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Jan 31, 2020

बरसात में हमसे मिले-बरसात १९४९

शंकर जयकिशन की फिल्म संगीत क्षेत्र में आगमन के साथ
ही नए युग का शुभारंभ हुआ जिसमें मधुरता के साथ थोड़ी
गति भी थी जो समय के हिसाब से ज़रूरी भी थी. ३० के
दशक की गीतों की गति ४० के दशक तक बरकरार रही और
उसमें थोडा बहुत फेर बदल अनिल बिश्वास, खेमचंद प्रकाश,
सी. रामचंद्र और नौशाद ने किया मगर आमूल चूल परिवर्तन
इस जोड़ी के आगमन के बाद ही हुआ.

सुनते हैं सन १९४९ की चर्चित फिल्म बरसात से शीर्षक गीत
जिसे शैलेन्द्र ने लिखा है. लता मंगेशकर और समूह ने इसे
गाया है. शंकर जयकिशन की अनेक खूबियों में से एक उनकी
फिल्मों के शीर्षक गीत भी हैं जो बेहद लोकप्रिय हैं.

गीत में मिलन और बिछुडन के भाव एक साथ हैं. दूसरे अंतरे
में तक धिना धिन बंद हो जाती है. कोरस गाने वाले दिखना
बंद हो जाते हैं और फिर दोनों नायक और उनकी गाडी भी
ओझल हो जाती है, रह जाता है धूल का गुबार और नायिका
की हाय.




गीत के बोल:


तक धिना धिन धिना धिन
तक धिना धिन
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

नैनों से झाँके जी मस्त जवानी
मेरी मस्त जवानी
कहती फिरे दुनिया से दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
उनकी जो मैं उनसे कैसी शरम
उनकी जो मैं उनसे कैसी शरम
कैसी शरम
बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

प्रीत ने सिंगार किया मैं बनी दुल्हन
मैं बनी दुल्हन
सपनों की रिमझिम में नाच उठा मन
मेरा नाच उठा मन
आज मैं तुम्हारी हुई तुम मेरे सनम
आज मैं तुम्हारी हुई तुम मेरे सनम
तुम मेरे सनम

बरसात में
तक धिना धिन
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में
तक धिना धिन

ये समाँ है जा रहे हो कैसे मनाऊँ
कैसे मनाऊँ
ये समाँ है जा रहे हो कैसे मनाऊँ
कैसे मनाऊँ
मैं तुम्हारी राह में ये नैन बिछाऊँ
नैन बिछाऊँ
जो ना आओ तुमको मेरी जान की क़सम
जान की क़सम
बरसात में
बरसात में हमसे मिले तुम सजन तुमसे मिले हम
बरसात में

देर ना करना कहीं ये आस टूट जाये
साँस छूट जाये
देर ना करना कहीं ये आस टूट जाये
साँस छूट जाये
तुम ना आओ दिल की लगी मुझको ही जलाये
ख़ाक में मिलाये
आग की लपटों में पुकारे ये मेरा ग़म
मिल ना सके हाय मिल ना सके हम
मिल ना सके हाय मिल ना सके हम
………………………………………………………
Barsaat mein hamse mile tum sajan-Barsaat 1949 

Artist: Nimmi, Raj Kapoor, Premnath

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Oct 14, 2019

जिया बेक़रार है-बरसात १९४९

हसरत जयपुरी  के सबसे पहले लिखे हुए गीतों में हैं बरसात का
ये गीत जो आज आप सुनेंगे. ये उनका पहला गीत है जो रिकॉर्ड
किया गया. टीमवर्क के फायदे और करिश्मे क्या होते हैं वो
आप शैलेन्द्र, हसरत, शंकर और जयकिशन की टीम के कार्य से
समझें. इस टीम ने करिश्माई संगीत रचा जो आज की नयी पीढ़ी
को भी लुभाता है.

इकबाल हुसैन उनका मूल नाम है और उन्होंने जयपुर से बम्बई
आने के बाद दस साल बस कंडक्टरी करी. उसके बाद उन्हें मौका
मिला फिल्मों में लिखने का. क्या उनका ये दस साल का अनुभव
जिम्मेदार है उनके रोमांटिक गीतों में चुम्बकीय प्रभाव के लिए?

६० के दशक में संगीतकार जोड़ी के बीच अलगाव और सन १९६६
में शुरू हुए बिखराव-बिछुडन के बाद उनके काम में वो बात नहीं
बची और उनके हिस्से के काम में दूसरे लोगों ने सेंधमारी करना
शुरू कर दिया और सन १९७३ के बाद उनकी फ़िल्में कम होती
चलीं. हालांकि उन्होंने बीस साल राज़ किया हिंदी फिल्म संगीत
जगत में जो कि बड़ी उपलब्धि है. इतने समय तक इसके पहले
के संगीतकार और उनकी जोडियाँ नहीं टिक पाईं.



गीत के बोल:

जिया बेक़रार है छाई बहार है
आ जा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
जिया बेक़रार है छाई बहार है
आ जा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
ओ ओ ओ सूरज देखे चँदा देखे सब देखें हम तरसे हो
सब देखें हम तरसे
ओ ओ ओ सूरज देखे चँदा देखे सब देखें हम तरसे हो
सब देखें हम तरसे
जैसे बरसे कोई बदरिया वैसे अँखियाँ बरसे
जैसे बरसे कोई बदरिया वैसे अँखियाँ बरसे
वैसे अँखियाँ बरसे
जिया बेक़रार है छाई बहार है
आजा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
जिया बेक़रार है

ओ ओ ओ नैनों से एक तारा टूटे मिट्टी में मिल जाए हो
मिट्टी में मिल जाए
ओ ओ ओ नैनों से एक तारा टूटे मिट्टी में मिल जाए हो
मिट्टी में मिल जाए
आँसू की बरसात बलमवा दिल में आग लगाए
आँसू की बरसात बलमवा दिल में आग लगाए
दिल में आग लगाए

जिया बेक़रार है छाई बहार है
आ जा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
जिया बेक़रार है

ओ ओ ओ तुझको नज़रें ढूँढ रही हैं मुखड़ा तो दिखला जा हो
मुखड़ा तो दिखला जा
ओ ओ ओ तुझको नज़रें ढूँढ रही हैं मुखड़ा तो दिखला जा हो
मुखड़ा तो दिखला जा
रस्ते पर हूँ आस लगाए आने वाले आ जा
रस्ते पर हूँ आस लगाए आने वाले आ जा
आने वाले आ जा

जिया बेक़रार है छाई बहार है
आ जा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
जिया बेक़रार है छाई बहार है
आ जा मोरे बलमा तेरा इन्तज़ार है
जिया बेक़रार है
..........................................................
Jiya beqaraar hai-Barsaat 1949

Artist: Nimmi

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Oct 15, 2018

मैं ज़िंदगी में हरदम-बरसात १९४९

बरसात फिल्म में एक दर्द भरा गीत मुकेश की आवाज़ में
है तो दूजा रफ़ी की आवाज़ में है.

फिल्म में इमोशंस की बरसात है, सिनेमा संगीत के ट्रेंड चेंज
का बिगुल है, मौसमी बरसात है और तो और गानों की बरसात
भी है.

जिन दोनों दर्द भरे गीतों की बात हो रही है ऊपर दोनों ही
हसरत जयपुरी ने लिखे हैं. फिल्म में अधिकाँश गीत उनके
ही हैं. पतली कमर, तिरछी नज़र वाला दोरंगा गीत शैलेन्द्र
ने लिखा है. दो तरह के इमोशंस वाला ये गीत काफी अनूठा
था उस समय के हिसाब से.

सुनते हैं रफ़ी की आवाज़ में ये गीत. गीत में धुआं उठ रहा
है. ये लकडियों के जलने का धुआं है या दिल से उठने वाला?


गीत के बोल:

मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
रोता ही रहा हूँ तड़पता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ

उम्मीद के दिये बुझे दिल में है अंधेरा
जीवन का तो साथी न बना कोई भी मेरा
जीवन का तो साथी न बना कोई भी मेरा
फिर किस के लिये
फिर किस के लिये आज मैं जीता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ

रह रह के हँसा है मेरी हालत पे ज़माना
रह रह के हँसा है मेरी हालत पे ज़माना
क्या दुःख है मुझे ये तो किसी ने भी न जाना
क्या दुःख है मुझे ये तो किसी ने भी न जाना
ख़ामोश
ख़ामोश मोहब्बत लिये फिरता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
आई न मुझे रास मोहब्बत की फिज़ायें

आई न मुझे रास मोहब्बत की फिज़ायें
आई न मुझे रास मोहब्बत की फिज़ायें
शरमाई मेरी आँख से सावन की घटायें
लहरों में सदा
लहरों में सदा ग़म की मैं बहता ही रहा हूँ

मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
रोता ही रहा हूँ तड़पता ही रहा हूँ
मैं ज़िंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ
………………………………………………………
Main zindagi mein hardam-Barsaat 1949

Artists: Raj Kapoor, Nargis

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Oct 10, 2018

प्रेम नगर में बसने वालों-बरसात १९४९

फिल्म बरसात में छोटा सा गीत भी है. दर्द से
लबालब. इसे लिखा है रोमांटिक गानों के राजा
हसरत ने. लाता मंगेशकर का ये गीत ४० के
दशक को ट्रिब्यूट जैसा है.

मासूम सी नायिका अपने टूटे दिल से पुकार
रही है और आगाह कर रही है प्यार करने
वालों को जो प्यार में मदमस्त हैं और कुछ
पीछे छोड़ आने के बाद नया पाने की खुशी
मना रहे हैं.



गीत के बोल:

प्रेम नगर में बसने वालों
अपनी जीत पे हँसने वालों
प्रीत हँसाये प्रीत रुलाये
प्रीत मिलाये प्रीत ही साथ छुड़ाये

हँसमुख फूलो ये मत भूलो
हँसमुख फूलो ये मत भूलो
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………
Prem nagar mein basen walon-Barsaat 1949

Artists: Nimmi, Nargis, Raj Kapoor

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Feb 28, 2017

छोड़ गए बालम-बरसात १९४९

सन १९४९ की फिल्म बरसात ने एक नए ट्रेंड की शुरुआत की
जिसने बहुतों के समीकरण बदल दिए. कई गायक और गायिकाओं
के भाग्य में परिवर्तन आया इस फिल्म के संगीत रिलीज़ के बाद
और इसके संगीत के प्रभाव के कारण. वो सब बातें विस्तार से
आप जगह जगह पढ़ चुके हैं, इसलिए उन्हें रिपीट करना  ऐसा
लगेगा जैसे समोसे और कचौड़ी तोड़ तोड़ के और बासी पोहे मिला
के भजिये बना लिए हों.

उसके अलावा मुझसे वो कहानियां नहीं लिखी जातीं जैसी मैं दूसरी
जगह पढता हूँ-मॉम ने मार्मलेड खाया और पॉप ने पॉपकॉर्न. वो
नदी किनारे मछली पकड़ने गया तो घोडा दिख गया. घोडा स्मार्ट
था और क्लीन शेव्ड भी. घोडा दिखा तो उसे एक घोड़े जैसा हीरो
याद आया. समुद्र की लहरों में घोडा उछल रहा था जैसे हीरो फिल्म
में उछलता है. घोड़े ने नायिका की कमर के अंदाज़ में कमर हिलाई.
ये कैसे हुआ, क्या घोड़े ने डांस डायरेक्टर से बाकायदा ट्रेनिंग ली
कमर हिलाने की, या घोड़े को जिमनास्टिक्स आता था.  या फिर
समुद्र के पानी में नमक कम था इसलिए पानी की डेंसिटी कम हो
गई इस वजह से घोड़े के लिए कूदना फांदना आसान हो गया होगा. 
समुद्र का पानी अगर डेड सी की तरह होता तो घोडा उस पर बैठ
भी सकता था या कोई क्लासिकल डांस भी कर सकता था मगर ऐसा
हुआ नहीं. जैसे दिल आखिर दिल है वैसे ही घोडा आखिर घोडा है.

बकवास की बरसात काफी हो चुकी अब गीत सुनते हैं जिसे लता
और मुकेश ने गाया है. हसरत जयपुरी के बोल हैं और संगीत दिया
शंकर जयकिशन का. गीत के फिल्म वर्ज़न में मिठास ज्यादा है.



गीत के बोल:

छोड़ गए बालम
छोड़ गए बालम  मुझे हाय अकेला छोड़ गए
तोड़ गए बालम
तोड़ गए बालम  मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए
छूट गया बालम
छूट गया बालम  हाय साथ हमारा छूट गया
टूट गया बालम
टूट गया बालम  मेरा प्यार भरा दिल टूट गया

फूल संग मुस्काए कलियाँ  मैं कैसे मुस्काऊं
फूल संग मुस्काए कलियाँ  मैं कैसे मुस्काऊं
बादल देख के भर आई अँखियाँ
बादल देख के भर आई अँखियाँ  छम-छम नीर बहाऊं
मैं छम-छम नीर बहाऊं
छूट गया बालम
छूट गया बालम  हाय साथ हमारा छूट गया
टूट गया बालम
टूट गया बालम  मेरा प्यार भरा दिल टूट गया

दिल की लगी को क्या कोई जाने
दिल की लगी को क्या कोई जाने  मैं जानूं दिल जाने
पलकों की छाया में नाचे 
पलकों की छाया में नाचे  दर्द भरे अफसाने
हाय दर्द भरे अफसाने
छोड़ गए बालम  हो ओ ओ
छोड़ गए बालम  मुझे हाय अकेला छोड़ गए
तोड़ गए बालम
तोड़ गए बालम  मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए

पहले मन में आग लगी और फिर बरसी बरसात
पहले मन में आग लगी और फिर बरसी बरसात
ऐसी चली बिरहा की आंधी
ऐसी चली बिरहा की आंधी  तडपत हूँ दिन-रात
हाय मैं तडपत हूँ दिन-रात
छूट गया बालम
छूट गया बालम  हाय साथ हमारा छूट गया
छोड़ गए बालम
छोड़ गए बालम  मुझे हाय अकेला छोड़ गए
.............................................................................
Chhod gaye balam-Barsaat 1949

Artists: Raj Kapoor, Nargis

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Jan 16, 2017

हवा में उड़ता जाये-बरसात १९४९

सन १९४९ की फिल्म बरसात ने फिल्म संगीत का रुख मोड दिया
पूरी तरह से और एक नए युग का सूत्रपात हुआ इस फिल्म की
रिलीज़ के बाद. सन १९५० से १९७० तक के दौर को सुनहरा
दौर कहा जाता है. ज्यादा बारीक कान वाले ५०-६० के दशक को
सबसे अच्छा समय मानते हैं हिंदी फिल्म संगीत का.

अगर सयानों की बात सुनें तो हमारी फिल्मों ने सबसे पहले बोलना
शुरू किया, बातचीत जैसे गाने आये, फिर आया रोतला युग जिसमें
रोतले से गाने सुनाई दिए फिर आया बरसात के बाद का दौर. उस
बरसात में काफी सारे आंसू बह गए. इन्हीं सयानों के हिसाब से ७०
से २००० का दौर शोरगुल वाला युग और उसके बाद का चीखने वाला
युग है. लो साहब हो गया ३ लाइन में हिंदी फिल्म संगीत का
इतिहास.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं रमेश शास्त्री का लिखा हुआ और लता
का गाया हुआ.



गीत के बोल:

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी

हो ओ ओ ओ ओ ओ
सर सर सर सर हवा चले
हाय जियरा डगमग डोले
जियरा डगमग डोले
ओ सर सर सर सर हवा चले
हाय जियरा डगमग डोले
जियरा डगमग डोले
फर फर फर फर उड़े चुनरिया
घूँघट मोरा खोले
हाय घूँघट मोरा खोले

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी

झर झर झर झर झरना बहता
ठण्डा ठण्डा पानी
ठण्डा ठण्डा पानी
झर झर झर झर झरना बहता
ठण्डा ठण्डा पानी
ठण्डा ठण्डा पानी
घूँघरू बाजे छुनक छुन्नक छुन्नक
चाल हुई मस्तानी
हाय चाल हुई मस्तानी

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
..............................................
Hawa mein udta jaaye-Barsaat 1949

Artist: Bimla Kumari

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Jun 2, 2016

तेरी अदाओं पे मरता हूँ-बरसात १९९५

बिना विवरण वाला अगला गीत प्रस्तुत है फिल्म बरसात
से. बिना विवरण वाली पोस्ट कितनी साफ़ सुथरी दिखाई
देती हैं. कोई कंफ्यूज़न नहीं, बस बोल पढ़ो और गाने देखो.
गाना  जिंदा भी तो होना चाहिए यूट्यूब पर.

फिल्म: बरसात
वर्ष: १९९५
गायक-कुमार सानू, अलका याग्निक
गीत:समीर
संगीत:  नदीम श्रवण




गीत के बोल:

अगर कोई मुझसे ये पूछे
क्या?
मैं क्यूँ बेचैन रहता हूँ
क्यूँ?
मेरी इस बेक़रारी की वजह क्या है
बता दूं क्या
क्या?

तेरी अदाओं पे मरता हूँ
लव तुझे लव मैं करता हूँ
तुझसे बिछड़ने से डरती हूँ
लव तुझे लव मैं करती हूँ

ज़रा पास आ मुझे कुछ कहना है
दूर नहीं एक पल रहना है
देखो मेरे इतने करीब ना आओ
डर लगता है न हाथ लगाओ
मैं हूँ तेरा तू है मेरी, मुझसे भी क्या डरना
छोडो तुम ज़िद करना, ज़िद करना
तुझे देख के आहें भरता हूँ
लव तुझे लव मैं करता हूँ

जब मुझे छोड़ के तू जाता है
सच कहती हूँ रोना आता है
इश्क़ में अक्सर ये होता है
प्यार जो करता है रोता है
चाहत के सारे गम सह लूंगी,
छोडूंगी दुनिया को
तेरे दिल में रह लूंगी रह लूंगी
तेरे लिये सजती संवरती हूँ
लव तुझे लव मैं करती हूँ
………………………………………………………………..
Teri adaon pe marta hoon.Barsaat 1995

Artists-Bobby Deol, Twinkle Khanna

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May 5, 2016

नहीं ये हो नहीं सकता-बरसात १९९५

ये हो ही नहीं सकता कि कोइ भारी खाना खाए और उसे नींद
ना आये. वैसे ही इश्क मोहब्बत करने के बाद किसी की याद
न आये ये कैसे संभव है?

आइये सुनें फिल्म बरसात से एक मधुर और लोकप्रिय गीत जो
अपने समय का बड़ा हिट गीत है. सन १९९५ की बरसात फिल्म
में नदीम श्रवण का संगीत है. १९४९ के बाद बरसात १९९५ में आई.
इसी नाम से १० साल बाद भी एक बरसात आई थी. अभी हाल
फिलहाल इसी बरसात की बात करते हैं.

गीत समीर का लिखा हुआ है और इसे कुमार सानू ने गाया है.
गीत में जनाना स्वर साधना सरगम का है. गीत हमने देखा है
इसका सबूत ये है कि इसमें नायक ने पीले रंग की टी शर्ट पहन
रखी है.



गीत के बोल:

नहीं ये हो नहीं सकता
के तेरी याद ना आये
बिना तेरे कहीं भी दिल मेरे
अब चैन ना पाये
तुझे भूलने से पहले
मेरी जान चली जाये
नहीं ये हो नहीं सकता

अगर मुझपे यकीन ना हो
मुझे तुम आज़मा लेना
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
जहाँ चाहे बुला लेना
तोडूंगा ना ये वादे वफा
मैं आशिक़ हूँ, दीवाना हूँ
कोई क्या मुझको समझाये
नहीं ये हो नहीं सकता

मोहब्बत की हदों से हम
चलो आगे निकल जायें
बसा लें घर दिलों में हम
ना दुनिया को नज़र आयें
चुपके सुनें धडकनों की सदा
मेरी दीवानगी दिलबर
तेरे सर की कसम खाये

नहीं ये हो नहीं सकता
के तेरी याद ना आये
बिना तेरे कहीं भी दिल मेरे
अब चैन ना पाये
तुझे भूलने से पहले
मेरी जान चली जाये
नहीं ये हो नहीं सकता
.....................................................................................
Nahin ye ho nahin sakta-Barsaat 1995

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Aug 17, 2015

हमको सिर्फ तुमसे प्यार है-बरसात १९९५

कवि कह रहा है-हमको ‘सिर्फ तुमसे’ प्यार है. मतलब है तुम्हारे
मोहल्ले से, तुम्हारी सखियों इत्यादि से हमें कोई लगाव नहीं है.
या तो इसका भावार्थ ऐसा ही है या - हमको सिर्फ ‘तुमसे प्यार
है’ और दूसरा कोई सरोकार नहीं ऐसा कुछ भी हो सकता है.
तुम्हारी प्रोपर्टी, बैंक बैलंस, पोमेरियन डॉगी से हमें कोई सरोकार
नहीं है. 

कभी कभी किसी गीत से मतलब निकालना या समझना टेड़ी खीर
या आड़ा हलवा साबित होता है. वैसे आपको बतला दिया जाए कि
ये गीत कुमार सानू के सबसे ज्यादा हिट हुए गीतों में से एक है.
सन १९९५ की फिल्म है, समीर का गीत है और नदीम श्रवण का
संगीत है. युगल गीत है ये इलसिए पहली पंक्ति की संभावना इसमें
दोनों पक्षों पर लागू हो सकती है. गायिका हैं अलका याग्निक.





गीत के बोल:

हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
कह रही है दिल की बेखुदी
बस तुम्हारा इंतज़ार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है

ढूंढते हैं हम तुमको दर-ब-दर
जाने कब कहाँ मिलोगे हमसे हमसफ़र
कैसी दूरियां, कैसा फ़ासला
हम यहाँ पे आए सुन के प्यार की सदा
अब ना तुमसे दूर होंगे हम
तुमपे दिल क्या जां निसार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है

जागते रहे हम तो रात भर
एक लम्हां एक पल भी सोई ना नज़र
तुम निगाह में, तुम ख्याल में
हाल है बुरा हमारा ऐसे हाल में
यूं तो हमपे ना करो सितम
हमको तुमपे ऐतबार है
कह रही है दिल की बेखुदी
बस तुम्हारा इंतज़ार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
हमको सिर्फ़ तुमसे प्यार है
......................................................................
Hamko sirf  tumse pyar hai-Barsaat 1995

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Jul 15, 2015

दिल पागल दीवाना है-बरसात १९९५

दिल पागल या दिल दीवाना अथवा दोनों के कोम्बिनेशन
वाले गीत फिल्म मैंने प्यार किया के बाद खूब आये ९०
के दशक में. इन सब में निस्संदेह सबसे ज्यादा जो गीत
बजे वे हैं- दिल दीवाना-मैंने प्यार किया और “दिल तो
पागल है”-फिल्म का शीर्षक गीत. फिल्म बरसात का गीत
दोनों गीतों के बीच के अंतराल का है, ये सन १९९५ में
प्रकट हुआ.

इसका मतलब ये नहीं है कि इन फिल्मों के पहले के प्रेमी
पागल या दीवाने नहीं होते थे. आपको ऐसी कई बानगियाँ
मिल जाएँगी हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में. बहरहाल
प्यार में क्या क्या होता है लगभग हर चीज़ का जिक्र इस
गीत में किया गया है. हिंदी फिल्मों के वीडियो देखने से
ज्यादा आनंद कभी कभी गीतों के वीडियो देखने में आता
है.

गीत बॉबी देवल पर फिल्माया गया है और इस फिल्म की
नायिका हैं ट्विंकल खन्ना. समीर के बोल हैं, नदीम श्रवण
का संगीत है और इसे कुमार सानू ने गाया है.




गीत के बोल:

दिल पागल दीवाना है ये प्यार करेगा
ये कब डरा है दुनिया से जो अब डरेगा
ये प्यार में धड़का है, ये प्यार से धड़केगा
ये कब डरा है दुनिया से जो अब डरेगा

दिल तख्त-ओ-ताज की परवाह नहीं करता
रस्म-ओ-रिवाज की परवाह नहीं करता
दौलत से खरीदोगे तो इंकार करेगा
ये कब डरा है दुनिया से जो अब डरेगा

फ़लक रोके, ज़मीं रोके, मगर हम रुक न पाएंगे
दीवारें तोड़ के सारी हम तुमसे मिलने आएंगे

मोहब्बत झुक नहीं सकती ज़माने के झुकाने से
मोहब्बत मिट नहीं सकती ज़माने के मिटाने से

कहता नहीं है दिल कर के दिखाएगा
तूफ़ान में चाहत की शमा जलाएगा
ये जुर्म-ए-वफ़ा दिल तो सौ बार करेगा
ये कब डरा है दुनिया से जो अब डरेगा

दिल पागल दीवाना है ये प्यार करेगा
ये कब डरा है दुनिया से जो अब डरेगा
.....................................................................................
Dil pagal deewana hai-Barsaat 1995

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Aug 3, 2011

बिछड़े हुए परदेसी-बरसात १९४९

परदेसी हिट्स में सबसे पुराना हिट गीत कह सकती है आज की पीढ़ी
इसे। वैसे इससे पहले भी हिंदी फिल्मों में परदेसी गीत(जिनमें परदेसी
शब्द का प्रयोग हुआ है) बने हैं। इस गीत ने सफलता के नए कीर्तिमान
रचे। लता मंगेशकर की आवाज़ है, नर्गिस का अभिनय है, हसरत जयपुरी
के बोल और शंकर जयकिशन का संगीत है।




गीत के बोल:

बिछड़े हुए परदेसी
बिछड़े हुए परदेसी इक बार तो आना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू
बिछड़े हुए परदेसी

वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादे भी किए तूने खाई थी क़सम मेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
वादों पे ही जीती हूँ है आस मुझे तेरी
इतनी है अरज मेरी
इतनी है अरज मेरी मुझको न भुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
दुनिया मुझे छीने है सबने मुझे घेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
और मेरी ज़ुबाँ पर तो बस नाम ही तेरा है
दुनिया न हँसे मुझ पर
दुनिया न हँसे मुझ परइतना न रुलाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी

गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
गैरों का न हो जाना जब अपना बनाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
पास आ के न खो जाना जब दिल में बसाया है
जो बात कही तूने
जो बात कही तूने वो बात निभाना तू
जब आँख मिलाई है नज़रें न चुराना तू

बिछड़े हुए परदेसी
........................................
Bichhde hue pardesi-Barsaat 1949

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Jul 1, 2011

अब मेरा कौन सहारा-बरसात १९४९

नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी की ये तीसरी फिल्म थी। इसमें
राज कपूर के साले साहब-प्रेमनाथ भी हैं उनके साथ। बरसात
फिल्म ने फिल्म सिनेमा को नए समीकरण दिखाए तो कुछ
समीकरण बदले भी। बदलते युगों के युग्म पर कुछ घटनाएँ
होती हैं कुछ वैसी ही यह फिल्म है जिसे हम ५० के दशक में
हिंदी सिनेमा में होने वाले बदलाव का बिगुल जैसा कह सकते हैं।
ऐसी उस दौर की कुछ और प्रतिनिधि फ़िल्में भी हैं जिनपर चर्चा
आगे उन फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति के समय हम करेंगे ।

फ़िल्म बरसात से तीसरा गीत पेश है। नर्गिस के ऊपर फिल्माया
गया अधिक कर्णप्रिय गीत सन १९४९ से सुनने वालों को आनंद दे
रहा है। एक दर्द भरा गीत जिसका फिल्मांकन भी बढ़िया है आपको
अंत तक बांधे रखेगा । ऐसे गीतों में किसी रंग की आवश्यकता नहीं
होती, ये तो श्वेत श्याम में भी ऐसा कमाल दिखाते हैं कि देखने वाला
भूल जाता है कि वो श्वेत श्याम फिल्म देख रहा है या रंगीन।

हुस्नलाल भगतराम के संगीत की जो ध्वनियाँ हैं वैसी ही साजों की
आवाजें इस गीत में भी हैं मगर थोड़ी तेज़ गति में ।



गीत के बोल:

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
मेरे बलम
मेरे बलम मुझको ना भुलाना
अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
तुझसे बिछड़ कर दूर हुई
मिलने से मजबूर हुई
रो-रो के दिल ने तुझको पुकारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

तुझसे मिलन की आस लगी
नैना रस की प्यास लगी
नैना रस्ते
मुझको है तेरा गम भी न्यारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा

पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
पंख लगे उड़ जाऊं मैं
लेकिन कैसे आऊँ मैं
बेबस हुयी किस्मत ने मारा

अब मेरा कौन सहारा
अब मेरा कौन सहारा
..............................
Ab mera kaun sahara-Barsaat 1949

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Dec 4, 2010

मेरी आँखों में बस गया कोई रे-बरसात १९४९

पहाड़ी पर ही घूमा जाए थोड़ी देर। फिल्म बरसात में बहुत
सी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। अगला गीत जो आपको सुनवाया
जा रहा है वो भी राग पहाड़ी पर आधारित है. इस गीत को भी
लता मंगेशकर ने गाया है। शंकर जयकिशन की बतौर स्वतंत्र
संगीत निर्देशक पहली फिल्म में मधुर गीतों की ओवरलोडिंग
थी। ऐसा लगा मानो बहुत दिन से वे ढेर सारे मधुर गीत सुनाने
के लिए बेताब थे। सारी कसर उन्होंने फिल्म बरसात में निकाल
ली। उन दिनों वैसे भी एक फिल्म में ढेर सारे गीत हुआ करते थे,
इसलिए सब चल गया और ऐसा चला कि आज तक पब्लिक उसके
जादू से मुक्त नहीं हुई है। बरसात ने संगीत-वाणिज्य के क्षेत्र में धन
की बहुत अच्छी बरसात की। गीत का फिल्मांकन आला दर्जे का है
और चकित करने वाला है। गीत में आपको विलंबित और द्रुत दोनों
गत का आनंद मिलेगा।



गीत के बोल:

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई

मुस्काये जब रात की बिंदिया, हो ओ ओ
मुस्काये जब रात की बिंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
उड़ जाये आँखों से निंदिया
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
ठंडी ठंडी मैं आहें भरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई

बात करें जब चाँद सितारे
बात करें जब चाँद सितारे
जल बरसायें नैन हमारे
जल बरसायें नैन हमारे
तेरी याद में रो रो मरूँ
तेरी याद में रो रो मरूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ
हाये मैं का करूँ

मेरी आँखों में बस गया कोई रे
मोहे नींद न आये मैं का करूँ
मेरी आँखों में बस गया कोई

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May 15, 2009

पतली कमर है-बरसात १९४९

कटाक्ष कहें या शब्दों के बाण, पतली कमर और तिरछी नज़र
के विवरण वाला ये गीत इतना बजा कि लोगों को याद हो गया।
इस गीत में मस्ती और दुःख दोनों का संगम है। जिस अनूठे ढंग
से इसको तैयार किया गया है वो शंकर जयकिशन के ही बस की
बात थी। ऐसा लगता है जैसे गीत में दो कहानियां एक साथ कही
जा रही हों। गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है जिसको गाया है मुकेश
और लता मंगेशकर ने। गीत तीन कलाकारों पर फिल्माया गया
है जिसमे से मैं प्रेमनाथ और निम्मी को आसानी से पहचान सकता
हूँ। तीसरी शायद कुक्कू जो नाच रही हैं।

..........



गाने के बोल:

पतली कमर है तिरछी नज़र है
पतली कमर है तिरछी नज़र है
खिले फूल सी तेरी जवानी
कोई बताये कहाँ क़सर है

पतली कमर है तिरछी नज़र है
पतली कमर है तिरछी नज़र है

आ,आ जा मेरे मन चाहे बालम
आ जा तेरा आँखों में घर है
आ जा तेरा आँखों में घर है

होए

मैं चंचल मदमस्त पवन हूँ
मैं चंचल मदमस्त पवन हूँ
झूम झूम हर कली को चुमूँ
झूम झूम हर कली को चुमूँ

बिछड़ गयी
बिछड़ गयी मैं घायल हिरणी
तुमको ढूँढूँ बन बन घूमूँ

मेरी ज़िंदगी मस्त सफ़र है
मेरी ज़िंदगी मस्त सफ़र है
पतली कमर है तिरछी नज़र है
पतली कमर है तिरछी नज़र है

आ,आ जा मेरे मन चाहे बालम
आ जा तेरा आँखों में घर है
आ जा तेरा आँखों में घर है

तुम बिन नैनों की बरसातें
रोक न पाऊँ लाख मनाऊँ
तुम बिन नैनों की बरसातें
रोक न पाऊँ लाख मनाऊँ
मैं बहते दरिया का पानी
मैं बहते दरिया का पानी
खेल किनारों से बढ़ जाऊँ
खेल किनारों से बढ़ जाऊँ
बँध न पाऊँ
नया नगर नित नयी डगर है

तिरछी नज़र है
पतली कमर है

आ जा मेरे मन चाहे बालम
आ जा तेरा आँखों में घर है

होए, पतली कमर है तिरछी नज़र है
पतली कमर है तिरछी नज़र है
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Patli kamar hai-Barsaat 1949

Artists: Premnath, Nimmi, Cuckoo

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