Feb 5, 2017

कोई नहीं है मेरा-समझौता १९७३

सन १९७३ की फिल्म समझौता में कुछ दिल को झंझोड़ने
वाले गीत हैं जो आज भी उसी तरह से गूंजते हैं जैसे फिल्म
रिलीज़ के वक्त गूंजा करते थे.

आदमी जब बेबस और लाचार हो जाता है तब ऐसे भाव उसके
मन से उठते हैं. उसके जो अपने होते हैं, कुछ के वाकई अपने
होते है तो कुछ के तथाकथित अपने. जो भी हो इनके बिछड़ने
से या दूर होने से या इनके द्वारा चोट मिलने से व्यक्ति व्यथित
होता है. अनिल धवन ने फिल्म में अच्छा अभिनय किया है.

इन्दीवर का लिखा गीत रफ़ी गा रहे हैं कल्याणजी आनंदजी के
संगीत निर्देशन में.




गीत के बोल:

सबके रहते लगता है जैसे
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा
सबके रहते लगता है जैसे
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा
सूरज को छूने निकला था
आया हाथ अँधेरा
कोई नहीं है मेरा

मेरी किस्मत में है ठोकर
यूँ तो बहुत हैं सहारे
मेरे दिल का दीप बुझा तो
फिर क्या चाँद सितारे
चन्दा वाली रात भी काली
चन्दा वाली रात भी काली
काला है मेरा सवेरा
कोई नहीं है मेरा

सबके रहते लगता है जैसे
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा

रास्ता ही रास्ता है आगे
ना मंजिल ना किनारा
जाने कहाँ पर ले चली है
मुझको समय की धारा
टूटी नैया बिछड़े खिवैया
टूटी नैया बिछड़े खिवैया
तूफानों ने घेरा
कोई नहीं है मेरा

सबके रहते लगता है जैसे
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा
कोई नहीं है मेरा
…………………………………………………….
Sabke rehte lagta hai-Samjhauta 1973

Artist: Anil Dhawan

3 comments:

स्मार्ट ऑस्ट्रेलियन August 12, 2017 at 12:24 AM  

फ़िल्मी नायक के लिए सबसे मुश्किल काम आम आदमी की
एक्टिंग करना होता है.

व्हाट एन आइडिया,  November 27, 2019 at 8:10 PM  

नेता की एक्टिंग भी मुश्किल होती है, क्या ख्याल है

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