घिर घिर आये बदरवा कारे-डाक बाबू १९५४
नियति को कुछ और मंज़ूर था वे गायक बन गए. देखने
दिखाने में वे काफी अच्छे थे मगर गायकी उनकी तकदीर
में लिखी थी सो उन्हें शोहरत और मुकाम गायकी के ज़रिये
ही मिला.
उन्होंने कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया जिनमें से एक है
सन १९५४ की डाक बाबू. आज आपको उस फिल्म से एक
गीत सुनवाते हैं. फिल्म में तलत महमूद और नादिरा मुख्य
कलाकार हैं.
ये तलत महमूद और मुबारक बेगम की आवाजों में युगल
गीत है जिसे लिखा प्रेम धवन ने और इसका संगीत तैयार
किया है पंडित धनीराम ने.
आज जो गीत आप सुन रहे हैं उसके मुखड़े से मिलते जुलते
बोलों वाले कम से कम ५ गीत और हैं.
गीत के बोल:
घिर घिर आये बदरवा कारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
रंग भरे रस भरे प्यारे प्यारे
रंग भरे रस भरे प्यारे प्यारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
चली नशे में चूर हवाएं
मस्ती से भरपूर हवाएं
चली नशे में चूर हवाएं
मस्ती से भरपूर हवाएं
मचल मचल कर बिजली चमके
मचल मचल कर बिजली चमके
ज्यों नैना मतवारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
चारों ओर है खुशी का मेला
रहा ना जाये आज अकेला
चारों ओर है खुशी का मेला
रहा ना जाये आज अकेला
बार बार मेरा मन सूना
बार बार मेरा मन सूना
किसको आज पुकारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
घिर घिर आये बदरवा कारे
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Ghir ghir aaye badarwa-Dak Babu 1954
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