पाँव छू लेने दो-ताज महल १९६३
रसिक जो साहिर के गीतों का बखान किया करते थे, मिले. उनसे
इस गीत पर चर्चा हुई. वे बोले इस गीत पर २ पन्ने का लेख
लिख रहा हूँ. हमें तुरंत फिल्म गुड्डी का पांच पन्ने वाला निबंध
याद आया. हमने पूछा फिल्म के निर्देशक ने बखान करने लायक
कुछ छोड़ा कहाँ है. गीत सेल्फ-एक्सप्लेनेट्री है. हाँ आप एक लाइन
के ऊपर चाहे जितना कहें सकते हैं-शर्म रोके है शौक उधर खेंचे
है. इश्क मोहब्बत को साहिर साहब ने शौक बतलाया है, उस पर
आप अपने कसीदे काढ़ सकते हैं जितने जी चाहे.
वे बोले, नहीं, मैं तो उन फूलों के बारे में सोच रहा हूँ जो ज़मीन
पर बिछे हैं, कौनसे हैं-चंपा या चमेली के, या रातरानी के. हाथ
में तो हीरोईन ने जो फूल पकड़ा है वो लाल गुलाब का है. किस्सा
फिर कभी, गीत सुनिए आज तो.
गीत के बोल:
पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी
वरना हमको नहीं इनको भी शिकायत होगी
आप जो फूल बिछाए उन्हें हम ठुकराएँ
आप जो फूल बिछाए उन्हें हम ठुकराएँ
हमको डर है
हमको डर है के ये तौहीन-ए-मोहब्बत होगी
मोहब्बत होगी
दिल की बेचैन उमंगो पे करम फरमाओ
दिल की बेचैन उमंगो पे करम फरमाओ
इतना रुक रुक के
इतना रुक रुक के चलोगी तो क़यामत होगी
क़यामत होगी
पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी
इनायत होगी
शर्म रोके हैं इधर शौक उधर खेंचे हैं
शर्म रोके हैं इधर शौक उधर खेंचे हैं
क्या खबर थी
क्या खबर थी कभी इस दिल की ये हालत होगी
ये हालत होगी
शर्म गैरों से हुआ करती है अपनों से नहीं
शर्म गैरों से हुआ करती है अपनों से नहीं
शर्म हमसे
शर्म हमसे भी करोगी तो मुसीबत होगी
मुसीबत होगी
पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी
इनायत होगी
हमको डर है के ये तौहीन-ए-मोहब्बत होगी
मोहब्बत होगी
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Paon chhoo lene do-Tajmahal 1963
Artists: Pradeep Kumar, Bina Rai
