Jul 22, 2016

नन्ही कली सोने चली-सुजाता १९५९

एक लोरी सुनते हैं आज. बहुत दिन हुए कोई लोरी सुने हुए.
फिल्म सुजाता से सचिन देव बर्मन के संगीत वाली लोरी है
जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने.

गीता दत्त के गानों की संख्या सन १९६० के आते आते कम
हो चली थी. उस समय तक सचिन देव बर्मन की प्रमुख
गायिकाएं लता और आशा हो चुकी थीं. लता मंगेशकर ने
एस डी से अनबन के चलते कुछ साल उनके गीत नहीं गाये.
ये उसी दौर में बनी फिल्म है-सुजाता. इस फिल्म में गीता
के गाये दो गीत हैं और आशा के गाये दो गीत. गीता के
गाये दो गीतों में से एक में आशा भोंसले का स्वर भी है.
फिल्म में बाकी के तीन गीत क्रमशः एस डी, तलत और
रफ़ी के हैं.

आज इतिहास के पन्नों में दर्ज है फिल्म सुजाता और इसका
संगीत. आप प्रस्तुत गीत की कल्पना किसी और गायिका की
आवाज़ में नहीं कर सकते. इस धुन के साथ गीता ही न्याय
कर सकती थीं. गीत फिल्माया गया है सुलोचना लटकर पर.



गीत के बोल:

हवा धीरे आना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली

चाँद किरण सी गुड़िया नाजों की है पली
चाँद किरण सी गुड़िया नाजों की है पली
आज अगर चाँदनिया आना मेरी गली
गुन गुन गुन गीत कोई हौले हौले गाना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना

रेशम की डोर अगर पैरों को उलझाए
रेशम की डोर अगर पैरों को उलझाए
घूंघर का दाना कोई शोर मचा जाए
रानी मेरे जागे तो फिर निंदिया तू बहलाना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना

नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना
……………………………………………….
Nanhi kali sone chali-Sujata 1959

Artist: Sulochana Latkar

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