Jan 25, 2017

रौशन तुम्हीं से दुनिया-पारसमणि १९६३

फिल्म पारसमणि से अगला गीत सुनते हैं. रफ़ी का गाया
ये गीत लोकप्रिय गीतों की श्रेणी में आता है. फिल्म में
इन्दीवर का लिखा हुआ ये एकमात्र गीत है. सरल सा गीत
है मगर गुणवत्ता कायम है.

फिल्म में श्वेत श्याम और रंगीन दोनों किस्म की रीलें हैं.
फिल्म के निर्दशक बाबूभाई मिस्त्री संगीतकारों के चयन
को लेकर काफी उदार रहे. पारसमणि के लिए उनका चयन
सही रहा. अधिकाँश ऐतिहासिक और धार्मिक फ़िल्में बनाने
वाले मिस्त्री अपनी फिल्मों के स्पेशल इफेक्ट्स के लिए
विख्यात थे. सन १९६३ की ही उनकी दूसरी फिल्म सुनहरी
नागिन में कल्याणजी आनंदजी का संगीत है. लक्ष्मी प्यारे
के साथ शायद ये उनकी पहली और आखिरी फिल्म रही.
उनके नियमितों में एस एन त्रिपाठी और कल्याणजी आनंदजी
प्रमुख थे. एक श्रेय उन्हें ज़रूर जाता है उन्होंने कई और
भी संगीतकारों को समय समय पर मौके दिए.



गीत के बोल:

रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक़ तुम्हीं जहाँ की
फूलों में पलने वाली रानी हो गुलसिताँ की
सलामत रहो सलामत रहो
रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक़ तुम्हीं जहाँ की
फूलों में पलने वाली रानी हो गुलसिताँ की
सलामत रहो सलामत रहो हाय सलामत रहो

नाज़ुक हो नाज़ से भी तुम प्यार से भी प्यारी
नाज़ुक हो नाज़ से भी तुम प्यार से भी प्यारी
तुम हुस्न से हसीं हो क्या बात है तुम्हारी
क्या बात है तुम्हारी
आँखों में दो जहां है मालिक हो दो जहां की
सलामत रहो सलामत रहो हाय सलामत रहो

दिल चाहे टूट जाये मेरे दिल से यूँ ही खेलो
दिल चाहे टूट जाये मेरे दिल से यूँ ही खेलो
जीती रहो यूँ ही तुम मेरी भी उम्र ले लो
मेरी भी उम्र ले लो
किस दिन दुआ न माँगी हमने तुम्हारी जाँ की
सलामत रहो सलामत रहो

रौशन तुम्हीं से दुनिया रौनक़ तुम्हीं जहाँ की
फूलों में पलने वाली रानी हो गुलसिताँ की
सलामत रहो सलामत रहो
सलामत रहो सलामत रहो
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Roshan tumhin se duniya-Parasmani 1963

Artists: Mahipal, Geetanjali

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