Feb 1, 2017

तुम कमसिन हो-आई मिलन की बेला १९६४

बेसिक्स पर चलने वाले कभी मात नहीं खाते. कम से
कम फ़िल्मी रोमांटिक गीत सुन कर यही महसूस होता
है. जैसे शब्द इस गीत में प्रयुक्त हैं, उनसे तारीफ तो
होती ही है, मगर वो एक भोली भली मासूम लड़की
के वर्णन के लिए काफी हैं. और नायक क भोलापन
देखिये कि वो इन बेसिक गुणों की वजह से उससे प्रेम
करने लगता है. इतनी सीधी साधी फिलोसफी सामान्य
जीवन में कहीं भी, ऐसी की ऐसी दिखलाई क्यूँ नहीं देती ?

इसे गा कर किसी लड़के ने किसी लड़की को रिझाया हो
मुझे याद नहीं पढता. हाँ, हसरत के लिखे दूसरे कई
प्रेम गीतों को मैंने प्रभावी ढंग से इस्तेमाल होते देखा है.

ये गीत है आई मिलन की बेला फिल्म से गीत जिसे परदे
पर राजेंद्र कुमार गा रहे हैं सायरा बानो के लिए.




गीत के बोल:

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ
तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ

मदहोश अदा ये अल्हड़पन
बचपन तो अभी रूठा ही नहीं
एहसास है क्या और क्या है तड़प
इस सोच में दिल डूबा ही नहीं
एहसास है क्या और क्या है तड़प
इस सोच में दिल डूबा ही नहीं

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ

तुम आहें भरो और शिकवे करो
ये बात हमें मंज़ूर नहीं
तुम तारे गिनो और नींद उड़े
वो रात हमें मंज़ूर नहीं
तुम तारे गिनो और नींद उड़े
वो रात हमें मंज़ूर नहीं

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ
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Tum kamsin ho-Aayi Milan ki bela 1964

Artists: Rajendra Kumar, Saira Bano

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