रात अँधेरी दूर सवेरा-आह १९५३
निर्देशक थे राजा नवाथे. फिल्म के बारे में कहा जाता है कि इसका
अंत पहले दुखांत फिल्माया गया था. फिल्म के ना चलने की सूरत
में अंत बदला गया और सुखान्त बनाया गया. फिल्म में नायक को
टी बी का मरीज दिखलाया गया है. बीमारी का पता चलने पर वो
सारे प्रयत्न करता है कि नायिका उससे दूर हो जाए.
फिल्म का दुःख के रंग वाला एक गीत पेश है. हसरत जयपुरी ने
इसे लिखा है और गायक हैं मुकेश. फिल्म को बाद में तमिल और
तेलुगु भाषाओँ में भी डब किया गया.
गीत के बोल:
रात अँधेरी दूर सवेरा
बरबाद है दिल मेरा हो ओ ओ ओ ओ
रात अँधेरी दूर सवेरा
बरबाद है दिल मेरा हो ओ ओ ओ ओ
आना भी चाहें आ ना सके हम
कोई नहीं आसरा
आना भी चाहें आ ना सके हम
कोई नहीं आसरा
खोई है मंज़िल रस्ता है मुश्किल
चाँद भी आज छुपा हो ओ ओ ओ ओ
रात अँधेरी दूर सवेरा
बरबाद है दिल मेरा
आह भी रोये राह भी रोये
सूझे न बाट कोई
आह भी रोये राह भी रोये
सूझे न बाट कोई
थोड़ी उमर है सूना सफ़र है
बेगाना साथ कोई हो ओ ओ ओ ओ
रात अँधेरी दूर सवेरा
बरबाद है दिल मेरा हो ओ ओ ओ ओ
बरबाद है दिल मेरा हो ओ ओ ओ ओ
बरबाद है दिल मेरा हो ओ ओ ओ ओ
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Raat andheri door savera-Aah 1953
Artists: Raj Kapoor, Nargis
