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Jun 17, 2020

सुन रसिया-नागिन १९५४

जून महीने में जन्मे लोगों में से एक हैं हेमंत कुमार. १६ जून
को बनारस की पावन नगरी में जन्मे हेमंत कुमार हिंदी और
बंगाली सिनेमा और संगीत की प्रभावशाली और बड़ी हस्तियों
में से एक हैं. वे भी ऐसी एक शख्सियत हैं जिन्होंने तकनीकी
शिक्षा छोड़ के अपने पैशन को अपनाया. ३० के दशक में ऐसा
होना किसी अचम्भे से कम नहीं है.

ऐसे कम कलाकार हैं जिन्होंने अपने ५० साल इस इंडस्ट्री में
पूरे किये हों. गायन के लिए दो राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें मिले.
उन्होंने दो बार पद्म पुरस्कारों के लिए मना किया, पद्मश्री
और पद्मभूषण. ये अपने देश की कुछ गिनी चुनी शख्सियतों
में से एक हैं जिन्होंने अवार्ड ठुकराया. सरकारी पुरस्कारों पे
सवालिया निशान काफी लगते रहे हैं पहले. पुरस्कार देने की
टाइमिंग भी कई बार समझ नहीं आती. कईयों को बरसों तक
झुलाया गया.

सन १९५४ की फिल्म नागिन का संगीत इतना बजा कि शायद
फिल्मफेयर वालों को भी मजबूरन ये पुरस्कार उन्हें देना पड़ा.
इसके अलावा शायद फिल्मफेयर को उनकी याद नहीं आई.

कुछ समय पहले आपने अवार्ड वापसी के नाम पर कई लोगों का
ड्रामा देखा होगा. इनमें से बहुत से ऐसे हैं जो अवार्ड के हकदार
नहीं हैं और उन्हें वाकई लौटा देना चाहिए था मगर किसी ने भी
लौटाया नहीं.

खैर ये सब छोड़ें, ये सब तो ट्विटर पर डिस्कस करने वाला
मसाला है जिसपे काफी कुछ डिस्कस किया जा चुका है.

सुनते हैं नागिन से एक मधुर गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ
जिसे लता मंगेशकर ने गाया है.




गीत के बोल:

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा

लिख लिख हारी बलम तोहे पतियाँ
तुम बिन कैसे बिताऊँ कारी रतियाँ
लिख लिख हारी बलम तोहे पतियाँ
तुम बिन कैसे बिताऊँ कारी रतियाँ
कारी कारी रतियाँ ये कारी कारी रतियाँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा

कब सच होगा सजन मेरा सपना
पिया तुम आ के कहोगे मुझे अपना
कब सच होगा सजन मेरा सपना
पिया तुम आ के कहोगे मुझे अपना
कब तुम आ के कहोगे मुझे अपना
ओ ओ ओ ओ ओ ओ

सुन रसिया सुन रसिया
काहे को जलाये जिया आ जा
काहे को जलाये जिया आ जा
काहे को जलाये जिया आ जा
………………………………………..
Sun rasiya-Nagin 1954

Artist: Vaiyanatimala

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Jan 31, 2019

सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा-आर पार १९५४

जैसे लायन का फीमेल होती है लायनेस वैसे ही ज़ालिम का
फीमेल होती है ज़ालिमा. ऐसा हमने इस गीत को सुनने के
बाद अनुमान लगाया. गीत काफी कुछ सिखलाते हैं प्यार
मोहब्बत के सिवा भी.

आर पार फिल्म में एक ही धुन पर दो गीत हैं. स्लो वाली
धुन ज्यादा कातिलाना है मगर ये युगल गीत भी कम नहीं
है. गौरतलब है दोनों ही गीतों में गीता दत्त की आवाज़ है.
युगल गीत में रफ़ी ने उनका साथ दिया है. कौन क्या गायेगा
ये तो संगीतकार तय किया करता है इसलिए हमारे पास
सुनने का विकल्प ही बचता है. फिल्म आर पार के सभी
गीत चर्चित और लोकप्रिय हैं बस कम ज्यादा का फर्क है.
सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत है-ये लो मैं हारी पिया.



गीत के बोल:

सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
प्यार हमको तुमसे हो गया
दिल से मिला ले दिल मेरा
तुझको मेरे प्यार की क़सम

जा जा जा जा बेवफा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठ तेरे प्यार की कसम

सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
जा जा जा जा बेवफा

प्यार की नज़र से दूर यूँ न ज़िंदगी गुज़ार
प्यार की नज़र से दूर यूँ न ज़िंदगी गुज़ार
हुस्न तू है इश्क़ मैं कर भी ले नज़र को चार
चार मैं नज़र करूँ और फिर हुज़ूर से
चार मैं नज़र करूँ और फिर हुज़ूर से
पास यूँ न आईये बात कीजे दूर से

जा जा जा जा बेवफा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठ तेरे प्यार की कसम

अरे वाह सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
जा जा जा जा बेवफा

दूर कब तलक रहूँ फूल तू है रंग मैं
मैं तो हूँ तेरे लिये डोर तू पतंग मैं
दूर कब तलक रहूँ फूल तू है रंग मैं
मैं तो हूँ तेरे लिये डोर तू पतंग मैं
कट गई पतंग जी डोर अब न डालिये
कट गई पतंग जी डोर अब न डालिये
और किसी के सामने जा के दिल उछालिये

अरे सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
प्यार हमको तुमसे हो गया
दिल से मिला ले दिल मेरा
तुझको मेरे प्यार की क़सम

जा जा जा जा बेवफा
सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा

बात रह न जाये फिर वक़्त ये गुज़र न जाये
बात रह न जाये फिर वक़्त ये गुज़र न जाये

मेरे प्यार का ये हार टूट कर बिखर न जाये
प्यार-प्यार कह के तू दिल मेरा न लूट रे
प्यार-प्यार कह के तू दिल मेरा न लूट रे
कह रहा है तू जो बात हो ना झूठ-मूठ रे

जा जा जा जा बेवफा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठ तेरे प्यार की कसम

सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
प्यार हमको तुमसे हो गया
दिल से मिला ले दिल मेरा
तुझको मेरे प्यार की क़सम

जा जा जा जा बेवफा
सुन सुन सुन सुन ज़ालिमा
अरे जा जा जा जा
सुन सुन सुन सुन
……………………………………………………..
Sun sun sun sun zalima-Aar Paar 1954

Artists: Guru Dutt, Shyama

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Oct 19, 2018

मर गये हम जीते जी-शबाब १९५४

ये सब काम के शब्दों में ना ना क्यूँ लगा रहता है भला
खाना, पीना, सोना, रोना, धोना, गाना, सुनना, पाना, खोना,
जीना, मरना. कभी विचार किया है आपने?

आप विचार करें तब तक हम आपको एक बढ़िया गीत
सुनवाते हैं फिल्म शबाब से. इसे लता मंगेशकर ने गाया है.
बोल शकील बदायूनीं के हैं और संगीत नौशाद का.



गीत के बोल:

मर गये हम जीते जी मालिक तेरे संसार में
चल दिया हमको खिवैया छोड़ के मँझधार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी

उनका आना उनका जाना बस खेल था तक़दीर का
ख़्वाब थे वो ज़िन्दगी के दिन जो गुज़रे प्यार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी

ले गये वो साथ अपने साज भी आवाज़ भी
ले गये वो साथ अपने साज भी आवाज़ भी
ओ रह गया नग़मा अधूरा दिल के टूटे तार में
मालिक तेरे संसार में
मर गये हम जीते जी
……………………………………………..
Mar gaye ham jeete ji-Shabab 1954

Artist: Nutan

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Oct 17, 2018

जोगन बन जाऊँगी-शबाब १९५४

जोगन जोगी हिट्स से अगला गीत सुनते हैं फिल्म शबाब
से. ये वाकई का हिट है. कुछ गाने तो श्रेणी बनाने वाले
जबरन हिट घोषित कर दिया करते हैं. इधर ऐसा नहीं है.

जोगी और जोगन शब्द बड़े लुभावने से लगते हैं गानों में.
फिल्म ताल के गाने रमता जोगी को ही ले लीजिए. उस
गीत के कुछ शब्द-जोगी, मधुशाला, पी आया, जी आया के
अलावा बाकी क्या गाया गया आपको याद आता है?

इस गीत में समर्पण भी है, प्रेमी को चेतावनी भी दी जा
रही है. चेतावनी और धमकी में फर्क होता है भाई लोग.
वैसे फिल्म की नायिका है कलाकार एक गाने में तो वो
घूँघटा में आग लगा रही थी.

अब ये भी पूछ लो कि सितार मेंडोलिन जैसा क्यूँ सुनाई दे
रहा है.  ये स्पेशल वाला है-इम्पोर्टेड आइटम. वैसे भी
सितार देख कौन रहा है गाने में ?





गीत के बोल:

जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन

जीत लिया तोरे गीत ने मन को
जीत लिया तोरे गीत ने मन को
आग लगी मोरे बालापन को
बालापन को
नैनों में कोई आए न दूजा
नैनों में कोई आए न दूजा
आए न दूजा आ
हो ओ ओ ओ करूँगी निसदिन प्रीतम पूजा
करूँगी निसदिन प्रीतम पूजा
भजन तोरे गाऊँगी बन के पुजारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन

मैं रसिया तोरे मन में रहूँगी
मैं रसिया तोरे मन में रहूँगी
प्यार से अपनी झोली भरूँगी
झोली भरूँगी
ओ मनबसिया ओ अलबेले हो
हो ओ ओ ओ छोड़ के ऊँचे महल दुमहले
छोड़ के ऊँचे महल दुमहले
मैं तेरी गली आऊँगी बन के भिखारन
सैंया तोरे कारन ओ बलमा तोरे कारन
जोगन बन जाऊँगी सैंया तोरे कारन
………………………………………………….
Jogan ban jaoongi-Shabab 1954

Artist: Nutan, Bharat Bhushan

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Jul 22, 2018

गया अँधेरा हुआ उजारा-सुबह का तारा १९५४

आज एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं श्वेत श्याम युग से.
ये अपने ज़माने का बेहद लोकप्रिय गीत हैं.

फिल्म के शीर्षक कैसे और क्यूँ रखे जाते हैं ये अब
तक मुझे पूरी तरह से समझ नहीं आया. उपन्यास
के शीर्षक तो काफी हद तक समझ आ जाते हैं
लेकिन कुछ फिल्मों में शीर्षक और कथानक के बीच
सम्बन्ध ढूंढते ढूंढते फिल्म समाप्त हो जाती है और
सिनेमा घर की बत्तियाँ जल जाती हैं.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म सुबह का तारा से
शीर्षक गीत जिसे तलत महमूद संग लता मंगेशकर
ने गाया है. नूर लखनवी की रचना है जिसका संगीत
सी रामचंद्र ने तैयार किया है.

भारतीय रेल के जनरल कम्पार्टमेंट में जब आप फँस
जाएँ और सारी सवारियां जबरन आँख मिचमिचाती हुई
सोती मिले और बैठने की जगह ना मिले तो आप ऐसे
गीत गा कर मन बहला सकते हैं. रात का सफर होगा
तो बैठे बैठे गुनगुनाते हुए सुबह हो ही जायेगी.



गीत के बोल:

गया अँधेरा हुआ उजारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
टूटे दिल का बँधा सहारा चमका चमका सुबह का तारा

साँस खुशी की तन में आई अरमानों ने ली अंगड़ाई
जाग उठीं उम्मीदें सारी जाग उठी तक़दीर हमारी
हमें किसी ने दूर पुकारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी
मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी खोई हुई क्या राहत मिलेगी
खोई हुई क्या राहत मिलेगी
कहीं ये तारा टूट न जाये सुबह का साथी छूट न जाये
आँखों में रह जाये नज़ारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

गई उदासी रौनक छाई रोशनी अब जीवन में आई
हँसी खुशी का छेड़ो तराना नाच उठे मन झूमे ज़माना
समा सुहाना प्यारा प्यारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
………………………………………….
Gaya andhera hua ujala-Subah ka tara 1954

Artists: Pradeep Kumar, Jayshri

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May 6, 2018

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ-टैक्सी ड्राईवर १९५४

जिंदगी में जो भी बेफिक्र रहता है उसे जिंदगी का असल
आनंद मिलता है. बेफिक्र होने और लापरवाह होने में फर्क
है. गैर जिम्मेदार होना भी एक बिलकुल अलग किस्म की
कला है.

हम बेफिक्री की बात कर रहे हैं. गीत में उसका पूर्ण विवरण
है क्या करें और कैसे करें. साहित्य के शौक़ीन मस्तराम
नाम से तो वाकिफ होंगे ही.

गीत है साहिर का और संगीत एस डी बर्मन का. इसे गाया
है किशोर कुमार और साथियों ने.




गीत के बोल:

गम की ऐसी तैसी
गम एक रोग है इंसान के तन बदन के लिए
सा रे गा मा प ध नि सा

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे
चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
अरे मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे
चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
अरे मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे

पी के धाँधली करूं तो मुझको जेल भेज दो
सूँघने में क्या है ये जवाब थानेदार दे

भाव अगर बढ़ा भी डाले सेठ यार ग़म न कर
भाव अगर बढ़ा भी डाले सेठ यार ग़म न कर
अरे खाये जा मजे के साथ जब तलक़ उधार दे
खाये जा मजे के साथ जब तलक़ उधार दे
भाव अगर बढ़ा भी डाले सेठ यार ग़म न कर
खाये जा मजे के साथ जब तलक़ उधार दे

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
अरे मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे

अरे तेरे की हवा निकल गई
जैक लगाओ
स्टेपनी अरे पहिया पम्पिंग

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
अरे मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे

बाँट कर जो खाये उसपे अपनी जान ओ दिल लुटा
बाँट कर जो खाये उसपे अपनी जान ओ दिल लुटा
अरे जो बचाये माल उसको जूतियों का हार दे
जो बचाये माल उसको जूतियों का हार दे
बाँट कर जो खाये उसपे अपनी जान ओ दिल लुटा
जो बचाये माल उसको जूतियों का हार दे

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे
चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
अरे मस्त राम बन के ज़िंदगी के दिन गुज़ार दे
मस्त राम अरे मस्त राम मस्त राम
मस्त राम मस्त राम मस्त राम
......................................................................
Chahe koi khush ho chahe galiyan hazaar de-Taxi Driver 1954

Artists: Dev Anand, Johny Walker

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वो चाँद छुप कर-शर्त १९५४

आज हम सुनेंगे सन १९५४ से दो गीत. पहला है फिल्म शर्त से.
ये एक युगल गीत है लता मंगेशकर और हेमंत कुमार की आवाजों
में. शमसुल हुदा बिहारी के बोल हैं और हेमंत कुमार का संगीत.

इसे दीपक और श्यामा पर फिल्माया गया है. फिल्म से आपको
पूर्व में चाँद शब्द वाले दो गीत सुनवा चुके हैं. सदा मुस्कुराती
श्यामा के चेहरे पर मुसकुराहट किसी बिजली के स्विच से संचालित
होती प्रतीत होती है. इतनी स्पीड से भाव बदलते हैं कि समझ
पाना मुश्किल है किस शब्द पर क्या भाव हैं.




गीत के बोल:

वो चाँद छुप के करता है क्या इशारे देखो
वो चाँद छुप के करता है क्या इशारे देखो
शायद ये कह रहा है हम हो गये तुम्हारे
हो गये तुम्हारे
हम हो गये तुम्हारे हो गये तुम्हारे देखो

उल्फ़त का आज हमने इक़रार कर लिया है
लेकिन ये कौन जाने किस्मत में क्या लिखा है
मंजिल को चल पड़े हैं तक़दीर के सहारे
हो गये तुम्हारे देखो
वो चाँद छुप के करता है क्या इशारे देखो

ऐसा ना हो के हमको रस्ते में छोड़ जाओ
जा कर कहीं किसी की दुनिया नई बसाओ
मंझधार में रहे हम लग जाओ तुम किनारे
हो गये तुम्हारे देखो
वो चाँद छुप के करता है क्या इशारे देखो

दिल में सिवा तुम्हारे कोई नहीं हमारे
अपने दिल से पूछो क्या दिल में है तुम्हारे
देंगे मेरी गवाही कुदरत के ये नज़ारे
हो गये तुम्हारे देखो
वो चाँद छुप के करता है क्या इशारे देखो
.................................................................
Dekho wo chand chhup kar-Shart 1954

Artists:

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Feb 21, 2018

पानी का बुलबुला-सुहागन १९५४

सन १९६४ की गुरु दत्त और माला सिन्हा अभिनीत फिल्म सुहागन
से आपने कई गीत सुने. आज सुनते हैं इससे दस साल पहले एक
और इसी नाम से बनी फिल्म सुहागन से एक गीत.

ये दर्शनवादी गीत गाया है गीता दत्त ने. सरस्वती कुमार दीपक के
बोल हैं और वसंत रामचंद्र का संगीत. इस फिल्म की नायिका हैं
गीता बाली जो गीत में नज़र आ रही हैं. परदे पर इसे गाने वाली
नायिका को आप पहचानिये.

वसंत पवार और रामचंद्र वाधवकर की जोड़ी को वसंत-रामचंद्र के
नाम से जाना जाता है. सुनने पर ऐसा लगता है मानो वसंत देसाई
और सी रामचंद्र की जोड़ी हो.




गीत के बोल:

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा

दीप बुझ जायेगा पीछे पछतायेगा
दीप बुझ जायेगा पीछे पछतायेगा
रूप ढल कर दो आंसू बहायेगा बहायेगा
सपने सजाये जा मन बहलाएगा
खोने को भूल कर पाए जा पाए जा

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा

सपनो की झोली खुशियों की झोली
घर में वो भोली
किस्मत की कश्ती डोली ना डोली
किस्मत की कश्ती डोली ना डोली
मुस्कुराये जा मुस्कुराये जा
मुस्कुराये जा
नए नए रास्ते हैं तेरे वास्ते
आगे आगे बढ़ इनेहं अपना बनाये जा

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा
.....................................................................
Paani ka bulbula-Suhagan 1964

Artist: Geeta Bali

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Jan 21, 2018

अरे ना ना ना तौबा तौबा-आर पार १९५४

कहावतें जिंदगी का हिस्सा हैं. बातचीत में हम अक्सर
कहावतों का इस्तेमाल किया करते हैं. कुछ लोग तो
कहावतों का चलता फिरता कोष सरीखे मालूम पड़ते
हैं. कहावतों के अलावा किसी जगह विशेष की सामान्य
बोल चाल की भाषा के शब्दों के अनूठे प्रयोग भी हम
सुनते हैं. फिल्मों के माध्यम से ये ज्यादा सुनाई देते
हैं.

आज एक कहावत सुनी-झूठ बोलना पाप है नदी किनारे
सांप है. इसे कई बार सुन चुके हैं और ज़्यादातर ऐसे
लोगों के मुख से जो सच से ज्यादा झूठ से काम चलाया
करते हैं.

सुनते हैं एक गीत आरपार फिल्म से से जिसे गाया
है गीता दत्त और रफ़ी ने. जॉनी वॉकर और यास्मीन पर
इसे फिल्माया गया है. मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत
है जिसकी तर्ज़ ओ पी नैयर ने बनाई है.




गीत के बोल:


अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा
मैं न प्यार करूँगी
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

दर्द-ए-जिगर से मैं वीक हूँ बहुत करो ऐसा ना जुलम
अरे हो जायेंगा फेल अभी हार्ट हमारा तेयरे सर की कसम
दर्द-ए-जिगर से मैं वीक हूँ बहुत करो ऐसा ना जुलम
अरे हो जायेंगा फेल अभी हार्ट हमारा तेयरे सर की कसम
छी छी छी छी छी छी करो ना ऐसी बात
देखो देखो देखो छोड़ो जी मेरा हाथ
छी छी छी छी छी छी करो ना ऐसी बात
देखो देखो देखो छोड़ो जी मेरा हाथ

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा
मैं न प्यार करूँगी
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

तू जो कहे धरती में कुआँ खोद डालूँ दूँ ये दुनिया उजाड़
तू जो कहे चढ़ जाऊँ लम्बे-लम्बे पेड़ ऊँचे-ऊँचे ये पहाड़
तू जो कहे धरती में कुआँ खोद डालूँ दूँ ये दुनिया उजाड़
अरे तू जो कहे चढ़ जाऊँ लम्बे-लम्बे पेड़ ऊँचे-ऊँचे ये पहाड़

रीछ का तू अंकल बन्दर का तू बाप
ठोको नहीं बंडल रहो जी चुपचाप
मारा बाप
रीछ का तू अंकल बन्दर का तू बाप
ठोको नहीं बंडल रहो जी चुपचाप

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा
मैं न प्यार करूँगी
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

सच कहो रात को अकेले में धड़कता तो होगा तेरा दिल
कहता तो होगा तेरा मन करूँ दो दो बतियाँ किसी से हिलमिल
सच कहो रात को अकेले में धड़कता तो होगा तेरा दिल
कहता तो होगा तेरा मन करूँ दो दो बतियाँ किसी से हिलमिल
हूँ मैं कोई रोगी अजब तेरी बात
सोती हूँ मज़े से मैं सारी सारी रात
एम के
हूँ मैं कोई रोगी अजब तेरी बात
सोती हूँ मज़े से मैं सारी सारी रात

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
तौबा कायको करता
तौबा कायको करता प्यार से डरता
ऐसा रे सनम कइसा होगा

अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा
मैं न प्यार करूँगी
मैं न प्यार करूँगी कभी किसी से
तौबा रे बलम तौबा तौबा

अरे वाह वाह वाह वाह ऐसा कइसा होगा
अरे ना ना ना ना ना ना तौबा तौबा
अरे वाह वाह वाह वाह
अरे ना ना ना ना ना ना
…………………………………………………..
Are na na na tauba tauba-Aar Paar 1954

Artists: Johny Walker, Yasmin

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Jan 17, 2018

राही मतवाले-वारिस १९५४

तलत महमूद और सुरैया का गाया एक युगल गीत सुनते हैं
फिल्म वारिस से. कमर जलालाबादी की रचना है और इस गीत
की धुन तैयार की है अनिल बिश्वास ने.

ट्रेन के सफर में नायक गीत गा रहा है जिसे नायिका भी गाने
लगती है और गीत के अंत में दोनों साथ गाते हैं. ऐसा ट्रेन का
सफर किस्मत वालों को नसीब होता है.



राही मतवाले
तू छेड़ इक बार मन का सितार
जाने कब चोरी चोरी आई है बहार
छेड़ मन का सितार
राही मतवाले

देख देख चकोरी का मन हुआ चंचल
चंदा के मुखड़े पे बदली का अंचल
देख देख चकोरी का मन हुआ चंचल
चंदा के मुखड़े पे बदली का अंचल
कभी छुपे कभी खिले रूप का निखार
खिले रूप का निखार
राही मतवाले

कली कली चूम के पवन कहे खिल जा
कली कली चूम के
खिली कली भँवरे से कहे आ के मिल जा
आ पिया मिल जा
कली-कली चूम के
दिल ने सुनी कहीं दिल की पुकार
दिल ने सुनी कहीं दिल की पुकार
कहीं दिल की पुकार
 राही मतवाले

रात बनी दुल्हन भीगी हुई पलकें
भीनी भीनी ख़ुशबू से सागर छलके
रात बनी दुल्हन भीगी हुई पलकें
भीनी भीनी ख़ुशबू से सागऔर छलके
ऐसे में नैना से नैना हों चार
ज़रा नैना हो चार

राही मतवाले
तू छेड़ इक बार मन का सितार
जाने कब चोरी चोरी आई है बहार
छेड़ मन का सितार
राही मतवाले
...................................................................................
Rahi matwale-Waris 1954

Artists: Talat Mehmood, Suraiya

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Dec 7, 2017

तेरे रास्ते पे हमने एक घर-कवि १९५४

फ़िल्मी नायक और नायिका चाहे कहानी के हिसाब से जितने गरीब हों
मगर वो आम आदमी से हमेशा रईस नज़र आते हैं. ऐसा क्यूँ है, क्या
बड़े परदे का इफेक्ट होता है या उनके पाउडर लिपस्टिक का? या फ़िल्मी
किरदार बाय डिफाल्ट नॉन-फटीचर ही होता है. फिल्म का नायक रईस है
और उसने नायिका के रास्ते पर घर बना लिया है, जाहिर है वो पैसे
वाला है. शायद १९६३ का वर्ष घर निर्माण के लिए प्रसिद्ध था बॉलीवुड में

फिल्म तेरे घर के सामने  सन १९६३ में ही आई और उस फिल्म के एक
गीत में भी नायक नायिका के घर के सामने एक घर बनाने का जिक्र कर
रहा है. वो तो पूरी फिल्म ही घर निर्माण पर थी. इस वर्ष एक फिल्म और
आई जिसका नाम है-घर बसा के देखो. गृहस्थी फिल्म को भी इसी साल
रिलीज़ होते देखा गया.

फिल्म कवि से एक सॉफ्ट मेलोडी सुनते हैं जिसे लता और तलत महमूद
ने गाया है. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत.





गीत के बोल:

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरी पायलों की छम-छम मेरे गीत में समाई
तेरी पायलों की छम-धम मेरे गीत में समाई
मेरी आरज़ू ने कर दी तेरी नाम से सगाई
छोटी सी इस अदा को नग़मा बना लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
………………………………………………………….
Tere raaste pe hamne-Kavi 1954

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Oct 25, 2017

देखो देखो हुज़ूर-अलीबाबा एंड ४० थीव्स १९५४

आज सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म से गधों को समर्पित एक
गीत. गधों के जिक्र वाले कुछ ही गीत बने हैं अभी तक. सबसे
मेहनतकश पशु को अभी तक अनदेखा किया जाता रहा उसके
पीछे वजह क्या हो सकती है-दो टांगों वाले गधे? वो बहुतायत
में हैं सभी उद्योगों में जो चमकती किस्मत के चलते प्रसिद्धि,
स्थान और सम्मान पा लेते हैं.

अंग्रेजियत शुरू से बॉलीवुड पर हावी रही. फिल्मों के हिंदी नामों
के अलावा उनके अंग्रेजी नाम भी हुआ करते थे. किसी को अगर
फिल्म का नाम या कहानी समझ ना आये तो वो अंग्रेजी नाम
से समझ जाए. ये सुविधा धीरे धीरे खत्म हो चली.

अलीबाबा और ४० चोर एक ऐतिहासिक कथानक है जिसके ऊपर
बॉलीवुड में एक और फिल्म बनी है ८० के दशक में जिसमें धर्मेन्द्र
और हेमा मालिनी प्रमुख कलाकार हैं. होमी वाडिया निर्देशित इस
१९५४ की फिल्म फिल्म अलीबाबा एंड ४० थीव्स से इस गाने को
रफ़ी और शमशाद बेगम गा रहे हैं. गीत राजा मेहँदी अली खान
का है और संगीत चित्रगुप्त का.


   
गीत के बोल:

गधों पर बैठ कर हम शहर के चक्कर लगाएँगे
हो ही इसी क़ाबिल
हमें तुमसे मुहब्बत है ये दुनिया को बताएँगे
आ हा हा हा
क़ुरबान जाऊँ तुम्हारे बताने पे

देखो-देखो हज़ूर ये हैं खट्टे अंगूर
अजी छोड़ो ये हाथ नहीं आएँगे
ओ मेरी जन्नत की हूर तू है अरबी खज़ूर
तेरे साए में ज़िन्दगी बिताएँगे
देखो-देखो हज़ूर ये हैं खट्टे अंगूर
अजी छोड़ो ये हाथ नहीं आएँगे

अच्छा लगे है मुझे ओ मेरी बुलबुल
गाना तेरा चहचहाना तेरा
अच्छा लगे न मुझे ओ पीछे-पीछे
आना तेरा बिलबिलाना तेरा
अच्छा लगे न मुझे ओ पीछे-पीछे
आना तेरा बिलबिलाना तेरा

तेरी आँखें बिल्लूर मीठे-मीठे अंगूर
इन्हें शरबत बना के पी जाएँगे
देखो-देखो हज़ूर ये हैं खट्टे अंगूर
अजी छोड़ो ये हाथ नहीं आएँगे
ओ मेरी जन्नत की हूर तू है अरबी खज़ूर
तेरे साए में ज़िन्दगी बिताएँगे

भूला नहीं है मुझे नज़रें झुका कर
आना तेरा मुस्कुराना तेरा
मुझको भी याद है पहला तमाचा
खाना तेरा भाग जाना तेरा
मुझको भी याद है पहला तमाचा
खाना तेरा भाग जाना तेरा
जो करेगी गरूर हम बन के लंगूर
तेरे कूचे में उधम मचाएँगे
देखो-देखो हज़ूर ये हैं खट्टे अंगूर
अजी छोड़ो ये हाथ नहीं आएँगे
ओ मेरी जन्नत की हूर तू है अरबी खज़ूर
तेरे साए में ज़िन्दगी बिताएँगे
देखो-देखो हज़ूर ये हैं खट्टे अंगूर
अजी छोड़ो ये हाथ नहीं आएँगे
………………………………………………………
Gadhon par baith kar-Alibaba and 40 thieves 1954

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Oct 17, 2017

ये लो मैं हारी पिया-आर पार १९५४

फिल्म आर पार का तेज गति वाला रोचक और लोकप्रिय गीत.
इसे आप एल्लो मैं, येल्लो मैं या ये लो मैं, जैसे शब्दों को फिट
करके गायें इसके प्रभाव पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

गुरु दत्त ने फिल्मों में शांत भूमिकाएं ज्यादा की हैं. किसी भी
फिल्म में आपने उन्हें ढिशुम ढिशुम करते नहीं देखा होगा. इस
गीत में नायक शांत सा अपनी कर चला रहा है और नायिका
बगल में बैठी हुई सारी उछल-कूद कर रही है. हिंदी गीतों के
फार्मूले अनुसार गीत के अंत में सब ठीक ठाक हो जाता है और
कूदना फांदना बंद हो जाता है. नायिका हैं श्यामा.

मजरूह का गीत है, गीता दत्त की आवाज़ और नैयर का संगीत.

गीत के बोल:

ये लो मैं हारी पिया हुई तेरी जीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
ये लो मैं हारी पिया हुई तेरी जीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
ये लो मैं हारी पिया

नये नये दो नैन मिले हैं
नई मुलाकात है
मिलते ही तुम रूठ गये जी
ये भी कोई बात है
जाओ जी माफ़ किया
तू ही मेरा मीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
ये लो मैं हारी पिया

हुई तिहारी संग चलो जी
बैयाँ मेरी थाम के
बंधी बलम किस्मत की डोरी
संग तेरे नाम के
लड़ते ही लड़ते मौसम
जाये नहीं बीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
ये लो मैं हारी पिया

चले किधर को बोलो बाबू
सपनों को लूट के
हाय राम जी रह नहीं जाये
दिल मेरा टूट के
देखो मैं गाली दूंगा
छोड़ दो ये रीत रे
काहे का झगड़ा बालम नई नई प्रीत रे
ये लो मैं हारी पिया
…………………………………………………………………….
Ye lo main haari piya-Aar Paar 1954

Artists: Guru Dutt, Shyama

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Oct 9, 2017

यही अरमान ले कर आज-शबाब १९५४

सन १९५४ की फिल्म शबाब में कुछ बेहतरीन गीत हैं जिनमें
से कुछ आपने सुने हैं अभी तक. बाकी के भी सुनवाए देते हैं
एक एक कर के.

अगला गीत है शकील बदायूनीं का लिखा, नौशाद का संगीत से
संवारा और रफ़ी का गाया हुआ. फिर से एक बार बतला दें कि
फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं भारत भूषण और नूतन.




गीत के बोल:

लाई हयात आये कज़ा ले चली चले
अपनी खुशी ना आये ना अपनी खुशी चले

यही अरमान ले कर आज  अपने घर से हम निकले
जहाँ है ज़िंदगी अपनी  उसी कूचे में धम निकले

सितारों जगमगाओ तुम  बहारों मुस्कुराओ तुम
मेरी उजड़ी मुहब्बत की  हँसी मिल कर उड़ाओ तुम
हँसी मिल कर उड़ाओ तुम
जिन्हें सजदे किए हमने 
जिन्हें सजदे किए हमने  वो पत्थर के सनम निकले
वो पत्थर के सनम निकले
जहाँ है ज़िंदगी अपनी  उसी कूचे में बम निकले

तमन्ना यही है अब तो  मेरा सर हो तेरा दर हो
न आँसू कोई आँखों में  न शिकवा कोई लब पर हो
न शिकवा कोई लब पर हो
अगर यूँ मौत आ जाए
अगर यूँ मौत आ जाए तो अपने दिल से ग़म निकले
तो अपने दिल से ग़म निकले

यही अरमान ले कर आज  अपने घर से हम निकले
............................................................
Yahi armaan le kar-Shabab 1954

Artist: Bharat Bhushan

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Oct 5, 2017

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे(गीता)-शर्त १९५४

आपको फिल्म शर्त से हेमंत कुमार का गाया एक लोकप्रिय
गीत सुनवाया था. आज सुनेंगे गीता दत्त वाला वर्ज़न. इस
गीत को लिखा है एस एच बिहारी ने. 

हेमंत कुमार वाले वर्ज़न की तुलना में ये थोडा दर्द भरा है.
श्यामा पर गीत फिल्माया गया है. हेमंत कुमार वाले वर्ज़न में
नायक बीमार दिख रहा था और इस गीत में बच्चा बीमार
है.



गीत के बोल:

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा

नज़र ढूंढती है जिसे पा लिया है
उम्मीदों के फूलों से दामन भरा है
किसी हमको सब दिल से प्यारे रहेंगे

न ये चाँद होगा

कहूँ क्या मेरे दिल का अरमान क्या है
तुम्हें हर घडी चूमना चाहता है
कहाँ तक भला जी को मारे रहेंगे

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा
........................................................
Na ye chand hoga(Geeta Dutt)-Shart 1954

Artists: Shyama

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Sep 19, 2017

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे(हेमंत)-शर्त १९५४

हेमंत कुमार के संगीत वाली फ़िल्में जिनके गीत काफी
चर्चित हुए उनमें से एक का नाम है शर्त. फिल्म का
एक गीत हेमंत कुमार और गीता दत्त दोनों की आवाज़
में उपलब्ध है. दोनों ही समान रूप से लोकप्रिय हैं.

आज सुनेंगे हेमंत कुमार वाला वर्ज़न. गीत लिखा है
एस एच बिहारी ने.चाँद सितारों के उल्लेख वाले गीत
रात में सुनने में आनंद देते हैं.

दीपक और श्यामा पर गीत फिल्माया गया है. नायक कुछ
बीमार सा दिख रहा है.




गीत के बोल:

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा

बिछड़ कर चले जाएं तुमसे कहीं
तो ये ना समझना मुहब्बत नहीं
जहाँ भी रहे हम तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा

ज़माना अगर कुछ कहेगा तो क्या
मगर तुम न कहना हमें बेवफ़ा
तुम्हारे लिये हैं तुम्हारे रहेंगे

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा

ये होगा सितम हमने पहले ना जाना
बना भी ना था जल गया आशियाना
कहाँ अब मोहब्बत के मारे रहेंगे

न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे
न ये चाँद होगा
........................................................
Na ye chand hoga(Hemant Kumar)-Shart 1954
 
Artists: Deepak, Shyama

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Sep 1, 2017

जा जा जा जा बेवफ़ा-आर पार १९५४

श्यामा पर फिल्माया गया एक गीत सुनते हैं फिल्म आर पार से.
गीता दत्त ने इसे गाया है. पुराने ज़माने के संगीत में कितनी
गहराई होती थी इस गीत को सुन कर अंदाजा लग जाता है. इसे
कुछ समय पहले रिलीज़ एक फिल्म में भी इस्तेमाल किया गया
है.

मजरूह सुल्तानपुरी का गीत है और ओ पी नैयर का संगीत.

श्यामा पर अधिकाँश मुस्कुराने वाले गीत फिल्माया गये हैं.
ये उनके चुनिन्दा दुःख भरे गीतों में से एक है.




गीत के बोल:

जा जा जा जा बेवफ़ा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठी तेरे प्यार की क़सम
जा जा जा जा बेवफ़ा

दिल पे हर जफ़ा देख ली
बेअसर दुआ देख ली
कुछ किया न दिल का ख़याल
जा तेरी वफ़ा देख ली
कुछ किया न दिल का ख़याल
जा तेरी वफ़ा देख ली

जा जा जा जा बेवफ़ा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठी तेरे प्यार की क़सम
जा जा जा जा बेवफ़ा

क्योँ न ग़म से आहें भरूँ
याद आ गये क्या करूँ
बेख़बर बस इतना बता
प्यार मे जियूँ या मरूँ
बेख़बर बस इतना बता
प्यार मे जियूँ या मरूँ

जा जा जा जा बेवफ़ा
कैसा प्यार कैसी प्रीत रे
तू ना किसी का मीत रे
झूठी तेरे प्यार की क़सम
जा जा जा जा बेवफ़ा
…………………………………………
Ja ja ja ja bewafa-Aar paar 1954

Artist: Shyama

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Aug 30, 2017

कई दिन से सावन बरसता-समाज १९५४

कई दिन से सावन बरस रहा है रिमझिम रिमझिम मगर इस
बार सावन कुछ रूठा रूठा सा रहा और भादो के महीने में भी
थोडा रूठा ही रहा.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म समाज से एक युगल गीत जिसे
आशा भोंसले संग शैलेश ने गाया है. मजरूह के लिखे गीत की
तर्ज़ बनायीं है अरुण कुमार मुखर्जी ने. ये शैलेश वही हैं जिन्होंने
फिल्म आग में शमशाद बेगम के साथ युगल गीत गाया है-देख
चाँद की ओर.




गीत के बोल:

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
हवा झूमती है घटा गा रही है
अब ऐसे में भी तुम ना आये तो देखो देखो
अब ऐसे में भी तुम ना आये तो देखो देखो
नज़र रुठने की क़सम खा रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम

फँसा कौन ये बिजलियों की अदा से
फँसा कौन ये बिजलियों की अदा से
बरसने लगे किसके आँसू घटा से-2
बरसने लगे किसके आँसू घटा से
आशा:
यही पूछती है  मेरे दिल की धड़कन धड़कन
यही पूछती है  मेरे दिल की धड़कन धड़कन
मगर कुछ बताते हया आ रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम

उधर तू है और मैं इधर हूँ तो क्या है
कहीं फूल से उसकी ख़ुशबू जुदा है
उधर तू है और मैं इधर हूँ तो क्या है
कहीं फूल से उसकी ख़ुशबू जुदा है

ये माना के ऐसी नहीं कोई दूरी-दूरी
ये माना के ऐसी नहीं कोई दूरी-दूरी
पर इतनी भी दूरी सितम ढा रही है

कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
हवा झूमती है घटा गा रही है
कई दिन से सावन बरसता है रिमझिम रिमझिम
……………………………………………………………….
Kai din se sawan-Samaj 1954

Artists: Ashok Kumar, Usha Kiran

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Jul 30, 2017

एक दिल दो हैं तलबगार-दरवाजा १९५४

सुमन कल्याणपुर और तलत महमूद का गाया एक
युगल गीत गीत सुनते हैं पुरानी फिल्म दरवाजा से.

खुमार बाराबंक्वी के बोल हैं और नाशाद का संगीत.





गीत के बोल:

एक दिल दो हैं तलबगार बड़ी मुश्किल है
कशमकश में है मेरा प्यार बड़ी मुश्किल है

ढूँढती हैं तुझे हरसू मेरी प्यासी आँखें
कैसे हो अब तेरा दीदार बड़ी मुश्किल है

दिल में जो कुछ है ज़बां पर नहीं लाया जाता
घुट के दम तोड़ न दे प्यार बड़ी मुश्किल है

सामने है मेरे अरमानों की मंज़िल लेकिन
सामने है मेरे अरमानों की मंज़िल लेकिन
मुफ़लिसी बन गई दीवार बड़ी मुश्किल है
……………………………………………..
Ek dil do hain talabgar-Darwaza 1954

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Jul 28, 2017

तेरी याद में जल कर-नागिन १९५४

हिंदी सिनेमा इतिहास कि सबसे बड़ी म्यूजिकल हिट फिल्मों
में से एक है नागिन. सन १९५४ में आई इस फिल्म के एक
गाने को शायद ही कभी हम भुला पाएंगे. नाग पंचमी को इस
गीत की धुन आप जगह जगह सुन सकते हैं. उसके अलावा
इस गीत का संगीत चाहे जब जहाँ पर किसी भी लोक गीत
या धार्मिक गीत में फिट कर दिया जाता है.

फिल्म नागिन से एक गीत सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया
हुआ. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और हेमंत कुमार का संगीत.



गीत के बोल:

तेरी याद में जल कर देख लिया
अब आग में जल कर देखेंगे
तेरी याद में जल कर देख लिया
अब आग में जल कर देखेंगे
इस राह में अपनी मौत सही
ये राह भी चल कर देखेंगे
तेरी याद में जल कर देख लिया
अब आग में जल कर देखेंगे

दीपक की चमक में आग भी है
दुनिया ने कहा परवानों से
दीपक की चमक में आग भी है
दुनिया ने कहा परवानों से
परवाने मगर ये कहने लगे
दीवाने तो जल कर देखेंगे

तेरी याद में जल कर देख लिया
अब आग में जल कर देखेंगे
……………………………………………..
Teri yaad mein jal kar-Nagin 1954

Artist: Vaijayantimala

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