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Jun 24, 2017

हर दिल जो प्यार करेगा-संगम १९६४

आपको कुछ पोस्ट पहले एक गीत सुनवाया था जिसके मुखड़े
से एक फिल्म का नाम निकल आया था. आज सुनते हैं ऐसा
ही एक और गीत. हर दिल जो प्यार करेगा नाम से भी एक
फिल्म बन चुकी है.

फिल्म संगम का ये गीत तीन गायकों ने गाया है और गीत
फिल्म के तीनों प्रमुख कलाकारों पर फिल्माया गया है. इसमें
राज कपूर, राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला दिखाई देंगे आपको.

शैलेन्द्र के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है शंकर जयकिशन ने.
लता मंगेशकर, मुकेश और महेंद्र कपूर ने इसे गाया है. गीत का
आधुनिक वर्ज़न कुछ यूँ बनाया जा सकेगा-हर दिल जो प्यार
करेगा वो कपडे धोयेगा.



गीत के बोल:

हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा

आप हमारे दिल को चुरा के आँख चुराये जाते हैं
ये इक तरफ़ा रस्मे वफ़ा हम फिर भी निभाये जाते हैं
चाहत का दस्तूर है लेकिन आपको ही मालूम नहीं
जिस महफ़िल में शमा हो परवाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा

भूली बिसरी यादें मेरे हँसते गाते बचपन की
रात बिरात चली आतीं हैं नींद चुराने नैनन की
अब कह दूँगी, करते करते कितने सावन बीत गये
जाने कब इन आँखों का शरमाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा

अपनी अपनी सब ने कह ली लेकिन हम चुपचाप रहे
दर्द पराया जिसको प्यारा वो क्या अपनी बात कहे
ख़ामोशी का ये अफ़साना रह जायेगा बाद मेरे
अपना के हर किसी को बेगाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा
……………………………………………………….
Har dil jo pyar karega-Sangam 1964

Artists: Raj Kapoor, Vaijayantimala, Rajendra Kumar

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Jan 28, 2017

ओ महबूबा-संगम १९६४

आज एक और ओर्केस्ट्रा हिट सुनते हैं. वे गाने जो ओर्केस्ट्रा
कार्यक्रमों के नियमित हुआ करते थे उन्हें हम ओर्केस्ट्रा हिट
कह के पुकारते हैं.

हसरत जयपुरी के लिखे गीत को मुकेश ने गाया है. परदे पर
फिल्म के तीनों प्रमुख पात्र दिखलाई देते हैं. गीत में आये शब्द
मंजिल-ए-मक़सूद का अर्थ लक्ष्य से लगाया जा सकता है जिसे
गीत के अंत में नायक द्वारा किये गए एक कारनामे से समझा
जा सकता है. 



गीत के बोल:

ओ महबूबा ओ महबूबा ओ महबूबा
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद

ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद

किस बात से नाराज़ हो  किस बात का है ग़म
किस सोच में डूबी हो तुम  हो जायेगा संगम

ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद

गुज़रूँ मैं इधर से कभी  गुज़रूँ मैं उधर से
मिलता है हर इक रासता  जा कर तेरे दर से

ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद

बाहों के तुझे हार मैं पहनाऊँगा इक दिन
सब देखते रह जायेंगे  ले जाऊँगा इक दिन
बाहों के तुझे हार मैं पहनाऊँगा इक दिन
सब देखते रह जायेंगे  ले जाऊँगा इक दिन

ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
वो कौन सी महफ़िल है जहाँ तू नहीं मौजूद
ओ महबूबा ओ महबूबा
तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद
……………………………………………………..
O mehbooba-Sangam 1964

Artists: Raj kapoor, Rajendra Kumar, Vaijayantimala

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Jan 14, 2017

ओ मेरे सनम-संगम १९६४

सन १९६४ की फिल्म संगम की कहानी इन्दर राज आनंद
ने लिखी थी. इन्दर राज आनंद राज कपूर से आग फिल्म
के ज़माने से जुड़े थे. कई फिल्मों के लिए उन्होंने संवाद
भी लिखे. अमिताभ बच्चन और मीनाक्षी शेषाद्री अभिनीत
फिल्म शहंशाह की कहानी भी उन्होंने लिखी थी जिसका
निर्देशन उनके पुत्र टीनू आनंद ने किया था.

संगम फिल्म से एक गीत सुनते हैं जिसमें नायक नायिका
एक दुसरे से सवाल जवाब कर रहे हैं. अतीत की परछाइयाँ
कई बार संबंधों में दरार उत्पन्न कर देती हैं. विश्वास एक
बहुत बड़ी दवा है ऐसे समय. समर्पण का कोई पैमाना नहीं
होता ये तो महसूस की जाने वाली बात है. गीत कहानी का
पूरक गीत है अर्थात सिचुएशनल गीत है मगर लोकप्रिय भी
है. इसे मुकेश और लता ने गाया है. शैलेन्द्र के बोल हैं और
शंकर जयकिशन का संगीत.



गीत के बोल:

ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम
ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम

तन सौंप दिया मन सौंप दिया
कुछ और तो मेरे पास नहीं
जो तुम से है मेरे हमदम
भगवान से भी वो आस नहीं

भगवान से भी वो आस नहीं
जिस दिन से हुए एक दूजे के
इस दुनिया से अनजान है हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम

ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम
ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम

सुनते हैं प्यार की दुनिया में
दो दिल मुश्किल से समाते हैं
क्या गैर वहाँ अपनों तक के
साये भी न आने पाते हैं
साये भी न आने पाते हैं
हमने आखिर क्या देख लिया
क्या बात है क्यों हैरान है हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम

ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम

मेरे अपने अपना ये मिलन
संगम है ये गंगा जमुना का
जो सच है सामने आया है
जो बीत गया एक सपना था
जो बीत गया एक सपना था
ये धरती है इन्सानों की
कुछ और नहीं इन्सान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम

ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम
ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम
दो जिस्म मगर एक जान हैं हम
एक दिल के दो अरमान हैं हम
……………………………………………………..
O mere sanam-Sangam 1964

Artists: Raj Kapoor, Vaijayantimala

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Jan 11, 2017

मेरे मन की गंगा-संगम १९६४

आज सुनते हैं संगम फिल्म से एक गीत. फिल्म की स्टोरी
प्रेम त्रिकोण पर आधारित है. फिल्म का संगीत ऐतिहासिक
है और इस फिल्म के बाद शंकर जयकिशन की जोड़ी में
आई दरार बड़ी खाई में परिवर्तित हो गई. कहा जाता है
अहम का टकराव जोड़ी के दोनों सदस्यों के बीच काफी
पहले शुरू हो चुका था. 

प्रस्तुत गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है और मुकेश इस गीत
के गायक हैं. इतनी तबियत से फिल्म की नायिका इससे
पहले फिल्म नागिन में नहाई थी. गीत के अंत में वही
कहावत याद आती है-गई भैंस पानी में. इसकी पुष्टि के
लिए कुछ कुछ ऐसी आवाजें भी बैकग्राउंड में सुनाई देती हैं.
निर्देशक का सेन्स ऑफ ह्यूमर ज़बरदस्त है. नायक के हाथ
में बैगपाइपर नाम का वाद्य यंत्र है.

राज कपूर एक बड़े शो मैन कहलाये जाते थे. उनकी फ़िल्में
काफी भव्यता लिए होती थीं. फिल्म संगम भी एक ऐसी ही
फिल्म है. उनकी कहानियां नायक के ऊपर ज्यादा केंद्रित
होतीं अगर वे ही फिल्म के नायक होते. फिल्म के अंत में
वे दर्शक की सहानुभूति बटोर ले जाने में कामयाब भी होते
जो दूसरे प्रमुख नायक हर बार हर फिल्म में नहीं कर पाते थे.
जिस नायक के पास निर्देशक वाली आँख हो उसके पास
एक्स्ट्रा टेलेंट होता है किसी भी पात्र को संवार सकने का.



गीत के बोल:

मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना का
बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
अरे बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
नहीं कभी नहीं

कितनी सदियाँ बीत गईं हैं हाय तुझे समझाने में
मेरे जैसा धीरज वाला है कोई और ज़माने में
दिल का बढ़ता बोझ कभी कम होगा के नहीं
बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
अरे बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
हा हा हा हा हा जा जा

दो नदियों का मेल अगर इतना पावन कहलाता है
क्यों न जहाँ दो दिल मिलते हैं स्वर्ग वहाँ बस जाता है
हर मौसम है प्यार का मौसम होगा की नहीं
बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
अरे बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
नही नही नहीं

तेरी ख़ातिर मैं तड़पा ज्यूँ  तरसे धरती सावन को
राधा राधा एक रटन है साँस की आवन जावन को
पत्थर पिघले दिल तेरा नम होगा के नहीं
बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं

मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना का
बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
अरे बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं
जाओ न क्यों सताते हो
होगा होगा होगा
..............................................................
Mere man ki Ganga-Sangam 1964

Artists: Raj Kapoor, Vaijayantimala

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Oct 17, 2009

दोस्त दोस्त न रहा-संगम

संगम फ़िल्म का ये गाना शायद उस फ़िल्म की
सबसे अच्छी धुन पर बनाया गया था। नियति को
कुछ और मंजूर होता है , फ़िल्मफेयर पुरस्कार
दूसरे गाने को मिल गया । इस गाने के पहले तक
लोगों को ये नहीं पता चल पाता था कि संगीतकार
जोड़ी में से किसने कौनसी धुन बनाई। शंकर जयकिशन
के शंकर के बनाये इस गाने को उनके बिगड़ते हुए
सम्बन्ध से जोड़कर भी देखा जाता है। दोस्ती और रिश्तों
के दूसरे पहलुओं पर रौशनी डालता ये गाना मुझे बेहद पसंद है
शायद इसलिए भी की कुछ जगह पर ये गाना मुझे अपने
बीते दिनों की यादें ताजा करवा जाता है।



गाने के बोल:

दोस्त दोस्त न रहा
प्यार प्यार न रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा
ऐतबार न रहा,
ऐतबार न रहा

दोस्त दोस्त न रहा
प्यार प्यार न रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा
ऐतबार न रहा,
ऐतबार न रहा

अमानतें मैं प्यार की,
गया था जिसको सौंप कर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्ही तो थे
जो ज़िन्दगी की राह में बने थे हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्ही तो थे

सारे भेद खुल गए
राजदार न रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा
ऐतबार न रहा,
ऐतबार न रहा

गले लगी सहम सहम
भरे गले से बोलती
वो तुम न थी
तो कौन था , तुम ही तो थी
सफर के वक्त में
पलक पर मोतियों को तौलती
वो तुम न थी
तो कौन था , तुम ही तो थी

नशे की रात ढल गई
अब खुमार न रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा
ऐतबार न रहा
ऐतबार न रहा

दोस्त दोस्त न रहा
प्यार प्यार न रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा
ऐतबार न रहा,
ऐतबार न रहा

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