कैसे रहूँ चुप के मैंने पी-इंतकाम १९६९
२-३ ही प्रभावी हैं. एक प्रभावी गीत आज सुनते हैं फिल्म
इंतकाम से. ये एक लोकप्रिय गीत रहा है. गीत लिखा
है राजेंद्र कृष्ण ने और इसका संगीत तैयार किया है
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
संजय खान और साधना अभिनीत फिल्म इंतकाम के इस
गीत में काफी सारे सितारों का जमावड़ा है-अशोक कुमार,
रहमान, राजेंद्र नाथ, जीवन, असित सेन और हेलन.
गीत के बोल:
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
होश अभी तक है बाक़ी
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
होश अभी तक है बाक़ी
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
मुद्दतों की प्यास आज एक जाम बन गई
मुद्दतों की प्यास आज एक जाम बन गई
ये ख़ुशी की शाम शाम-ए-इन्तक़ाम बन गई
जो बात हममें तुममें थी वो बात आम बन गई
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
होश अभी तक है बाक़ी
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
पता है तुमको राज़ क्या है मेरे इस सुरूर का
पता है तुमको राज़ क्या है मेरे इस सुरूर का
के इस सुरूर में ज़रा सा रंग है ग़ुरूर का
जो मैने पी तो क्यों नशा उतर गया हुज़ूर का
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
होश अभी तक है बाक़ी
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
कैसे रहूँ चुप के मैने पी ही क्या है
होश अभी तक है बाक़ी
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
और ज़रा सी दे-दे साक़ी और ज़रा सी और
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Kaise rahoon chup ke maine-Inteqam 1969
Artists: Sadhana, Sanjay Khan, Helen
