ओ महबूबा-संगम १९६४
कार्यक्रमों के नियमित हुआ करते थे उन्हें हम ओर्केस्ट्रा हिट
कह के पुकारते हैं.
हसरत जयपुरी के लिखे गीत को मुकेश ने गाया है. परदे पर
फिल्म के तीनों प्रमुख पात्र दिखलाई देते हैं. गीत में आये शब्द
मंजिल-ए-मक़सूद का अर्थ लक्ष्य से लगाया जा सकता है जिसे
गीत के अंत में नायक द्वारा किये गए एक कारनामे से समझा
जा सकता है.
गीत के बोल:
ओ महबूबा ओ महबूबा ओ महबूबा
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
किस बात से नाराज़ हो किस बात का है ग़म
किस सोच में डूबी हो तुम हो जायेगा संगम
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
गुज़रूँ मैं इधर से कभी गुज़रूँ मैं उधर से
मिलता है हर इक रासता जा कर तेरे दर से
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
बाहों के तुझे हार मैं पहनाऊँगा इक दिन
सब देखते रह जायेंगे ले जाऊँगा इक दिन
बाहों के तुझे हार मैं पहनाऊँगा इक दिन
सब देखते रह जायेंगे ले जाऊँगा इक दिन
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
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O mehbooba-Sangam 1964
Artists: Raj kapoor, Rajendra Kumar, Vaijayantimala
