खुश रहो हर खुशी है-सुहाग रात १९६८
सेड और मेंलंकली अलग अलग चीज़ें हैं. दुःख ज्यादा हो जाए
तो मेंलंकली बन जाता है. साहित्यिक दिमाग फर्क कर पाता
है इन सब चीज़ों में. उदासी अवसाद, निराशा, खिन्नता ये
सब कुछ मिलते जुलते से हैं मगर फर्क है जनाब इन सब में.
आप ही निर्णय कर के बतलायें आज का गीत कौन सी श्रेणी
में रखा जाए. ये भी एक ऐसा गीत है जिसमें खुशी शब्द के
साथ दर्द छुपा हुआ है. आपको याद हो मुकेश का गाया कुछ
ऐसा ही एक गीत फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में भी है.
गीत जीतेंद्र और राजश्री पर फिल्माया गया है. इन्दीवर ने
इसको लिखा है और कल्याणजी आनंदजी की तर्ज़ है. खुश
रहने की नसीहत दी जा रही है गीत में नायक द्वारा नायिका
को. सुहाग रात से एक गीत मोहे लागी रे आप सुन चुके हैं.
गीत के बोल:
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
छोड़ दो आंसुओं को हमारे लिए
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
क्यूँ उदासी की तस्वीर बन कर खड़े
गम उठाने को दुनिया में हम तो पड़े
मुस्कुराने के दिन है ना आहें भरो
मेरे होते न खुद को परेशां करो
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
बिजली चमके तुम्हें डर की क्या बात है
रोशनी की यही तो शुरुआत है
टूटनी है जो बिजली मेरा सर तो है
जो अँधेरे है बेघर मेरा घर तो है
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
तुम बहारों से शिकवा न करना कभी
दे दो कांटें हमें फूल ले लो सभी
फूल कोई कुचल जाए जब भूल में
सोच लेना के हम मिल चुके धूल में
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
छोड़ दो आंसुओं को हमारे लिए
खुश रहो हर ख़ुशी है तुम्हारे लिए
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Khush Raho har khushi-Suhaag Raat 1968
Artists-Jeetendra, Rajshri

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