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Apr 3, 2020

दिल आखिर दिल है(लता)-शीर्षक गीत १९८२

८० के दशक में मुख्य धारा के सिनेमा के कलाकारों को
ले कर बनी ऑफबीट फ़िल्में बहुत आईं . इनमें से एक
उल्लेखनीय फिल्म है-दिल आखिर दिल है. परवीन बाबी,
राखी और नसीरुद्दीन शाह फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं.
फिल्म १९८२ में रिलीज़ हुई थी.

फिल्म दिल आखिर दिल है से आपने शीर्षक गीत सुना. वो
भूपेंद्र की आवाज़ में है. उसी का दूसरा संस्करण आज सुनेंगे
जो लता मंगेशकर ने गाया है.

ऐसे गीत जो दो संकरण में उपलब्ध हैं उनमें अक्सर
मेल वर्ज़न ज्यादा पॉपुलर हो जाता है, ऐसा क्यूँ इसका
स्पष्ट जवाब हमें नहीं मिल पाया अभी तक. ये फेनोमेना
नए गानों(२००० के बाद वाले) में कंट्रोल में है. कई बार
हमने फीमेल गाने ज्यादा सुने हैं.

यह गीत भी नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है और संगीत
एक बार फिर खय्याम का. दोनों वर्ज़न के बोल अलग अलग
हैं. इसमें भावनाओं क गुबार ज्यादा है. बोलों के लिहाज से ये
वर्ज़न मुझे ज्यादा पसंद है.


गीत के बोल:

दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है

शिकवा तो है हालात का
उनसे कोई शिकवा नहीं
टूटा है दिल उम्मीद का
रिश्ता अभी टूटा नहीं
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है

माना के है हंसता हुआ
चेहरा ज़माने के लिये
कैसे कहें है ज़ख़्म-ए-दिल
किसको दिखाने के लिए
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है

कश्ती अगर जज़्बात की
तूफ़ान से टकरायेगी
कोई लहर अहसास की
दिल को बहा ले जायेगी
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनायें हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
…………………………………
Dil aakhir dil hai(lata)-Titlesong 1982

Artist: Rakhi, Dina Pathak

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Mar 1, 2020

निगाहें यार ने कुछ ऐसा-दिल आखिर दिल है १९८२

फिल्म इंडस्ट्री के कुछ टेस्टिंग एन्विल हैं जिनके साथ
काम कर के कलाकार और गायक अपने आप को
सौभाग्यशाली समझते हैं. खय्याम और जयदेव ऐसे
दो नाम हैं जिन्होंने थोडा लीक से अलग हट के काम
भी किया है. इनमें से जयदेव के पास तो लीक से
हटी हुई और पटरी से उतरी ही कहानियां ही ज्यादा
आयीं.

सुरेश वाडकर से जयदेव ने एक गाना गवाया था फिल्म
गमन में. खय्याम के खेमे में नंबर लगा वाडकर का
१९८२ की फिल्म दिल आखिर दिल है में. इसमें उन्हें
एक गाना गाने का मौका मिला. सुरेश वाडकर एक
ट्रेंड सिंगर हैं जिन्हें रागदारी की जानकारी भी है.
इस समय तक चल चमेली बाग में मेवा खिलाऊँगा
गीत भी आ चुका था जिससे सुरेश वाडकर को काफी
लोकप्रियता हासिल हुई.

नक्श लायलपुरी की रचना है और मेरा ख्याल गलत
नहीं है तो इसे परदे पर नसीरूदीन शाह पर फिल्माया
गया है.



गीत के बोल:

निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया

हसीं रात है तू मेरे साथ है
मैं क्यूँ न चूम लूं घटायें ज़ुल्फ़ की
मैं तुझमें खो गया दीवाना हो गया
के मुझको ले उड़ी हवाएं ज़ुल्फ़ की
महकते गेसुओं
महकते गेसुओं ने सैन किस कदर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया

मिली जो उसना की ज़रा सी रौशनी
बुझे बुझे से ख्वाब जगमगा उठे
जो प्यार मिल गया ये दिल संभल गया
उदास होंठ फिर से गुनगुना उठे
लबों ने प्यार से
लबों ने प्यार से ये नगमा-ए-सहर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया

ये मेरा दिल कहे तू हमकदम रहे
जहाँ भी ले चले वफ़ा के रास्ते
किसी भी मोड़ पर अकेला छोड़ कर
चले ना जाना तू खुदा के वास्ते
मुझे नसीब ने
मुझे नसीब ने इक प्यारा हमसफ़र दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया

निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
गुलों का रंग मेरी जिंदगी में भर दिया
निगाहे यार ने
निगाहे यार ने कुछ ऐसा जादू कर दिया
……………………………………………….
Nigaahe yaar ne kuchh aisa-Dil aakhir dil hai 1982

Artists: Naseeruddin Shaf, Parveen Babi

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Feb 18, 2020

चन्दन को चूम चूम-दिल आखिर दिल है १९८२

फिल्मकारों और संगीतकारों को हमेश तो नहीं मगर
किसी किसी फिल्म के गानों के लिए २-३ गीतकारों
की ज़रूरत पड़ती रही. फिल्म बाजार के गानों के लिए
तो हर गाने के लिए अलग गीतकार है.

फिल्म दिल आखिर दिल है के लिए नक्श लायलपुरी,
निदा फाज़ली और इन्दीवर की सेवाएं ली गईं. आपने
दो गीतकारों के गीत तो सुन लिए अब सुनते हैं तीसरे
गीतकार इन्दीवर का लिखा गीत.

राखी और नसीरूदीन शाह पर फिल्माए गए इस गीत
को गाया है आशा भोंसले ने. नायिका का गोरा गोरा और
गुलाबी स्पॉट वाला चेहरा भी नायक को नहीं लुभा पा
रहा है. उसे अपनी फैंटेसी ही नज़र आ रही है. गीत
शायद एलिफेंटा की गुफाओं में फिल्माया गया है.

राखी सन १९४७ की पैदाइश हैं और नसीर १९५० की.
परवीन बाबी सन १९४९ में पैदा हुई थीं. फिल्म करते
समय दोनों की उम्र नसीर से ज्यादा थी. ये रेयर फिल्म
है अन्यथा हमने सुपर डुपर स्टारकास्ट देखी है जिसमें
६५ साल का नायक २३ साल की लड़की के साथ नज़र
आता है. नसीर इस गाने में क्या करना चाह रहे हैं
समझ नहीं आया.

बरसों पहले किसी बंदे ने एक फोरम में चर्चा के दौरान
चेहरे के भावों पर कुछ ये कहा था-कांसटिपेटेड लुक्स.
जब किसी के चेहरे पर ज़रूरत के मुताबिक़ भाव ना
आ पा रहे हों और कहीं कुछ अटका सा लगे तब ये
शब्द याद आते हैं. अब वो शख्स चाहे एन एस डी
का छात्र रहा हो या हिंद महासागर में डुबकी मार के
आया हो, जो दिख रहा है वो तो दिखेगा और जनता
समझेगी भी.





गीत के बोल:

चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन
साहिल को चूम चूम मौज है मगन
समझो सजन प्यार की लगन
चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन
साहिल को चूम चूम मौज है मगन
समझो सजन प्यार की लगन

चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन

पत्थर की मूरत में प्यार पला है
रंगों में छंदों में प्यार ढला है
पत्थर की मूरत में प्यार पला है
रंगों में छंदों में प्यार ढला है
सिमटी है होंठों में मन की अगन
सिमटी है होंठों में मन की अगन
समझो सजन प्यार की लगन

चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन

सर से पाँव तक प्यार हो पिया
रोशन कर देगा मन देह का दिया
सर से पाँव तक प्यार हो पिया
रोशन कर देगा मन देह का दिया
देखो तो छू के कोरा बदन
देखो तो छू के कोरा बदन
समझो सजन प्यार की लगन

चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन

बांधे थे अग्नि के आगे बंधन
स्वीकार था मुझको अपनी दुल्हन
बांधे थे अग्नि के आगे बंधन
स्वीकार था मुझको अपनी दुल्हन
कर दो तो पूरे वो प्यार के वचन
कर दो तो पूरे वो बुखार के वचन
समझो सजन प्यार की लगन

चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन
साहिल को चूम चूम मौज है मगन
समझो सजन प्यार की लगन
चन्दन को चूम चूम मस्त है पवन
……………………………………………..
Chandan ko choom choom-Dil aakhir dil hai 1982

Artists: Rakhi, Parveen babi, Naseeruddin Shah

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Oct 15, 2019

जा री बहना जा-त्रिशूल १९७८

१९७८ की चर्चित बहुसितारा फिल्म त्रिशूल से एक
और गीत सुनते हैं जो बहन की विदाई पर भाई
गा रहा है. डोली सोंग्स की श्रेणी में गिना जाता
है इसे. विदाई गीत भी कह लेते हैं इसे क्यूंकि
जाने का संकेत दिया जा रहा है.

किशोर कुमार, येसुदास और पामेला चोपड़ा के
गाये इस गीत की रचना साहिर ने की है और इस
गीत का संगीत खय्याम ने तैयार किया है.
   



गीत के बोल:

बाप का घर क्या भाई का घर क्या
आज समझ सबको अनजान
लड़की जिस घर में पलती है
उस घर होती है मेहमान
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

लड़की का जब बचपन जाये
मायका साथ ही जाये
उसका जीवन साथी का घर
उसका घर कहलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

लड़की के जीवन में
जिस दिन ये शुभ अवसर आये
सास बने माता उसकी और
ससुर पिता कहलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा

जा री बहना जा तुझको
ये नव जीवन रास आये
तेरे आँगन लक्ष्मी नाचे
दुर्गा दीप जलाये
जा री बहना जा तू अपने घर जा
जा री बहना जा तू अपने घर जा
………………………………………..
Ja ri behna ja-Trishul 1978

Artists: Poonam Dhillon,

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Oct 13, 2019

दिल आखिर दिल है(भूपेंद्र)-शीर्षक गीत १९८२

सन १९८२ की ऑफबीट फिल्म दिल आखिर दिल है से
शीर्षक गीत सुनते हैं भूपेंद्र की आवाज़ में. ये गीत दो
संस्कारों में उपलब्ध है. लता मंगेशकर की आवाज़ वाला
गीत आपको बाद में सुनवायेंगे.

गीत नक्श लायलपुरी का है और संगीत खय्याम का. इस
फिल्म में दो अन्य गीतकारों ने भी अपनी सेवाएं दी हैं-
इन्दीवर और निदा फाजली.





गीत के बोल:

दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है

नाज़ुक तो था ये आइना
सोचा ना था लेकिन कभी
कुछ इस तरह तोड़ेगी दिल
बस एक नज़र की बेरुखी
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है

पत्थर कहो शीशा कहो
चआहे कोई भी नाम दो
ये प्यार के काबिल नहीं
दिल को ना ये इलज़ाम दो
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है

गुल भी खिले गुलशन खिला
हरसूं हुई रंगीन फिजा
ऐ काश ये पूछे कोई
वीरान क्यूँ है दिल मेरा
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
किसको सुनाएं हाल-ए-दिल
हाल-ए-दिल
दिल आखिर दिल है
दिल आखिर दिल है
………………………………………………….
Dil aakhir dil hai(Male)-Titlesong 1982

Artist: Naseerudiin Shah

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Sep 3, 2019

जबसे देखा है तुम्हें-दिल आखिर दिल है १९८२

१९८२ की थोड़ी ऑफबीट फिल्म दिल आखिर दिल है से
एक युगल गीत सुनते हैं लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर
की आवाजों में.

इस गीत को नक्श लायलपुरी ने लिखा है. फिल्म में तीन
गीतकारों की सेवाएं ली गयी हैं-इन्दीवर, नक्श लायलपुरी
और निदा फाज़ली. गीत का संगीत तैयार किया है खय्याम
ने.

गीत नसीरूदीन शाह और परवीन बाबी पर फिल्माया गया
है. नसीरूदीन शाह को अपने कैरियर में मिले कुछ गिने चुने
युगल गीतों में से एक.





गीत के बोल:

जबसे देखा है तुम्हें
ऐसा लगता है मेरे ख्वाब की ताबीर हो तुम
मेरे दिल में जो छुपी थी वही तस्वीर हो तुम
जबसे देखा है तुम्हें
ऐसा लगता है मेरे हाथ की तहरीर हो तुम
मेरे दिल में जो छुपी थी वही तस्वीर हो तुम

हर उजाले में महकती थी तुम्हारी खुशबू
तुम वही हो चमकती थी सितारों की तरह
मैं तो जिस राह से गुजरी हूँ तुम्हें पाया है
तुम मुझे देखते रहते हो नजारों की तरह

जबसे देखा है तुम्हें
ऐसा लगता है मेरे ख्वाब की ताबीर हो तुम
मेरे दिल में जो छुपी थी वही तस्वीर हो तुम

प्यार कोशिश से नहीं मिलता ज़माने में कभी
आप ही आप कोई दिल में उतर जाता है
जब भी दो ख्वाब किसी मोड पे मिल जाते हैं
हर अँधेरे में उजाला सा भर जाता है

जबसे देखा है तुम्हें
ऐसा लगता है मेरे ख्वाब की ताबीर हो तुम
मेरे दिल में जो छुपी थी वही तस्वीर हो तुम
जबसे देखा है तुम्हें
ऐसा लगता है मेरे ख्वाब की ताबीर हो तुम
मेरे दिल में जो छुपी थी वही तस्वीर हो तुम
………………………………………………………..
Jabse dekha hai tumhen-Dil aakhir dil hai 1982

Artists: Naseruddin Shah, Parveen Babi, Rakhi

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Sep 2, 2019

आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को-त्रिशूल १९७८

सन १९७८ की फिल्म त्रिशूल एक बहुसितारा और चर्चित
फिल्म है. इसमें बड़े सितारे मौजूद हैं. वहीदा रहमान ने
जो इक दुक्का फिल्मों में अमिताभ बच्चन की नायिका
रह चुकी हैं, उनकी माँ का रोल किया है. सन १९८३ की
फिल्म ‘महान’ इस मामले में उससे भी महान है.

गीत युवा संजीव कुमार पर फिल्माया गया है. उनके साथ
वहीदा रहमान इस रोमांटिक गीत को गा रही हैं. गीतकार
ने भी क्या खूब लिखा है-ऐसी बातें ना करो जिनका यकीं
मुश्किल हो. निर्देशक ने भले ही कम उम्र के संजीव के
साथ वहीदा की जोड़ी बना दी हो, गीतकार ने इस बात
पर ज़रूर गौर किया है. आठ साल पहले की फिल्म धरती
में वे राजेंद्र कुमार के साथ नायिका थीं. उसके अलावा
बढती उम्र में जुल्फें पतली होती चलती हैं. इसलिए घनी
शब्द का उपयोग नहीं है. है ना सेफ लिरिक्स.

खैर नायक जो आगे चल के बालों में सफेदी लगाने वाला
है फिल्म में, उसके लिए आवाज़ का ध्यान पहले से रखा
गया है. एक मैच्योर्ड वोईस अर्थात येसुदास की आवाज़
का प्रयोग किया गया है. फिल्म में आगे चल के एक और
गीत में येसुदास की आवाज़ आती है चंद पंक्तियों के लिए.

गीत सुनते हैं जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा है और
इसका संगीत खय्याम ने तैयार किया है.




गीत के बोल:


आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को कहते हैं घटा
आपकी महकी हुई ज़ुल्फ़ को कहते हैं घटा
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
मैं तो कुछ भी नहीं तुमको हसीं लगती हूँ
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं

एक हम ही नहीं
एक हम ही नहीं सब देखने वाले तुमको
संगे मरमर पे
संगे मरमर पे लिखी शोख ग़ज़ल कहते हैं
संगे मरमर पे लिखी शोख ग़ज़ल कहते हैं

ऐसी बातें न करो
ऐसी बातें न करो जिनका यकीं मुश्किल हो
ऐसी तारीफ को
ऐसी तारीफ को नीयत का खलल कहते हैं
ऐसी तारीफ को नीयत का खलल कहते हैं
आपकी मदभरी आँखों को कंवल कहते हैं
इसको चाहत भरी नज़रों का अमल कहते हैं

मेरी तकदीर के तुमने मुझे अपना समझा
मेरी तकदीर के तुमने मुझे अपना समझा
इसको सदियों की
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
इसको सदियों की तमन्नाओं का फल कहते हैं
...................................................................
Aapki mehki hui zulf ko-Trishul 1978

Artists: Sanjeev Kumar, Waheeda Rehman

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Sep 1, 2019

गापुची गापुची गम गम-त्रिशूल १९७८

प्यार में आदमी चाईनीज़ भाषा भी सीख जाता है.
प्यार में आलू आलूबुखारा हो जाता है. और ना जाने
क्या क्या हो जाता है इन सब बातों का जिक्र हम
करते आये हैं पूर्व में.

जिन गीतों में अगडम-बगडम शब्द होते है हैं उन्हें
संगीत प्रेमी गार्बेज वर्ड्स कहते हैं जिनका कोई मतलब
ना हो. कभी कभी ये गीत को रोचक बना देते हैं.

फिल्म त्रिशूल में भी ऐसा एक गीत है जिसे फिल्माया
गे है युवा पूनम ढिल्लों और सचिन पर. लता मंगेशकर
और नितिन मुकेश ने इसे गाया है. साहिर के बोल हैं
और खय्याम का संगीत.





गीत के बोल:

गापुची गापुची गम गम किशिकी किशिकी कम कम
गापुची गापुची गम गम
ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम
ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम
गापुची गापुची गम गम किशिकी किशिकी कम कम
गापुची गापुची गम गम

फूलों जैसा चेहरा डाली जैसा तन है
तेरी ही अमानत हर धडकन है
फूलों जैसा चेहरा डाली जैसा तन है
तेरी ही अमानत हर धडकन है
अरे आ भी जा बाहों में प्यार का हो संगम
ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम
गापुची गापुची गम गम किशिकी किशिकी कम कम
गापुची गापुची गम गम

जादू भरी आँखें ख्वाबों के खजाने
महकी महकी साँसे बातें हैं तराने
जादू भरी आँखें ख्वाबों के खजाने
महकी महकी साँसे बातें हैं तराने
अरे आ भी जा बाहों में प्यार का हो संगम
ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम
गापुची गापुची गम गम किशिकी किशिकी कम कम
गापुची गापुची गम गम

जागे जागे अरमान भीगा भीगा मौसम
दिलों की ये हलचल बूंदों की ये छम छम
जागे जागे अरमान भीगा भीगा मौसम
दिलों की ये हलचल बूंदों की ये छम छम
अरे आ भी जा बाहों में प्यार का हो संगम
अरे ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम

ओ सनम हम दोनों साथ रहें जनम जनम
…………………………………………………..
Gapuchi gapuchi gam gam-Trishul 1978

Artists: Poonam Dhillon, Sachin Pilgaonkar

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Aug 20, 2019

जाने क्या हाल हो-आशा भोंसले

खय्याम के जाने से हिंदी सिने संगीत के एक और सुनहरे चैप्टर
का क्लोजर हो गया. वे सा रे गा मा जैसी संगीत प्रतियोगिताओं
के जज के तौर पर काफी देखे गए दर्शकों द्वारा.

आपने फ़िल्मी गीत तो काफी सुने होंगे खय्याम के संगीत वाले.
आज आपको एक गैर फ़िल्मी रचना सुनवाते हैं ८० के दशक की.
८० के दशक के अंत में आशा भोंसले का एक एल्बम आया था
जिसके गीत खय्याम द्वारा संगीतबद्ध हैं.

अहमद वसी की रचना है जिसे कुछ और गायकों ने भी गाया है.
खय्याम ने अपने अंदाज़ में धुन बनाई है इसकी.




गीत के बोल:

जाने क्या हाल हो
जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आये
ना तो जज़्बात पे ना खुद पे ही काबू आये
जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आये

चार जानिब तेरी परछाईं नज़र आती हैं
चार जानिब तेरी परछाईं नज़र आती हैं
तू ही खुशबू सा महकता हो हरसू आये
तू ही खुशबू सा महकता हो हरसू आये
जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आये

तेरे जलवे की निगाहों को नहीं ताब रही
तेरे जलवे की निगाहों को नहीं ताब रही
ऐसा महसूस हुआ चाँद को हम छू आये
ऐसा महसूस हुआ चाँद को हम छू आये
जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आये

तेरी दिलदार निगाहों का दिलासा पा कर
तेरी दिलदार निगाहों का दिलासा पा कर
मेरी पलकों पे चमकते हुए जुगनू आये
मेरी पलकों पे चमकते हुए जुगनू आये

जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आये
.............................................................
Jaane kya haal ho-Asha Bhosle Non film song

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Aug 2, 2019

मौसम मौसम लवली मौसम-थोड़ी सी बेवफाई १९८०

अनवर और सुलक्षणा पंडित के गाया युगल गीत सुनते हैं
फिल्म थोड़ी सी बेवफाई से. युवा पद्मिनी कोल्हापुरे और
युवा सिद्धार्थ रे पर ये गीत फिल्माया गया है. सिद्धार्थ
वही हैं फिल्म बाजीगर के “छुपाना भी नहीं आता” गीत
वाले.

गुलज़ार के बोल हैं और खय्याम का संगीत. फिल्म का ये
गीत थोडा तेज गति वाला है. युवा पीढ़ी के हिसाब से बनाया
गया गीत. फिल्म का दूसरा गीत-आँखों में हमने आपने’
राजेश खन्ना और शबाना आज़मी पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

हो हो ओ ओ ओ ओ
हो हो ओ ओ ओ ओ

मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
बेवजह लगता है कोई खुशखबरी है

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कहो तो सुनती हैं सुनो तो कहती हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ज़मीन पे उड़ते हैं हवाओं मे चलते हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
.......................................................................
Mausam mausam lovely mausam-Thodi si bewafai 1980

Artists: Padmini Kolhapure, Siddharth Ray

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Jan 9, 2019

अटकन बटकन दही चटोकन-बारूद १९६०

बच्चों पर फिल्माए गीत मासूम से सुनाई देते हैं. इनके
निर्माण के समय विशेष ध्यान रखा जाता है. इन्हें सुन
कर पकी उम्र वालों को भी बचपन याद आ जाता है.

फिल्म बारूद में एक और बच्चा गीत है. इसमें जो छोटा
बच्चा है वो हैं हनी ईरानी. बच्चा स्मार्ट है और वो बड़ी
चीज़ों की ही मांग करता है. गर गीत में चौथा अंतरा
होता और उसमें पूछा जाता-गिलहरी लोगे या डायनोसार
वो डायनोसार का ही नाम लेता.

हसरत जयपुरी के बोल हैं और खय्याम का संगीत. इसे
लाता मंगेशकर ने गाया है और गाने में हनी ईरानी की
आवाज़ भी है.



गीत के बोल:

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

चंदा की गेंद तुझे ला दूंगी मुन्ना
ला दूंगी मुन्ना
बिजली का बल्ला मंगा दूंगी मुन्ना
मंगा दूंगी मुन्ना
मुन्ना मेरा ले ले लेगा
फिर तो घर में खेलेगा
फिर तो घर में खेलगा
गेंद लोगे या बल्ला
बल्ला
जुग जुग जियो मेरे लल्ला

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

बादल का हाथी हवाओं का घोड़ा
हवाओं का घोड़ा
बैठेगा मुन्ना लगायेगा कोड़ा
लगायेगा कोड़ा
हाथी फिर तो झूमेगा
देश देश में घूमेगा
देश देश में घूमेगा

घोड़ा लोगे या हाथी
हाथी
मैं मुन्ने की साथी

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
…………………………………………
Atkan batkan dahi chatokan-Barood 1960

Artists: Kumkum, Sheikh Mukhta, Honey Irani

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Jun 6, 2018

मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है-त्रिशूल १९७८

प्रस्तुत गीत में इतनी बार चीज़ शब्द आया है कि मुझे
चीज़ सेंडविच याद आने लग जाता है. ये गाना है फिल्म
त्रिशूल का तीन गायकों वाला बेहद लोकप्रिय गीत जिसे
किशोर कुमार, लता मंगेशकर और येसुदास ने गाया है.

गीत शशि कपूर, हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन पर
फिल्माया गया है. गीत में नोकझोंक है थोड़ी सी प्यार
मोहब्बत के ऊपर. अपनी अपनी दलीलें हैं इसमें. विशेष
बात यही है इस गीत की. अब दो लोग पैरवी करेंगे तो
जीत तो उन्हीं की होगी.

गीतकार हैं साहिर लुधियानवी और संगीतकार खय्याम.
बड़े बड़े बाग और कबड्डी के मैदान से भी बड़ी जगह में
आयोजन फिल्मों में देखने को मिलते थे, अब ये आम
बात हो चली है. हरियाली का कमसे कम ये फायदा है
कि आपको साफ़ हवा मिलती रहती है.




गीत के बोल:

हर तरफ हुस्न और जवानी है
आज की रात क्या सुहानी है
रेशमी जिस्म
रेशमी जिस्म थरथराते हैं
मरमरी होंठ गुनगुनाते हैं
धडकनों में सुरूर फैला है
रंग नज़दीक-ओ-दूर फैला है
दावत-ए-इश्क दे रही है फज़ा
आज हो जा किसी हसीं पे फ़िदा
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

मोहब्बत के दम से है दुनिया ये रौशन
मोहब्बत ना होती तो कुछ भी ना होता
नज़र और दिल की पनाहों की खातिर
ये जन्नत ना होती तो कुछ भी ना होता
ये ही एक आराम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

किताबों में छापते हैं चाहत के किस्से
हकीक़त की दुनिया में चाहत नहीं है
किताबों में छापते हैं चाहत के किस्से
हकीक़त की दुनिया में चाहत नहीं है
ज़माने के बाज़ार में ये वो शै है
के जिसकी किसी को ज़रूरत नहीं है
ये बेकार बेदाम सी चीज़ है
ये कुदरत के इनाम की चीज़ है
ये बस नाम ही नाम की चीज़ है
काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है

मोहब्बत से इतना खफा होने वाले
चल आ आज तुझको मोहब्बत सिखा दें
तेरा दिल जो बरसों से वीरां पड़ा है
किसी नाज़नीना को इसमें बसा दें
मेरा मशवरा काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
ये बेकार बेदाम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है काम की चीज़ है
…………………………………………………….
Mohabbat bade kaam ki cheez hai-Trishul 1978

Artists: Hema Malini, Shahsi Kapoor, Amitabh Bachchan, Rakhi

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Jun 3, 2018

तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने-त्रिशूल १९७८

पैसे वालों में नैतिक साहस कितना होता है ये एक
विचारणीय विषय रहा है हिंदी फिल्मों का. कई ऐसे
कथानक हैं जिनमें तिरस्कृत नायिका अपने औलाद
को संघर्षमय जीवन जीते जीते बड़ा करती है. अपने
खून पसीने से सींच के पौधे को बड़ा करती है और
जीवन की भट्टी के ताप में झुलस जाती है.

फिल्म त्रिशूल के इस गीत में भी एक पूरी कहानी
है जिसमें नायिका वहीदा रहमान संघर्षरत दिखाई
देती हैं. उनके पुत्र का रोल अमिताभ ने निभाया है.

गीत साहिर का है और इसे लता ने खय्याम की
धुन पर गाया है.



गीत के बोल:

तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने
ताकि तू जान सके
तुझको परवान चढाने के लिए
कितने संगीन मराहिल से तेरी माँ गुजरी
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने
ताकि तू देख सके
कितने पाँव मेरे ममता के कलेजे पे पड़े
कितने कह्न्जर मेरी आँखों में मेरे कानों में पड़े
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने

मैं तुझे रहम के साये में ना पलने दूँगी
जिंदगानी की कड़ी धूप में जलने दूँगी
ताकि तप तप के तू फौलाद बने
माँ की औलाद बने माँ की औलाद बने
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने

जब तलक होगा तेरा साथ निभाऊंगी मैं
फिर चली जाऊँगी उस पार सन्नाटों में
और तारों से तुझे झांकूंगी
ज़ख्म सीने में लिए खून निगाहों में लिए
तेरा कोई भी नहीं मेरे सिवा
मेरा कोई भी नहीं तेरे सिवा
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने
तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने

मेरा हर दर्द तुझे दिल में बसाना होगा
मैं तेरी माँ हूँ मेरा क़र्ज़ चुकाना होगा
मेरी बर्बादी के ज़ामिल अगर आबाद रहे
मैं तुझे दूध ना बख्शूंगी तुझे याद रहे
मैं तुझे दूध ना बख्शूंगी तुझे याद रहे
तुझे याद रहे तुझे याद रहे
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Too mere sath rahega munne-Trishul 1978

Artists: Waheeda Rehman, Amitabh Bachchan

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May 17, 2018

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के-मुकेश

मुकेश की गाई एक गैर फ़िल्मी रचना सुनते हैं जिसे
लिखा है जान निसार अख्तर ने. इसकी संगीत रचना
है खय्याम की.




गीत के बोल:

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं

अब ये भी नहीं ठीक के हर दर्द मिटा दें
अब ये भी नहीं ठीक के हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

आँखों में जो भर लोगे तो कांटों से चुभेंगें
आँखों में जो भर लोगे तो कांटों से चुभेंगें
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये हैं
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
मन्दिर में फ़कत दीप जलाने के लिये हैं
मन्दिर में फ़कत दीप जलाने के लिये हैं
अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
वरना तो बदन आग बुझाने के लिये है
वरना तो बदन आग बुझाने के लिये है

अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं
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Ashyar mere yun to zamane ke-Mukesh Non film song

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Mar 17, 2018

मैं ग्वालो रखवालो मैया-गैर फ़िल्मी गीत(रफ़ी)

मधुकर राजस्थानी की एक रचना सुनते हैं जिसका संगीत
तैयार किया है खय्याम ने.  इस गैर फ़िल्मी गीत को गाया
है रफ़ी ने.

ये एक कृष्ण भजन है जिसे पुराने गीतों के प्रेमियों ने ज़रूर
सुना होगा एक ना एक बार रेडियो पर.




गीत के बोल:

मैं ग्वालो रखवालो मैया
मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

कौन कमी माखन की अपने जो मैं परघर जाऊँ
राज में तेरे चाहे जितनो खाऊँ और खिलाऊँ
चोर न होवे लाल तिहारो काहे मन भरमायो
काहे मन भरमायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

तू मैया है स्नेह की ज्योति हुम सब तेरि किरणें
तेरे आँचल की छाया में बहते सुख की झरने
तेरे चरणों की धूली में मैय्या स्वर्ग समायो
मैय्या स्वर्ग समायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

बृज को माखन मेरो माखन नाही ये बरजोरी
ये अधिकार जनम को मेरो कौन कहे ये चोरी
वो मूरख अज्ञानी जिसने मोहे चोर बतायो
मोहे चोर बतायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो
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Main gwalo rakhwalo maiya-Non film song

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Feb 28, 2018

तेरा हिज्र मेरा नसीब है-रज़िया सुल्तान १९८३

भारी और रौबदार आवाजें हमने काफी सुनी हिंदी फिल्मों में, कभी
नायकों की तो कभी गायकों की. मोती आवाज़ वाले गायक ६० और
सत्तर के दशक में बहुत कम या नहीं के बराबर सुनाई दिए. १९८३
की फिल्म रज़िया सुल्तान में कब्बन मिर्ज़ा के गाये दो गीत हैं.
उनमें से एक आज सुन लेते हैं. इसे निदा फाजली ने लिखा है और
इसकी तर्ज़ बनाई खय्याम ने.




गीत के बोल:

तेरा हिज्र मेरा नसीब है
तेरा ग़म
तेरा ग़म ही मेरी हयात है
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों
तू कहीं भी हो मेरे साथ है
तू कहीं भी हो मेरे साथ है
तेरा हिज्र मेरा नसीब है

मेरे वास्ते तेरे नाम पर
मेरे वास्ते तेरे नाम पर
कोई हर्फ़ आए नहीं नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं
मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है
मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है
तेरा हिज्र मेरा नसीब है

तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबान
तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबान
मेरे दिल को हासिल है दो जहाँ
मेरी जान-ए-जां मेरी जान-ए-जां
मेरी जान-ए-जां इसी बात पर
मेरी जान जाए तो बात है
मेरी जान जाए तो बात है

तेरा हिज्र मेरा नसीब है
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Tera hijr mera naseeb hai-Razia Sultan 1983
 
Artists: Dharmendra, Hema Malini

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Feb 12, 2018

आ गईं फिर से बहारें-गैर फ़िल्मी गीत

तलत महमूद का गाया एक गैर फ़िल्मी गीत सुनते
हैं जिसे खावर ज़मां ने लिखा है. धुन खय्याम ने
तैयार की है. खय्याम ने काफी सारे गैर फ़िल्मी
गीतों को कम्पोज किया है.




गीत के बोल:

आ गईं फिर से बहारें आ गईं
आ गईं फिर से बहारें आ गईं
दिल पे ग़म की बदलियाँ सी छा गईं
आ गईं

हसरतों के बाग वीराँ हो गये
हसरतों के बाग वीराँ हो गये
हम तो दुनिया से परीशाँ हो गये
आप की यादें हमें तड़पा गईं
आ गईं

किस तरह दुनिया मेरी आबाद हो
किस तरह दुनिया मेरी आबाद हो
तुम न आये तुम बड़े जल्लाद हो
दिल की कलियाँ खुद-ब-खुद मुरझा गईं
दिल की कलियाँ खुद-ब-खुद मुरझा गईं

आ गईं फिर से बहारें आ गईं
आ गईं
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Aa gayi fir se baharen-Talat Non film song

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Jan 22, 2018

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की-शंकर हुसैन १९७७

इस गीत में एक जगह पर जिक्र है-दांतों तले ऊँगली दबाने का.
इस गीत को सुन कर ही दांतों तले उँगलियाँ दबाने की इच्छा
होती है. ये कमाल अमरोही का लिखा हुआ गीत है. संगीत
खय्याम का है और इसे रफ़ी ने गाया है.

कमाल अमरोही के नाम ज्यादा गीत नहीं हैं फिल्म संगीत के
खजाने में अतः उनका ये गीत किसी प्रोफेशनल गीतकार की
स्टाइल में लिखा होना सोचने पर मजबूर अवश्य करता है कि
ये क्या वाकई उन्होंने लिखा है या फिर उन्होंने ज्यादा गीत
क्यूँ नहीं लिखे फिल्मों के लिए.



गीत के बोल:

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की
बहुत खूबसूरत
बहुत खूबसूरत मगर सांवली सी
बहुत खूबसूरत

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

मुझे अपने ख़्वाबों की बाहों में पा कर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा कसमसा कर
सरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख़्वाब दिन की मुंडेरों पे आ के
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साज़ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेसाख्ता धीमे-धीमे सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की


चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियां कँपकँपाती तो होंगी
कलम हाथ से छूट जाता तो होगा
उमंगें कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिख कर
वो दांतों में उँगली दबाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

ज़बान से अगर उफ़ निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पांव पड़ते तो होंगे
 ज़मीन पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लुड़की


हर  एक चीज हाथों से गिरती तो होगी
तबियत पे हर काम खलता तो होगा
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Kahin ek masoom nazuk si ladki-Shankar Hussain 1977

Artist: Kanwaljeet

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Dec 4, 2017

ये मुलाक़ात इक बहाना है-खानदान १९७९

कुछ गीत कालजई कहलाते हैं जैसे कि फिल्म खानदान का ये
गीत जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. इसके बोल और संगीत
दोनों लाजवाब हैं.

बोल नक्श लायलपुरी के हैं और संगीत खय्याम का. गीत में
नायक जीतेंद्र और फिल्म कि दो नायिकाएं-सुलक्षणा पंडित और
बिंदिया गोस्वामी दिखलाई दे रहे हैं.




गीत के बोल:

ये मुलाक़ात एक बहाना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

धड़कने धड़कनों में खो जायें
धड़कने धड़कनों में खो जायें
दिल को दिल के क़रीब लाना है
दिल को दिल के क़रीब लाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

मैं हूँ अपने सनम के बाहों में
मैं हूँ अपने सनम के बाहों में
मेरे क़दमों तले ज़माना है
मेरे क़दमों तले ज़माना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

ख़्वाब तो काँच से भी नाज़ुक है
ख़्वाब तो काँच से भी नाज़ुक है
टूटने से इन्हें बचाना है
टूटने से इन्हें बचाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

मन मेरा प्यार का शिवाला है
मन मेरा प्यार का शिवाला है
आप को देवता बनाना है
आप को देवता बनाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है
……………………………………………………..
Ye mulaqat ek bahana hai-Khandan 1979

Artists: Bindiya Goswami, Jeetendra, Sulakshana Pandit

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Oct 6, 2017

आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम-फिर सुबह होगी १९५८

व्यावसायिक चाशनी में लिपटे लटकऊ झटकऊ फ़िल्मी
आदर्शवाद को समझने में कभी कभी थोडा वक्त लग जाता
है. हाँ, स्क्रिप्ट के पेंचों में अटके साहिर के गीतों को
समझने में ज़रा भी वक्त नहीं लगता. फिल्म कैसी भी
रही हो उन्होंने गीतों में अपने पञ्च ज़रूर मारे हैं. ये
गीत आखिरी अंतरे में कुछ इस मोड में है-हमें क्या लेना
देना.

मुकेश के गाये सार्थक गीतों में से एक जिसकी धुन बनाई
है खय्याम ने, राज कपूर पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम

आजकल किसी को वो टोकता नहीं,
चाहे कुछ भी कीजिये ये रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहे हैं बम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम

किसको भेजे वो यहाँ हाथ थामने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम

जो भी है वो ठीक है ज़िक्र क्यों करें
हम ही सब जहाँ की फ़िक्र क्यों करें
जो भी है वो ठीक है ज़िक्र क्यों करें
हम ही सब जहाँ की फ़िक्र क्यों करें
जब उसे ही ग़म नहीं तो क्यों हमें हो ग़म
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
आजकल वो इस तरफ़ देखता है कम
आसमाँ पे है खुदा और ज़मीं पे हम
……………………………………………………..
Aasman pe hai khuda-Phir subah hogi 1958

Artist: Raj Kapoor

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