नहीं ये हो नहीं सकता-बरसात १९९५
ना आये. वैसे ही इश्क मोहब्बत करने के बाद किसी की याद
न आये ये कैसे संभव है?
आइये सुनें फिल्म बरसात से एक मधुर और लोकप्रिय गीत जो
अपने समय का बड़ा हिट गीत है. सन १९९५ की बरसात फिल्म
में नदीम श्रवण का संगीत है. १९४९ के बाद बरसात १९९५ में आई.
इसी नाम से १० साल बाद भी एक बरसात आई थी. अभी हाल
फिलहाल इसी बरसात की बात करते हैं.
गीत समीर का लिखा हुआ है और इसे कुमार सानू ने गाया है.
गीत में जनाना स्वर साधना सरगम का है. गीत हमने देखा है
इसका सबूत ये है कि इसमें नायक ने पीले रंग की टी शर्ट पहन
रखी है.
गीत के बोल:
नहीं ये हो नहीं सकता
के तेरी याद ना आये
बिना तेरे कहीं भी दिल मेरे
अब चैन ना पाये
तुझे भूलने से पहले
मेरी जान चली जाये
नहीं ये हो नहीं सकता
अगर मुझपे यकीन ना हो
मुझे तुम आज़मा लेना
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
जहाँ चाहे बुला लेना
तोडूंगा ना ये वादे वफा
मैं आशिक़ हूँ, दीवाना हूँ
कोई क्या मुझको समझाये
नहीं ये हो नहीं सकता
मोहब्बत की हदों से हम
चलो आगे निकल जायें
बसा लें घर दिलों में हम
ना दुनिया को नज़र आयें
चुपके सुनें धडकनों की सदा
मेरी दीवानगी दिलबर
तेरे सर की कसम खाये
नहीं ये हो नहीं सकता
के तेरी याद ना आये
बिना तेरे कहीं भी दिल मेरे
अब चैन ना पाये
तुझे भूलने से पहले
मेरी जान चली जाये
नहीं ये हो नहीं सकता
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Nahin ye ho nahin sakta-Barsaat 1995

1 comments:
हम तो भारी वाला ही खाते हैं जी, दिल्ली दिलवालों की
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