय के साथ
जनता कीपसंद भी बदली है. 

इस गीत के दूसरे अंतरे की पंक्तियों के पहले वाली बांसुरी में ‘गले में
खिच खिच’ वाला इफेक्ट है. उसके अलावा पूरे गीत में कुछ भी एक्स्ट्रा
स्पेशल(read अटपटा) नहीं है. गीत निदा फाज़ली का है.




गीत के बोल:

यार मिले दिलदार मिले
तब यारी ला वंदा चस है
काफिर है जो यार कर के
फिर ये कहे मेरी बस है

एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
एक नहीं सौ नहीं लाखों बार
हम भी कहेंगे तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना

दीवाने का दीवाना जब साथ निभाए
वक्त मेहरबान हो के यूँ ही थम जाए
सारी दुनिया से प्यारा है प्यार तेरा
हो तू ही दर्पण तू ही है सिंगार मेरा
हो बालमा साजना आ जाओ बाहों में
प्यार दुआ प्यास वफ़ा प्यार ऐतबार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना

तेरे मेरे प्यार के चर्चे रहें सदा
मैं धरती तू अम्बर होंगे कैसे जुदा
पेड़ों के साये में हम तुम प्यार करें
ढलते सूरज के आगे इकरार करें
हो लाजवाब ये शबाब आ जाओ बाहों में
धूप कहीं छाँव कहीं छाया है खुमार
कहूँ मैं ज़माने से तुमसे है प्यार
यारा ओ यारा जाना मेरी जाना
हो यारा ओ यारा जाना मेरी जाना

एक नहीं दो नहीं सौ सौ बार
कहूँ मैं ज़माने से ला ला ला ला ला तुमसे है प्यार
तुमसे है प्यार तुमसे है प्यार
तुमसे है प्यार
........................................................................
Ek nahin do nahin-Biwi o biwi 1981

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Mar 11, 2018

याद आ रही है २-लव स्टोरी १९८१

आपने फिल्म लव स्टोरी का युगल गीत सुना अब उसका
सोलो वर्ज़न सुनते हैं जो अमित कुमार की आवाज़ में है.
इसके बोल भी आनंद बक्षी के हैं और संगीत पंचम का.

अमित कुमार को गायन के अवसर आर डी बर्मन और
लक्ष्मी प्यारे ने सबसे ज्यादा उपलब्ध करवाए. अमित कुमार
सबसे पहले बालिका वधू के गीत-बड़े अच्छे लगते हैं से
चर्चा में आये थे.



गीत के बोल:

याद आ रही है तेरी याद आ रही है
याद आने से तैरे जाने से जान जा रही है

पहले ये न जाना तेरे बाद ये जाना प्यार में
जीना मुश्किल कर देगा ये दिल दीवाना प्यार में
जाने कैसे साँस ये ऐसे आ जा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है

ये रुत की रंगरेलियां ये फूलों की गलियां रो पड़ीं
मेरा हाल सुना तो मेरे साथ ये कलियां रो पड़ीं
एक नहीं तू दुनिया धांसू बरसा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है

बनते भनते दुल्हन प्रीत हमारी उलझन बन गई
मेरे दिल की धड़कन मेरी जान की दुश्मन बन गई
कुछ कह कह के मुझे रह रह के तड़पा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है
………………………………………………..
Yaa aa rahi hai 2-Love story 1981

Artist: Kumar Gaurav

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Mar 3, 2018

याद आ रही है १-लव स्टोरी १९८१

सन १९८१ की फिल्म लव स्टोरी नायक कुमार गौरव और नायिका
विजयेता पंडित की पदार्पण फिल्म है. फिल्म काफी चली और इसके
गाने भी खूब बजे.

आर डी बर्मन के संगीत वाली कुल बीस फ़िल्में सन १९८१ में आईं.
अंगूर, बरसात की एक रात, बीबी ओ बीबी, दौलत, धुंआ, गहरा ज़ख्म,
घुँघरू की आवाज़, हरजाई, जेलयात्रा, कालिया, कच्चे हीरे, कुदरत,
लव स्टोरी, मंगल सूत्र, नरम गरम, रक्षा, रॉकी, सत्ते पे सत्ता और
ज़माने को दिखाना है.

इनमें से एक और फिल्म ऐसी है जो पदार्पण फिल्म है एक नायक
की और उनका नाम है संजय दत्त. इस फिल्म ने भी अच्छा व्यवसाय
किया और इसके गाने भी खूब बजे. अमिताभ के डबल रोल वाली
फिल्म सत्ते पे सत्ता में पुराने कलाकार हैं. इस फिल्म के गाने भी
जनता ने खूब सुने. चर्चा जारी है और आगे की पोस्ट पढते रहिये.

फिल्म लव स्टोरी से युगल गीत सुनते हैं लता और अमित कुमार का
गाया हुआ. आनंद बक्षी का गीत है और संगीतकार का नाम हम
ऊपर बतला ही चुके हैं आपको. फिल्म के ये सबसे ज्यादा चर्चित
गीत है.



गीत के बोल:

याद आ रही है तेरी याद आ रही है
याद आने से तेरे जाने से जान जा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है

पहले ये न जाना तेरे बाद ये जाना प्यार में
जीना मुश्किल कर देगा ये दिल दीवाना प्यार में
जाने कैसे साँस ये ऐसे आ जा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है

ये रुत की रंगरलियां ये फूलों की गलियां रो पड़ीं
मेरा हाल सुना तो मेरे साथ ये कलियां रो पड़ीं
एक नहीं तू दुनिया आँसू बरसा रही है

याद आ रही है तेरी याद आ रही है

बनते बनते दुल्हन प्रीत हमारी उलझन बन गई
मेरे दिल की धड़कन मेरी जान की दुश्मन बन गई
कुछ कह कह के मुझे रह रह के तड़पा रही है

याद आ रही है तेरी याद आ रही है
याद आने से तेरे जाने से जान जा रही है
याद आ रही है तेरी याद आ रही है
………………………………………………….
Yaad aa rahi hai-Love story 1981

Artists: Kumar Gaurav, Vijyeta Pandit

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Feb 11, 2018

वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा-बीवी ओ बीवी १९८१

प्रस्तुत गीत की पहली पंक्ति में ऐसे शब्द हैं जो थोड़े अलग आर्डर
में आपने कई सार्वजनिक परिवहन के साधनों और माल ढोने वाले
वाहनों के पीछे लिखे देखे होंगे. ट्रकों के पीछे तो कई डाइलॉग भी
लिखे मिलते हैं शेर-शायरी के साथ साथ. प्रतिभा का सार्वजनिक
प्रदर्शन या तो कवि सम्मलेन-मुशायरे में, फिल्मों में, ड्रामा में या
फिर ट्रकों के पीछे ही देखने को मिलता है.

गीत की बात करते हैं. पहली पंक्ति में टायर में से हवा निकाली
जाती है और फिर दूसरी पंक्ति में थोडा सा मरहम लगाया जाता
है, ध्यान भटकाने के लिए. समय से पहले और प्रारब्ध से ज्यादा
अगर नहीं मिलता है तो क्यूँ जनता मंदिरों और बाबाओं के चक्कर
लगाती है? ऊपर वाला तो छलिया है, प्रारब्ध भी वही लिखता है
और आपको भरमाने का काम भी वही करता है. ये सब उसकी
रचाई माया है जिसमें हम सब मोहरे मात्र हैं.

गीत लिखा है निदा फाजली ने जिसकी धुन तैयार की है पंचम ने.
किशोर कुमार ने इसे बीबी ओ बीबी फिल्म के नायक रणधीर कपूर
के लिए गाया है.



गीत के बोल:

ओ हो  आ हा हा हो हो हो
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा

ग़म को हमने गीत बना कर
इस दुनिया का दिल बहलाया
ग़म को हमने गीत बना कर
इस दुनिया का दिल बहलाया
हँसते हँसाते जाने कैसे
इन गीतों में तुमको पाया
हाँ हम हैं सबके कोई न अपना
इक दिन कोई अपना मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन बहके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा

वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा

नैन मिले और चैन गँवाया
बात पुरानी फिर भी नई है
अरे नैन मिले और चैन गँवाया
बात पुरानी फिर भी नई है
तेरी नज़र ने मेरी नज़र से
बिन बोले एक बात कही है
हाँ देख के मुझको यूँ न लजाओ
दिल पे फिर क़ाबू न रहेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा

वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
किसी को मिला है न किसी को मिलेगा
प्यार से सारा गुलशन महके
नफ़रत से कोई गुल न खिलेगा
वक़्त से पहले किस्मत से ज्यादा
…………………………………………………………
Waqt se pehle kismet se zyada-Biwi o biwi 1981

Artist: Randhir Kapoor, Poonam Dhillon

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Jan 31, 2018

काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है-लावारिस १९८१

कल्याणजी आनंदजी, अनजान और किशोर कुमार की टीम ने कई
सफल गीत दिए थे ७० और ८० के दशक में. अधिकांश इनमें से
अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गये हैं.

अनजान ने कई सार्थक गीत लिखे हैं. ये निर्माता निर्देशक के चयन
पर निर्भर होता है कि कौन सा गीत फिल्म में दिखलाई देगा. ऐसे
गीत सभी दशकों में बने हैं और आज भी बन रहे हैं. हर दर्शनवादी
गीत लोकप्रिय ही हो ज़रूरी नहीं. कई गीत हाशिए पे पहुंचे हुए हैं.

सुनते हैं अमिताभ और जीनत अमान पर फिल्माया गया लावारिस
का ये गीत. फिल्म का नायक गरीब है और नायिका अमीर. हर
फ़िल्मी निर्देशक ने नायक को फटे चिथड़ों में नहीं दिखलाया है, कुछ
ने तो फ़िल्मी गरीबों को शानदार कपडे पहना कर उन्हें ग्रेस प्रदान
किया है. ग्रीस लगाने वाले यदार्द्वादी निर्देशक तो कम ही हुए फिल्म
जगत में. 

गीत में जो अब तक आपने ध्यान से नहीं देखा वो है एक जगह पर
छोटा सा कुत्ता भी अमिताभ के नृत्य को देख कर उसी अंदाज़ में
हिलता डुलता है.




गीत के बोल:

चार पैसे क्या मिले
क्या मिले भई क्या मिले
वो ख़ुद को समझ बैठे ख़ुदा
वो ख़ुदा ही जाने अब
होगा तेरा अंजाम क्या

काहे पैसे पे
काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है
काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है
यही पैसा तो
यही पैसा तो अपनों से दूर करे है
दूर करे है
काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है
ग़ुरूर करे है

सोने-चाँदी के ऊँचे महलों में
दर्द ज़्यादा है चैन थोड़ा है
दर्द ज़्यादा है चैन थोड़ा है
इस ज़माने में पैसे वालों ने
प्यार छीना है दिल को तोड़ा है
प्यार छीना है दिल को तोड़ा है
पैसे की अहमियत से तो इंकार नहीं है
पैसा ही मगर सब कुछ सरकार नहीं है
इन्साँ इन्साँ है पैसा पैसा है
दिल हमारा भी तेरे जैसा है
है भला पैसा तो बुरा भी है
ये ज़हर भी है ये नशा भी है
ये ज़हर भी है ये नशा भी है
ये नशा कोई
ये नशा कोई धोखा ज़रूर करे है
यही पैसा तो हाँ
यही पैसा तो अपनों से दूर करे है
दूर करे है
काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है
ग़ुरूर करे है

अरे चले कहाँ
ऐ पैसे से क्या क्या तुम यहाँ ख़रीदोगे
ऐ दिल ख़रीदोगे या के जाँ ख़रीदोगे
बाज़ारों में प्यार कहाँ बिकता है
दुकानों पे यार कहाँ बिकता है
फूल बिक जाते हैं खुशबू बिकती नहीं
जिस्म बिक जाते हैं रूह बिकती नहीं
चैन बिकता नहीं ख़्वाब बिकते नहीं
दिल के अरमान बेताब बिकते नहीं
अरे पैसे से क्या क्या तुम यहाँ ख़रीदोगे
ऐ दिल ख़रीदोगे या के जाँ ख़रीदोगे

हे इन हवाओं का मोल क्या दोगे
इन घटाओं का मोल क्या दोगे
अरे इन ज़मीनों का मोल हो शायद
आसमानों का मोल क्या दोगे
हे इन हवाओं का मोल क्या दोगे
इन घटाओं का मोल क्या दोगे
अरे इन ज़मीनों का मोल हो शायद
आसमानों का मोल क्या दोगे
इन घटाओं का मोल क्या दोगे
अरे इन ज़मीनों का मोल हो शायद
आसमानों का मोल क्या दोगे
पास पैसा है तो है ये दुनिया हसीं
दुनिया हसीं
हो ज़रूरत से ज़्यादा तो मानों यक़ीं
मानों यक़ीं
ये दिमाग़ों में
ये दिमाग़ों में पैदा फ़ितूर करे है
यही पैसा तो
यही पैसा तो अपनों से दूर करे है
दूर करे है
काहे पैसे पे इतना ग़ुरूर करे है
ग़ुरूर करे है
....................................................................
Kaahe paise pe itna guroor-Lawaris 1981

Artists: Amitabh Bachchan, Zeenat Aman

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Oct 9, 2017

मेघा रे मेघा रे-प्यासा सावन १९८१

सन १९८० तक ज़माना सिंपल था जैसा कि आज के समय को देख
कर हम कह सकते हैं. सन १९४० में उससे भी सिंपल था जैसा कि
पूर्ण चांदीमय बालों के ओनर कहा करते हैं. तो हम सन १९८० पर
बात कर रहे हैं. फिल्म संगीत का कर्णभेदी पहलू अभी सो के उठा
ही था. उस युग में कुछ प्रमुख गायकों के संसार छोड़ने की वजह
से कुछ नए गायकों को अवसर मिलना शुरू हुए. इनमें से एक नाम
है सुरेश वाडकर का.

आज फिल्म प्यासा सावन से एक गीत सुनते हैं लता मंगेशकर और
सुरेश वाडकर का गाया हुआ. संतोष आनंद का गीत है और इस गीत
का संगीत लक्ष्मी प्यारे की देन है.




गीत के बोल:

मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे

कहाँ से तू आया कहाँ जायेगा तू
के दिल की अगन से पिघल जायेगा तू
धुआँ बन गई है ख़यालों की महफ़िल
मेरे प्यार की जाने कहाँ होगी मंज़िल
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे
मेरे ग़म की तू दवा रे  दवा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे

बरसने लगी हैं बूँदें तरसने लगा है मन
हो  ओ ओ ओ ओ
ज़रा कोई बिजली चमकी लरज़ने लगा है मन
और न डरा तू मुझको ओ काले काले घन
मेरे तन को छू रही है प्रीत की पहली पवन
हो  ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे मेघा रे मेघा रे
मेरी सुन ले तू सदा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे

मन का मयूरा आज मगन हो रहा है
मुझे आज ये क्या सजन हो रहा है
उमंगों का सागर उमड़ने लगा है
बाबुल का आँगन बिखरने लगा है
न जाने कहाँ से हवा आ रही है
उड़ा के ये हमको लिये जा रही है
ये रुत भीगी भीगी भिगोने लगी है
के मीठे से नश्तर चुभोने लगी है
चलो और दुनिया बसायेंगे हम तुम
ये जन्मों का नाता निभायेंगे हम तुम
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
दे तू हमको दुआ रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे

हो ओ ओ ओ ओ
मे घारे  मे घारे मे घारे मे घारे
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे
……………………………………….
Megha re megha re-Pyasa sawan 1981

Artists: Jeetendra, Mausami Chatterji

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Sep 17, 2017

दिलवाले दिलवाले तेरा नाम-क्रांति १९८१

फिल्म क्रांति से एक गीत सुनते हैं लाता मंगेशकर का गाया हुआ.
दिलवाले का नाम और पैगाम क्रांति है. उसके अलावा बहुत कुछ
है इस गीत में जो क्रांति है.

संतोष आनंद के गीत और लक्ष्मी प्यारे के संगीत से सजे इस
गीत को सुनते हैं. गीत में चार और गायकों की आवाजें हैं. टैग
में उन सबके नाम दिए हुए हैं.




गीत के बोल:

दिलवाले
दिलवाले दिलवाले तेरा नाम क्या है
दिलवाले दिलवाले तेरा नाम क्या है
नाम क्या है तेरा पैगाम क्या है
क्रांति क्रांति क्रांति क्रांति

अब किसी की माँग ना उजड़े
अब किसी की माँग ना उजड़े
अब बच्चो से मां ना बिछड़े
ओ ओ अब बच्चो से मां ना बिछड़े

दिलवाले
दिलवाले दिलवाले तेरा अपना क्या है
अपना क्या है तेरा सपना क्या है
क्रांति आ हा
क्रांति आ हा
क्रांति क्रांति

देश की खातिर काम आयेंगे
देश की खातिर काम आयेंगे
गोद में जिसकी सो जाएँगे
हो ओ गोद में जिसकी सो जाएँगे

दिलवाले
दिलवाले दिलवाले तेरा अरमान क्या है
अरमान क्या है तेरा ईमान क्या है
क्रांति आ हा
क्रांति आ हा
क्रांति क्रांति

एक ही मिट्टी एक ही पूजा
एक ही मिट्टी एक ही पूजा
इसके सिवा ना भाये दूजा
हो ओ इसके सिवा ना भाये दूजा

दिलवाले
दिलवाले दिलवाले तेरा राम क्या है
राम क्या है तेरा घनश्याम क्या है
क्रांति आ हा क्रांति आ हा
क्रांति आ हा
क्रांति आ हा
क्रांति क्रांति
…………………………………………………………..
Dilwale dilwale tera naam-Kranti 1981

Artists: Hema Malini, Dilip Kumar, Manoj Kumar

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Sep 16, 2017

छोड़ो सनम काहे का ग़म-कुदरत १९८१

कुदरत फिल्म से एक युगल गीत सुनते हैं जो पॉपुलर है आज भी.
किशोर कुमार और एनेट पिंटो का गाया ये गीत कुछ हाज़िर जवाब
संगीत प्रेमियों की नज़र में दो प्रकार की विधाओं का संगम है-
योडलिंग और गार्गलिंग.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और संगीत आर डी बर्मन का. अपने
समय की संगीत शैली यानि के डिस्को के हिसाब से ये गीत एकदम
सटीक है. इस पर डांस किया जा सकता है. धुन भी आकर्षक है इसकी.




गीत के बोल:

छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
मिट जायेगा सारा गिला
हमसे गले मिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो

छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
मिट जायेगा सारा गिला
हमसे गले मिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो

मुस्कुराती हसीन आँखों से देखो देखो समा बदलता है कैसे
जाने जहाँ चेहरे की रंगत खुल जाती है ऐसे
मुस्कुराती हसीन आँखों से देखो देखो
समा बदलता है कैसे
जाने जहाँ चेहरे की रंगत खुल जाती है ऐसे

छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो

आओ मिलकर के यूँ बहक जाएं कि महक जाये
आज होंठों की कलियाँ
झूमे फ़िज़ा ये गलियाँ बन जाये फूलों की गलियाँ
आओ मिलकर के यूँ बहक जाएं कि महक जाये
आज होंठों की कलियाँ
झूमे फ़िज़ा ये गलियाँ बन जाये फूलों की गलियाँ

छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
मिट जायेगा सारा गिला
हमसे गले मिलते रहो
छोड़ो सनम काहे का ग़म
हंसते रहो खिलते रहो
…………………………………………………………
Chhodo sanam kaahe ka gham-Kudrat 1981

Artists: Vinod Khanna, Kalpana Iyer, Hema Malini

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Sep 8, 2017

इन आँखों की मस्ती के-उमराव जान १९८१

१९८१ की सुपर हिट म्यूजिकल फिल्म उमराव जान से अगला गीत
सुनते हैं आशा भोंसले की आवाज़ में.

इसके बोल भी शहरयार के हैं और संगीत खय्याम का.




गीत के बोल:

इन आँखों की मस्ती के
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों से वाबस्ता
इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं
अफ़साने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इक तुम ही नहीं तन्हा
इक तुम ही नहीं तन्हा उलफ़त में मेरी रुसवा
उलफ़त में मेरी रुसवा
इस शहर में तुम जैसे
इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं
दीवाने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इक सिर्फ़ हम ही मय को
इक सिर्फ़ हम ही मय को आँखों से पिलाते हैं
आँखों से पिलाते हैं
कहने को तो दुनिया में
कहने को तो दुनिया में मयखाने हज़ारों हैं
मयखाने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को आंधी से डराते हो
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं
परवाने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के
 …………………………………………………………………….
In ankhon ki masti ke-Umrao Jaan 1981

Artist: Rekha

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Aug 21, 2017

कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ-लावारिस १९८१

सन १९८१ की फिल्म लावारिस के गीत खूब बजे. जनता को सारे
गीतों के बोल और ऊह-आह आउच तक सब याद हो गया. इस फिल्म
का सबसे चर्चित गीत रहा-मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है.

इस फिल्म से एक मधुर युगल गीत सुनते हैं किशोर और आशा का
गाया हुआ. अनजान के बोल हैं और कल्याणजी आनंदजी का संगीत.




गीत के बोल:

कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
जैसे शम्मा से कहीं लौ ये झिलमिला के मिले
कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
जैसे सावन जैसे सावन
जैसे सावन से कहीं प्यासी घटा आ के मिले
कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
कब के बिछड़े कब के बिछड़े

बाद मुद्दत के रात महकी है
दिल धड़कता है साँस बहकी है
प्यार छलका है प्यासी आँखों से
सुर्ख़ होंठों पे आग दहकी है
ओ ओ ओ ओ ओ
महकी हवाओं में बहकी फ़िज़ाओं में
दो प्यासे दिल यूँ मिले
दो प्यासे दिल यूँ मिले
जैसे मयकश जैसे मयकश
जैसे मयकश कोई साक़ी से डगमगा के मिले
कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
कब के पिछड़े कब के बिछड़े

दूर शहनाई गीत गाती है
दिल के तारों को छेड़ जाती है
दिल के तारों को छेड़ जाती है
यूँ सपनों के फूल यहाँ खिलते हैं
यूँ दुआ दिल की रंग लाती है
यूँ दुआ दिल की रंग लाती है
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बरसों के बेगाने उल्फ़त के दीवाने
अनजाने ऐसे मिले
अनजाने ऐसे मिले
जैसे मनचाही जैसे मनचाही
जैसे मनचाही दुआ बरसों आजमा के मिले

कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
जैसे सावन से कहीं प्यासी घटा आ के मिले
कब के बिछड़े हुए हम आज कहाँ आ के मिले
कब के बिछड़े कब के बिछड़े
………………………………………….
Kab ke bichhde-Lawaris 1981

Artists: Amitabh, Zeenat Aman

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Jul 27, 2017

ये रुत है हसीन-हरजाई १९८१

टीना मुनीम और रणधीर कपूर की फिल्म हरजाई से एक गीत
किशोर कुमार की आवाज़ में.

गीत लिखा है गुलशन बावरा ने और धुन तैयार की है पंचम ने.



गीत के बोल:

ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
हरजाई नहीं हम ना तुम बेवफ़ा
ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ

मिलना था हम मिल ही गये
फूल प्यार के खिल ही गये
मिलना था हम मिल ही गये
फूल प्यार के खिल ही गये
हो दिल से यही दूँ मैं दुआ
मिल के ना हो कोई जुदा

ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
हरजाई नहीं हम ना तुम बेवफ़ा

सपने थे सपने ही रहे
अपने जब अपने ना रहे
सपने थे सपने ही रहे
अपने जब अपने ना रहे
हो रूठे हो तुम कौन सुने
कोई प्यार का शिकवा गिला

ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
हरजाई नहीं हम ना तुम बेवफ़ा

तन मन प्रीत के दीप जले
आये सहर ना रात ढले
तन मन प्रीत के दीप जले
आये सहर ना रात ढले
हो सोचो ज़रा होगी भला
फूल से खुशबू कैसे जुदा

ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
हरजाई नहीं हम ना तुम बेवफ़ा
ये रुत है हसीन दर्द भी है जवाँ
…………………………………………………
Ye rut hai haseen-Harjai 1981

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