अंगडाईयाँ ले ले कर-स्वीकार १९७३
किया था -हरीश उपाध्याय और सी डी शाह. फिल्म में महेंद्र संधू
और हंसा मेकर प्रमुख कलाकार हैं. कुछ और कलाकार हैं अनजाने
से -नमित कपूर, राज मेहरा, गुलशन अरोड़ा लेकिन एक नाम जाना
पहचाना है और वो है अवतार कृष्ण हंगल का जिन्हें हम ए.के. हंगल
के नाम से अधिक पहचानते हैं.
फिल्म के निर्देशक हैं सुधेंदु रॉय जिन्होंने सन १९७१ की फिल्म उपहार
का निर्देशन किया था. सुधेंदु की एक और फिल्म सन १९७३ में प्रदर्शित
हुई जिसका नाम है सौदागर. ताराचंद बडजात्याद्वारा निर्मित उपहार में
जया भादुड़ी और सौदागर में अमिताभ बच्चन ने काम किया था. शाह
और उपाध्याय की जोड़ी ने एक और फिल्म का निर्माण किया थे इसके
पूर्व बनफूल जिसमें जीतेंद्र नायक हैं. फिल्म थोडा चर्चित थी और इसके
गाने भी काफी बजे. बनफूल और स्वीकार दोनों फिल्मों में लक्ष्मी प्यारे
का संगीत है. सुधेंदु रॉय एक नामचीन आर्ट डायरेक्टर रह चुके हैं. १००
के लगभग बड़ी फिल्मों में उन्होंने कला निर्देशन का काम किया है.
आज आपको स्वीकार से आशा भोंसले का थोडा चर्चित गीत सुनवा रहे हैं
जो किसी ज़माने में आकाशवाणी के कार्यक्रमों में बजा करता था. गीत
में एक शब्द है-हरजाई जो ‘ह’ और रजाई को मिलाने से भी बन जाता
है.
गीत के बोल:
अंगडाईयाँ ले ले कर तन्हाईयों में अक्सर
मैं सोचती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
अंगडाईयाँ ले ले कर तन्हाईयों में अक्सर
मैं सोचती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
सुलगे रंग रूप मेरा पानी में आग जैसा
चन्दन से इस बदन से लिपटे कोई नाग जैसा
रुसवाइयों से दर कर परछाइयों से छुप कर
कुछ ढूंढती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
सपनों में हो गई है सजन से बात जैसे
लगता है आ रही है मेरी बारात जैसे
शहनाईयां ये सुन कर शहनाइयों की धुन पर
मैं झूमती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
जाने वो प्रीत अपनी जाने परायी हो
क्या हो जो मीत मन का थोडा हरजाई हो
हरजाईयों से मिल कर गहराइयों में खो कर
मैं सोचती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
अंगडाईयाँ ले ले कर तन्हाईयों में अक्सर
मैं सोचती रहती हूँ
कहीं प्यार हो ना जाए इकरार हो ना जाये
ए दिल ए दिल
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Angdaiyan le le kar-Sweekar 1973

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