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Mar 14, 2018

आ हा आई मिलन की बेला-शीर्षक गीत १९६४

शीर्षक गीतों में अगला प्रस्तुत है फिल्म आई मिलन की बेला से.
इसमें शीर्षक के आगे आ हा लगाया हुआ है. आ हा लगाने से इसे
गाने में सहूलियत हो गयी और ये सुनने में ज्यादा मधुर हो गया.

शैलेन्द्र के गीत को रफ़ी और आशा ने गाया है. शंकर जयकिशन
के संगीत वाली इस फिल्म के नायक राजेंद्र कुमार हैं. फिल्म में एक
और नायक हैं-धर्मेन्द्र. नायिका को आप पहचान लीजिए.





गीत के बोल:

आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हाय हाय हाय
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
होये उनसे नैन मिले मैं शरमाई
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हो हो हो
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
उनसे नैन मिले मैं शरमाई आ हा आ हा आ हा
आ हा आई मिलन की बेला
ओ हो आई मिलन की बेला
आ हा आई मिलन की वेला

आ आ आ आ आ आ आ आ
जाने क्यों तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन
चुटकियाँ लेती है क्यों सीने में मीठी सी चुभन
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
प्यार जो करते हैं होता है यही हाल उनका
देखिये क्या क्या दिखायेगी अभी दिल की लगन

आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हाय हाय हाय हाय
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हो हो हो
आ हा आई मिलन की बेला
ओ हो आई मिलन की बेला
आ हा आई मिलन की वेला

आ आ आ आ आ आ आ आ
आज दुनिया मुझे कुछ और नज़र आती है
जिस तरफ़ देखिए तक़दीर मुस्कुराती है
आ आ आ आ आ आ आ आ
प्यार के रंग में रंग जाते हैं जब दिलवाले
देखते देखते हर चीज़ बदल जाती है

आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
होये उनसे नैन मिले मैं शरमाई होये होये होये
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हो हो हो
आ हा आई मिलन की बेला
ओ हो आई मिलन की बेला
आ हा आई मिलन की वेला

आ आ आ आ आ आ आ आ
आज सर से मेरा आँचल क्यूँ उड़ा जाता है
मेरा दिल क्यों मेरे पहलू से खिंचा जाता है
आ आ आ आ आ आ आ आ
मुन्तज़िर होगा कोई याद कर रहा होगा
दर्द सा उठता है जब याद किया जाता है

आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हाय हाय हाय
आ हा आई मिलन की ठेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई हो हो हो
आ हा आई मिलन की बेला
ओ हो आई मिलन की बेला
आ हा आई मिलन की वेला
…………………………………………………………………………..
Aa ha aayi Milan ki bela-Titlesong 1964

Artists: Rajendra Kumar, Saira Bano

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Feb 5, 2017

मैं कमसिन हूँ-आई मिलन की बेला १९६४

पहले नायक नायिका को कमसिन, भोली और ना जाने क्या क्या कह
के, मस्का लगा लगा के प्रभावित कर चुका है. अब बारी है नायिका की.
कुछ गीत ऐसे हैं फिल्म संगीत के खजाने में जिसमें नायिका बहुत
भोली दिखाई देती है. ये भी वैसा ही एक गीत है. इसे भी हसरत ने
लिखा है.

एक ही धुन पर शंकर जयकिशन ने दो गीत बनाने का करिश्मा कई
फिल्मों में किया है. फिल्म के निर्देशक है मोहन कुमार और इसका
निर्माण किया है जे ओमप्रकाश ने.



गीत के बोल:

मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
थाम लो मुझे मैं यही इल्तिजा करूं
मैं यही इल्तिजा करूं
मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
थाम लो मुझे मैं यही इल्तिजा करूं
मैं यही इल्तिजा करूं

है दिल की लगन मैं फूल बनी
और हंस के तेरे चरणों में रहूँ
तू देखे मुझे मैं देखूं तुझे
और प्यार में तेरे खो जाऊं
तू देखे मुझे मैं देखूं तुझे
और प्यार में तेरे खो जाऊं

मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
थाम लो मुझे मैं यही इल्तिजा करूं
मैं यही इल्तिजा करूं

जिस मंजिल का राही ना कोई
वो सहरा है मंजिल तो नहीं
जिस दिल  में कोई धडकन ही न हो
वो पत्थर है कोई दिल तो नहीं
जिस दिल  में कोई धडकन ही न हो
वो पत्थर है कोई दिल तो नहीं

मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
थाम लो मुझे मैं यही इल्तिजा करूं
मैं यही इल्तिजा करूं
मैं कमसिन हूँ नादां हूँ नाज़ुक हूँ भोली हूँ
थाम लो मुझे मैं यही इल्तिजा करूं
मैं यही इल्तिजा करूं
………………………………………………………….
Main kamsin hoon-Aayi Milan ki bela 1964

Artists: Rajendra Kumar, Saira Bano

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Feb 1, 2017

तुम कमसिन हो-आई मिलन की बेला १९६४

बेसिक्स पर चलने वाले कभी मात नहीं खाते. कम से
कम फ़िल्मी रोमांटिक गीत सुन कर यही महसूस होता
है. जैसे शब्द इस गीत में प्रयुक्त हैं, उनसे तारीफ तो
होती ही है, मगर वो एक भोली भली मासूम लड़की
के वर्णन के लिए काफी हैं. और नायक क भोलापन
देखिये कि वो इन बेसिक गुणों की वजह से उससे प्रेम
करने लगता है. इतनी सीधी साधी फिलोसफी सामान्य
जीवन में कहीं भी, ऐसी की ऐसी दिखलाई क्यूँ नहीं देती ?

इसे गा कर किसी लड़के ने किसी लड़की को रिझाया हो
मुझे याद नहीं पढता. हाँ, हसरत के लिखे दूसरे कई
प्रेम गीतों को मैंने प्रभावी ढंग से इस्तेमाल होते देखा है.

ये गीत है आई मिलन की बेला फिल्म से गीत जिसे परदे
पर राजेंद्र कुमार गा रहे हैं सायरा बानो के लिए.




गीत के बोल:

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ
तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ

मदहोश अदा ये अल्हड़पन
बचपन तो अभी रूठा ही नहीं
एहसास है क्या और क्या है तड़प
इस सोच में दिल डूबा ही नहीं
एहसास है क्या और क्या है तड़प
इस सोच में दिल डूबा ही नहीं

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ

तुम आहें भरो और शिकवे करो
ये बात हमें मंज़ूर नहीं
तुम तारे गिनो और नींद उड़े
वो रात हमें मंज़ूर नहीं
तुम तारे गिनो और नींद उड़े
वो रात हमें मंज़ूर नहीं

तुम कमसिन हो  नादाँ हो  नाज़ुक हो  भोली हो
सोचता हूँ मैं कि तुम्हें प्यार ना करूँ
मैं तुम्हें प्यार ना करूँ
......................................................................
Tum kamsin ho-Aayi Milan ki bela 1964

Artists: Rajendra Kumar, Saira Bano

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