ज़िन्दगी की यही रीत है-मिस्टर इंडिया १९८७
एक आज सुनते हैं जो फिल्म मिस्टर इण्डिया में है. इस गीत
को बजते हुए ३० साल हो गए मजाल है इसके आनंद में कमी
आई हो. भूल जाएँ राग रागिनी, किशोर कुमार के फोर्थ डायमेंशन
वाली गायकी के आनंद में आप राग-रागिनी सब भूल जायेंगे.
जावेद अख्तर ने इस गीत को लिखा है. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के
लिए गीत लिखने का काम वैसे अधिकतर आनंद बक्षी ने किया
मगर इस फिल्म के गीतकार का चुनाव कैसे हुआ ये शायद शोध
का विषय हो सकता है. जो भी हुआ हो फिल्म के गीत सुपरहिट
साबित हुए. गाने की पञ्च लाइन है-वक्त्त भी जैसे एक मीत है.
गीत के बोल:
ज़िन्दगी की यही रीत है
हार के बाद ही जीत है
थोड़े आँसू हैं थोड़ी हँसी
आज ग़म है तो कल है ख़ुशी
ज़िन्दगी की यही रीत है
हार के बाद ही जीत है
ज़िन्दगी रात भी है सवेरा भी है ज़िन्दगी
ज़िन्दगी है सफ़र और बसेरा भी है ज़िन्दगी
एक पल दर्द का गाँव है, दूसरा सुख भरी छाँव है
हर नए पल नया गीत है
ज़िन्दगी की यही रीत है
हार के बाद ही जीत है
ग़म का बादल जो छाए, तो हम मुस्कराते रहें
अपनी आँखों में आशाओं के कैंडल जलाते रहें
आज बिगड़े तो कल फिर बने, आज रूठे तो कल फिर पौने
वक़्त भी जैसे इक मीत है
ज़िन्दगी की यही रीत है
हार के बाद ही जीत है
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Zindagi ki yahi reet hai-Mr. India 1987
Artists-Anil Kapoor

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