फिर तुम्हारी याद आई-रुस्तम सोहराब १९६३
एक मधुर गीत सुनवाया था कुछ अरसे पहले. अब सुनते हैं इसी
फिल्म से तीन गायकों का गाया एक गीत जिसमें कोरस भी है.
फिल्म में रुस्तम के रोल में पृथ्वीराज कपूर हैं और सोहराब के रोल
में प्रेमनाथ. ऐतिहासिक फिल्म का कथानक रोचक है और वीरता के
कारनामों से भरा पड़ा है. डरावनी फ़िल्में बनाने के लिए मशहूर रामसे
प्रोडक्शंस ने फिल्म का निर्माण किया था.
प्रस्तुत गीत कमर जलालाबादी का लिखा हुआ है जिसके संगीतकार
हैं सज्जाद. रफ़ी, मन्ना डे और सआदत खान ने इसे गाया है. हिंदी
फिल्म संगीत के उम्दा नमूनों में इस गीत को भी शामिल कर लीजिए
गायकी, वाद्य यंत्र हर चीज़ नपी तुली है इस गीत में साथ में सज्जाद
के मेंडोलिन का जादू तो फ्री है ही.
गीत के बोल:
फिर तुम्हारी याद आई ऐ सनम ऐ सनम
फिर तुम्हारी याद आई ऐ सनम ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
हाल-ए-दिल यार को लिखूँ कैसे
हाथ दिल से जुदा नहीं होता
किस तरह उनको बताएं अपना ग़म ऐ सनम
किस तरह उनको बताएं अपना ग़म ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
तुम मेरे दिल में मेरी आँखों में हो
तुम मेरे ख़्वाबों मेरी आहों में हो
दूर रह कर भी जुदा होंगे न हम ऐ सनम
दूर रह कर भी जुदा होंगे न हम ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
अल्लाह क़सम अल्लाह क़सम अल्लाह क़सम
जबसे देखी सूरत उनकी हम शमा जलाना भूल गए
रुख़सार की सुर्खी क्या कहिए फूलों का फ़साना भूल गए
बस इतनी कहानी है अपनी जब आँख मिली बेहोश हुए
दामन से हवा तुम कर न सके हम होश में आना भूल गए
कितने प्यारे हैं मोहब्बत के सितम ऐ सनम
कितने प्यारे हैं मोहब्बत के सितम ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
क्या लुत्फ़ आ रहा था
क्या लुत्फ़ आ रहा था
क्या लुत्फ़ आ रहा था दिलबर की दिल्लगी से
नज़रें भी थी मुझी पर परदा भी था मुझी से
क्या हसीं तसवीर थी अल्लाह क़सम ऐ सनम
क्या हसीं तसवीर थी अल्लाह क़सम ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
अल्लाह क़सम अल्लाह क़सम अल्लाह क़सम
फिर तुम्हारी याद आई ऐ सनम ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
हम न भूलेंगे तुम्हें अल्लाह क़सम
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Phir tumhari yaad aayi-Rustam Sohrab 1963

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