आँखें खुली थी-साथी १९६८
वर्ष: १९६८
गायक: मुकेश
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
संगीतकार: नौशाद
गीत के बोल:
आँखें खुली थी आये थे वो भी नज़र मुझे
फिर क्या हुआ नहीं है कुछ इस की खबर मुझे
आँखें खुली थीँ
उन का ख़याल दिल में तसव्वुर निगाह में
रोशन वही चिराग़ है यादों की राह में
वो छोड़ कर गये थे इसी मोड़ पर मुझे
फिर क्या हुआ नहीं है कुछ इस की खबर मुझे
आँखें खुली थी
अब तो मुझे अन्धेरों से उल्फ़त सी हो गई
आँखों को इंतज़ार की आदत सी हो गई
तकना है उन की राह यूँ ही उम्र भर मुझे
आँखें खुली थी आये थे वो भी नज़र मुझे
फिर क्या हुआ नहीं है कुछ इस की खबर मुझे
आँखें खुली थी
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Aankhen khuli thi-Sathi 1968
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