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Nov 16, 2025

हम भी राहों में खड़े हैं(युगल गीत)-सलाम मेमसाब १९७९

असरानी की बात चली तो एक और गीत सुनते हैं असरानी द्वारा 
निर्मित एक अन्य फिल्म का.   फिल्म का नाम सलाम मेमसाब है जो
 सन १९७९ में आई थी. इसमें असरानी संग ज़रीना वहाब की मुख्य
भूमिकाएं हैं.
 
३०० से ज्यादा फिल्मों और ५० साल के कैरियर में असरानी ने कई 
अविस्मरनीय भूमिकाएं की हैं.उनके कार्यों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय 
तो निस्संदेह फिल्म शोले का जेलत वाला किरदार है. उसके अलावा
हमें सोशल मीडिया पर एक मीम अक्सर दिखाई देता है जिसमें असरानी 
"ये क्या देखना पद रहा है" कहते दिखाई देते हैं. ये है फिल्म धमाल 
का दृश्य.

आपको याद होगा फिल्म छोटी सी बात जिसमें अमोल पालेकर
और विद्या सिन्हा प्रमुख कलाकार हैं. उसमें भी सेकंड लीड
असरानी हैं.
 
प्रस्तुत गीत मजरूह का लिखा हुआ है जिसकी धुन तैयार की है 
आर डी बर्मन ने . ये एक हल्का फुल्का गीत है जिसका दुखद तर्जुमा 
भी फिल्म में मौजूद है जिसे लता मंगेशकर ने गाया है.

 

 गीत के बोल:

सलाम साहब
अरे सलाम मेमसाहब
अरे जरा इधर भी नजर फेंकिए
आ हा हा हा
अरे बोनी तो हो गई ए जिओ राजा ए जिओ रानी

ओ ले लो ले लो दुवा किसी बेकरार की
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं

हम दुखों के पाले हैं, हाँ मगर दिलवाले हैं
एक नज़र पे रुक जाए, ऐसे हम मतवाले हैं
हो ओ ओ........
अपने हो या बेगाने, हम तो सबके दीवाने
हर गली में बाहो के हार हमने डाले हैं
ये ही तो है गलिया वो प्यार की
आनेवालो
आनेवालो मेरे दिल का नज़र देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं

दिल का साथी है जब दिल, कैसा रस्ता क्या मंजिल
चल पड़ो तो रस्ता है, ठहर जाओ तो मंजिल
रंग ये बाज़ारो का रूप ये दिलदारो का
जो नजारा देखो है चूम लेने के काबिल
हो ओ हवा खाने वालों मेरे गुलज़ार की
क्या हो थोड़ा सा ऐ भाई
क्या हो थोड़ा सा हमें भी अगर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं

हम तो चाहत से हारे फिरते हैं मारे मारे
तुम रहो हँसते बसते साथ हों चंदा तारे
फिर यूँ ही जाने जाना कल कहीं पे मिल जाना
हम चले गाते नगमे खुश रहो तुम भी प्यारे
हो ओ जाओ लूटो मजे शाम है बहार की
जाते जाते ओ मामू
जाते जाते हो सके तो इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं
.................................................................................
Ham bhi rahon mein khade hain(duet)-Salaam Memsaab 1979

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Jul 31, 2020

ये कौन आज आया-बंधे हाथ १९७३

आज अभिनेत्री मुमताज़ का जन्मदिन है. ७० के दशक की
क्वीन मुमताज़ के हजारों दीवाने हैं.

सुनते हैं फिल्म बंधे हाथ से एक गीत जिसे लता मंगेशकर ने
गाया है. मजरूह सुल्तानपुरी का गीत है और पंचम का संगीत.

गीत में आपको अजीत और अमिताभ भी दिखाई देंगे.




गीत के बोल:

ये कौन आज आया मेरा दिल चुराने
.
.
.
.............................................................................
Ye kaun aaj aaya-Bandhe Haath 1973

Artist: Mumtaz

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Jul 18, 2020

संग मेरे निकले थे साजन-फिर वही रात १९८०

आज हम आपको ८० के दशक की एक सस्पेंस फिल्म से
मधुर युगल गीत सुनवाते हैं. इसे लता और किशोर ने
गाया है. मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं और आर डी बर्मन
का संगीत. ये काफी लोकप्रिय गीत है और पंचमभक्तों का
पसंदीदा गीत है.

आज १८ जुलाई सुपरस्टार राजेश खन्ना की पुण्यतिथि है.
उनका मूल नाम जतिन खन्ना है, मगर फ़िल्मी दुनिया में
जो नाम एक बार जुड़ जाता है, सितारे उसी से पहचाने
जाते हैं.

आज एक और जतिन-टी वी के प्रसिद्ध कॉमेडियन और
गुजराती मूल के जतिन कनकिया की भी पुण्यतिथि है.
९० के दशक में चर्चित चेहरा रहे कनकिया कम उम्र में
दुनिया को अलविदा कह गए. श्रीमान श्रीमती उनका बेहद
लोकप्रिय धारावाहिक रहा जो डी डी मेट्रो पर आया करता
था.

सुनते हैं राजेश खन्ना और किम पर फिल्माया गया ये
गीत.




.गीत के बोल:

संग मेरे निकले थे साजन
हार बैठे थोड़ी ही दूर चल के.
.
.
.
……………………………………………………
Sang mere nikle the sajan-Phir wahi raat 1980

Artists: Rajesh Khanna, Kim

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Jul 17, 2020

दिल का साथी है जब दिल-सलाम मेमसाब १९७९

हिंदी सिनेमा ने अपने पैदा होने के बाद से अभी तक कई
शानदार अभिनेत्रियों को देखा है. सिनेमा जगत उसे याद
रखता है जो चर्चा में हो मगर ढेरों ऐसे दर्शक हैं जो अच्छे
कलाकारों को याद रखते हैं, दौर कोई भी हो.

हमने आपको १० साल पहले असरानी निर्देशित एक फिल्म
सलाम मेमसाब से एक लता का गाया गीत सुनवाया था.
आज सुनते हैं उस गीत का खुशनुमा तर्ज़ुमा जिसे गाया
है किशोर कुमार ने. गीत असरानी और ज़रीना वहाब पर
फिल्माया गया है. गीत में एक लाईन लगता है भूपेंद्र की
आवाज़ में है. बाकी कोरस है.

आज नायिका ज़रीना वहाब का जन्मदिन है जिसकी उन्हें
ढेरों शुभकामनाएं. ज़रीना वहाब की पहली हिंदी फिल्म है
देव आनंद निर्देशित इश्क इश्क इश्क. बतौर प्रमुख नायिका
वे १९७६ की बासु चटर्जी निर्देशित हिट फिल्म चितचोर में
दिखाई दीं. उसके बाद एक लंबा सफल कैरियर है उनका
जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषा की फ़िल्में
हैं.

पुरस्कारों से शिकायत मुझे भी है. ज़रीना वहाब को किसी
भी भाषा के सिनेमा पुरस्कारों ने पुरस्कार के लायक नहीं
समझा? फिल्म इतिहास की सबसे संजीदा अभिनेत्रियों में
से एक ज़रीना वहाब अभिनय के मामले में समकालीनों से
काफी आगे दिखलाई देती हैं.

सुनते हैं गीत जिसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है.



गीत के बोल:

दिल का साथी है जब दिल
कैसा रास्ता क्या मंजिल
याद आया, गाओ मेमसाब

दिल का साथी है जब दिल
कैसा रास्ता क्या मंजिल
चल पडो तो रास्ता है
ठहर जाओ तो मंजिल
रंग ये नजारों का रूप ये दिलदारों का
जो नज़ारा है देखो चूम लेने के काबिल
हो ओ आओ लुटे मज़े शाम है बहार की
क्या हो थोडा सा, हाँ
क्या हो थोडा सा हमें भी अगर देख लो
ओ जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
अरे सोचिये मत गाइए गाइए

हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
ये बात हुई ना, वंडरफुल
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
हम भी राहों में खड़े हैं यार इधर देख लो
जानेमन प्यार से एक नज़र देख लो
…………………………………………………
Dil ka sathi hai jab dil-Salaam memsaab 1979

Artists: Asrani, Zarina Wahab

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Jul 13, 2020

दोनों के दिल हैं मजबूर-नर्गिस १९९२

आज १३ जुलाई प्रसिद्ध सेक्सोफोन वादक मनोहारी सिंह की
पुण्यतिथि है. मनोहारी सिंह एस डी बर्मन के ओर्केस्ट्रा से
जुड़े और बाद में उनके पुत्र आर डी बर्मन के साथ उन्होंने
लमे समय तक वादक, संगीत सहायक और अरेंजर के रूप
में काम किया.

मनोहारी सिंह कई वाद्य कुशलता के साथ बजाते थे जिनमें
से एक बांसुरी भी है.

मनोहारी सिंह ने बासु चक्रवर्ती के साथ मिल के जोड़ी भी
बनाई थी. आज हम आपको इसी जोड़ी के संगीत से सजी
सन १९९२ की फिल्म नर्गिस से एक गाना सुनवाते हैं जिसे
लता मंगेशकर और जगजीत सिंह ने गाया है. इसे लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने.




गीत के बोल:

मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
.
............................................................
Dono ke dil hain majboor-Nargis 1992

Artists:

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Jul 8, 2020

जीना क्या अजी प्यार बिना-धन दौलत १९८०

आज ८ जुलाई अभिनेत्री नीतू सिंह का जन्मदिन है. इस
अवसर पर सुनते हैं फिल्म धन दौलत से एक गीत. इस
फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर ने काम किया था.

जीवन विडंबनाओं का नाम है जिसमें अजीब मोड और
पेचीदा स्तिथियाँ सामने आती रहती है. इस साल हमें
बॉलीवुड से काफी दुखद ख़बरें मिलीं. जीवन मरण का ये
चक्र दुनिया में सभी जगह निरंतर जारी है मगर जिस
हिस्से को कवरेज ज़्यादा मिलता है वहाँ से हमें ज़्यादा
ख़बरें सुनाई और दिखलाई देती हैं.

आज फिल्म की अभिनेत्री का जन्मदिन है और फिल्म
धन दौलत के निर्देशक हरीश शाह ७ जुलाई को अलविदा
कह गए थे. निर्माता हरीश शाह की बतौर निर्देशक पहली
फिल्म थी-धन दौलत. नामचीन लोगों के जन्मदिन हमें
याद रह जाते हैं मगर कम सुने नामों की सुध लेने वाले
मीडिया में गिने चुने लोग ही हैं.

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी तर्ज़
बनाई है आर डी बर्मन ने. इसे गाया है किशोर कुमार और
आशा भोंसले ने.




गीत के बोल:

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके और बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना

सपने पूरे हुए आज दिन फिरते नहीं देरी
सुन ओ मेरे हसीं आज एक तू ही नहीं
साडी दुनिया है मेरी
सपने पूरे हुए आज दिन फिरते नहीं देरी
सुन ओ मेरे हसीं आज एक तू ही नहीं
सारी दुनिया है मेरी
हाँ मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना

सोने चांदी का वो दिल क्या
जो न दिल के काम आये
यहाँ तो तेरी कसम प्यार वालों में सनम
अपना पहला नाम आये
सोने चांदी का वो दिल क्या
जो न दिल के काम आये
यहाँ तो तेरी कसम प्यार वालों में सनम
अपना पहला नाम आये
मिली दुनिया तो मजा है के मिले दिल भी
बिंदिया भी चमके तो बजे पायल भी

जीना क्या अजी प्यार बिना
जीवन के यही चार दिना
धन दौलत बिना चले मगर
ज़िन्दगी ना चले यार बिना
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
………………………………………….
Jeena kay aji pyar bina-Dhan daulat 1980

Artists: Rishi Kapoor, Neetu Singh

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Jun 12, 2020

मौसम के सरगम को सुन-ख़ामोशी १९९६

जतिन ललित के संगीतमय कैरियर का एक बड़ा मील का
पत्थर है इस फिल्म का संगीत.

भंसाली की इस फिल्म की स्टारकास्ट मुझे थोड़ी बेहतर सी
लगी दूसरी फिल्मों की अपेक्षा. इसमें हेलन, नाना पाटेकर
सीमा बिश्वास और मनीषा कोईराला ने अपने अभिनय का
लोहा मनवाया है.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत जिसे गाया है
कविता कृष्णमूर्ति और श्रद्धा पंडित ने.




गीत के बोल:

मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
तू भी गा तेरे संग गाये सारा जहाँ
गाये जा गाये जा गाये जा

मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
तू भी गा तेरे संग गाये सारा जहाँ
गाये जा गाये जा गाये जा

हर सुर पे दिल यूँ धड़के
के साँसों में अगन भड़के
सुन कर ये सदा
हर सुर पे दिल यूँ धड़के
के साँसों में अगन भड़के
सुन कर ये सदा
ऐसे आज गा ख़ामोशी बोल उथे
पलकें भीग जायें जल बरसे बिना घटा
गाये जा गाये जा गाये जा

मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
तू भी गा तेरे संग गाये सारा जहाँ
गाये जा गाये जा गाये जा

फिर इक दिन ले जायेगा
घुँघट तेरा उठायेगा कोई राजकुमार
फिर इक दिन ले जायेगा
घुँघट तेरा उठायेगा कोई राजकुमार
फिर ये रूप रंग बन जायेगा चमन
होगा अंग अंग एक मस्ती भरी बहार
गाये जा गाये जा गाये जा

मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
मौसम के सरगम को सुन
क्या गा रहा है समाँ
तू भी गा तेरे संग गाये सारा जहाँ
गाये जा गाये जा गाये जा
गाये जा गाये जा गाये जा
………………………………………………..
Mausam ke sargam ko-Khamoshi 1996

Artists: Helen, Manisha Koirala, Nana Patekar, Seema Biswas

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Jun 9, 2020

बड़े भोले हो-अर्धांगिनी १९५९

सिनेमा संसार एक सिद्धांत पर चलता है-चमक दमक. इस बात के
चलते जो परदे के पीछे के सृजनकर्ता होते हैं वो सामने नहीं आ पाते
या आते भी हैं तो उन्हें वो प्रसिद्धि और सम्मान नहीं मिलता जिसके
वे अधिकारी होते हैं.

फिल्म निर्माण में असंख्य लोगों को योगदान होता है और इनमें से
निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के अलावा गायक कलाकारों को
लोकप्रियता मिल जाती है. तकनीकि से संबद्ध लोग भी लाईमलाईट
में आ जाते हैं जैसे कैमरामैन, साउंड रिकॉर्डिंस्ट वगैरह. आज के युग
में काफी जानकारी उपलब्ध है किसी भी फिल्म निर्माण से सम्बंधित.

ये चलन कुछ सालों से ही देखने में आया है जब से इस इंटरनेट नाम
की दुनिया पे सोशल मीडिया ने अपने पैर पूरी तरह से पसारे. उसके
पहले तक काफी लोग इन सब बातों को जैसे बंदरिया मरे बच्चे को
चिपटाए रखती है, वैसे ही चिपकाये रखते थे. इनमें से कई जानकार
तो ज्ञान को अपने साथ ही ले गए. कुछ जो वानप्रस्थ तक पहुँच चुके
हैं उन्होंने किताबें छपा के इस ज्ञान को अपने अधिकार क्षेत्र में ले
लिया जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी भी शामिल है.

आज जून महीने की ९ तारीख है. आज के दिन ढेर सारे सेलिब्रिटीज़
और बॉलीवुड कलाकार पैदा हुए थे. आज के दिन पैदा होने वाले प्रसिद्ध
लोगों में पुद्दुचेरी की राज्यपाल किरण बेदी, संगीतज्ञ अनुष्का शंकर,
संगीतज्ञ देबाशीष चक्रवर्ती, टेलीविज़न एक्टर करण वाही, तमिल सिनेमा
की नायिका मोहिनी, तेलंगाना शकुंतला, निर्माता निर्देशक रजत रवैल,
संगीतकार वसंत देसाई, गायिका-नायिका बी जयश्री, सुंदरी मनप्रीत ब्रार,
और महिला क्रिकेटर नेहा शर्मा हैं.

बॉलीवुड की बात करें तो नायिकाओं में अमीषा पटेल, सोनम कपूर,
मराठी भाषी अभिनेत्री पल्लवी सुभाष शामिल हैं. फिल्मकारों की बात
करें तो डूंडी उर्फ डूंडेश्वर राव पोथिना आज ही के दिन १९३२ में पैदा
हुए थे. जीतेन्द्र की फिल्म फ़र्ज़ और मिथुन की फिल्म साहस के
सह निर्माता वही थे सुन्दरलाल नाहटा के साथ.
आज हम आपको वसन्त देसाई के संगीत निर्देशन में तैयार एक
गीत सुनवायेंगे. इस गीत को लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और
इसे गाया है लता मंगेशकर ने. वसंत देसाई शुद्धतावादी परंपरा
के संगीतकार थे जिहोने भारतीयता को बनाये रखा अपने संगीत
में.

कृष्ण कन्हाई की मनोहारी सूरत से ये गीत शुरू होता है. नायिका
कन्हाई से वार्तालाप कर रही है और अपनी व्यथा उड़ेल रही है.
बंसी होंठ से लगा के अब कान्हा बोले भी तो क्या बोलें-इस बात
का सुन्दर वर्णन है दूसरे अंतरे में.





गीत के बोल:

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
तन मन मेरा सबकी ठोकर से चूर
फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई
हो ओ ओ फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

जलते आँसू जलते आँसू
जलते आँसू भीगे नयनों का हार
देखा तो है सब कुछ तुमने गोपाल
फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुस्काई
हो ओ ओ फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुसकाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो

कित जाऊँ हो ओ ओ
कित जाऊँ मैं मुख तो खोलो ज़रा
चोर बन के चुप क्यूँ हो बोलो ज़रा
अच्छी ये बंसी की ओट लगाई
हो ओ ओ अच्छी ये बंसी की ओट लगाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो
………………………………….
Bade bhole ho-Ardhangini 1959

Artists: Meena Kumari,

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Apr 13, 2020

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी-चांदी सोना १९७७

यकीनन, मोती बहुमूल्य और नायाब रत्न है. सीपियों के
गर्भ में नवजात शिशु की तरह पले मोती की चमक के
आगे सब रत्न फ़ीके हैं. इसमें कुदरती चमक होती है.
मोती को चमकाने के लिये किसी ग्राइंडर पर घिसने की
ज़रूरत नहीं होती.

कवियों और शायरों ने इसे ऊंचा दर्ज़ा दिया है उसकी
एक वजह है जो ऊपर हमने बतलाई और दूसरी ये है
कि गहरे पानी में से इसे निकालना टेढ़ी खीर है.

अब तो तकनीकि और संसाधन बहुतेरे हो गए हैं जिनकी
मदद से नदी और समुद्र की गहराई की थाह ली जा
सकती है मगर कई ऐसे हिस्से बाकी हैं अभी भी इस
पृथ्वी के जहाँ तक मानव की पहुँच नहीं है. ये ना हो
तो ही अच्छा है. ना जाने क्या प्राकृतिक विपदा निकल
आये उसके दुस्साहस के कारण.

किशोर कुमार और आशा भोंसले का गाया हुआ युगल
गीत सुनते हैं फिल्म चांदी सोना से. आशिक़ अफ़सोस
जता रहा है अपनी मुफलिसी का. मुफलिसी पैसों की
ही नहीं, वरन संसाधनों और दिमाग की भी हुआ करती
है. वो इसमें तरह तरह की चीज़ें गिना रहा है जो वो
ला सकता है या कर सकता था. गीत में आशा भोंसले
की केवल एक पंक्ति है.

नायक की भावनाओं को मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने गीत
की मदद दी है.  नायिका जो काफी देर से सेमी-कंफ्यूज्ड
से स्टेट में है अन्तरा शुरू होते ही उसकी चेतना लौटती
है और वो ये देख के खुश होती है-अले ये तो मेले फेव्लेट
राजेश खन्ना वाले अंदाज़ में अपना सर हिला रहा है.



गीत के बोल:

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा ओ

तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
खिलते कभी तो महलों के दर जलते कभी अरमां के दिये
तू हंसती इक गुल की तरह मैं गाता बुलबुल की तरह

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
चाहूं बस इक पल का तराना बन के किसी ग़ुन्चे की सदा
खिल जाता इक पल ही सही धूल का फिर आँचल ही सही

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
चाँदी के सोने के ख़ज़ाने रख दूँ तेरे क़दमों के तले
उठता है तूफ़ान उठे लुटती है तो जान लुटे

आ ओ जानेमन ............... नहीं
मैं तेरे साथ हूँ तो फिर....
……………………………………………….
Socha tha maine to ae jaan meri-Chandi Sona 1977

Artusts: Sanjay Khan, Parveen Babi

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Apr 11, 2020

मेरे लिये...रातों का राजा हूँ-शीर्षक गीत १९७०

हिंदी फिल्मों में शीर्षक गीत बनाने के पीछे एक वजह ये
भी है कि दर्शक अगर सो जाए तो इस गीत को सुन कर
झटका खा के उठ बैठे. कुछ गीत तो ऐसे हैं जिन्हें देख
के दर्शक सो भी जाया करते हैं. ऐसे गीतों को कहते है
बिन-लोरी-सुलाये-गीत.

धीरज कुमार ने अभिनय के क्षेत्र में काफी कोशिश करी
मगर हिट फिल्म का उन्हें इंतज़ार ही रह गया. कई फिल्म
बनाने वालों के पटिये बिक गए होंगे.

निर्देशक ने इस गीत में रिस्क ना लेते हुए वो सब दिखाया
है जो अभिनय ना आने कि सूरत में दिखलाया जाता है.
और वो सब ४० फीट के परदे पर ३०-३५ फीट साइज़ का
दीखता है. ये सब देख कर आगे की कुर्सी पर बैठा दर्शक
उछल पड़ता था. उसे सीट पर छितरे मच्छर खटमल भी
ना रोक पाते.

एक सवाल खड़ा होता है टाईट कपडे पहन कर ये नाचते हैं
तो किसी के भी चर्र कर के फटते नहीं हैं क्या?

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत जिसे गा
रहे हैं रफ़ी. संगीतकार का नाम है आर डी बर्मन.



गीत के बोल:

धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं
मेरे लिए आती है शाम चंदा भी है मेरा ग़ुलाम
धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं

महफ़िल सजे डोलूँ जिधर से
साक़ी बहके मेरी नज़र से
महफ़िल सजे डोलूँ जिधर से
साक़ी बहके मेरी नज़र से
चाहूँ तो अभी खुद चल के आये जाम

मेरे लिए आती है शाम चंदा भी है मेरा ग़ुलाम
धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं

खिड़की खुले मुझे बुलाये
महलों में है मेरे ही साये
खिड़की खुले
खिड़की खुले मुझे बुलाये
महलों में है मेरे ही साये
सोते जागते सब जानें मेरा नाम

मेरे लिए आती है शाम चंदा भी है मेरा ग़ुलाम
धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं

मैनें जवाँ होंठों की लाली
अकसर पलकों से ही चुरा ली
मैनें जवाँ
मैनें जवाँ होंठों की लाली
अकसर पलकों से ही चुरा ली
सारे गुलबदन मुझे करते हैं सलाम

मेरे लिए आती है शाम चंदा भी है मेरा ग़ुलाम
धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं
मेरे लिए आती है शाम चंदा भी है मेरा ग़ुलाम
धरती से सितारों तक है मेरा इंतज़ाम
रातों का राजा हूँ मैं
………………………………………………….
Mere liye…raaton ka raja-Titlesong 1970

Artist: Dheeraj Kumar

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Mar 27, 2020

हे अब्दुल्ला नागिन वाला आ गया-इशारा १९६४

हिंदी फिल्मों में कुछ सिचुएशनल सॉंग्स ऐसे भी बने हैं जो
नियमित रूप से भले ही ना बजते मिलें मगर उन्हें जब भी
सुनो आप आनंदित अवश्य होते हैं.

फिल्म अभिनेता जॉय मुखर्जी के हिस्से कुछ बढ़िया गीत आये
जिन्हें सुन कर उनके समकालीनों को रश्क अवश्य हुआ होगा.
ऐसा ही एक गीत है फिल्म इशारा से जो कि एक युगल गीत
है लता और रफ़ी का गाया हुआ.  मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे
गीत के लिए संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने.




गीत के बोल:

आप गीत पर नागिन डांस करें तब तक बोल हाज़िर
होते हैं.
आ आ आ आ आ आ आ
हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्ला नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की हो
हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला

नागिन जब लचके रहना ज़रा बच के
नागिन जब लचके रहना ज़रा बच के
ये नैना जिसपे मोड दे दीवाना कर के छोड़ दे
दीवानी दिलदार की हो

हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला

हम भी हैं कमाल के जादू नहीं डालते
अरे हम भी हैं कमाल के जादू नहीं डालते
पर अपनी बात बात पे रह जाये नाच नाच के
महफ़िल ये संसार की हो ओ

हे अब्दुल्ला
हे अब्दुल्लाह नागिन वाला आ गया
जादू बन कर छा गया
छेड़े है बीन प्यार की ओ ओ
हे अब्दुल्ला
………………………………………………………………
He Abdullah nagin wala aa gaya-Ishara 1964

Artists: Joy Mukherji, Vaijayantimala

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Mar 23, 2020

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा-आखिरी दांव १९५८

एक संगीतकार दूसरे संगीतकार का मुरीद क्यूँ हो सकता
है. अजी जनाब बिलकुल हो सकता है. सज्जाद हुसैन की
एक धुन- ये हवा ये रात ये चांदनी मदन मोहन को इतनी
भाई कि उन्होंने इस पर एक गीत बना डाला. इसको कहते
हैं असली ट्रिब्यूट.

सज्जाद हुसैन ने गाना गवाया तलत महमूद से तो इधर
आखिरी दांव फिल्म के लिए मदन मोहन ने रफ़ी से गाना
गवाया.

प्रस्तुत गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है और इसे परदे
पर गा रहे हैं शेखर और नूतन से मुखातिब हैं. शम्मी बाजू
में बैठी है. शम्मी के ऊपर फिल्म संगदिल का गीत फिल्माया
गया था. संयोग है दोनों गीतों से शम्मी का कनेक्शन है.

नूतन के चहरे के भाव कुछ ऐसे हैं जैसे कुछ अप्रत्याशित
सा नायक के मुख से निकल के बाहर आ रहा हो. गाने वाले
और सुनने वाले के चेहरों के भाव गीत के अंत में देखिये
आनंद आयेगा.




गीत के बोल:

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
तेरे सामने मेरा हाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

मेरी हर ख़ुशी तेरे दम से है
मेरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है
मेरी हर ख़ुशी तेरे दम से है
मेरी ज़िंदगी तेरे ग़म से है
तेरे दर्द से रहे बेख़बर
मेरे दिल की कब ये मजाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

तेरे हुस्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या ख़बर
तेरे हुस्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या ख़बर
मेरी शाम है तेरी जुस्तजू
मेरी सुबह तेरा ख़याल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

मेरे दिल जिगर में समा भी जा
मेरे दिल जिगर में समा भी जा
रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला
मेरे दिल जिगर में समा भी जा
रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला
के तेरे बग़ैर तो जाने जान
मुझे ज़िंदगी भी मुहाल है

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
तेरे सामने मेरा हाल है
तेरी इक निगाह की बात है
मेरी ज़िंदगी का सवाल है
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा
……………………………………………………
Tujhe kya sunaoon main dilruba-Aakhiri daon 1958

Artist: Nutan, Shekhar

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Mar 10, 2020

दूर से तेरा दीवाना-रातों का राजा १९७०

प्रेरणा कहीं से भी और किसी भी चीज़ से ली जा सकती
है. बानगी देखिये इस गीत की जिसमें आपको भारतीय रेल,
अंग्रेजी नृत्यों की पैरोडी, गधे की दुलत्ती, लंगडी के खेल और
येज्दी मोटरसाइकिल की किक समेत रशियन बेले वगैरह
याद आएगा.

मनोरंजक गीत है और हमें फर्क नहीं पड़ता ये किस पर
फिल्माया गया है. मजरूह सुल्तानपुरी के बोलों से सजे
इस गीत का संगीत तैयार किया है पंचम ने और इसे
गाया है रफ़ी संग आशा भोंसले ने.



गीत के बोल:

दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना
हो ओ ओ ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना
ओ ओ ओ ओ दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना
हो ओ ओ हो हो ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना

मालूम है कह रहा क्या दिल
ना ना
साजनिया चल कहीं ले चल
अजी कहाँ कहाँ
अरे मालूम है कह रहा क्या दिल
अरे ना ना
साजनिया चल कहीं ले चल
अजी कहाँ कहाँ
प्यार के मस्ताने जब चल पड़े दीवाने
मंजिल कहाँ ये कौन जाने
हो ओ ओ ओ साथ ही रहना सैयां
रस्ता है अनजाना

हू ऊ ऊ दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना
हो ओ ओ ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना

जब हमको छू लिया तुमने
ओ हो
अजी सुनते हो क्या किया तुमने
अजी कहो कहो
जब हमको छू लिया तुमने
अरे हो हो
अजी सुनते हो क्या किया तुमने
अजी कहो कहो
यूँ लगे है मिल के तन मन में हलके हलके
जैसे तेरा खुमार छलके
हो ओ ओ हाथ जो लग जायेगा छलकेगा पैमाना


हो ओ ओ ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना
ओ ओ ओ ओ दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना

अब तो है हाल ये जानी
हूँ हूँ
बिन तेरे मैं कहीं का नहीं
अब तो है हाल ये जानी
अरे हाँ हाँ
बिन तेरे मैं कहीं का नहीं
अरे नहीं नहीं
इंतज़ार कर के तुमने तो प्यार कर के
मारा है बेकरार कर के
हो ओ ओ मैं तुमको बहलाऊँगी तुम मुझको बहलाना

दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना
हो ओ ओ ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना
ओ ओ ओ ओ दूर से तेरा दीवाना आया है रुक जाना
हो ओ ओ हो हो ओ आज सजन मेरी आँखों में तेरा ही अफसाना
………………………………………………………..
Door se tera deewana aaya-Raaton ka raja 1970

Artists: Dheeraj Kumar, Vaishali

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Jan 29, 2020

कोई नहीं है-पत्थर के सनम १९६७

फिल्म उद्योग में हर प्रमुख संगीतकार, सिवाए नैयर के,
ने लता मंगेशकर के लिए स्पेशल गाने बनाये. इनमें
सी रामचंद्र और अनिल बिश्वास ऐसे हैं जिन्होंने कम
शोर वाले या यूँ कहें कम वाद्य यंत्रों वाली मधुर रचनाएँ
बनाईं. उसके बाद आता है नौशाद, एस डी बर्मन और
मदन मोहन का नाम जिन्होंने कम और ज्यादा संगीत
दोनों तरह की धुनें बनाई लता के गाये गानों के लिए.

शंकर जयकिशन के गीतों में ओर्केस्ट्रा लबालब होता था.
अधिकाँश गीतों के शुरू में भारी संगीत होता और बाद में
गीत सिंपल सा सुनाई देता. उनके गीतों में से संगीत
के टुकड़ों का अलग समझ पाना संभव नहीं होता. हम
कई जगह पर सुन चुके हैं और पढ़ चुके हैं कि ६० के
दशक में पदार्पण करने वाली लक्ष्मी प्यारे की जोड़ी भी
शंकर जयकिशन की बड़ी फैन रही है. उन्होंने भी उसी
लबालब संगीत वाली परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए जो
गाने बनाये उसमें पूरे गानों में संगीत लबालब नज़र
आने लगा.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा और लक्ष्मी प्यारे
द्वारा संगीतबद्ध गीत लाता मंगेशकर की आवाज़ में.



गीत के बोल:

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ कोई नहीं हैं फिर भी हैं मुझको
क्या जाने किस का इंतज़ार
हो ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार

सोचूँ ये हैं उंगलियाँ किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
छुये जो डाली बहार की
सोचूँ ये हैं उंगलिया किसके प्यार की
गालों को छुए जो डाली बहार की
कौन है ए हवा ए बहार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
बालों में सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी
सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी हो ओ ओ ओ ओ
पानी में छबि मैं देखूं खड़ी खड़ी
फिर बनूँ आप ही बेकरार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार

वादी में निशान मेरे ही पांव के
फूलों पे हैं रंग मेरी ही छांव के
हैं रंग मेरी ही छांव के हो ओ ओ ओ ओ
वादी में निशान मेरे ही पांव के
फिर भी क्यूँ आये ना ऐतबार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार
हो ओ ओ ओ ओ ये भी ना जानूं लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार
क्या जाने किसका इंतज़ार
क्या जाने किसका इंतज़ार
……………………………………………
Koi nahin hai-Patthar ke sanam 1967

Artist: Waheeda Rehman

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Jan 16, 2020

आप चाहें मुझको-प्यार का मौसम १९६९

आम आदमी की भाषा में कहें तो ये गीत उस श्रेणी
में आता है-नायिका का भाव खाना. अजब गज़ब सी
श्रेणियाँ बन जाती हैं गीतों की जिन्हें देख के अलज़ेबरा
की श्रेणियाँ भी शर्मा जाएँ.

सुनते हैं फिल्म प्यार का मौसम से एक गीत जिसे
लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने राहुल देव बर्मन की
धुन के लिए और इसे गाया है लता मंगेशकर ने.

गीत में विलायती हेलन को धता बताने के लिए नायिका
और उसकी टोली यकायक प्रकट हो जाती है और माहौल
का देसीकरण हो जाता है.



गीत के बोल:

आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको
ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहों में
आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको
ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहो में

हाय रे गरूर आपका
सूझे मुझे भी दिल्लगी
हो ओ ओ मैं जो एक दिन तुम्हारी
बेतुकी अदा पे हंस पड़ी
तुम समझे मैं मरती हूँ तुमपे
तुम समझे मैं मरती हूँ तुमपे
आपकी समझ को क्या कहूँगी

आ आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको
ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहों में

हो तुम किस ख्याल में
अरे पूजते है सब यहाँ मुझे
हो ओ ओ देखूं सूरत तुम्हारी
फुरसत ही कहा मुझे
ये भी जानो एहसान मेरा
ये भी जानो एहसान मेरा
एक बार भी जो देख लूं जी

आ आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको
ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहों में
आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको
ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहों में
आपसे पड़े है कई राहों में
……………………………………………
Aap chahen mujhko-Pyar ka mausam 1969

Artists: Asha Parekh, Shashi Kapoor

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Jan 13, 2020

ए दुश्मन जान-पत्थर के सनम १९६७

नाईट सूट पहनने की आदत हमारे देश की जनता
को अभी भी नहीं है. कुरता पाजामा भी एक प्रकार
का नाईट सूट ही है. इसे दिन में भी पहना जा
सकता है. फिल्मों ने नाईट सूट को काफी लोकप्रिय
कराया है. जैसे मोगली सीरियल ने चड्डी को कराया
और जिसे देखो आज चड्डी पहने मोबाइल काण में
लगा के सड़क पर चहलकदमी करने लगता है. चड्डी
को तो एक देवांग पटेल के गाये बोनी एम के गाने
की पैरोडी ने भी लोकप्रिय कराया है.

कुरता पाजामा पहनने वाले ज्यादा स्मार्ट होते हैं या
कुरता पाजामा पहनने से आदमी ज्यादा स्मार्ट हो
जाता है, मुझे समझ नहीं आया अभी तक. नेता
कुरता पाजामा पहन के ही पब्लिक को क्यूतिया
बना रहे हैं सालों से.

आपने हाइवे पर कर्मचारियों को कपड़ों के ऊपर
जैकेट पहने देखा होगा. उसकी डिजाईन इसी गीत
से प्रेरित है शायद.

कुछ नैयर के गीत और कुछ पश्चिमी एशिया का
संगीत सुन कर लक्ष्मी प्यारे ने इस धुन की रचना
की होगी ऐसा मेरा अनुमान है. मजरूह का गीत है
और इसे आशा भोंसले गा रही हैं.



गीत के बोल:

आ ये बहार
हां
ये समा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

छांव भी जो सनम तेरी
छांव भी जो सनम तेरी
मिल गई मेरी छांव से
डाली बदन की हुई हरी
खिल गई मैं अदाओं से
देखो मेरी अंगड़ाईयाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

आ जा आ जा मत देर कर
आ जा आ जा मत देर कर
मस्ती है अभी चाल में
आया भी मेरी जां तू अगर
आते आते कई साल में
तब तक जियूँगी कहाँ आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ये बहार
गालों पे लट हां बेकरार
गोरा बदन हां प्यार प्यार
तुझको पुकारे तू नहीं सुनता
क्या करूं अल्लाह हा आ

ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
ए दुश्मन-ए-जां
चल दिया कहाँ
..................................................................
Ae dushman jaan-Patthar ke sanam 1967

Artists: Mumtaz, Manoj Kumar

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Jan 5, 2020

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले-आखिरी दांव १९५८

जो गीत हमसफ़र शब्द से शुरू होते हैं या जिनके
मुखड़े में ये शब्द आता है वे कुछ अलग से सुनाई
नहीं देते आपको. इधर तो गीत ही इस शब्द से शुरू
हो रहा है. नशीला सा गीत है. हालांकि इस गाने की
शुरूआत तड़प वाली आवाज़ से होती है.

मनमोहक धुन है और आपको भाव प्रकट करने वालों
से हमदर्दी हो जाती है. इस गीत का प्रभाव बड़े परदे
पर सोचिये, कैसा होता होगा. मल्टीप्लेक्स के ज़माने में
हमें पुरानी फ़िल्में बड़े परदे पर देखने का मौका ही नहीं
मिलता.

मजरूह सुल्तानपुरी के गीत को रफ़ी और आशा गा रहे
हैं मदन मोहन की धुन पर.




गीत के बोल:

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
रिश्ते-नाते वो सारे तोड़ चले
हमसफ़र साथ

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ

रास्ता साफ़ था तो चलते रहे
साथ हँसते रहे मचलते रहे
मोड़ आया तो मुँह को मोड़ चले
हमसफ़र साथ

सपने टूटे पड़े हैं राहों में
सपने टूटे पड़े हैं राहों में
दर्द की धूल है निगाहों में
दिल पे क़दमों के नक़्श छोड़ चले
हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
हमसफ़र साथ

जब उन्हें हमसे प्यार ही न रहा
रोयें क्या इंतज़ार भी न रहा
हम भी दामन को अब निचोड़ चले

हमसफ़र साथ अपना छोड़ चले
रिश्ते-नाते वो सारे तोड़ चले
हमसफ़र साथ
.......................................................
Hamsafar sath apna chhod chale-Aakhiri Daon 1958

Artists: Nutan, Shekhar

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Jan 4, 2020

अब दवा की ज़रूरत नहीं-लाल दुपट्टा मलमल का १९८९

मरीज ठीक हो जाए तो गा सकता है-अब दवा की
ज़रूरत नहीं. या जब रोग लाइलाज हो जाए तब ये
कहा जा सकता है.

दवा के अलावा भी कई चीज़ें होती हैं जिनमें दुआ
सबसे पहले आती है. इस गीत में ऐसा क्या है कि
मरीज को दवा की ज़रूरत नहीं, सुनते हैं.

मजरूह सुल्तानपुरी की रचना है और आनंद मिलिंद
का संगीत. मोहम्मद अज़ीज़ संग अनुराधा पौडवाल
ने इस गीत को गाया है.



गीत के बोल:

अब दवा की ज़रूरत नहीं
अब दवा की ज़रूरत नहीं
मुझको दर्द-ए-जिगर के लिए
इक नज़र तेरी मेरे मसीहा
काफ़ी है उम्र भर के लिए
हो काफ़ी है उम्र भर के लिए
अब दवा की ज़रूरत नहीं
मुझको दर्द-ए-जिगर के लिए
इक नज़र तेरी मेरे मसीहा
काफ़ी है उम्र भर के लिए
हो काफ़ी है उम्र भर के लिए
………………………………………………..
Ab dawa ki zaroorat nahin-Lal dupatta malmal ka 1989

Artists: Sahil Chaddha, Veverly Wheeler

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Jan 1, 2020

अच्छा जी माफ़ कर दो-मुसाफ़िरखाना १९५५

इस ब्लॉग के पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं.

नया साल केवल रेसोल्यूशंस वाला हो ज़रूरी नहीं है.
पिछले साल के खोये-पाए का हिसाब और उसपर
डेफिनिटिव एक्शन का भी है. पुराना छोड़ने और
नया पकड़ने का भी है.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत
जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. इस गीत का
संगीत तैयार किया है ओ पी नैयर ने.

किसी ज़माने में बंदर और बंदरिया का नाच आपने
देखा होगा. मदारी नचाया करता था मजमा लगा कर.
जिस किसी ने नहीं देखा है वो मीडिया के कुछ एक
कार्यक्रम देख के समझ सकता है.



गीत के बोल:

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
………………………………………………
Achchha ji maaf kar do-Musafirkhana 1955

Artists: Karan Deewan, Shyama

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Dec 20, 2019

ओ तेरी दुनिया कैसी-चांदी सोना १९७७

जीवन दर्शन वाले गीत तो बहुत बने हैं फिल्म जगत में
और ये समय समय पर किसी दैवीय प्रेरणा से बनते हैं.
इनका उद्देश्य होता है जो आम जनता को सन्देश देता है
अपने अपने तरीके से. इंसान समझना ही नहीं चाहता कि
जीवन का सार क्या है. बड़ी से बड़ी एल ई डी टी वी
लेने में तो कतई नहीं है.

समय चक्र चलता रहता है, शब्द बदलते रहते हैं मगर
मजमून वही रहता है, गौर फरमाएं. जीवन वो जो किसी
के काम आये, चाहे वो पर्यावरण के ही लिए क्यूँ ना हो.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ मधुर गीत
मुकेश की आवाज़ में जिसका संगीत राहुल देव बर्मन ने
तैयार किया है. राज कपूर इसे परदे पर गा रहे हैं.



गीत के बोल:

तुझे भूल के माटी की पुतली पर
कोई मन की खिड़की खोल रहा
जिसमें तेरा नाम तुले उसमें
जग सोना चाँदी तोल रहा

अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
यारा दुनिया कैसी तू जाने

तूने जब दुनिया ये बनाई
धरती की चादर फैलाई
चन्दा सूरज की जोत जलाई
तूने जब दुनिया ये बनाई
धरती की चादर फैलाई
चन्दा सूरज की जोत जलाई
ओ यारा ओ यारा
पर जिसके लिए जग तूने रचा
वो कर के इसे वीरान रहा
धरती की चादर छीन चुका
अब चाँद और सूरज माँग रहा
ये तेरे बन्दों के अफ़साने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने

उल्टी गंगा जो बहे जोगी चुप कैसे रहे
अब देवता कुछ भी नहीं
मानवता कुछ भी नहीं
यारों से यारी गई वो दिलदारी गई
ऐसी छाया तले हम दीवाने भले
कैसा प्यार कहाँ की दोस्ती कैसा रिश्ता नाता
तेरे होते इंसान तेरा शैतान हुआ ओ दाता
पर ये क्यूँ कह रहे हम दीवाने
तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने

जब दिल में पराया दर्द उठे
दूजे के तू काम आये यारा
सब जान मिला जीवन तुझको
चाँदी सोने से भी प्यारा
वरना धन दौलत चीज़ ही क्या है
कहे मियाँ नज़ीर का इकतारा
सब ठाठ पड़ा रह जायेगा
जब लाद चलेगा बंजारा
काम आयेंगे यही प्यार के नज़राने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
…………………………………………………..
O teri duniya kaisi-Chandi Sona 1977

Artists: Raj Kapoor, Pran

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